सुनील संजय को हथकड़ियों में देखकर बेहद व्यथित थे। क्या जेल में रहते हुए संजय के मन में आत्महत्या के विचार आए थे? जेल में लोगों ने संजय को तोड़ने की कोशिश की थी।संजय दत्त उन बॉलीवुड सितारों में से हैं जिनकी जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही है। अपनी फिल्मों के अलावा, उनकी निजी जिंदगी भी काफी चर्चा का विषय रही है।
संजय दत्त की जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया जब उन्हें जेल में वक्त बिताना पड़ा। इस दौरान उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। संजय दत्त ने कई मौकों पर जेल के अपने अनुभवों पर खुलकर बात की है। अब, एक बार फिर उन्होंने उन मुश्किल दिनों को याद किया है और खुलासा किया है कि कैसे उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से तोड़ने की कोशिश की गई थी।हाल ही में शेखर सुमन के टॉक शो ‘शेखर्स डिकेड’ में पहुंचे संजय दत्त ने जेल के दिनों के अपने अनुभव साझा किए।
बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उस दौर में उन्हें किस तरह की स्थितियों से गुजरना पड़ा था। उन दिनों को याद करते हुए संजय दत्त ने कहा कि जेल में उनके लिए हालात आसान नहीं थे। उन्होंने बताया कि उन्हें तोड़ने की कोशिशें की गईं, लेकिन उन्होंने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। कठिन समय के बावजूद, उन्होंने अपना हौसला बनाए रखा।दर्शकों से बात करते हुए शेखर सुमन ने जिक्र किया कि संजय दत्त को अंडा सेल में रखा गया था, फिर भी उन्होंने अपना मानसिक संतुलन बनाए रखा।
इसके बाद उन्होंने अभिनेता से पूछा कि क्या कभी कोई ऐसी कठिन परिस्थिति आई जब उनके मन में आत्महत्या का विचार आया हो? इस पर संजय ने नकारात्मक जवाब दिया। शेखर ने आगे कहा कि लोग अक्सर अपनी गलतियों को स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं और उनसे भागते हैं। लेकिन संजय ने हमेशा अपनी गलतियों को स्वीकार किया है।इसके बाद शेखर ने संजय से पूछा कि क्या कोई ऐसा पल था जब उन्होंने खुद को सबसे ज्यादा असहाय या कमजोर महसूस किया? इस सवाल का जवाब देते हुए संजय ने कहा, “मुझे पता था कि मेरे पिता और परिवार को बहुत दुख सहना पड़ा है। लेकिन मैंने कभी खुद को कमजोर महसूस नहीं किया।”उन्होंने आगे कहा, “जब पुलिस पहली बार आई और मुझे हथकड़ी लगाई, तो मेरे पिताजी सदमे में थे।
उनकी आंखों में आंसू थे। पापा ने पुलिस से पूछा, ‘आप मेरे बेटे के साथ क्या कर रहे हैं?’ मैंने उन्हें कसकर गले लगाया और कहा, ‘आप इन हथकड़ियों को लेकर खुद को क्यों परेशान कर रहे हैं?’ ‘यह तो बस एक प्रक्रिया है।’ ‘कृपया आप दुखी मत होइए।’ हालांकि सच यह था कि यह चीज मुझे अंदर से खत्म कर रही थी। लेकिन मुझे उनके लिए मजबूत बनना था। पूरे 24 साल चले इस ट्रायल के दौरान, मैं इसी सोच और साहस के साथ आगे बढ़ता रहा।”टॉक शो के दौरान संजय ने यह भी बताया कि एक अभिनेता के रूप में उनके पास जो सुविधाएं थीं, वे सब छीन ली गईं, जिससे लोगों को लगा कि वे टूट जाएंगे। इस पर उन्होंने कहा, “लेकिन मुझे कुछ नहीं हुआ क्योंकि मैं टूटा नहीं। बल्कि, वे लोग खुद सदमे में थे। वे मेरा मज़ाक उड़ाया करते थे। एक अधिकारी मेरे पास आया और बोला कि तुम्हें यहाँ सिगरेट नहीं मिलेगी, अब तुम क्या करोगे? तो मेरा जवाब था, सर, कम से कम बीड़ी तो मिलेगी ना? इन बदलावों से मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
इसलिए वे इस बात से परेशान थे कि यह इंसान इतना जमीन से जुड़ा और अप्रभावित कैसे रह सकता है।”आपको बता दें कि संजय दत्त का नाम 1993 के मुंबई बम विस्फोटों से जुड़ा था। जिसके बाद अभिनेता को अवैध हथियार रखने का दोषी पाया गया और उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। संजय दत्त को 6 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे घटाकर 5 साल कर दिया गया था और अभिनेता को पुणे की यरवदा जेल में अपनी सजा काटनी पड़ी थी। हालांकि, उन्हें 2016 में रिहा कर दिया गया था।