80 के दशक में पाकिस्तान से भारत आई एक ऐसी अदाकारा जिसने अपनी पहली ही फिल्म से हिंदी सिनेमा में तहलका मचा दिया था। नीली आंखें बेहद खूबसूरत चेहरा और एक ऐसी आवाज जिसमें दर्द भी था और जादू भी। वो मशहूर अदाकारा जो गायकी ने भी इस कदर पारंगत थी कि अपनी पहली ही फिल्म के लिए फिल्म फेयर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का अवार्ड अपने नाम कर लिया। और बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी गायिकाएं देखती रह गई। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि पाकिस्तान के कराची शहर में पैदा हुई यह अभिनेत्री दरअसल एक ब्रिटिश नागरिक थी और इससे भी दिलचस्प बात हिंदी सिनेमा के शो मैन कहे जाने वाली राज कपूर रिश्ते में इनके मामा लगते थे। भारत सरकार ने इन्हें ओसीआई यानी ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड दिया। जिसके बाद उन्हें भारत आने के लिए वीजा लेने की जरूरत नहीं रही। और इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी थी। एक हिंदू नाना और मुस्लिम नानी की कहानी। एक ऐसा रिश्ता जो भारत, पाकिस्तान और कपूर खानदान तीनों को एक दूसरे से जोड़ता है। एक अमेरिकी पति, दो पाकिस्तानी पतियों को छोड़ने के बाद और दुबई के एक शख्स से चौथी शादी करने के बावजूद यह आज मुंबई में अपनी जिंदगी गुजार रही है। जी हां दोस्तों, आज हम बात कर रहे हैं
गुजरे जमाने की बेहतरीन अभिनेत्री सलमा आगा की। अपनी पहली ही फिल्म से सलमा आगा को एक बेहतरीन अभिनेत्री के साथ-साथ मंझी हुई गायिका भी करार दे दिया गया। इस फिल्म ने तीन तलाक के दर्द से गुजर रही मुस्लिम महिलाओं की तकलीफ को पहली बार इतने प्रभावी तरीके से पर्दे पर पेश किया था। यही वजह थी कि खासकर मुस्लिम महिलाओं के बीच इस फिल्म को खूब समर्थन मिला। वह हर मिजाज के गीत गाने के लिए भी जानी जाती थी। देखते ही देखते सलमा आगा ने हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान और मुकाम बना लिया था। तो कौन थी सलमा आगा और कैसे शुरू हुआ उनका फिल्मी सफर? ऐसा क्या हुआ कि जिस अभिनेत्री ने अपनी पहली फिल्म से तहलका मचाया उनका करियर कुछ ही सालों में ढलने लगा। और आज सलमा आगा आखिर किस हाल में है। चलिए जानते हैं उनकी पूरी कहानी। सलमा आगा का जन्म 25 अक्टूबर 1956 को पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ था। सलमा की मां जरीन हिंदी और पाकिस्तानी फिल्मों में नसरीन के नाम से काम करती थी। वही उनके पिता लियाकत गुल आगा ईरानी मूल के थे और पाकिस्तान में एक व्यापारी थे। उनका कारोबार अमृतसर में भी था। भारत से परिवार का रिश्ता होने की वजह से सलमा का कुछ समय भारत में भी बीता। लेकिन उनके पिता को बिजनेस के सिलसिले में बार-बार लंदन आना जाना पड़ता था और इसी वजह से बाद में पूरा परिवार लंदन शिफ्ट हो गया। सलमा की पढ़ाई लंदन में ही हुई और उन्होंने ब्रिटिश नागरिकता ले ली।
वैसे सलमा के परिवार का फिल्मों से रिश्ता कोई नया नहीं था। उनकी मां का परिवार पिछली तीन पीढ़ियों से फिल्मों से जुड़ा था। इसीलिए सलमा का भी फिल्मों की तरफ झुकाव होना स्वाभाविक था। पढ़ाई के साथ-साथ सलमा ने क्लासिकल म्यूजिक सीखना शुरू किया और धीरे-धीरे फिल्मों में आने का सपना देखने लगी। इसी दौरान एक ऐसा मौका आया जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। राज कपूर ने अपने बेटे ऋषि कपूर की शादी के बाद लंदन में एक रिसेप्शन पार्टी दी थी। इस पार्टी में बॉलीवुड के कई दिग्गज मौजूद थे और सलमा की मां को भी वहां इनवाइट किया गया था। बताते हैं कि इसी पार्टी में सलमा की मुलाकात मशहूर फिल्म निर्माता बी आर चोपड़ा से हुई। बी आर चोपड़ा अपनी अगली फिल्म के लिए एक मुस्लिम हीरोइन की तलाश में थे। कहानी मुस्लिम पृष्ठभूमि पर आधारित थी और उन्हें लगता था कि एक मुस्लिम अदाकारा ही इस किरदार के साथ ज्यादा बेहतर न्याय कर पाएगी। बी आर चोपड़ा की नजर जैसे ही सलमा पर पड़ी, उन्होंने उन्हें अपनी फिल्म का ऑफर दे दिया। लेकिन कहानी में अभी एक और बड़ा मोड़ बाकी था। जब चोपड़ा साहब ने सलमा की आवाज सुनी तो उन्होंने फैसला किया कि फिल्म में सलमा पर फिल्माए जाने वाले गाने भी वह खुद ही गाएंगी और इसी तरह सलमा आगा भारत आ गई। फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। फिल्म का विषय बेहद संवेदनशील था। तीन तलाक यह एक ऐसी कहानी थी जिसमें तीन तलाक के दंश, उसके दुष्परिणाम और हलाला जैसे मुद्दों को बेहद प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया था। सलमा आगा ने ऐसी लड़की का किरदार निभाया जिसकी जिंदगी इन सामाजिक कुरीतियों की वजह से दर्द और गम में डूबती चली जाती है। लेकिन फिल्म के नाम को लेकर भी एक बड़ा विवाद हुआ। फिल्म का नाम पहले तलाक तलाक तलाक रखा गया था। लेकिन मुस्लिम समुदाय के विरोध और विवाद के बाद इसका नाम बदलकर निकाह रख दिया गया। बताया जाता है कि बी आर चोपड़ा के कुछ दोस्तों ने उन्हें एक दिलचस्प बात समझाई। उन्होंने कहा मान लीजिए कोई मुस्लिम शख्स यह फिल्म देखकर अपने घर जाता है
और उनकी पत्नी उससे पूछती है कि कौन सी फिल्म देखकर आए हो। अगर वह फिल्म का नाम बता देगा तो शरिया कानून के मुताबिक उसका तो तलाक ही हो जाएगा। चोपड़ा साहब को बात समझ में आ गई और फिल्म का नाम बदल दिया गया। फिल्म जब रिलीज हुई तो सलमा आगा की आवाज और खूबसूरती ने जैसे पूरे देश को अपना दीवाना बना दिया। लोग एक दूसरे से पूछने लगे यह नीली आंखों वाली गोरी सी लड़की कौन है जो खूबसूरत होने के साथ-साथ इतनी बेहतरीन गायिका भी है? सुरैया, नूरजहां और सुलक्षणा पंडित जैसी कुछ मशहूर अभिनेत्रियों के बाद सलमा आगा का नाम भी एक्ट्रेस कम सिंगर की लिस्ट में शामिल हो गया। इसके बाद उनकी फिल्में आई कसम पैदा करने वाली कि ऊंचे लोग जंगल की बेटी, पांच फौलादी, महावीरा और कई दूसरी फिल्में। उन्होंने उस दौर के कई बड़े-बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर की। मिथुन चक्रवर्ती के साथ उनकी जोड़ी भी खूब पसंद की गई। और फिर फिल्म आई पतिप और तवायफ जिसमें सलमा आगा ने एक तवाइयफ का किरदार निभाया। इस किरदार में उनका नेगेटिव शेड भी था। उन पर फिल्माए गए कई गाने हिट हुए। फिल्म में वैंप के रूप में उनकी डायलॉग डिलीवरी भी पसंद की गई। लेकिन इसके बावजूद सलमा को वह सफलता दोबारा नहीं मिल पाई जो निकाह से मिली थी। आखिर क्यों? इसके पीछे एक वजह सलमा द्वारा फिल्मों का ठीक से चुनाव ना करना भी माना गया है।
सलमा एक खास तरह के किरदारों के लिए ही ज्यादा फिट लगती थी। वेस्टर्न स्टाइल के किरदारों में वह उतनी सहज नहीं लगती थी। फिर भी कई बार उन्हें ऐसे रोल करने पड़े जो उन पर थोड़े थोपे हुए से लगते थे। बताया जाता है कि उन्हें राज कपूर की फिल्म हिना भी ऑफर हुई थी। लेकिन ऐन मौके पर सलमा की नानी बीच में आ गई। उन्होंने कथित तौर पर राज कपूर साहब से सलमा को किसी भी कीमत पर फिल्मों में काम ना देने की गुजारिश की। कहा जाता है कि इसकी वजह से सलमा के हाथ से कई और अच्छी फिल्में भी निकल गई। वहीं फिल्म एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि सलमा ने एक्टिंग से ज्यादा अपने सिंगिंग करियर पर फोकस किया। वह जिन फिल्मों में काम करती उनमें अपने गाने खुद गाने पर जोर देती थी। लेकिन हर निर्माता उनकी हर शर्त मानने को तैयार नहीं था। क्योंकि अगर सलमा खुद गाती तो लता मंगेशकर, आशा भोसले या किसी दूसरी मशहूर गायिका को फिल्म में गाने का मौका नहीं मिलता। ऐसे में सलमा की इस जिद की वजह से उनके हाथ से कुछ बेहद अच्छी फिल्में भी निकल गई। इसके साथ ही सलमा अपनी निजी जिंदगी और रिश्तों को लेकर भी लगातार सुर्खियों में बनी रही। बार-बार शादी, रिश्तों में उतार-चढ़ाव और निजी जिंदगी के उथल-पुथल ने भी उनके करियर को प्रभावित किया। फिल्मों में लॉन्च होने से पहले उनका नाम न्यूयॉर्क के बिजनेसमैन महमूद सिफ्रा के साथ जुड़ गया था। उन्होंने निर्माता बनकर सलमा आगा को हीरोइन बनने के सपने दिखाए।
उन्होंने तीन फिल्में बेगम, साहिबा और बेबसी बनाना भी शुरू कर दिया। लेकिन उन्होंने सलमा से निकाह कर लिया। बताया जाता है कि महमूद सिकरा ने यह फिल्में सलमा आगा को पाने के लिए ही बनानी शुरू की थी। लेकिन शादी के बाद उन्होंने फिल्मों का काम बंद कर दिया और वह सलमा से अलग हो गए। इस तरह सलमा अपनी निजी जिंदगी और पेशेवर जिंदगी दोनों मोर्चों पर निराश हुई। इसके बाद सलमा आगा ने 1980 में पाकिस्तान के अभिनेता, निर्देशक और निर्माता जावेद शेख से दूसरी शादी की। दोनों ने कुछ पाकिस्तानी फिल्में भी साथ में की। जावेद शेख पहले से ही शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे भी थे। लेकिन सलमा का यह दूसरा निकाह भी ज्यादा समय तक नहीं चल सका और दोनों अलग हो गए। फिर साल 1979 में सलमा ने तीसरी शादी की। इस बार उनके शौहर बने पाकिस्तान के मशहूर स्क्वैश खिलाड़ी रहमत खान। रहमत खान लंदन में सलमा के पड़ोसी हुआ करते थे। दोनों के बच्चे हुए साशा आगा और अली आगा। वह शादी करीब 2010 तक चली। इसके बाद सलमा ने 2011 में दुबई बेस्ड बिजनेसमैन मंजर शाह से चौथी शादी की। उस समय सलमा आगा की उम्र 55 साल थी। शादी के बाद सलमा मुंबई आ गई और अपने बच्चों का करियर यहीं सेटल करने की कोशिश करने लगी। सलमा की बेटी साशा आगा ने बॉलीवुड में फिल्म औरंगजेब से एंट्री ली। व रही सलमा खुद भी फिल्म मेकर बनने की कोशिश करती रही और कुछ सीरियल्स में भी काम किया। तो यह थी गुजरे जमाने की मशहूर अभिनेत्री और गायिका सलमा आगा की पूरी कहानी। आपको यह कहानी कैसी लगी नीचे कमेंट्स में जरूर बताइए और इस चैनल को लाइक, शेयर, सब्सक्राइब जरूर कीजिएगा। धन्यवाद।