बॉलीवुड में जब भी किसी बड़े सितारे का निधन होता है तो पूरी फिल्म इंडस्ट्री उन्हें आखिरी विदाई देने पहुंचती है। लेकिन क्या ऐसी अभिनेत्री भी थी जिन्होंने लगभग पूरी जिंदगी किसी की अंतिम यात्रा में ना जाने का फैसला किया था। वहीं हैरानी की बात यह है कि उन्होंने अपनी इस आदत को सिर्फ दो लोगों के लिए तोड़ा। आखिर ऐसा क्या था कि साधना खुद को रोक नहीं पाई।
आइए जानते हैं पूरा किस्सा। नमस्कार, आप सुन रहे हैं बॉलीवुड किस्से और मैं हूं आपके साथ अंशु वर्मा। दोस्तों, हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाने वाली साधना सिर्फ अपनी फिल्मों और हेयर स्टाइल के लिए ही नहीं बल्कि अपनी निजी जिंदगी के कुछ अनोखे सिद्धांतों के लिए भी जानी जाती थी। उनकी एक ऐसी आदत थी जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। साधना ने अपने जीवन में लगभग कभी भी किसी अभिनेता, निर्देशक या फिल्मी साथी के अंतिम संस्कार या अंतिम यात्रा में जाना पसंद नहीं किए।
जबकि फिल्म इंडस्ट्री में यह एक सामान्य परंपरा मानी जाती है। व एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि वह हमेशा ऐसा क्यों करती हैं तो उन्होंने बेहद ईमानदारी से अपनी भावना बताई। साधना ने कहा कि उन्हें किसी प्रिय व्यक्ति की मृत्यु के तुरंत बाद उसके घर जाना बहुत असहज लगता है। उनका मानना था कि उस माहौल को देखना उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन होता था। इसलिए उन्होंने हमेशा ऐसे मौके से दूरी बनाए रखी। लेकिन जिंदगी में दो ऐसे मौके आए जब साधना अपने इस फैसले पर कायम नहीं रह सकी। पहला मौका था राजेश खन्ना के निधन का। दरअसल राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार थे और साधना उनके साथ फिल्म दौलत में काम कर चुकी थी।
जबकि 2012 में राजेश खन्ना का निधन हुआ। तो साधना खुद को रोक नहीं पाई और जब उनके घर पहुंची और परिवार से मिलकर श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं बताया जाता है कि उन्होंने डिंपल कपाडिया से भी मुलाकात की थी। वहीं दूसरा मौका था मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा का निधन। साधना और यश चोपड़ा एक दूसरे को लंबे समय से जानते थे और फिल्मी गलियारों में वर्षों से यह चर्चा भी रही कि अपने शुरुआती दिनों में दोनों के बीच एक भावनात्मक रिश्ता भी रहा था। हालांकि यह रिश्ता कभी शादी तक नहीं पहुंचा और इस चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। लेकिन यश चोपड़ा के निधन के बाद साधना उनके घर पहुंची और उनकी पत्नी पामेला चोपड़ा से मिलकर संवेदना व्यक्त की।
इन दो घटनाओं ने यह दिखाया कि साधना भले ही अंतिम संस्कारों से दूर रहती हो, लेकिन जिन लोगों से उनका गहरा भावनात्मक जुड़ाव था, उनके लिए उन्होंने अपने वर्षों पुरानी आदत भी बदल दी। साधना हमेशा कहती थी कि किसी इंसान को याद करने के लिए अंतिम यात्रा में पहुंचना जरूरी नहीं होता। असली सम्मान दिल से होता है और शायद यही वजह है कि उन्होंने अपने तरीके से रिश्ते को निभाया और अपने सिद्धांतों पर कायम भी रहे। आज भी साधना को उनकी सदाबहार फिल्में उनकी खूबसूरती और उनकी सादगी भरे व्यक्तिगत के याद भी किया जाता है। लेकिन उनकी जिंदगी का यह पहलू भी उतना ही दिलचस्प है कि उन्होंने अपने जीवन के लिए एक निजी नियम को सिर्फ दो लोगों के लिए ही तोड़ा। दोस्तों, फिलहाल इस पॉडकास्ट में इतना ही। ऐसे और भी पॉडकास्ट के लिए बने रह हमारे चैनल के साथ।