नमस्कार N 24 देख रहे हैं आप और मैं हूं आपके साथ अदिति शाह। एमपी के सिहौर जिले के रूठिया परिवार ने फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के समय ब्रिटिश हुकूमत को ₹35,000 उधार दिए थे। 109 साल बाद अब इस परिवार ने ब्रिटेन सरकार से [संगीत] पैसे वापस मांगे हैं। जिस पर ब्रिटेन सरकार की तरफ से पहला रिस्पांस आया है जो पॉजिटिव है। एमपी के रूठिया परिवार का वर्षों पुराना वित्तीय विवाद अब इंटरनेशनल लेवल पर चर्चा [संगीत] का विषय बन गया है। रूठिया परिवार के सदस्य विनय रूठिया के अनुसार पुराने डॉक्यूमेंट्स मिलने के बाद उनके एडवोकेट शियांश रानीवाल के माध्यम से ब्रिटेन के डेथ मैनेजमेंट [संगीत] ऑफिस को ईमेल और हार्ड कॉपी के जरिए कानूनी नोटिस भेजा गया था। इसके जवाब में ब्रिटिश ऑफिस ने इस दावे से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज और जरूरी जानकारी मांगी है। परिवार अब इन दस्तावेजों को [संगीत] जुटाने में लगा है।
यह जानकारी गिल्ट रजिस्ट्रार को भेजी जाएगी। जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। परिवार का कहना है कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश प्रशासन ने प्रशासनिक जरूरतों के लिए यह रकम उधार ली थी। उस समय ₹35,000 बहुत बड़ी धनराशि मानी जाती थी। बताया जा रहा है कि यह राशि भोपाल रियासत में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल की गई थी। उस दौर में सेठ जुम्मालाल रूठिया क्षेत्र के प्रमुख और समृद्ध व्यापारियों में गिने [संगीत] जाते थे। परिवार के अनुसार वर्ष 1937 में सेठ जुम्माल के निधन के बाद उनकी वसीहत के जरिए उनके बेटे [संगीत] मानक चंद रूठिया को इस लेनदेन से जुड़े सभी मूल दस्तावेज मिले।
अब अगली पीढ़ी के सदस्य विवेक रूठिया इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कानूनी लड़ाई आगे बढ़ा रहे हैं। उनका दावा है कि परिवार के पास उस समय की लिखित सहमति [संगीत] और वित्तीय लेनदेन के पर्याप्त प्रूफ सुरक्षित है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञ इस मामले को काफी जटिल मान रहे हैं। उनका कहना है कि सबसे अहम [संगीत] सवाल यह है कि मूल समझौते में कर्ज लौटाने की समय सीमा, ब्याज और अन्य शर्तों का स्पष्ट उल्लेख था या नहीं। यदि दस्तावेजों में यह जानकारी मौजूद है तो परिवार का दावा मजबूत हो सकता है। इसके अलावा 109 साल पुराने इस मामले में कानूनी समय [संगीत] सीमा यानी लिमिटेड पीरियड भी बड़ी चुनौती मानी जा रही है। विशेषज्ञ यह भी सवाल उठा रहे हैं कि भारत की आजादी के बाद ब्रिटिश शासन से जुड़े ऐसे वित्तीय दायित्वों का निपटारा किस तरह हुआ था?
क्या इन देनदारियों की जिम्मेदारी ब्रिटिश सरकार की रही या फिर स्वतंत्र भारत सरकार [संगीत] ने उन्हें अपने दायित्व में शामिल किया था। इस पहलू पर भी आगे कानूनी बहस हो सकती है। रूठिया परिवार का यह भी दावा है कि कभी सिहौर शहर का बड़ा हिस्सा उनकी जमीनों पर बसा था। भोपाल और इंदौर में भी परिवार [संगीत] की कई संपत्तियां थी। जिनमें से कुछ आज विवाद और अतिक्रमण का हिस्सा हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि 109 साल पुराने इस कर्ज [संगीत] के दावे को कानूनी रूप से कितनी मजबूती मिलती है और क्या रुठिया परिवार अपने पूर्वजों की बकाया राशि वसूल पाएगा। इस वीडियो पर आप अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा। इस तरह की वीडियोस को देखने के लिए हमारे YouTube चैनल N 24 को सब्सक्राइब [संगीत] करना मत भूलिएगा। शुक्रिया। निष्पक्ष मतलब N 24