अब एक महत्वपूर्ण सवाल और प्रगति लेकर आ रही है। पंडित धीरज शास्त्री जी एक फिल्म आ रही है रामायण और इसमें एक्टर हैं रणबीर कपूर जो राम का किरदार निभा रहे हैं।
अब लोगों का कहना है कि जो खाता है जो एक्टर खाता है वो कैसे राम का किरदार निभा सकता है आप इसे कैसे देखते हैं? राम के चरित्र को निभाने के लिए राम के जैसा चरित्र बनाना तो चाहिए।
अब बैक जो भी रहा हो शायद मूवी बन वो फिल्म बन गई होगी शायद हमें पता नहीं रिलीज हो गई होगी या होगी अरे अभी हम इतना कहेंगे।
अब तक जो हुआ सो हुआ अब इतना ख्याल रखना कि राम जी के चरित्र का चित्रांकन यदि आपने किया तो अब उनके चरित्र से भटक ना जाना वरना रामायण जो पिक्चर बनाई है वो भले ही हिट हो जाए आप हिट ना हो पाओगे क्योंकि हमने हमने हनुमान जी के नाम का चोला पहना है। हनुमान जी का नाम लेकर के सहारा लिया है। तो हम रावण के खानदान का काम नहीं कर सकते। लेकिन आने वाले दिनों में तो उनकी कुछ फिल्म प्रस्तावित है। किसी में गैंगस्टर बन रहे हैं।
किसी में कुछ दूसरा एनिमल फिल्म उसका भी एक सीक्वल आ रहा है। अभिनय जगत के लोगों में ये बात तो देखो हमने अरुण गोबेल जी से सीखी। उनका एक कोई इंटरव्यू था या क्या था? हमें पता नहीं अचानक से एक दिन हम देख रहे थे तो वो आया सामने। उन्होंने कहा कि जब हम रामानंद सागर की रामायण को जब चित्रांकन कर रहे थे, अभिनय शूटिंग कर रहे थे तो उस वक्त हमारी आदत थी वो यही इसी शो में एंड फाइव के दौरान ही उन्होंने अच्छा हां तो हमें इतना स्मरण है कि वो ये बोल रहे थे तो बोले उसके बाद हम लोग आके हमें प्रणाम करते आज भी करते उन्हें। लोग आके प्रणाम करते थे तो बोले हमें बहुत बुरा लगा।
उस दिन जब ये हुआ तो हमने फिर स्मोकिंग फेंक दी और उसके बाद पे कभी नहीं पी। इससे सीखा जा सकता है कि यदि गलती कल तक करते रहे तो अब ना की जाए क्योंकि आपने राम के चरित्र को जीवन में उतारा।
हमारा भारत आस्था का देश है। श्रद्धा का देश है। ये इतना अद्भुत आस्था से भरा हुआ देश है कि यहां कोई हनुमान जी की फोटो भर एक बार पीछे टांग ले तो उसको लगने लगता है यही सबसे बड़ा हनुमान जी का भगत है। और हमारी तो हनुमान जी तक पहुंच नहीं है। यही हनुमान जी है। वो ऐसा मान के जीने लगते हैं।
तो हम उनको यही कहेंगे कि अब रामायण के बाद आप बहुत संभल कर के रहना। आपने यह बहुत बड़ा कार्य तो कर लिया। अब इससे बड़ा कार्य बाकी है। जैसे हमने अस्पताल बनाने का संकल्प तो ले लिया। चलाना बहुत कठिन है। उसको संचालित करना बहुत कठिन है। जैसे गाड़ी खरीद लो और गाड़ी को चलाना बहुत कठिन है। ऐसे ही उन्होंने रामायण तो बना दी है। अब उसके भगवान राम के चरित्र को जीवन में उतारना बहुत कठिन है और हमें भरोसा है। हमारी टिप्पणी के बाद इस लेकिन आप ये जो अस्पताल का जिक्र कर रहे हैं।
दुनिया साधु साधु कह रही है आपके लिए। आपके लिए लेकिन गौरव इस पर एक सवाल भी पूछ रहे हैं। पंडित जी उसी अस्पताल के बारे में पूछना चाह रहा हूं। कहां तक क्या प्रगति है? कब वो शुरू हो जाएगा?
माननीय जी ने उसका भूमि पूजन शिलान्यास किया। इसके बाद फाउंडेशन कंप्लीट हो गया। 2027 के दिसंबर तक हर हाल में फर्स्ट फेज का ओपीडी हम उसको चालू करके लोगों की सेवा के लिए प्रारंभ करेंगे। हमारा क्षेत्र ट्राइबल आदिवासी क्षेत्र है और अब तक अस्पतालों में मंदिर थे। हमने एक नई मुहिम की। अस्पतालों में मंदिर नहीं मंदिरों में अस्पताल होने चाहिए।