कहां गड़बड़ हुई? किस किस मोड़ पे कोई आपको लगता है कि यह पॉइंट पे मेरे से एक गलती हुई? नहीं हम इसको दूसरे हम पिछले अगर माने तो 2006 से हमारा जीवन और 2026 मैं कुछ गड़बड़ या गलती में विश्वास नहीं करता। हम् मैं एक्सपेरिमेंट में आविष्कार में विश्वास करता हूं। हम् और जो आप जिसको गड़बड़ बोलते हो या जो बोलते हो मैं उसको लर्निंग पीरियड बोल लेता हूं।
आज फिल्म है। हां। मैं अगर राजपाल यादव पिछले 40 साल से अभिनय कर रहा है। आज भी अभिनय कर रहा है। आज भी हम अभिनय की वजह से नीरज भाई बैठे हैं। तो मैं ये कह रहा हूं कि हमने अपनी फील्ड भी हम अपनी फील्ड में ही है ना सर। सही बात है। तो अगर हमने 10 फील्ड ज्वाइन कर ली होती तो हम बोलते कि अब पहले ये किया फिर वो किया फिर वो किया फिर वो इसमें गड़बड़ हुई हमने जो कुछ भी किया चाहे सिनेमा के लिए किया हो सिनेमा में किया हो जो कुछ भी किया है अपने करियर के लिए और अपने सिनेमा से घर-घर अंजन घर-घर मन अमृत रूपी वाणी मनोर मंजन और तन मन हो प्रसन्न उसके लिए भरपूर कहीं ऐसा तो नहीं होता क्रिएटिव आदमी को ये फाइनेंस संभालना कई बार भारी पड़ जाता है।
नहीं फाइनेंस वाला तो मैं बंदा हूं भी नहीं। हमारा दिमागी ही अपना जब जो भी कंप्यूटर की तरह यूज़ कर पाता हूं। प्रोडक्शन होता है ना जी। अगर देखा जाए तो राज कपूर साहब से लेके और आज तक जो अभी तक के दिलीप साहब से लेके शाहरुख खान साहब से लेके अजय देवगन साहब से लेके अक्षय कुमार साहब से लेके राकेश रोशन जी से लेके कौन से ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने नुकसान नहीं नहीं जिन्होंने नुकसान नहीं सहा या उन्होंने प्रोडक्शन नहीं खोला प्रोडक्शन खोलना एक अभिनेता की जिम्मेदारी इसलिए हो जाती है कि वो 10 फिल्में कर रहा है। तो उस पे क्या होता है कि 100 लोग जो उसकी जर्नी उसके साथ रहे तो वो सब एक्टर ही क्रिएटिव लोग हैं। तो प्रोडक्शन एक आदमी से ना खुलता है ना एक आदमी चलता है। हां जब प्रोडक्शन में अगर कुछ गड़बड़ हो उतारचढ़ाव तो तो वो सारा कैप्टन पे जो कि भाई टीम कैप्टन की वजह से हार जाएगी। ठीक है ना?
लेकिन खेलते तो 11 खिलाड़ी है ना उसमें तो मैं ये मानता हूं कि वो प्रोडक्शन के पीछे नीति और नियत ये थी कि मैं तो देश दुनिया में अभिनय करूंगा ही जीवन भर लेकिन कुछ ऐसा एक प्लेटफार्म डाल दिया जाए जो ऐसे समो लोग हैं जो काम के लिए तो एक प्रोडक्शन खुल के वो भी गिलहरी का काम करेगा और लोगों को कहीं टेलीविजन कहीं ओटीटी कहीं वेब सीरीज कहीं कुछ बनाएगा और उसके अलग-अलग लोग होंगे। मैं तो डायरेक्टर पहले ही बोल चुका हूं कि मैं मैंने कभी उस फिल्म में एक्शन भी नहीं बोला है। हम नसीम भाई थे वो हमेशा एक्शन बोलते थे क्योंकि मैं अभिनेता की कुर्सी पे बहुत कंफर्टेबल हूं। और बाकी मैं दुनिया की किसी कुर्सी पे कंफर्टेबल नहीं हूं। तो प्रोड्यूसर अगर प्रोड्यूसर भी हूं तो भी मैं उसका कार्यकर्ता हूं। अगर मैं डायरेक्टर भी हूं तो उसका कार्यकर्ता हूं क्योंकि 250 लोगों के बीच में एक मॉनिटरिंग हो जाती है।
तो मैं हमेशा क्योंकि सिंडिकेट बहुत बड़ा है फिल्मों का जिसमें हर सेट पे दो 400 500 आदमी अलग-अलग उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम के हर जगह के मिक्स अप होते हैं। तो हजारों परिवार की रोजी रोटी चलती है। तो माध्यम भले ही मैं बन गया लेकिन उसके पीछे नियत यह थी कि एक एक प्रोडक्शन और खुलेगा तो और 100 लोगों को जॉब मिलेगा बस बाकी ये कुछ भी आता है कि आपके फैंस बहुत बेचैन हो जाते हैं कि आप जेल भी जाके आ गए चेक बाउंस हो गया जो भी समस्या आपके जीवन में रही आपने उनको भुगतान भी किया कोर्ट में भी आप अपना पक्ष रखते हैं मगर अचानक से फिर एक खबर आती है फिर एक चेक बाउंस हो गया राज्यपाल को जाना पड़ेगा जेल तो उनको ये लगता कि शायद आप रुक नहीं रहे। वह एक ही मामला है या अब कोई और नया मामला आ गया।
यह मामला 2000 12-13 में शुरू हुआ। जी और बहुत हृदय से बात बताता हूं। राजपाल यादव वॉरियर हैं। राजपाल ने जिंदगी में सिर्फ सिर्फ सफलता की ही सफलता ही प्रेसी है हमारी। और सक्सेस हमने जिंदगी में हर हार के पीछे सक्सेस उसके पीछे मोटिवेशन था। 2013 से 2026 तक कम से कम मेरा पर्सनल दो0 करोड़ का नुकसान हुआ है। ये बात मैं हृदय से बोल रहा हूं। कम से कम मेरे 50ों टूअर बाहर के छूट गए। और मेरे नाम पर जो जो फीस मुझे मिलनी चाहिए जहां पर जैसे ₹100 फीस मिलनी चाहिए वहां पर मुझे ₹10 फीस फीस मिल रही है मिल रही थी और मैं कभी फीस के चक्कर में आज तक कभी पढ़ा नहीं क्योंकि मैं कलाकार कला का विद्यार्थी हूं तो फीस तो आगे पीछे घूमती है। हमें जो काम करना आता है उसमें हमें परफेक्शन मिलना चाहिए। पूरे भारत आज मैं भारतीय सिनेमा का हिस्सा हूं। एक एक जिनके साथ काम किया या जिनके साथ काम नहीं किया अभी तक सौभाग्य नहीं मिला क्योंकि साल में 12 महीने होते हैं। फिल्में छ सात करोगे फिल्म 2000 प्रोडक्शन हाउस है। कैसे सबके? लेकिन इस क्रिएटिव मार्केट में अगर मैं यहां पे आपके सामने बात भी कर रहा हूं। अगर आपको लगता है कि यह परेशानियां हैं।
तो एक ही चीज बोलना चाहता हूं कि करियर से करियर के लिए जीवन भर समर्पित हूं। पूरे विश्व के लिए भारतीय सिनेमा का कला का विद्यार्थी हूं। पूरा विश्व हमारा है। वसुधैव कुटुंब कम जो जिन आपके माध्यम के जिनके भी पैसे हमारे ऊपर हैं अगर 100 200 लोगों से भी लेना देना किया होगा पिछले 30 साल में 40 साल में गांव से ले इधर तक तो उनके घर पर पहुंचाए जिनके देने उनके घर पर पहुंच जाएंगे डजंट मैटर क्योंकि वो मुझे पता है कि किसके कहां पे क्या है। लेकिन मैं एक चीज कहना चाहता हूं रिक्वेस्ट करना चाहता हूं कि फंड और फाइनेंस का बड़ा चोली दामन जैसा रिश्ता है। फंड जब गड़बड़ में पड़े तो आर्टिस्ट के पूरे बायोडाटा को दांव पे कैसे लगा सकते हो? राजपाल यादव आज किसी भी चाहे परेशानी में जाए, चाहे अच्छाई में जाए। हंसते-हंसते हर एयरपोर्ट पे 500 सेल्फी तो खिंचवाता है ना। तो राजपाल इस विश्व का कितने जिम्मेदार अभिनेता है। इसको 5 करोड़, 10 करोड़, 100 करोड़, 250 करोड़ कुछ कोई खरीद नहीं सकता क्योंकि ये बिक चुका है कला के नाम बचपन से।
इसको कोई नहीं इसको पैसा तो जीवन में नहीं खरीद सकता। ये बात बिलीव करो। मैं इतना मुझे पता है क्योंकि हम लोगों ने भरत मुनि के हम लोग चेले हैं। उनके नाट्यशास्त्र पढ़ के हम लोग बड़े हुए। उनका नाट्यशास्त्र सुन के कि आया आपने अपनी हमारे दादा जी की एक ही लाइन में हमेशा याद रखता हूं कि जीवन आपकी एक जर्नी है एक रंगमंच है। इसमें आपका जन्म हुआ और धीरे-धीरे बड़े होते होते आपका एक कैरेक्टर बना और धीरे धीरे धीरे आपने मरण की तरफ गए तो जीवन और मरण के बर्थ और मरण के बीच में जो यात्रा है कोई 100 साल जीता है। कोई सवा 100 साल जीता है, कोई 75 साल जीता है। अपने-अपने उसमें ना वही आपके कर्म आपके साथ जिसमें आप अपने आप को एग्जामिन कर सकते हो कि आपने क्या-क्या किया और क्या अच्छा हुआ, क्या बुरा हुआ। अगर आपके मन में वो नियति में अगर कहीं खोट है तो शायद फिर मिशन गड़बड़ है। तो मैं अपनी जीवन यात्रा में अभिनय की यात्रा को लेके और जिसमें थिएटर और फिल्म्स इन्हीं का पुजारी हूं। और इसमें नुकसान बोलो कुछ भी बोलो।
लेकिन 100% एक एक ऐसी चीज जरूर बना के आपको दूंगा कि ताकि आप से 2026 तक का राज्यपाल क्या है वो आपको बिल्कुल एक-एक पन्ने के साथ में आपको देखने को मिलेगा। थोड़ा सा उसके लिए साल दो साल जाएगा। मैं पहले दिन से बोल रहा था कि मैं डूबा हुआ कभी नहीं था। हम ना फिल्म बनाने से ना घर बनाने से और ना करियर बनाने से 10 12 साल बीच में उलझा हुआ था कुछ चीजों में तो ये जो नीलामी वगैरह की जो ये नोटिस तो मुझे ये अच्छा लगा कि नहीं देश दुनिया को ये पता है प्रॉपर्टी है कि कि आदमी डूबा हुआ नहीं है उलझा हुआ है प्रॉपर्टी जितना वजन है उतना अनुभव है और उतनी वेल्थ है। चलती फिरती फैक्ट्री है और दाल चावल रोटी के लिए परिवार के लिए कुछ जुड़ा हुआ भी है। तो बस यही और यही बच्चे बूढ़े नौजवान का आशीर्वाद है। बहुत सारी चीजों का उत्तर देना बड़ा मुश्किल है।
लेकिन एक चीज है कि मैं पहले दिन से बोल रहा हूं। मैं हमेशा बोलता हूं कि मेरे साथ इस दुनिया का प्यार बहुत है और हस मैं अपने पूरी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री भारतीय सिनेमा और भारतीय थिएटर और फिर उसमें विश्व क्या थिएटर और सिनेमा मैं उसमें जीता रहता हूं। अब उसमें हां लेकिन कभी-कभी सिर्फ हमारे सुझाव के रूप में कि सोशल मीडिया है। सोशल मीडिया पे कोई चीज अगर लिखी जाए तो उसका प्रॉपर कुछ अध्ययन हो जाए। वो तकलीफ देती है कुछ खबरें ऐसी नहीं तकलीफ नहीं मुझे हंसी आती है कि अगर जैसे चेकक्स की बात की आपने तो चेकक्स जो है चेकक्स देना तो ईमानदारी का सबूत है कि बेईमानी का गारंटी चेक अगर हमें आपसे पैसे लिए या आपको पैसे दिए तो आपसे चेक ले लिया या आपको चेक दे दिया कि भाई मैं आपसे यह पैसा लिया है ये चेक है। यह ईमानदारी है कि बेईमानी है? हां, इधर तो नियत साफ़ है कि हां मैंने कट दिया। अब तो दूंगा पैसे। अब उसको आप तो मैं सोशल मीडिया के माध्यम से यही सिर्फ रिक्वेस्ट करना चाहता हूं कि राजपाल यादव आपका आपका है। और आपके बीच में है। मैं अगर कहीं विदेश में जा विदेश भी जाऊं ना।
इवन मैं दुबई तक जाऊं और मुझे वापसी की टिकट ना मिले ना तो मुझे जब तक पहले वापसी का बोलता हूं कि वो वापसी का बताओ ताकि जाने का शेड्यूल मैं बना सकूं। तो भारतीय संस्कृति, भारतीय कल्चर, भारतीय लोग, भारतीय सिनेमा पूरी दुनिया को परिवार मानता है। सोशल मीडिया के माध्यम से जो जो बच्चे अभी जिसका करियर 5 साल का भी नहीं है। या जो और इतनी इतनी क्रिया प्रतिक्रियाएं आती हैं तो उनको सुनके यह सिर्फ एक चीज है कि या तो थोड़ा अध्ययन करना चाहिए या थोड़ा सा और भी इनको चिंतन करना चाहिए और भागने की जरूरत नहीं ठहराव की जरूरत है। कहीं कोई जो आदमी छिपता फिरे उसको चोर बोलते हैं। हम्म। और जिस पे बहुत सारे इल्जाम हो वो खुली सड़कों पे घूमे। उसको क्या बोलते हैं? कुछ तो हां कि डराने वाला राज्यपाल को राज्यपाल है। ये बात सच है। राजपाल जी आपको लगता है कोई राजपाल ने राजपाल को पीछे पड़ा है। कोई टारगेट किया जाता है। कुछ ऐसा आपको अंदेशा किसी पे शक है ऐसा कुछ? नहीं। ये कहानी मैंने पहले दिन से बोला कि सिर्फ तीन लोगों की कहानी है। हां। और तीन ही लोग इसके कल्पेट हैं। और इन तीनों के जो हुए और उसके बाद इनकी जो नादानियां हो गई तो उसमें सब्जेक्ट को प्रमोशन को धीरे-धीरे फिर तुरंत जब आदमी ना जरा सा पता लग जाए कि ये फिल्म या ये गड़बड़ हो रहा है। तो क्या है फिर जो क्रिया प्रतिक्रिया है आदमी तो ऐसा लग रहा है कि यह तो जेन्युइन कर रहा है। अब यह लग रहा है 10 साल से इंतज़ार कर रहा था कि कुछ गड़बड़ हो और मुझे मौका मिले। तो वो इसमें हंसी और दूसरे के दुख में खुश होने वाले लोग बहुत हैं।
यह यह समाज ही आज हज़ारों साल से है। उस वो दूसरे का दुख देख के अपना सु अपना दुख भूल जाता है। और दूसरे का दुख देख के उसको सुख मिल जाता है। कि जैसे कोई विनिंग चीज हो गई। इसके लिए चार्ली चैपलिन जी की एक लाइन हमेशा याद रखता हूं कि हमारा दुख अगर लोगों के लिए मनोरंजन बन जाए तो स्वीकार कर लूंगा। लेकिन हमारा सुख लोगों के लिए दुख बन जाए उसको ईश्वर हमेशा बचाए। और पैसे कमाए भी यही जाते हैं। और एक बात बताऊं धीरूभाई अंबानी से लेके आज तक जिस आदमी ने जीवन में कुछ करने की कोशिश की उसको आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक और सांसारिक 90 लोगों ने सपोर्ट किया। 10 लोगों ने बाधक का काम कर दिया। तो उन उनको इस जर्नी से गुजरना ही पड़ता है।
अब मैं 100 साल से सब रिसर्च एज एन एक्टर करता हूं। तो मुझे यह लगता है कि लड़ाई सत्य अहिंसा दया पवित्रता की है। एक तरफ लड़ाई सामधाम दंड भेद की है। और बस जिसमें सामधाम दंड भेद और वर्सेस सत्य अहिंसा दया पवित्रता इंतजार करें। हो सकता है सब चीजों का जवाब यहीं पे मिले। क्या आने वाले समय में राजपाल यादव को हम पॉलिटिक्स में देख पाएंगे? जीवन में नहीं। हां ना दूर-दूर तक नहीं। अब मैं भारतीय सिनेमा का एक बच्चा हूं और मैं कोशिश करूंगा कि अब विश्व के सिनेमा के टीम 11 का मिक्स पुलाव में जो जॉइनिंग चल रही यही सब थैंक यू कि डॉक्टर अजय कुमार थैंक यू केबिन किशोर जी ये लोग ऐसे जिन्होंने प्रोजेक्ट समझे और जो हम जर्नी जीना चाहते हैं इन्होंने खुल के प्रोजेक्ट स्वीकार किया और फॉक्स पेट्रोलियम ग्रुप हमारी जो 10 20 लोगों की टीम है जो लगी हुई थी ये क्रिएटिव वर्क के लिए क्योंकि मैं तो ना लिख सकता हूं मैं सोच सकता हूं बाकी तो अभिनय कर सकता हूं तो सबके इंजीनियर से लेके सबका योगदान है और जो काफिला मैं चाहता था भले ही वो प्रोडक्शन मजाकमज़ाक में खुला हो हम लेकिन आज प्रोडक्शन नहीं होता तो आज 2026 में हम अह तो ऐसी डीलें भी नहीं हो पाती। अब हमें खुशी है कि यह प्रोजेक्ट बनेगा। मुझे तो अभिनय करने में मजा आएगा। इसको डायरेक्ट कौन करेगा? इसको यह कौन करेगा? 2000 लोग इसमें लगेंगे और उनके घर चलेंगे और हमें संत तो हमारा तन मन की भूख अभिनय करके मिटेगी।
हम इसी को जानते हैं। यही करते हैं। चलिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं। आपका प्रोजेक्ट सफल हो और मुसीबतें भी दूर हो। मुसीबतें दूर थी। दूर है, दूर रहेंगे। क्योंकि मुसीबतें में तो राम जी से ज़्यादा मुसीबत इस दुनिया में किसने उठाई? राम जी से अगर मुसीबतें सीखना है तो राम जी के व्यक्तित्व, कृतित्व, मर्यादा को पढ़िए ना। और जीवन के महाभारत में अगर थोड़ा बहुत चिंतन करना है तो फिर तो फिर महाभारत में आप फिर गीता का सहारा ले लीजिए कि क्या है, क्या है यह? इतनी चीज कह रहा हूं कि 100 200 500 लोगों से हाफ सेंचुरी में जो भी एक से लेके और करोड़ तक लेना देना किया है उसमें जितने लगभग जिनसे लिया है उनको दिया है जिनको देना है उनके घर सम्मान के साथ पहुंचेगा और जिसको दिया है ना उनसे कभी चेक लिया है ना जीवन कभी मांगने जाऊंगा मुझे भरोसा है कि जिस दिन वो जिस दिन वो मतलब इस लायक होगा वो मेरे मेरे मेरे पैसे मुझे मेरे पास पहुंचा देगा। तो और जिन लोगों के पास पैसे हैं उनका जीवन में कभी नाम भी नहीं लूंगा। और उनसे कभी परिवार को बोल के रखा कि मांगने नहीं जाना है क्योंकि पैसा किसी की बपौती नहीं है।
सर्कुलेशन है, सामंजस्य है। जैसे अपन गणपति और माता रानी के जितने होली, दीपावली मिलजुल के जो फेस्टिवल मनाते हैं। ये हमेशा एक दूसरे का सेरेमनी होता है पैसा। जब हम एक दूसरे से पैसे को लेके अपनी नियत या अपनी उसमें जब हम वो करते हैं गड़बड़ वहां पे होता है और वो गड़बड़ आज से नहीं सव साल से चल रहा है पूरी दुनिया में चल रहा है तो वो उसके हम भी हिस्सा हैं और लेकिन मैं यह मानता हूं कि इनको मुसीबत मत समझो। मैं नहीं लगभग 90% लोग राजपाल यादव का घर-घर पता है क्योंकि मैं अभिनेता हूं। सब प्यार करते हैं। लेकिन, अगर आप कर लो अह छानबीन, तो कंपनी हो, चाहे पर्सनल हो, जो आदमी कुछ काम हो, 90% लोग लगातार या तो डेट चुकाना है या डेट देना है। या लेना है कोई एक लास्ट लाइन बोलूं बड़े प्यार से। जब मैं मंदिर जाता हूं, तो मुझे इस दुनिया से और प्यार हो जाता है। किस लिए? कि मंदिर के सामने सीढ़ियों के पास में जैसे जाते हैं दरिद्र नारायण बोलते हैं जल्दी से जाओ वो कि अंदर दर्शन करने गया है
भाई बहुत बड़ा आदमी है और मिलेगा जरूर तो सारे जितने दरिद्र नारायण होते हैं सब वो मतलब इस उसमें खड़े हो जाते हैं। फिर वो जो सेठ जी जा रहे हैं या जो भगवान जा रहे हैं सीढ़ियों पे ऐसे या हम जा रहे हैं। हम जा के मूर्ति में कान में उनमें अंदर जाके अपना रोना रोते हैं कि प्रभु हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है? और जैसे फिर वो खूब पूजा होके फिर वो वो भी फिर वो नीचे जब आ रहे होते हैं तो उनका रूप दूसरा होता है। फिर वो जो भी अपने तरीके से पुण्य करता है वो तो सबका तो सोचिए कोई सीढ़ियों के बाहर मांग रहा है। कोई सीढ़ियों पे मांग रहा है। कोई मंदिर के अंदर मांग रहा है। पूजा करने वाला भी मांग रहा है। पूजा करवाने वाला भी मांग रहा है। कोई एक बैंक दूसरे बैंक से मांग रही है। कोई एक घर दूसरे घर से मांग रहा है। कोई एक देश दूसरे देश तो इन भीखमंगों के 850 करोड़ के बाजार में अगर राजपाल यादव भीखमंगा है तो नंबर वन भिकमंगा है क्योंकि भीखमंगों की मार्केट है क्योंकि पैसा किसी के घर में छपेगा तो वो अनु क्या बोलते हैं इललीगल है पैसा के एक सिस्टम जिससे देश चलता है तो मुझे ऐसा लगता है कि जो नारायण हैं उनके संसार में जितने भी हम लोग जन्म हुआ तो लगातार हमारी तबीयत ठीक हो जाए। हम मांग ही रहे हैं ना। तो मांगने में दो ही तरीके होते हैं कि एक मांगने में अच्छी नियत होती है और एक मांगने में गंदी नियत होती है।
तो शायद मेरा अह पिछले 20 साल का करियर भी 2006 से लगभग हम अह थोड़ा सा व्यापार और परिवार थोड़ा सा सेटलमेंट के लिए की चीजें तो 20 साल में 20 साल में मैं जितना परेशान था मांगने के लिए उससे कहीं ज्यादा रिलैक्स हूं यह समझने के लिए कि नहीं नहीं नहीं जन्म लेते हैं नामकरण से ले खर्चे से ले और अंतिम संस्कार तक खर्चे ही हैं। और जितने लोग जुड़े हैं वह चर्चे में है और बाकी सब कोई अकेले में मांग रहा है, कोई फोन मांग रहा है और ये मांगने की बाजार खूब हेल्दी बढ़ाओ और इसमें इतना एक दूसरे से मांगो कि आपके आप माध्यम बनो हजारों लोगों के घर और किचन चलवाने के लिए। मैं 850 करोड़ लोगों में मंगिता नंबर वन हूं अभिनय में और धन में और प्रसिद्धि में मैं सिर्फ ईश्वर ईश्वर से ये कि अगर तू सब कुछ देता ही है तो बोलते क्या अंत में कि यार तुमने क्या-क्या मांगा? बोले इतना मांगा और बोले फिर संतुष्टि किसने मिली? बोले कि यहां तक जहां तक हाथ खुले आसमान आपका और बोले कि संतुष्टि के मामले में जहां हाथ जुड़ जाए सम्मान आपका जो मिला वो हमारे लिए कृपा है। इस पे मैं जीता हूं और राजपाल यादव को कोई भी मुसीबत डराए वो राजपाल के अंदर का इंसान बैठा राजपाल को डरा सकता है। बाकी मैं बहुत ही मस्करा टाइप मशवरा टाइप इंसान हूं।
मुझे कोई डराने की कोशिश करता है। तो मैं कहता हूं कि डरा मत ना डर से तुझ सबको मौत से डर लगता है पूरी दुनिया में। सबके ने अपनी-अपनी सबकी अपनी-अपनी सिस्टम है। बोलते 850 करोड़ लोग हैं आपके पास। नीरज भाई हम्म लेकिन एआई के मंच ए एनआई के मंच पे ये बहुत श्रद्धा के साथ बोलना चाहता हूं कि अंगूठे किसी के नहीं मिलते साइन मिल सकते हैं अंगूठे किसी के नहीं मिलते मैं इस संरचना इस चमत्कार को प्यार करता हूं और ये सोचो ये जो चल रहा है इसको चलाने के वाले चलाने के लिए ऊपर वाले पे कितना प्रेशर होगा बहुत शुभकामनाएं हमसे बात करने के बहुत शुक्रिया। थैंक यू थैंक यू ब्रदर थैंक