हमको मिटा सके ये जमाने में दम नहीं हमसे जमाना खुद है जमाने से हम नहीं शेर जैसी चाल ढाल रोबदार आवाज और नायाब अंदाज यह शब्द सिर्फ एक ही नाम की तस्वीर खींचते हैं राजकुमार ले जाने की बात तो भूल जाओ अगर तुमने गलती से उसे कहीं देख भी लिया तो हम तुम ऐसी मौत मारेंगे तुम्हारी आने वाली नस्लों की नींद भी उस मौत के खौफ से उड़ जाएगी वो अभिनेता जो ना सिर्फ अपनी दमदार एक्टिंग बल्कि अपने अखर और बेबाक मिजाज के लिए भी मशहूर थे उनकी डायलॉग डिलीवरी का अंदाज ऐसा था कि दर्शक सिनेमा हॉल में उनकी आवाज सुनने के लिए खींचे चले आते थे हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे लेकिन वो बंदूक भी हमारी होगी गोली भी हमारी होगी और वक्त भी हमारा होगा सफेद जूतों में उनकी दमदार एंट्री और उनके डायलॉग सुनकर हॉल तालियों और सिटियोड़तोंग से लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस बुलंद आवाज ने उन्हें बॉलीवुड का सितारा बनाया वही आवाज उनके जीवन के अंतिम दौर में उनका साथ छोड़ गई वह जो डायलॉग से दर्शकों का दिल जीतते थे आखिरी दिनों में इशारों से बात करने पर मजबूर हो गए जिनके अपने घर शीशे के हो वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते क्या आपको पता है कि पुलिस ऑफिसर से एक्टर बने इस सुपरस्टार ने कभी अपनी फिल्म के हिट या फ्लॉप होने की परवाह नहीं की और हर फिल्म के बाद अपनी फीस बढ़ाते चले गए दिल्ली तक बात मशहूर है कि राजपाल चौहान के हाथ में तंबाकू का पाइप और
जेब में अतिफ रहता है जिस रोज हम इस कुर्सी पर बैठकर इंसाफ नहीं कर सकेंगे उस रोज हम इस कुर्सी को छोड़ देंगे राजकुमार की शख्सियत जितनी अट्रैक्टिव थी उतनी ही उनका तीखा अंदाज ऐसा था कि बड़े से बड़े स्टार्स भी उनके साथ काम करने से कतराते थे यहां तक कि अमिताभ बच्चन और सलमान खान जैसे कलाकार भी उनके मजाक और कटाक्ष का शिकार हुए एक बात हमारी भी सुनते जाओ काली के पुजारी चिपकली के बच्चे कभी मगरमच्छ नहीं बन सकते वो दीवार पर रंगते रेंगते ही मर जाते हैं फिर आखिर क्यों इस रॉयल जिंदगी जीने वाले एक्टर ने अपने परिवार को यह वसीयत दी कि उनकी मौत की खबर को राज रखा जाए इस दिलचस्प सफर की और भी अनसुनी बातें लेकर आएंगे हम आपके सामने तो इस वीडियो के एंड तक आप बने रहिए हमारे साथ जब मौत करीब होती है तो यमराज के साथ-साथ लोग राना को भी याद कर लेते हैं फिल्म इंडस्ट्री में ना जाने कितने एक्टर्स आए और गए लेकिन राजकुमार वो नाम है जिसने ना सिर्फ अपनी दमदार एक्टिंग से बल्कि अपनी गहरी करिश्माई आवाज और पावरफुल डायलॉग डिलीवरी से दर्शकों के दिलों में एक अलग पहचान बनाई हमें देवता मत कहो बाबा हमें अमीरों की ताकत का नहीं गरीबों की कमजोरी का एहसास है और फिर देवता तकदीर बनाते हैं जो उनके हाथ में है हम तो सिर्फ तदबीर बताते हैं उनकी पर्सनालिटी इतनी जबरदस्त थी कि हर कोई उन्हें नोटिस करता लेकिन उनके स्वभाव में एक खास बात थी और वह था उनका गुस्सा राजकुमार का टेंपर ऐसा था कि किसी भी गलत चीज को व बर्दाश्त नहीं करते थे अगर उन्हें कुछ खटकता तो सामने वाले को तुरंत फटकार लगाते थे पिंजरा तो वो है जहां से हमने तुम्हें मंगवाया था यह तो शेर की गुफा है जहां अगर तुमने करवट भी ली तो समझो
मौत को बुलावा दिया और उनके इस अंदाज के किस्से बॉलीवुड में खूब मशहूर हुए बड़े-बड़े सितारे और फिल्म मेकर्स उनके तीखे तेवर का सामना कर चुके हैं अब बात करते हैं उनकी शुरुआत की तो राजकुमार का जन्म 8 अक्टूबर 1926 को अनडिसाइडेड इंडिया के बलूचिस्तान के ललाई इलाके में हुआ वह एक कश्मीरी पंडित परिवार से थे और उनका असली नाम था कुलभूषण पंडित उन्होंने अपनी पढ़ाई बेहतरीन तरीके से पूरी की और कई भाषाओं में महारत हासिल की हिंदी इंग्लिश उर्दू पंजाबी संस्कृत और कश्मीरी हर भाषा पर उनकी मजबूत पकड़ थी 1940 के दशक में मात्र 14 साल की उम्र में वह मुंबई आ गए और मुंबई पुलिस में सब इंस्पेक्टर की नौकरी ज्वाइन कर ली कुछ समय तक पुलिस की वर्दी में सेवा देने के बाद उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ आया दरअसल दोस्तों के बार-बार कहने पर उन्होंने 1952 में फिल्म इंडस्ट्री का रुक किया और उन्हें पहली फिल्म मिली रंगीली इसके बाद राजकुमार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
और वह सिल्वर स्क्रीन पर एक चमकते हुए सितारे के रूप में उभरते चले गए हकीकत छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से कि खुशबू आ नहीं सकती कभी कागज के फूलों से राजकुमार ने 40 साल से भी ज्यादा के अपने करियर में 60 से अधिक फिल्मों में काम किया उनकी मदर इंडिया में बेमिसाल परफॉर्मेंस ने उन्हें इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया दिल अपना और प्रीत पराई में उनका शांत और गंभीर किरदार दर्शकों को बेहद पसंद आया गुड मॉर्निंग शायद पहली दफा मिल रही हो जी हां मां यह करोना है नस बनकर हाल ही में अस्पताल में आई है वक्त में उनके किरदार के डायलॉग्स जैसे जानी यह चाकू है लग जाए तो खून निकल आता है ने हिंदी सिनेमा में एक नया स्टाइल स्थापित किया यह बच्चों के खेलने की चीज नहीं हाथ कट जाए तो खून निकल आता है 1972 की पाकीजा में उन्हें रोबदार अंदाज और मीना कुमारी के साथ उनकी केमिस्ट्री को आज भी क्लासिक के रूप में याद किया जाता है इस घर के नों को हर सांस के बाद दूसरे सांस के लिए भी आपसे इजाजत लेना पड़ती है और आपकी औलाद खुदा की बनाई हुई जमीन पर नहीं चलती आपकी हथेली पर रती है वही 90 के दशक में तिरंगा और सौदागर जैसी फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि उम्र और दौर का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा हम आंखों से सुरमा नहीं चुराते हम आंखें ही चुरा लेते हैं ताकि सुरमा लगाने की नौबत ही ना आए अक्सर राजकुमार का सेंस ऑफ ह्यूमर और कटाक्ष लोगों को असहज कर देता था लेकिन यह उनके व्यक्तित्व का
हिस्सा था इसी तरह एक वाक्य में फिल्म जंजीर के लिए डायरेक्टर प्रकाश मेहरा ने राजकुमार को लीड रोल देने का सोचा स्क्रिप्ट लेकर जब वो राजकुमार के पास पहुंचे तो राजकुमार ने उनकी बात सुनते ही नाक बंद कर ली और बोले जानी तुम्हारे पास से बिजनौरी तेल की बदबू आ रही है हम तुम्हारे साथ एक मिनट भी खड़े नहीं हो सकते फिल्म तो बहुत दूर की बात है प्रकाश मेहरा अपमानित होकर लौट गए और आखिरकार उन्होंने फिल्म में अमिताभ बच्चन को कास्ट कर लिया जो इस फिल्म से सुपरस्टार बन गए वहीं एक पार्टी के दौरान राजकुमार पहली बार बप्पी लाहरी से मिले जो अपने गहनों के लिए बहुत मशहूर थे राजकुमार ने उनसे कहा वाह जानी एक से बढ़कर एक गहने बस एक मंगल सूत्र की कमी रह गई है बप्पी लाड़ी ने इसे बजाक में लिया और जोर से हंसने लगे इसी तरह फिल्म आंखें की कहानी लेकर जब रामानंद सागर राजकुमार से मिलने गए तो उस कहानी को सुनने के बाद राजकुमार को व पसंद नहीं आई सीधे मना करने की बजाय राजकुमार ने अपने कुत्ते को बुलाया और उससे पूछा जानी तुम यह रोल करोगे जब कुत्ते ने गर्द हिला दी तो राजकुमार बोले देखो यह रोल तो मेरा कुत्ता भी नहीं करेगा इससे रामानंद सागर नाराज हो गए और फिर कभी राजकुमार के साथ काम नहीं किया फिर एक बार किसी फिल्म के सेट पर डायरेक्टर से मिलने गए राजकुमार ने वहां मौजूद राजेश खन्ना और धर्मेंद्र को देखकर कहा जानी काफी जूनियर्स इकट्ठा कर रखे हैं इस टिप्पणी ने डायरेक्टर और सुपरस्टार सबको चौंका दिया इसी तरह एक पार्टी में जब अमिताभ बच्चन के सूट की खूब तारीफ हो रही थी राजकुमार ने उनसे पूछा जानी यह सूट कहां से सिलवा जब अमिताभ ने पता बताया और पूछा कि क्या आपको भी ऐसी ड्रेस सिलवानी है तो तो राजकुमार बोले नहीं तुम्हारे सूट का कपड़ा पसंद आया इससे मैं अपने घर के पर्दे बनवाना चाहता हूं ये सुनकर अमिताभ तो बिल्कुल ही सन्न रह गए राजकुमार अक्सर धर्मेंद्र को जितेंद्र और जितेंद्र को धर्मेंद्र कहकर चिढ़ाते थे जब धर्मेंद्र ने गुस्से में एक दिन कहा कि आप सही से नाम लो वरना मैं बात नहीं करूंगा तो राजकुमार बोले जानी राजेंद्र हो
या धर्मेंद्र जितेंद्र या बंदर सब हमारे लिए बराबर है इसी तरह फिल्म जंगबाज के सेट पर गोविंदा ने रंगीन शर्ट पहनी हुई थी राजकुमार ने तारीफ करते हुए गोविंदा से उनकी शर्ट मांगी और गोविंदा ने बिना देरी किए उन्हें शर्ट दे दी अगले दिन देखा गया कि राजकुमार ने उस शर्ट का रूमाल बना लिया और उससे अपनी नाक पोंछ रहे थे एक और मशहूर किस्से के मुताबिक फिल्म मैंने प्यार किया कि सक्सेस पार्टी में जब सलमान खान सबसे मिल रहे थे तो व राजकुमार को नहीं पहचान सके और जब सलमान ने राजकुमार से घबराहट में पूछा कि आप कौन तो राजकुमार बोले जाओ बेटा अपने अब्बा से पूछ कर आओ कि हम कौन हैं इन किस्सों से ये साफ झलकता है कि राजकुमार का अंदाज हमेशा नो फिल्टर वाला था और शायद यही बात उन्हें इंडस्ट्री का सबसे यूनिक और यादगार एक्टर बनाती है ये ठाकुर राजेश्वर सिंह इतिहास बताता नहीं इतिहास लिखता है इतिहास बनाता है राजकुमार ने दिलीप कुमार मीना कुमारी सुनील दत्त धर्मेंद्र और नाना पाटेकर जैसे सितारों के साथ काम किया हालांकि उनकी सख्त मिजाज और अखर स्वभाव के कारण उनके साथ काम करना इन सबके लिए भी चुनौतीपूर्ण माना गया सौदागर की शूटिंग के दौरान दिलीप कुमार और राजकुमार के बीच मतभेद की कई कहानियां इंडस्ट्री में मशहूर हुई इसके बावजूद दोनों कलाकारों ने पर्दे पर बेहतरीन तालमेल दिखाया ना यह बच्चा हमें कबूल है और ना कभी कबूल होगा तिरंगा में नाना पाटेकर के साथ इनकी शुरुआत थोड़ी खट्टी रही लेकिन बाद में दोनों करीबी दोस्त बन गए अपना तो उसूल है पहले मुलाकात फिर बात और फिर अगर जरूत पड़े तो लात बड़ी उम्मीद थी आपसे लेकिन अब पता चला आपका रास्ता अलग मेरा रास्ता अलग राजकुमार से जुड़े ऐसे दर्जनों किस्से हैं जो उनके जिद्दी और अड़ स्वभाव को बयां करते हैं उनके कटु वचन हर बार एक्टर से लेकर डायरेक्टर तक को चुप जाते थे
लेकिन फिर भी जानकारों की माने तो राजकुमार एक नेक दिल इंसान थे और जरूरत पड़ने पर सबकी मदद के लिए भी तैयार रहते थे साथ ही वो एक सुपरस्टार भी थे और उनके सामने सभी को झुकना पड़ता था उन्हें करीब से जानने वाले बताते हैं कि वह शीशे की तरह साफ दिल इंसान थे जो कभी ना ही किसी की चाटुकारिता करते थे और ना ही अपने फायदे के लिए कभी झूठ बोलते थे जिसके लिए जो दिल में होता था वही जुबान से भी बोलते थे ही वाज मेरी रीडिंग ये है कि राजकुमार जी एक बहुत ही इंटेलिजेंट इंसान थे बहुत ही क्लासी टाइप के आदमी थे राजकुमार को गहनों का बेहद शौक था वे खुद को हमेशा ही शाही लिबास में रखते और उनके गहने उनके रुतबे को और बढ़ाते थे उन्होंने कई बार अपने शेरो शायरी के माध्यम से भी अपने विचार साझा किए उनकी साहित्यिक रुचियां उन्हें आम अभिनेताओं से अलग करती थी कश्मीरी पंडित परिवार से होने के कारण उन्हें अपनी संस्कृति और भाषा पर गर्व था वे अक्सर उर्दू और हिंदी के शेर सुनाते और सुनने वाले मोहित हो जाते थे सबूत आग से मांगते हो कि वह जलाती कैसे है आंधी से मांगते हो कि वो उड़ाती कैसे है और नदी से मांगते हो वो डबोक है मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अपने आखिरी दिनों में राजकुमार कैंसर से जूझ रहे थे उनकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि उनकी आवाज लगभग पूरी तरह से बंद हो गई थी अगर कोई उनसे बात करना चाहता तो उसे उनके बेहद करीब जाना पड़ता था लेकिन यहां भी उनकी बेबाकी और अंदाज बरकरार रहे जब किसी ने उनकी बीमारी के बारे में पूछा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा जानी हमें भला और कौन सा रोग हो सकता था राजकुमार को अपनी बीमारी का पता था लेकिन वह अपनी हालत को लेकर कोई सहानुभूति नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने खुद को धीरे-धीरे दुनिया से दूर कर लिया कीमोथेरेपी और इलाज के बावजूद उनके गले के नोट्स इतने खराब हो गए कि उन्हें कोई भी उम्मीद बाकी नहीं रही अपने अंतिम समय में उन्होंने अपनी पत्नी
और बच्चों को बुलाया और बेहद धीमी आवाज में कहा मैं नहीं चाहता कि मेरी मौत के बाद कोई शोर शराबा या तमाशा बने बस परिवार के लोग इसमें शामिल हो और अंतिम संस्कार के बाद ही दुनिया को इसकी खबर दी जाए वाइफ को उन्होंने कहा था कि देख ये लड़का तो अभी बच्चा है तेरे को बोल रहा हूं मेरे मरने पर किसी को कोई आदमी आना नहीं चाहिए यू कीप इट दिस बय तो ठीक है राजकुमार को एक शेर बेहद पसंद था जिसे वो अक्सर दोहराते थे जिंदगी एक नाटक ही तो है लेकिन जिंदगी और नाटक में फर्क है नाटक को जहां चाहो जब चाहो बदल दो लेकिन जिंदगी के नाटक की डोर तो ऊपर वाले के हाथ में है शेर की तरह उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बिना किसी पर बोझ बने ही बिताई और 3 जुलाई 1996 को गले के कैंसर से जूझते हुए 69 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया राजकुमार का अंदाज आज भी नए एक्टर्स को प्रेरित करता है उनका डायलॉग डिलीवरी का स्टाइल और दबंग व्यक्तित्व भारतीय सिनेमा का अमूल्य हिस्सा बन गए उनके जीवन के आखिरी दिनों में भी उन्होंने अपने स्वाभिमान और शान को बरकरार रखा और उनकी यह बात कि जानी किसी से एहसान लेना हमारी फितरत में नहीं उनके जीवन के दर्शन को दर्शाती है आज भी उनके डायलॉग्स थिएटर इवेंट्स और सोशल मीडिया पर घुसते हैं और उनका प्रभाव हमेशा बॉलीवुड के सुनहरे इतिहास का हिस्सा रहेगा अभी बहुत कुछ है जो हम नहीं कर पाए और शायद हमारे रास्ते में आएगा भी नहीं जो कर पाएंगे तो दोस्तों आपको आज का हमारा राजकुमार स्पेशल वीडियो कैसा लगा हमें कमेंट्स में जरूर बताएं साथ ही अगर आपके पास भी राजकुमार से जुड़ी कोई इंटरेस्टिंग जानकारी हो तो वह भी हमारे साथ जरूर शेयर करें बॉलीवुड की किसी बेबाक स्टोरी के साथ अगले वीडियो में आपसे फिर होगी मुलाकात तब तक के लिए नमस्कार i