नमस्कार दोस्तों, एक बार फिर आप सभी का स्वागत है मनोज फिल्मी पडकास्ट में। बी आर चोपड़ा, [संगीत] अमिताभ बच्चन और राज बब्बर को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में बहुत तरह की कहानियां कही और सुनी जाती है। ऐसा भी कहा जाता है कि बी आर चोपड़ा ने ही राज बब्बर के करियर को आगे बढ़ाया। जबकि अमिताभ बच्चन को उनका बैनर तो मिला लेकिन निर्देशन [संगीत] नहीं। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर [संगीत] प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। बी आर चोपड़ा और यश चोपड़ा दोनों भाई थे। लेकिन दीवार कभी-कभी या सिलसिला जैसी फिल्मों से जिस तरह यश चोपड़ा का अमिताभ बच्चन से एक रिश्ता सा कायम हो गया था, उस तरह बी आर चोपड़ा से क्यों नहीं हो सका? इसको लेकर गॉसिप में हमेशा अनेक बातें कही सुनी जाती रही हैं।
दूसरी तरफ राज बब्बर का शुरुआती कैरियर देखिए। बी आर चोपड़ा मानो उनके गॉडफादर ही कहलाए। बी आर चोपड़ा के बारे में यह किस्सा भी मशहूर है कि उन्होंने अमिताभ बच्चन को फिल्मफेयर टैलेंट कॉन्टेस्ट में अयोग्य घोषित कर दिया था। जब वह हीरो बनने के लिए इंडस्ट्री में दस्तक देना चाहते थे। वहीं कुछ सालों बाद कॉन्टेस्ट में राज बब्बर चुने गए थे। लेकिन बहुत कम लोगों को ध्यान होगा कि 1975 [संगीत] में यश चोपड़ा ने अगर दीवार जैसी फिल्म उनके साथ निर्देशित की तो उसी साल बी आर चोपड़ा ने प्रोड्यूस की [संगीत] थी जमीर जिसमें अमिताभ बच्चन के अलावा सायरा बानो और शम्मी कपूर जैसे कलाकार भी थे। हां जमीर का निर्देशन रवि चोपड़ा ने [संगीत] किया था। लेकिन बैनर बीआर फिल्म्स का ही था। हालांकि यह बात सही है कि आगे चलकर यश चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन को लेकर कई फिल्में बनाई तो बी आर चोपड़ा ने राज बब्बर को लेकर। लेकिन यह अनायास नहीं हुआ। राज बब्बर को बी आर चोपड़ा क्यों ज्यादा पसंद करते थे? या कि उनके करियर को आगे बढ़ाने में अपना खास योगदान दिया। इसके पीछे एक अहम कहानी कही जाती है।
जो शायद बहुत लोगों को मालूम ना हो। वो कहानी आज हम आपको आगे बताएंगे। लेकिन उससे पहले यह जान लेते हैं कि बी आर चोपड़ा ने राज बब्बर को लेकर कई फिल्में बनाई थी। बी आर चोपड़ा अपनी फिल्मों में सामाजिक [संगीत] मुद्दों और परिवर्तन के आगाज की कहानियां दर्शाने के लिए विख्यात रहे हैं। मीना कुमारी की एक ही रास्ता दिलीप कुमार और वैजंती माला की फिल्म नया दौर अशोक कुमार की कानून और राजेंद्र कुमार की धूल का फूल जैसी फिल्में बनाने के लिए वह जाने गए। वहीं बी आर चोपड़ा ने राज बब्बर के साथ जीनत अमान और पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ इंसाफ का तराजू [संगीत] सलमा आगा के साथ निकाह और स्मिता पाटिल के साथ आज की आवाज जैसी फिल्में बनाई। इंसाफ का तराजू और निकाह में राज बब्बर को भरपूर एक्सपोज़र मिला। इंडस्ट्री में एक उदयमान कलाकार का आगमन हुआ। वैसे यही दौर था जब राज बब्बर को 100 दिन सास के या फिर लेख टंडन की अगर तुम ना होते में भी देखा गया था। चलिए अब आपको बताते हैं वह कहानी कि आखिर कब बी आर चोपड़ा मानो राज बब्बर की प्रतिभा के मुरीद हो गए। गौरतलब है कि फिल्मों में जाने से पहले राज बब्बर दिल्ली में थिएटर से जुड़े थे। दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से अभिनय का प्रशिक्षण लिया था।
इसी दौरान उन्होंने अपनी सह कलाकार नादिरा से शादी की थी। इसके बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया था। दिलचस्प बात यह है कि टैलेंट कॉन्टेस्ट में कभी अमिताभ बच्चन को अयोग्य घोषित किया गया था। लेकिन उसी कॉन्टेस्ट में बाद के सालों में राज बब्बर चुन लिए गए थे। लेकिन उस साल देश में लगे राष्ट्रीय आपातकाल के चलते नतीजे का ऐलान नहीं हो सका। गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन [संगीत] इंदिरा गांधी सरकार ने देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी। आपातकाल का असर फिल्म इंडस्ट्री पर भी पड़ा। जिस प्रकार पत्र पत्रिकाओं की सामग्रियां सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारियों से पास करानी होती थी। उसी तरह फिल्म जगत की सभी गतिविधियों की भी निगरानी की जाती थी। यही समय था जब गुलजार की आंधी और लेख टंडन की आंदोलन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था तो रमेश सिप्पी की शोले का क्लाइमेक्स भी बदला गया था। माधुरी [संगीत] के पूर्व संपादक अरविंद कुमार ने एक बार वह सारा प्रसंग विस्तार से बताया था। जिसका सार संक्षेप कुछ इस प्रकार है। उन्हीं के शब्द हैं। आपातकाल में सत्ता विरोधियों को मिलने वाली टेलीफोन मिडनाइट फोन कॉल भयावह घटना के रूप में प्रचलित थी। एक रात मेरे घर भी मिडनाइट कॉल आई। बी आर चोपड़ा जी की। उन्होंने कहा अरविंद जी इतनी रात को फोन करने को मैं मजबूर हूं। टैलेंट कॉन्टेस्ट फौरन बंद करने को कहा गया है। अगर बंद नहीं कर सकते तो विजेताओं को पुणे के फिल्म प्रशिक्षण संस्थान में 3 साल के लिए दाखिला लेना होगा। राज बब्बर उस साल चुने गए थे। लेकिन घोषणा नहीं
होने से बी आर [संगीत] चोपड़ा भी आहत थे। इसके बाद बी आर चोपड़ा ने राज बब्बर को कई फिल्में दी। उन्होंने आगे बताया था कि टैलेंट कॉन्टेस्ट के दौरान राज बब्बर अपनी प्रतिभा से बी आर चोपड़ा को खासे प्रभावित कर चुके थे। ऑडिशन के दौरान राज बब्बर ने जिस अंदाज में अभिनय किया था, वह बीआर [संगीत] चोपड़ा को काफी पसंद आया था। प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए राज बब्बर ने दिए गए संवाद में अपनी तरफ से एक सीन और जोड़ा था। अपने सिर [संगीत] पर धौल जमाया। जीभ निपोरी, झेपें और फिर हंसे। यह अदा चोपड़ा जी को पसंद आ गई। तभी उनके दिमाग में राज बब्बर के लिए कोई रोल आकार लेने लगा। राज बब्बर विजेता हुए लेकिन पब्लिक में घोषणा नहीं हो सकी। उसकी वजह आपातकाल बताया गया। खैर, आपातकाल के दौरान और उसके बाद राज बब्बर कई छोटी-मोटी फिल्मों [संगीत] में काम करते रहे। लेकिन उन्हें सबसे बड़ी सफलता बी आर चोपड़ा की फिल्म इंसाफ का तराजू से मिली। यह फिल्म [संगीत] सन 1980 में ही आई थी। फिल्म में राज बब्बर नेगेटिव रोल में थे।
पहले जीनत अमान और फिर उनकी छोटी बहन पद्मिनी [संगीत] कोल्हापुरी के किरदार के साथ उन्होंने बलात्कार का सीन फिल्माना था। राज बब्बर ने एक बार कहा था कि वह सीन करना बहुत आसान नहीं था। लेकिन बी आर चोपड़ा की बदौलत वह उसे [संगीत] भली-भांति निभा सके। राज बब्बर ने वह रोल जिन खूबियों के साथ निभाया उसकी चर्चा आज भी होती है। इस प्रकार बी आर चोपड़ा ने इंडस्ट्री को एक नया प्रतिभाशाली कलाकार दिया। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि बी आर चोपड़ा और अमिताभ बच्चन के बीच कोई मतभेद रहा है। यही सही है कि अमिताभ बच्चन को बी आर चोपड़ा के निर्देशन में काम करने का अवसर नहीं मिल सका। [संगीत] लेकिन बीआर फिल्म्स बैनर के तहत उन्होंने 1975 की जमीर के बाद कई कामयाब फिल्में की हैं। [संगीत] मसलन 2003 की बागवा और 2006 की बाबुल बाघवा में अमिताभ के साथ हेमा मालिनी थी तो बाबुल में भी दोनों को एक बार फिर से साथ देखा गया। निर्देशन रवि चोपड़ा ने किया था। गौरतलब है कि बी आर चोपड़ा को अमिताभ की प्रतिभा [संगीत] और मेहनत पर गर्व था। तो अमिताभ भी बी आर चोपड़ा का बहुत सम्मान करते थे। तो दोस्तों आज का वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप [संगीत] सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर।