तो डायरेक्ट मोदी और अमित शाह को चैलेंज देखा आपने विजय का यह अंदाज खूब वायरल हो रहा है। आखिरकार विजय ने ऐसा कहा क्या कि भाई दक्षिण की सियासत में एकाएक उनका यह बयान वायरल हो गया जबरदस्त तेवर और तेवर सीधे तौर पर संकेत मोदी और अमित शाह के उस ड्रीम प्रोजेक्ट ड्रीम बिल को लेकर है जिस पर विजय क्रॉस का निशान लगा रहे हैं और वह भी मन से खड़े हो गए। अब खेल क्या है? और क्यों कहा जा रहा है एक तीर से विजय ने दो निशाने साथ दिए।
और कहीं ना कहीं राहुल गांधी के मिशन को आगे बढ़ा दिया। 10 दिन यह 10 दिन बहुत महत्वपूर्ण होने वाले हैं जो 20 तारीख से शुरू होंगे। क्यों? क्योंकि मानसून सत्र शुरू होने वाला है। अभी मैं आपको बताऊंगा कि विजय ने दो तीर कैसे साधे। मानसून सत्र शुरू हो रहा है और वाजिब सी बात है कि मानसून सत्र और इस सत्र में क्या होने वाला है यह सबको मालूम है।
परिसीमन बिल को लाने की तैयारी एक बार फिर से सरकार कर रही है। दो तिहाई बहुमत चाहिए। दो-ती महीने पहले यह सरकार सदन में लेकर आई थी लेकिन बिल गिर गया। क्यों? क्योंकि तब उस वक्त बहुमत नहीं था और यह पहली बार ऐसा हुआ था कि मोदी अमित शाह की करारी हार हुई। अब पार्टियों में तोड़फोड़ मची है। क्यों मची है? किस लिए मची है? क्योंकि अब यह बिल पास करना है। इसीलिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय सामने आते हैं और मन से कहते हैं सीधे तौर पर अल्टीमेटम दे देते हैं। और जो बात कह रहे हैं ना वो स्टैन को जाकर लग रही है।
वो बात मोदी अमित शाह को जाकर लग रही है। क्योंकि विजय ने पहली बार सीधे तौर पर मोदी अमित शाह को ललकार दिया। आंख दिखाई है। और अब तक [हंसी] जो बात कहने से वह बच रहे थे। अब विजय ने खुले तौर पर ऐलान कर दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में जो राजनीतिक समीकरण है पॉलिटिकल सिनेरियो है वो किसी भी हाल में तमिलनाडु के हितों को लेकर बैकफुट पर नहीं आएंगे अब होता क्या है समझिए एक बहुत बड़ी रैली थी विजय की विजय की रैली थी और इस रैली में जबरदस्त भीड़ थी और विजय जो बात बोल रहे हैं अब सुनिएगा की रैली थी और अपने तमाम मुद्दों को लेकर विजय बात रख रहे थे और तभी इसी दौरान विजय ने टी लिमिटेशन बिल को लेकर अपनी बात रखी और जैसे ही वह बात रख रहे थे वो बात संकेत दे गई कि आने वाले वक्त में विजय करने के हवाले हैं।
दरअसल परिसीमन बिल जिसको लेकर आप जानते हैं कि तमिलनाडु के राज्यों की सीटें बढ़ाने की बात है। तमाम राज्यों के सीटें बढ़ाने की बात है हर राज्य में और करीब-करीब 800 से ज्यादा सीटें पड़ेंगी। यह दावा किया जा रहा है कि भाई दक्षिण भारत पर भी इसका असर पड़ेगा। देश की सियासत पर असर पड़ेगा और कहा यह जा रहा है कि मोदी अमित शाह इसलिए चाहते हैं क्योंकि बीजेपी हमेशा के लिए सत्ता में आता है।
अब दक्षिण भारत के राज्य वहां पर किस लिहाज से सीटें बढ़ेंगी, कैसे बढ़ेंगी, क्या नहीं बढ़गी उसको लेकर चर्चा हो रही है। और विजय का स्टैंड क्या है? विजय ने अब स्टैंड क्लियर कर दिया। स्टैलिन को अपने स्टैंड में फंसा दिया। विधानसभा के चुनाव के वक्त स्टिन ने बिल फाड़ा था। याद आया आपको? और वो वक्त था जब स्टैलिन ने उस बिल में आग लगा दी थी। अब विजय रैली में खड़े होकर मंच से कहते हैं कि वह डीलिमिटेशन बिल के खिलाफ लोकसभा में पिछली बार अप्रैल में यह बिल गिर गया था।
किसी भी हाल में वो इस बिल को लेकर तमिलनाडु के हितों को बर्दाश्त नहीं करेंगे कि अगर उससे समझौता हुआ साफ तौर पर जो विजय ने कहा देखिए आपकी स्क्रीन पर है। विजय ने कहा कि नोबडी कैन टेक अवे ओवर प्लेस एंड वी विल नॉट अलाउ इट। कोई भी हमारा स्थान नहीं ले सकता। हम किसी भी कीमत पर यह बर्दाश्त नहीं करेंगे। अब यह बात विजय ने जो कही है इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।
डीलिमिटेशन बिल परिसीमन वाला वह बिल और संविधान में संशोधन अब इसके लिए बहुमत चाहिए और सबसे ज्यादा निगाहें कहां है भाई सब जगह तोड़फोड़ हो गई ममता बनर्जी की पार्टी तोड़ दी उद्धव ठाकरे की पार्टी तोड़ दी अब बची कौन सी डीएमके डीएमके के पास कितने सांसद हैं 22 सांसद और आंकड़ों का खेल क्या है उस पर हम आएंगे लेकिन आगे देखिए विजय ने कहा कि आई एम आल्सो अ हियरिंग दैट रिलेशन विल विल बी बोट बैक नो मैटर हु ब्रिंग इट तमिलनाडु विल नॉट एक्सेप्ट इट। यानी विजय यह कह रहे हैं कि मेरे सुनने में आ रहा है कि एक बार फिर से परिसीमन बिल को लाया जा रहा है और उसी को लेकर विजय कह रहे हैं कि किसी भी हाल में हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। अब कैसे एक तीर से दो निशाने साधे हैं विजय ने। अब उसे समझिए क्योंकि पहली बार विजय अपना स्टैंड क्लियर कर रहे थे। और यहां सीधे तौर पर यह संकेत साफ था कि वो मोदी अमित शाह को ललकार रहे थे मन से। और दूसरा डीएमके। डीएमके अगर पाला बदलता है तो उसके लिए राजनीतिक भविष्य में यह एक तरह से बहुत बड़ी सियासी चोट साबित हो जाएगी। क्योंकि डीएमके कांग्रेस से गठबंधन टूट चुका है और खबरें ये आ रही है कि राहुल गांधी ने एक बार फिर से डीएमके को मनाने के लिए अपने सबसे मजबूत सिपाही डीके शिव कुमार को रण में उतार दिया। डीके शिवकुमार यहां से कोशिश कर रहे हैं और दूसरी तरफ एमके स्टैलिन की पार्टी हार की सुगबुगाहट से छटपटा रही है।
स्टिन यानी डीएमके हो सकता है कि यह कह दे कि भैया हम इशू बेस्ड केंद्र सरकार को समर्थन कर रहे हैं। या फिर डीएमके सदन से ही नदारत हो जाए। गैर हाजिर हो जाए तब भी अमित शाह और बीजेपी और मोदी को इसका फायदा मिल जाएगा। इसीलिए विजय का यह बयान बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है दोस्तों। क्योंकि सदन में क्या हुआ था? डीएमके ने सबसे ज्यादा विरोध किया। काले कपड़े डाले।
यही स्टैन ने कहा था कि किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं। और यहां तक कि अमित शाह ने कहा था कि हर राज्य में 50% सीटें बढ़ेंगी। कोई दिक्कत नहीं है। मैं लिख के दे देता हूं। लेकिन यहां पर अमित शाह ने जो बात कही थी उसको लेकर भी विरोध शुरू हुआ था। और अमित शाह ने सदन के भीतर यह कहा था कि मैं लिख के दे देता हूं कि 50% सीटें हर राज्य में बढ़ेंगी। तमिलनाडु में भी बढ़ेंगी। उत्तर प्रदेश में भी बढ़ेंगी। उत्तर प्रदेश में लेकिन यह बड़ी बात है। समझिएगा। उत्तर प्रदेश में 80 सीटें हैं। 80 सीटें और फिर 50सदी और बढ़ेंगी। यह जिक्र किया गया कि भैया सीटें हर राज्य में बढ़ेंगी।
आप टेंशन मत लीजिए। लेकिन अब यहां पर तमिलनाडु का जो हित है जो दक्षिण की सियासत में चाहे चंद्रबाबू नायडू हो वो भी परेशान है। और डी के शिवकुमार तो जिस तरह से सियासी खेल खेल रहे हैं। समझ रहे हैं आप? डी के शिव कुमार तो पहले ही जो है खुद चंद्रबाबू नायडू को मंच पर ला चुके हैं। डी के शिव कुमार के बारे में भी आपको बताएंगे। लेकिन किस तरह से ऑन एवरेज सीटें बढ़गी। 50% जिक्र किया जा रहा है। अब फर्क देखिए क्योंकि जनसंख्या का फर्क है। जो दलील है वह बहुत महत्वपूर्ण है और इसी को लेकर एमके स्टैलिन भी विरोध जता रहे थे। वो भी तब जब वो मुख्यमंत्री थे। अब मुख्यमंत्री नहीं है। स्टिन चुनाव हार गए तो क्या पाला बदल देंगे? यही बात तो विजय मंच से कह रहे हैं। यही बात कह रहे हैं कि अगर पाला बदला स्टिन ने तो फिर वो जनता के बीच जाकर क्या कहेंगे?
कहेंगे देख लीजिए। ये है इनकी असलियत। ये है स्टिन की असलियत। यह है डीएमके की असलियत। इसीलिए विजय का यह बयान ना सिर्फ मोदी अमित शाह को सियासी चोट पहुंचा रहा है बल्कि एमके स्टैलिन को दुविधा में ला चुका है। आगे कुआं पीछे खाई। अप्रैल के महीने में आप कह रहे हैं प्रस्ताव पास करके सदन के भीतर विधानसभा में स्टैन ने ही प्रस्ताव पार किया ना और यह पहला राज्य था जिन्होंने कहा था कि तमिलनाडु के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं होगा। कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं होगा। अप्रैल के महीने में आप बिल में आग लगाते हैं। बिल के विरोध में खड़े होते हैं। सदन में बिल पास करते हैं। प्रस्ताव पास करते हैं।
और अब जब समर्थन देने की बात आई तो मोदी अमित शाह के साथ हाथ मिला देते हैं। इसीलिए विजय का यह दाव सीधे तौर पर एक सियासी संदेश है। क्यों? क्योंकि अब समझिए विजय के पास कोई सांसद नहीं है। एक भी सांसद नहीं है क्योंकि यह पहली बार चुनाव लड़े। डीएमके के पास कितने हैं? डीएमके के पास 22 सांसद हैं। लोकसभा में। राज्यसभा में कितने हैं? 10 सांसद है। ऐसे में डीएमके के पास अच्छी खासी स्ट्रेंथ है सदन के भीतर। इसी लिहाज से इसी लिहाज से तो राहुल गांधी ने डी के शिव कुमार को कहा है कि किसी भी हाल में आप डीएमके को मनाइए और पश्चिम बंगाल में जिस तरह से तोड़फोड़ हुई ममता बनर्जी की पार्टी को तोड़ दिया।
किस कदर उद्धव ठाकरे की पार्टी को तोड़ दिया। अब आंकड़ों को जोड़िए। अभी भी दो तिहाई बहुमत नहीं है। दो तिहाई बहुमत से लगभग 41 सीटें पीछे हैं मोदी अमित शाह। इसीलिए यह 22 सांसद बहुत महत्वपूर्ण है। एनडीए के पास 319 का आंकड़ा पहुंच चुका है। ये तोड़फोड़ के बाद भी चाहे आप टीएमसी को जोड़ लें, उद्धव ठाकरे को जोड़ लें। कुल मिलाकर लबो लबाब यही है कि अभी भी 41 सांसद कम है। इस लिहाज से क्योंकि बीजेपी के अपने खुद के 240 हैं।
80 सहयोगियों के। अब बीजेपी को उम्मीद की किरण कहां से दिखाई दे रही है? दिखाई दे रही है इसी डीएमके से। इसी डीएमके से लेकिन रहा मेरोड़ा अब विजय बन चुके हैं। विजय खड़े होकर राह में अरोड़ा बन चुके हैं। और दूसरी तरफ डीके शिव कुमार सर के चाणक्य डीके शिव कुमार चुनौती बनकर क्योंकि डीएम को मनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। क्योंकि अब आपने देखा होगा कि हाल के दिनों में बीजेपी को नाको चने चबा दिया डीके शिव कुमार ने। कर्नाटक के सीएम जब से बने हैं बताइए एमएलसी के चुनाव में पहली बार देश में ऐसा हुआ 12 साल में कि बीजेपी के विधायकों ने क्रॉस वोट कर दिया और यही डीके शिव कुमार के राज्य में ऐसा हुआ और यहां पर दूसरी तरफ अब विजय खड़े हो गए। इसलिए मैंने कहा कि दक्षिण की सियासत में बहुत कुछ बदल रहा है और अगर यहां पर गलती से डीएमके ने समर्थन दे दिया तो विजय पूरे देश में घूमघूम कर बताएंगे कि ये देखिए ये है तमिलनाडु में असली हकीकत कि एमके स्टैलिन कहते कुछ हैं और करते कुछ। इसीलिए विजय ने दोनों तरफ से फंसा दिया एमके स्टैलिन को भी और मोदी अमित शाह को भी। अब आने वाले वक्त में बिल आएगा। बिल आएगा तो स्टैलिन क्या करेंगे?
डीएमके क्या करेगी? क्या वापस एक बार फिर से कांग्रेस के साथ नजदीकियां बढ़गी इंडिया गठबंधन के साथ और विजय जिस तरह से खड़े हो गए हैं और राजनीतिक लिहाज से इसका बहुत बड़ा संकेत है। पहला दांव पहली बार खेला है केंद्र की मोदी सरकार को ललकारते हुए डायरेक्ट आंखें दिखाई है विजय ने कि बिल पास नहीं होने दूंगा। तमिलनाडु के हितों के साथ टकराव नहीं होने दूंगा। और अगर यह बिल पास होता है तो डीएमके के बिना होगा नहीं।
इसीलिए एमके स्टिन की पार्टी को भी डीएमके ने विजय ने फंसा दिया। खैर आपकी क्या राय है इस पूरे मुद्दे को लेकर जिस तरह से विजय सामने आए और वही कैंसिल वाला क्रॉस वाला मोदी अमित शाह के मुंह पर कि भैया ना नो नेवर।