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नाना पाटेकर की मौ;त का खुला रहस्य, मेडिकल रिपोर्ट में हुआ दर्दनाक खुलासा,मचा तह;ल!का

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नमस्कार मैं आपके साथ विभा उपाध्याय और आप देख रहे हैं N 18 बिहार झारखंड का डिजिटल प्लेटफार्म। फिल्मी पर्दे पर अपनी दमदार आवाज बेहतरीन अदाकारी और अलग अंदाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 साल की उम्र में उनके निधन की खबर ने फिल्मी इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों को गमगीन कर दिया। नाना पाटेकर सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे बल्कि संघर्ष, मेहनत और सादगी की एक ऐसी मिसाल थी जिनकी जिंदगी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं थी। एक वक्त ऐसा भी था जब महज 13 साल की उम्र में वो फिल्मी पोस्टर पेंट करने का काम करते थे। इसके लिए उन्हें महीने में सिर्फ ₹35 ही मिलते थे। लेकिन अपनी मेहनत, हुनर और अभिनय के दम पर उन्होंने एक ऐसा मुकाम हासिल किया कि उनकी फीस करोड़ों रुपए तक पहुंच गई।

आज उनकी संपत्ति मुंबई के घर, पुणे के फार्म हाउस और ब्रांड एंडोर्समेंट की चर्चा की जाती है। लेकिन नाना पाटेकर की जिंदगी की सबसे खास बात सिर्फ उनकी कमाई नहीं थी। बल्कि करोड़ों लोग की दौलत होने के बावजूद उनका सादा रहन-सहन और जरूरतमंदों के प्रति उनका संवेदनशील रवैया था। नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। फिल्मी दुनिया में उन्होंने अपने अभिनय के दम पर एक अलग अपनी मुकाम बनाई, पहचान बनाई। लेकिन इस पहचान के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी छिपी हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक महज 13 साल की उम्र में नाना मुंबई के चूना भट्टी इलाके में फिल्मी पोस्टर्स पेंट करने का काम करते थे। वह रोजाना करीब 8 कि.मी. पैदल चलकर काम पर पहुंचते। इस मेहनत के बदले उन्हें सिर्फ ₹35 महीने मिलते थे। यह वो दौर था जब उनके लिए जिंदगी आसान नहीं थी, लेकिन मुश्किलों ने उनके हौसलों को कमजोर नहीं किया। धीरे-धीरे अभिनय की दुनिया में कदम रखा और अपने हुनर से दर्शकों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ दी। एक अलग जगह उन्होंने बना ली।

परिंदा, क्रांतिवीर, अग्निसाक्षी और अब तक छप्पन जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने उनकी अलग पहचान बनाई। गंभीर किरदार हो, खतरनाक की भूमिका जिसमें खलनायक जैसे भूमिकाओं का बखूबी निर्वहन हो या फिर भावनाओं से भरा कोई चरित्र। नाना पाटेकर हर किरदार में अपनी छाप छोड़ने के लिए जाने गए। अब बात उस संपत्ति की जिसकी चर्चा उनके निधन के बाद अब की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नाना पाटेकर की कुल नेटवर्थ करीब 50 से 80 करोड़ के बीच आकी गई। कुछ [नाक से की जाने वाली आवाज़] रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा ₹80 करोड़ भी बताया गया। हालांकि उनकी कुल संपत्ति का कोई आधिकारिक या फिर सार्वजनिक रूप से सत्यापित आंकड़ा नहीं है। रिपोर्ट्स यह कहती है कि नाना पाटेकर एक फिल्म के लिए करीब 2 से ₹ करोड़ तक चार्ज करते थे। फीस लेते थे। उनकी फीस फिल्म में उनकी भूमिका, प्रोडक्शंस और अन्य शर्तों के आधार पर अलग-अलग हो सकती थी। फिल्मों में अभिनय के अलावा निर्देशन, लेखन और विज्ञापनों से भी उनकी कमाई होती थी। यानी जिस अभिनय ने उनके करियर की शुरुआत महीने के महज ₹35 से की उसने अपनी मेहनत के दम पर करोड़ों की संपत्ति बनाई। नाना पाटेकर की संपत्ति की बात हो और उनके घरों का जिक्र ना हो।

भला यह कैसे हो सकता है? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई के अंधेरी इलाके में उनका करीब 750 वर्ग फुट का एक बेडरूम वाला फ्लैट था। बताया यह भी जाता है कि इस घर को उन्होंने कई साल पहले करीब 1.1 लाख में खरीदा था। आज उसकी अनुमानित कीमत करीब करीब ₹3 करोड़ के आसपास बताई जाती है। लेकिन नाना पाटेकर की संपत्ति सिर्फ मुंबई के इस फ्लैट तक सीमित नहीं थी। पुणे के पास यहां पर खड़क वासला की बात करें तो उनका करीब 27 एकड़ में फैला हुआ फार्म हाउस भी चर्चा में रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां खेती के लिए जमीन के साथ रहने की व्यवस्था भी थी। नाना पाटेकर का खेती से गहरा एक तरीके से जुड़ाव और लगाव कह लीजिए था। वो गेहूं और धान की जैसी फसलों की खेती करने की बात अपने कुछ इंटरव्यू में भी कर चुके हैं और उनके लिए खेती सिर्फ जमीन से जुड़ा काम नहीं था बल्कि प्रकृति और आम जिंदगी से जुड़े रहने का एक तरीका भी था। इसके अलावा पुणे के लॉ कॉलेज रोड, गोवा और महाराष्ट्र के मरोड़ में भी उनकी संपत्तियों का जिक्र विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में मिलता है। हालांकि इन संपत्तियों की मौजूदा कीमत और मालिकाना विवरण को आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि फिल्मों के अलावा नाना पाटेकर विज्ञापन की दुनिया में भी आपने उन्हें देखा होगा। वहां भी उनकी चर्चा है। ब्रांड्स के साथ उनका कोलैबोरेशन रहा। उनके अभियानों के साथ वो जुड़े हुए नजर आए और साल 2005 में वो माइको मॉनसनफो की बात करें उसके बीटी कॉटन उत्पादों के प्रचार से भी जुड़े थे। इसके बाद एक के बाद एक कई सारे विज्ञापंस में भी आपने उन्हें देखा होगा।

2016 के साल की अगर मैं बात करूं तो 2016 में नम्रता ग्रुप के इकोसिटी 2.0 प्रोजेक्ट्स और 2021 में टाटा स्काई के महाराष्ट्र केंद्रित अभियान में भी उनका नाम जुड़ा हुआ नजर आया। कुछ रिपोर्ट्स में उनके विज्ञापनों की फीस ₹80 लाख से लेकर ₹1 करोड़ या फिर उससे अधिक तक बताई गई। हालांकि किसी भी कलाकार की विज्ञापन फीस हर अभियान में एक जैसी नहीं होती है। इसलिए इन आंकड़ों को मीडिया रिपोर्ट्स के बताए गए अनुमान के तौर पर ही सिर्फ देखा जाना चाहिए। नाना पाटेकर की जिंदगी का एक ऐसा पहलू भी था जो उन्हें बाकी सितारों से अलग बनाता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक बार करीब ₹1.5 करोड़ की लग्जरी कार खरीदने का विचार छोड़कर उन्होंने किसानों और जरूरतमंद परिवारों की मदद को अपनी प्राथमिकता बताया। उनकी दिलचस्पी महंगी गाड़ियों और दिखावे से ज्यादा लोगों की समस्याओं में नजर आती थी। उनके कार कक्शंस में Mahindra, Scorpio, Mahindra, जीप जैसी गाड़ियों का जिक्र तो मिलता है। उनकी जिंदगी से जुड़ी हुई कहानियां यह कहती हैं कि अपनी कमाई और शोहरत के बावजूद जमीन से जुड़े रहना वह पसंद करते थे।

साल 2015 में नाना पाटेकर ने अभिनेता मकरंद अनास पुरे के साथ मिलकर नाम फाउंडेशंस की शुरुआत की। इस संस्था की बात करें तो इसका मकसद था महाराष्ट्र में सूखे से प्रभावित किसानों और उनके परिवार की मदद करना। फाउंडेशन के जरिए ही आर्थिक सहायता, जल संरक्षण, गांव के विकास, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में काम किया। किसानों की समस्याओं को लेकर नाना पाटेकर की सक्रियता उनके सामाजिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया। बॉलीवुड में जहां सितारों की जिंदगी अक्सर महंगे घर, महंगी गाड़ियां, आलीशान पार्टियों से जोड़ी जाती हैं, वहीं नाना पाटेकर की छवि इससे बिल्कुल अलग रही। उनके बारे में मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जाता रहा कि वह मुंबई के अपने साधारण फ्लैट में रहना ही पसंद करते थे। उन्हें खेती करना, अपने हाथ से खाना बनाना और आम लोगों के बीच रहना ज्यादा अच्छा लगता था। उनकी जिंदगी का यह विरोधाभास दिलचस्प है। एक तरफ फिल्मों से करोड़ों रुपए कमाने वाला अभिनेता, दूसरी तरफ सादगी से रहने और जरूरतमंद लोगों की मदद करने वाला इंसान।

उनकी पहचान सिर्फ उनके संवादों या दमदार अभिनय तक सीमित नहीं है। पर्दे के बाहर भी उनके काम और विचारों ने उन्हें अपनी एक अलग पहचान दिलाई। नाना पाटेकर की जिंदगी हमें बताती है कि सफलता का मतलब सिर्फ पैसा या शोहरत या बड़ी संपत्ति बना लेना नहीं है। असली पहचान इस बात से भी बनती है कि इंसान अपने संघर्ष को कैसे याद रखता है। अपनी कामयाबी का इस्तेमाल दूसरों की जिंदगी को बेहतर बनाने में कैसे करता है। 13 साल की उम्र में ₹35 महीने से शुरुआत करने वाले नाना पाटेकर ने अभिनय की दुनिया में अपना एक अलग मुकाम बनाया। उनकी संपत्ति के आंकड़े भले ही रिपोर्ट्स के अनुमान हो लेकिन उनका अभिनय, उनकी सादगी, किसानों के लिए किए गए उनके काम, उनकी विरासत हैं और वह नाना पाटेकर को महान बनाते हैं। नाना पाटेकर को दूसरे तमाम लोगों से अलग करते हैं। जी

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