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भारत की वो जमीन जिसे पाकिस्तान ने चीन को बेच दी!

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जब भी भारत, पाकिस्तान और चीन के सीमा विवाद की बात होती है तो हमारे दिमाग में कश्मीर, लद्दाख या गलवान घाटी का नाम आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का एक ऐसा हिस्सा भी है जिसे पाकिस्तान ने पहले जबरन अपने कब्जे में ले लिया और फिर चुपके से चीन के हाथों से बेच दिया। हम बात कर रहे हैं शख्स गाम घाटी की। 5180 कि.मी. का यह इलाका जो आकार में हमारे गोवा राज्य से भी बड़ा है। भारत का अभिन्न अंग था। लेकिन साल 1948 और 1963 में पाकिस्तान और चीन ने मिलकर एक ऐसा खेल खेला जिसने भारत की पीठ में छुरा गोपने का काम किया। आखिर क्या है शक्स गाम वैली का इतिहास पाकिस्तान ने इसे चीन को क्यों सौंपा? और आज 2026 में वहां क्या चल रहा है?

आइए इस पूरी कहानी को आसान भाषा में समझते हैं। नमस्कार, मैं हूं आदित्य। भारत फैक्ट्स के आज के एपिसोड में आपका स्वागत है। कहानी की शुरुआत होती है साल 1947 से। शख्सगाम घाटी का यह पूरा इलाका कश्मीर के महाराजा हरि के राज के अधीन था। यह जमीन भारत का भी हिस्सा थी। साथ ही हमारे लिए रणनीतिक रूप से बेहद खास थी क्योंकि यह काराकोरम पर्वत श्रृंखला के उत्तर में मौजूद है और यहां से दुनिया की कुछ सबसे ऊंची चोटियां हैं। सनातन काल से ही यह इलाका भारत की शान हुआ करता है। अक्टूबर 1947 में जब पाकिस्तानी कबलाइयों और सेना ने कश्मीर पर अवैध हमला किया तो महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय पत्र पर दस्तखत किए। कानूनी और संवैधानिक रूप से पूरा जम्मू कश्मीर जिसमें गिलगित बाल्तिस्तान और यह शख्सगाम घाटी भी शामिल थी। भारत का हिस्सा बन गया। लेकिन पाकिस्तान ने गिल्गित बाल्तिस्तान के साथ-साथ शख्सगाम वैली पर भी अवैध रूप से कब्जा कर लिया जिसे आज हम पीओके यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहते हैं।

[संगीत] अब कहानी में एंट्री होती है चीन की। साल 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ। भारत उस वक्त एक मुश्किल दौर से गुजर रहा था। पाकिस्तान ने भारत की इस कमजोरी का फायदा उठाने की सोची। पाकिस्तान को लगा कि अगर वो चीन से हाथ मिला लेगा तो भारत पर दबाव बढ़ जाएगा। युद्ध के ठीक अगले साल यानी 2 मार्च 1963 को पाकिस्तान और चीन के बीच एक सीमा समझौता हुआ। इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने बिना किसी कानूनी हक के भारत की 5180 कि.मी. की शख्स गाम घाटी चीन की झोली में डाल दी। इस समझौते के पीछे पाकिस्तान की एक चाल थी। पाकिस्तान ने दुनिया को यह दिखाया कि वो चीन के साथ अपने सीमा विवाद को सुलझा रहा है। लेकिन असल में वो भारत की जमीन का सौदा कर रहा था।

बदले में चीन ने पीओके पर पाकिस्तान के दावे को एक तरह से मान्यता दे दी। भारत ने इस अवैध समझौते का कड़ा विरोध किया और इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया क्योंकि पाकिस्तान के पास भारत की जमीन किसी दूसरे देश को देने का कोई हक था ही नहीं। [संगीत] अब सवाल यह उठता है कि चीन को इस बंजर और बर्फीले इलाके में इतनी दिलचस्पी क्यों थी और भारत के लिए यह इतनी बड़ी चिंता की बात क्यों है? इसके पीछे का कारण है ज्योग्राफी। अगर आप नक्शे को ध्यान से देखें तो शक्सदाम घाटी सीधे सियाचीन ग्लेशियर के उत्तर में मौजूद है। सियाचीन पर भारत का कब्जा है। इस घाटी में चीन के पास जाने से चीन और पाकिस्तान की सीमाएं सीधे तौर पर जुड़ गई। आज जो चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी सीपक बन रहा है और काराकोरम हैवी निकाला जा रहा है उसमें इस इलाके की बड़ी भूमिका है। आसान शब्दों में कहें तो पाकिस्तान

ने शक्सगाम घाटी चीन को देकर भारत के सिर पर चीन पाकिस्तान का एक साझा मिलिट्री प्रेशर खड़ा कर दिया। [संगीत] तो साथियों अब बात करते हैं कि आज के समय में वहां क्या चल रहा है। पिछले कुछ सालों में आई सेटेलाइट तस्वीरों ने दुनिया को चौंका दिया है। चीन इस शांत और बर्फीली घाटी में चुपचाप भारी निर्माण कार्य कर रहा है। चीन ने शक्सगाम घाटी में पक्की सड़कें बना ली है जो काराकोरम हाईवे को सीधे इस इलाके से जोड़ती हैं। इतना ही नहीं वहां चीनी सेना की मिलिट्री पोस्ट और बंकर भी दिख गए हैं। चीन इस दुर्गम इलाके को पूरी तरह से एक्टिव कर रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर वो बहुत कम समय में भारतीय सीमाओं के करीब भारी सेना और हथियार तैनात कर सके। भारत सरकार इन सभी गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए है और लद्दाख सेक्टर में अपनी तरफ भी इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत कर रही है। साथियों आपको क्या लगता है इस इलाके में चीन की बढ़ती दादागिरी का भारत को कैसे जवाब देना चाहिए? अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। बने रहिए india.com के साथ। शुक्रिया।

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