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CJP प्रोटेस्ट में गए छात्र पर कानूनी कार्रवाई,मिला 5 लाख का नोटिस,वजह जानकर रो पड़ेंगे।

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दिल्ली के जंतरमंतर प्रोटेस्ट में शामिल होने की वजह से एक स्टूडेंट पर 5 लाख का जुर्माना लगा है। ग्रेटर नोएडा की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को एग्जीक्यूटिव मैजिस्ट्रेट की ओर से एक नोटिस मिला है जिसमें शांति भंग करने का आरोप है।

अक्षत त्रिपाठी की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं।

अक्षत को 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के थ्री ने एक नोटिस भेजा। यह नोटिस भारतीय यानी की धारा के तहत जारी किया गया। यह कार्यवाही इकोक वन थाने के एक सब इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि जंतरमंतर पर हुए सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान अक्षत ने छात्रों को सरकार के खिलाफ करने का काम किया।

हालांकि अक्षत ने इन आरोपों से इंकार किया है। अक्षत का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शन में पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था। अक्षत का तर्क है कि सीजेपी प्रोटेस्ट के समय उनकी यूनिवर्सिटी करीब 3 महीने से बंद थी।

ऐसे में क्लास नहीं हो रही थी तो वह कॉलेज नहीं जाते थे। फिर छात्रों को भड़काने का सवाल कहां से आता है? अक्षत ने उल्टा दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाए हैं। अक्षत का दावा है कि 20 जुलाई को सीजेपी के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस के एक्शन में वो हो गए थे।

इसी मामले में मुझे न्यायपालिका न्यायालय कार्यपालिका मजिस्ट्रेट तृतीय गिटर नोएडा कमिश्नरेट गौतम बुध नगर की तरफ से एक नोटिस मिला। जिसमें मुझे ₹ लाख की निजी वन पत्र देने को कहा गया है।

साथियों मैं एक छात्र हूं। मेरी कोई व्यक्तिगत आय नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कितनी व्यवहारिक है। यह एक बड़ा सवाल है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि 20 जुलाई को जंतरमंतर पर हुए पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन में शामिल हुआ। वहां सकरा और विश्वविद्यालय के छात्रों को सरकार के विरुद्ध । लेकिन मेरा सवाल यह है कि सरकार के खिलाफ आखिर होता क्या है?

क्या सरकार की किसी नीति की आलोचना करना भड़काना है? क्या सरकार से सवाल पूछना है? क्या पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना है? क्या मुझ पर इतना गंभीर आरोप लगाया गया है? तो इसका आधार क्या है?

अक्षत को मिली नोटिस पर ने आपत्ति जताई है। 7 सितंबर को जारी प्रेस रिलीज में ने यूपी सरकार और पुलिस पर असहमति की आवाज दबाने के लिए कानून का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। ने दावा किया है कि जंतरमंतर पर प्रदर्शनकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद अक्षयत त्रिपाठी के खिलाफ एक्शन लिया गया है।

संगठन ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को नजरअंदाज कर रही है। साथियों सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मुझे जंतरमंतर पर हुए के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है। आखिर क्यों? अब यह समझते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया है जिसका हवाला की प्रेस रिलीज में दिया गया है। दरअसल 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से जुड़ी सभी को रद्द करने का आदेश दिया था।

यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर लागू होगा। कोर्ट ने साफ किया कि जिन प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड है उन पर केस चलता रहेगा।

इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को मार्च को वापस ले लिया है। यह एफआईआर 20 से 25 जुलाई के बीच जंतरमंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के लिए संविधान के अनुच्छेद में दी गई शक्तियों का इस्तेमाल किया। हालांकि कोर्ट ने साफ कहा कि रद्द करने का फैसला सिर्फ इसी मामले के खास तथ्यों और हालात को देखकर लिया गया है।

इसलिए इसे दूसरे मामलों के लिए उदाहरण और बाध्यकारी फैसला नहीं माना जाएगा। अब इसी आदेश को आधार बनाकर एसएफआई ने अक्षत त्रिपाठी को मिले 5 लाख के नोटिस पर सवाल उठाए हैं।

हालांकि जब हम यह वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं तब तक इस पूरे मामले पर सीजेपी की ओर से पूरे मुद्दे पर कोई बयान नहीं आया है। यह बात इसलिए कोर्ट की जा रही है क्योंकि अक्षत को जो नोटिस मिला है वह सीजेपी प्रोटेस्ट के समय उनके एक्शन के रिगार्डिंग मिला है और इस पर अब तक सीजेपी का बयान नहीं आया है। इसलिए सवाल उठ रहे हैं।

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