मैं तुमको क्या कहूं देवाना मैं तुमको क्या कहूं एक कमाल की अदाकारा और अपने समय में इंडस्ट्री की सबसे हॉट सिंबल मैं हल हूं मैं जवान हूं ह दिल का मैं जिस दौर में प्रौढ और उम्रदराज महिलाएं हीरोइन बनकर अपने जलवे भी खेल रही थी उस दौर में वोह ताजी हवा का झोका बनकर आई तुम्हारे प्यार के आगे जरूरत क्या बहारों की तुम्हारी बाहो में रह दर्शकों को ना सिर्फ उनका बेबाक और बिंदास अंदाज पसंद आता था बल्कि वह अपनी रोमांटिक अदाओं से युवा दिलों की धड़कन बन गई थी रनी हूं मैं मेरी सूरत में ना जाना अपनी जेब को बचाना लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस अदाकारा ने अपने फिल्मी करियर में अपने ससुर और जेठ के साथ जमकर ऑन स्क्रीन रोमांस किया था और बाद में उसी परिवार की बहू बन गई जीना प्रम बना जीवन की यही क्या आप सोच सकते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री के सबसे प्रतिष्ठित खानदान की बहू बनने वाली इस अदाकारा की मां और नानी दिल्ली और लखनऊ की मशहूर तवाफे थी की किताब शौक से पढ़ और क्या आप यकीन करेंगे कि जिस हीरोइन की फिल्मों में एंट्री एक बाल कलाकार के तौर पर हुई थी उसने महज 21 साल में अपना चढ़ता हुआ करियर खत्म कर लिया हम बार की बा गया कौन थी यह अदाकारा और क्यों उन्हें बार-बार बदलना पड़ा अपना नाम क्या थी उनकी मजबूरी कि एक्टर पति की बेवफाई को वन नाइट स्टैंड मानकर इग्नोर करती रही और क्यों उन्होंने अपने परिवार की रीत तोड़कर 25 साल बाद फिल्मों में ली दोबारा एंट्री जानेंगे और भी बहुत कुछ बस बने रहिए हमारे साथ नमस्कार दोस्तों मैं हूं धीरज और आप देख रहे हैं ड्रामा सीरीज भारत आज के इस वीडियो में हम बात कर रहे हैं जानी मानी अभिनेत्री नीतू सिंह की चोरनी हूं मैं चोरनी हूं
मैं मेरी सूरत से ना जाना जी हां 60 और 70 के दशक के एक छोटे से अंतराल में रुपहले पर्दे पर आई वही मशहूर अदाकारा जिसकी खूबसूरती और अदाकारी की चर्चा उनके इंडस्ट्री से चले जाने के बाद भी वर्षों तक होती रही तुमसे दूर रहके हमने नीतू सिंह उर्फ हरनीत कौर का जन्म दिल्ली में 8 जुलाई 1958 को एक सिख परिवार में हुआ था पिता का नाम था दर्शन सिंह जबकि मां का नाम राजी सिंह था राजी को फिल्मों से बड़ा लगाव था और संभवतः इसी कारण वह अपने पति और बच्ची को दिल्ली से बंबई ले गई देखने में तो यह कहानी बिल्कुल सामान्य लगती है लेकिन वास्तव में इसमें कई उतार चढ़ाव हैं राजी सिंह का अपना एक इतिहास है जो नीतू सिंह की जिंदगी में एक अहम स्थान रखता है दरअसल यह कहानी शुरू होती है आज से तकरीबन 100 साल पहले जब पंजाब के लाहौर के इलाके में एक छोटे से गांव में रहने वाली एक छोटी सी बच्ची को उसके सगे चाचा दिल्ली में एक कोठे पर बेच गए बेहद खूबसूरत इस ब का नाम था हरजीत कौर दरअसल हरजीत के माता-पिता का एक बीमारी में निधन हो गया था और उसके चाचा चाची ने पैसों और प्रॉपर्टी के लालच में उसे दिल्ली लाकर बेच डाला दोस्तों जैसा कि आप सब जानते हैं कोठे पर मासूम बच्चियों के साथ क्या सुलूक किया जाता है हरजीत से भी वही काम करवाया गया और हर रोज उसे बाजार का सामान बनाकर ग्राहकों के आगे परोसा जाने लगा गया लेकिन हरजीत को अपनी असलियत पता थी और वह इस नर्क से निकलकर वापस जाना चाहती थी जब वह करीब 18 साल की हुई तब एक दिन उसे बाहर निकलने का मौका मिल गया मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरजीत छिप छिपाकर किसी तरह वहां से निकल तो गई लेकिन उसे किसी गाड़ी की तलाश थी जो वहां से दूर पहुंचा दे इतने में एक बड़ी सी गाड़ी आकर उसके पास रुकी और उसे बैठने की इजाजत मिल गई गाड़ी में बैठा शख्स लखनऊ का एक मशहूर नवाब अमीनुल्लाह शेख था
नवाब हालांकि शादीशुदा और बाल बच्चे दार था लेकिन उसे खूब सूरत हरजीत से प्यार हो गया उसकी कई हवेलियां थी जिनमें से एक में उसने हरजीत को भी रख लिया दोनों पति-पत्नी की तरह करीब 4 साल तक रहे लेकिन अचानक एक दिन नवाब अमीनुल्लाह की मौत हो गई फिर तो नवाब के बीवी बच्चों ने हरजीत को हवेली से निकाल बाहर किया अब एक बार फिर से वह सड़क पर आ गई थी और दरदर की ठोकरे खाने को मजबूर हो गई नवाब का एक दोस्त जमाल खां हरजीत को सहारा देने के नाम पर अपने साथ ले गया लेकिन उसने भी उसे कोठे पर बेज दिया वक्त ने हरजीत को एक बार फिर उसी जगह पर ला खड़ा किया था जहां से वह चार साल पहले निकली थी बस शहर बदल गया था हरजीत बला की खूबसूरत थी और लखनऊ में कोठे पर उसके ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी यहां भी दिन रात बिकते हुए उसकी जिंदगी बीतने लगी लेकिन कोठे पर ही रहने वाले फतेह सिंह नाम के एक दलाल से उसे प्यार हो गया दोनों ने कोठे की मालकिन से शादी की इजाजत मांगी तो उसने शर्त र दी जिसके मुताबिक हरजीत को अपना धंधा बंद नहीं करना था बहरहाल कुछ सालों बाद इन दोनों की बेटी हुई जिसका नाम रखा गया राजी सिंह कहते हैं राजी बड़ी हुई तो उसे भी कोटे के धंधे में उतार दिया गया 14 साल की उम्र से ही उससे भी वही काम कराया जाने लगा गया जो अब तक उसकी मा करती आई थी लेकिन राजी एक महत्वाकांक्षी लड़की थी वह फिल्मों में काम करना चाहती थी लेकिन जब उसने यह बात अपने मां-बाप को बताई तो ना सिर्फ साफ मनाही ही हो गई बल्कि उसकी खूब पिटाई भी की गई वक्त बीता और एक दिन राजी ने भी वही किया जो उसकी मां ने किया था यानी वोह कोठे से भाग गई लेकिन यहां कहानी में ट्विस्ट यह था कि जहां हरजीत दिल्ली से लखनऊ गई वहीं उनकी बेटी लखनऊ से दिल्ली जा पहुंची राजी ने वहां एक मिल में काम करना शुरू कर दिया वहीं उसकी मुलाकात वहां के सुपरवाइजर दर्शन सिंह से हुई और दोनों ने शादी कर ली एक साल बाद इन दोनों के घर एक बच्ची का जन्म हुआ जिसका नाम रखा गया हरनीत कौर जो कि बेहद खूबसूरत थी समय गुजरता रहा और लगभग 5 साल बाद राजी सिंह और दर्शन सिंह दिल्ली से मुंबई शिफ्ट हो गए यहां उन्होंने अपनी बच्ची का एडमिशन हिल ग्रेज हाई स्कूल में करा दिया मुंबई आकर राजी सिंह ने हीरोइन बनने की चाहत में स्टूडियोज और डायरेक्टर्स के दफ्तरों के खूब चक्कर लगाए लेकिन उसे कहीं भी काम नहीं मिला अब तक वो समझ चुकी थी कि हीरोइन बन्ने की उसकी चाहत अब पूरी नहीं होने वाली किसी ने सुझाया फिल्म इंडस्ट्री में सुंदर दिखने वाले बाल कलाकारों की बहुत डिमांड है तुम अपनी बेटी को लेकर ट्राई कर सकती हो राजी को भी यह बात समझ में आ गई और अब वह खुद की जगह अपनी बेटी हरनीत को फिल्मों में लाने की कोशिश में जुट गई जल्दी उनको अपने इस मकसद में सफलता भी मिल गई और टी प्रकाश राव के निर्देशन में बन रही फिल्म सूरज के लिए हरनीत को बतौर चाइल्ड एक्ट्रेस सिलेक्ट कर लिया गया बाबा वो देख भया देखो बेटे आज से वो प्रताप नहीं सूरज है सूरज प्रताप भया मैं कहता हूं वो सूरज है बो फिल्मी दुनिया में 8 साल की हरनीत को बेबी सोनिया के नाम से इंट्रोड्यूस किया गया साल 1966 में आई फिल्म सूरज सुपरहिट रही इसके बाद तो बेबी सोनिया के पास फिल्मों की लाइन लग गई इसी साल उसकी एक और फिल्म 10 लाख रिलीज हुई द द पैसे रख दो आज हमारे हाथ में गरीबों की तो वही साल 1968 में दो दनी चर और दो कलियां भी सुपरहिट साबित हुई मुर्गा मुर्गी प्यार से देखी नन्हा चू खे फिल्म दो कलिया में बेबी सोनिया ने दोहरा किरदार निभाया और दर्शकों के बीच खासी लोकप्रिय हुई बच्चे मन के सच्चे सारे जग की आंख के तारे लेकिन उन दिनों चाइल्ड एक्टर्स बड़े होकर फिल्मों में कामयाब नहीं हो पाते थे अपने दौर की मशहूर बाल कलाकार डेजी इरानी इसकी एक बड़ी मिसाल थी राजी सिंह को भी यही डर सताने लगा कि कहीं उनकी बेटी का भी फिल्मी करियर बड़ी होने पर खत्म ना हो जाए यही सब सोचकर राजी सिंह अपनी बेटी को फिल्मी दुनिया से दूर पंजाब लेकर चली गई और कुछ साल बिना किसी फिल्म में काम करके वहीं रही कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दर्शन सिंह की मृत्यु तभी हो गई थी जब नीतू स्कूल में पढ़ती थी खैर 3 साल बाद 1973 में राजी सिंह अपनी बेटी के साथ एक बार फिर मायानगरी मुंबई आ पहुंची और अपनी बेटी को नया नाम दिया नीतू सिंह नीतू सिंह अब एक खूबसूरत और हसीन युवती बन गई थी और लोग बाल कलाकार बेबी सोनिया को भूल चुके थे लिहाजा फिल्म दुनिया में नीतू को काम मिलने में देर ना लगी फिल्म डायरेक्टर के शंकर ने फिल्म रिक्शावाला के लिए रणवीर कपूर के अपोजिट इन्हे साइन कर लिया मैंने कहा छोड़ दे दुपट्टा मोड़ दे बेशरम हालाकि साल 1973 में रिलीज हुई यह फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी दुनिया सेया की दुनिया में इस पहली नाका से राजी सिंह डर गई कि कहीं अगर उनकी बेटी
पर फ्लॉप हीरोइन का ठप्पा लग गया तो वह फिल्मी दुनिया से बाहर कर दी जाएगी इसलिए उन्होंने एक नया तरीका अपनाया उन्होंने अपनी बेटी नीतू सिंह का एक हॉट फोटोशूट करवाया और पत्र-पत्रिकाओं को बांट दिया जब यह बोल्ड फोटोज उस दौर की चर्चित मैगजीन में छपे तो सिने इंडस्ट्री में तहलका मच गया अब हर फिल्म निर्माता नीतू सिंह को अपनी फिल्म में लेना चाहता था लेकिन कहा जाता है कि नीतू सिंह उन्हीं फिल्मों में काम करती थी जिसे उनकी मां फाइनल करती थी मैं हसीन हूं मैं जवान हूं हर दिल का साल 1973 में ही नीतू सिंह की एक और फिल्म यादों की बारात रिलीज हुई यादों की बारात निकली है आज दिल के द्वारे दिल के द्वा निर्माता निर्देशक नासिर हुसैन की यह मल्टी सरर फिल्म सुपरहिट साबित हुई और नीतू सिंह का करियर चल निकला लेकर हम देवाना दिल फिरते हैं मंदर साल 1974 में नीतू सिंह ने शतरंज के मोहरे आशियाना जहरीला इंसान और हवस जैसी चार सफल फिल्मों में अभिनय किया तेरी गलियों में ना रखेंगे कदम साल 1975 नीतू सिंह के लिए बहुत लकी साबित हुआ और इस सालन की पांच फिल्में रिलीज हुई जिनमें से तीन ने धूम मचा [संगीत] दी मेरे [संगीत] दिलने खेल खेल में रफू चक्कर और दीवार ने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए कह दू तुम्ह क्या चुप रहू दिल में मेरे आज खेल खेल में वो फिल्म थी जिसमें उन्होंने पहली बार ऋषि कपूर के साथ काम किया था और कहते हैं यहीं से इ दोनों की प्रेम कहानी की शुरुआत हुई थी हमने तुमको देखा तुमने हमको देख 1975 में ही ऋषि कपूर के साथ आई इनकी दूसरी फिल्म रफू चक्कर भी सुपरहिट हो गई पे दिल अगर आ जाए तो क्या होता है वही होता है इस फिल्म में दोनों की जोड़ी को लोगों ने खूब सराहा इसी के साथ दर्शकों के बीच यह जोड़ी उस दौर की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में से गिनी जाने लगी गई प्यार कर लिया तो क्या प्यार है पता नहीं रीरी 1975 में आई इनकी तीसरी सुपरहिट फिल्म थी दीवार जिसमें वह शशि कपूर के अपोजिट नजर आई है मैंने तुझे मा तुझे पाया है तूने मुझे माधा मुझे यश चोपड़ा की यह फिल्म सुपर डुपर हिट साबित हुई लगातार आई हिट फिल्मों की बदौलत नीत सिंह की गिनती उस समय की टॉप एक्ट्रेसेस में होने लगी थी इसके बाद साल 1976 में नीतू सिंह की पांच फिल्में शराफत छोड़ दी मैंने शंकर दादा कभी-कभी महा चोर और भला मानुष रिलीज हुई पहन [संगीत] पहले ऋषि कपूर के साथ आई इनकी फिल्म कभी-कभी की रिकॉर्ड तोड़ सफलता ने इन्ह बुलंदियों के शिखर पर पहुंचा दिया वाला कोई माने या ना माने बेमान है साल 1977 में इनकी ढोंगी अदालत धर्मवीर अमर अकबर एंथनी परवरिश प्रियतमा कसमें वादे सहित कुल 11 फिल्में रिलीज हुई कड़ी कड़ी जंजीर बने प्यार के रंग भरो फिल्म कसमें वादे व ढोंगी में वो रणधीर कपूर के अपोजिट नजर आई थी हाय रे हाय मेरा टा दिल धड़काए मेरा घटा फिल्म धर्मवीर में जहां इन्हें जितेंद्र के अपोजिट काम करने का मौका मिला था वहीं फिल्म अदालत और परवरिश में इन्होंने अमिताभ बच्चन के अपोजिट हीरोइन का रोल किया आए शौक से कहिए क ना मनमोहन देसाई की सुपरहिट मल्टीस्टारर फिल्म अमर अकबर एंथनी में नीतू सिंह ने अकबर ऋषि कपूर के अपोजिट डॉक्टर सलमा की भूमिका निभाई पर्दा है पदा पर्दा है पदा पदे के पीछे जैसा कि पहले भी जिक्र किया जा चुका है कि नीतू सिंह ने अपनी ऑन स्क्रीन जोड़ी शश कपूर और रणधीर कपूर के साथ बनाई जो बाद में उनके रिश्तेदार बने मैंने कहा छोड़ दे त दिल मोड़ दे शरम इसके बाद भी इनकी हिट फिल्मों का दौर जारी रहा जिसमें हीरालाल पन्नालाल द ग्रेट गमलर आतिश काला पत्थर जानी दुश्मन और जहरीले जैसी सफल फिल्में शामिल रहीम आज की बनार हुए तक जागी जवानी आगे बढ़ने से पहले आपको यह बताते चलें कि बेटी का करियर परवान चढ़ाने
के बाद मां राजी सिंह ने भी फिल्म इंडस्ट्री में थोड़ा बहुत हाथ आजमाया और 1975 में आए फिल्म रानी और लाल परी में जहां सिंड्रेला की मां का किरदार अदा किया तो फिल्म कभी-कभी दूसरा आदमी और द ग्रेट गमलर के लिए कॉस्ट्यूम भी डिजाइन किया चलिए अब बात करते हैं कि कैसे शबाब पर चल रहे अपने करियर को नीतू सिंह ने छोड़ दिया और क्यों उन्होंने ऐसा फैसला लिया जिससे उनकी मां बेहद परेशान हो गई दरअसल इसके पीछे था नीतू सिंह का प्यार जो वह उस दौर के सबसे सफल अभिनेताओं में से एक ऋषि कपूर से करने लगी थी हम तुम सनम सातो जनम मिलते रहे हो नीतू सिंह और ऋसी कपूर अब तक कई फिल्मों में एक साथ काम कर चुके थे और दोनों में अच्छे रिश्ते की शुरुआत भी हो गई थी कहा जाता है कि नीतू के अफेयर की बात सुनकर उनकी मां राजी सिंह बेहद नाराज हुई थी उन्हें अपने सपने चूर-चूर होते दिखाई देने लगे क्योंकि आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जिसने कोठे की नारकीय जिंदगी देखी हो और भारी जद्दोजहद से एक सम्मानित जिंदगी हासिल की हो उसके लिए इसके क्या मायने रहे होंगे बताते हैं कि इसी गुस्से में राजी सिंह ने बेटी की पिटाई भी कर दी लेकिन जब गुस्सा ठंडा हुआ तो बेटी ने मां को बहुत समझाया फिर आखिरकार राजीव सिंह ने भी अपनी सोच का दायरा बदला और सोचा कि फिल्मी दुनिया का कोई भरोसा तो है नहीं नीतू की अगर दो चार फिल्में फ्लॉप हो गई तो लोग उसे भूल जाएंगे और अगर नीतू शादी करके एक प्रतिष्ठित परिवार की बहू बन जाती है तो वह एक खुशहाल और लग्जरियस जिंदगी जी सकती है में बिठा के तुम्हें तुमसे ही प्यार किया हालांकि ऋषि कपूर ने जब राजीव सिंह से नीतू सिंह का हाथ मांगा तो इस रिश्ते को टेस्ट करने के लिए पहले उन्होंने मना कर दिया पर जब ऋषि कपूर ने कहा कि नीतू के साथ वह उन्हें भी अपने घर ले जाएंगे और सब साथ में रहेंगे तो वह मान गई प्यार से तेरा हाथ लगा लहरा ग 22 जनवरी 1980 को नीतू सिंह और ऋषि कपूर शादी के बंधन में बंद गए शादी के बाद कपूर खानदान की अन्य बहुओं की तरह नीतू सिंह ने भी अभिनय से नाता तोड़ लिया हालांकि नीतू ने खुद इस बात की सफाई भी दी थी कि ऐसा उन्होंने कपूर खानदान के दबाव में नहीं बल्कि अपनी मर्जी से किया है शादी के बाद नीतू सिंह ने बेटी रिद्धिमा और बेटे रणवीर को जन्म दिया रिद्धिमा आगे चलकर एक फैशन डिजाइनर बनी तो वहीं बेटे रणवीर कपूर ने एक सफल अभिनेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई सन 2006 में रिद्धिमा की शादी एक गारमेंट एक्सपोर्टर भरत साहनी से हो गई जिनसे वह पढ़ाई के दौरान लंदन में मिली थी ऋषि कपूर और नीतू सिंह का वैवाहिक जीवन खासा उतार चढ़ाव भरा रहा
अपना करियर समर्पित कर देने के बावजूद नीतू को पति से हरदम सहयोग नहीं मिला यहां तक कि नीतू के डोमेस्टिक वायलेंस के शिकार होने की भी खबरें आई इतना ही नहीं नीतू ऋषि कपूर के शूटिंग लोकेशंस पर दूसरी अदाकारा से फ्लर्ट करने की आदत से भी वाकिफ थी लेकिन कुछ बोल नहीं पाती थी एक बार तो उन्होंने मीडिया से कहा भी था कि वह अपने पति के वन नाइट स्टैंड को सीरियसली नहीं लेती बहरहाल थोड़े बहुत उधार चढ़ाव के साथ नीतू सिंह और ऋषि कपूर की वैवाहिक जिंदगी चलती रही लेकिन 30 अप्रैल 2020 को ऋषि साथ छोड़ गए जब मुंबई के एक अस्पताल में उनका निधन हो [संगीत] गया ऋषि कपूर के निधन के दो साल बाद इनके बेटे रणवीर की शादी जानी मानी एक्ट्रेस आलिया भट्ट से से साल 2022 में हुई और इस कपल के घर अब एक बच्ची ने भी जन्म लिया है यानी नीतू सिंह अब दादी भी बन चुकी हैं नीतू सिंह के आगे के करियर की बात करें तो हम कह सकते हैं कि प्रोफेशनली कोई सीरियस प्रोजेक्ट तो इन्होंने नहीं किया इसलिए उनके हाल में फिल्मों में आने को उनकी सेकंड इनिंग नहीं कहा जा सकता लेकिन हां कुछ फिल्मों में नीतू सिंह गेस्ट अपीयरेंस में नजर आई हैं
तो कुछ में बेटे और पति ऋषि के साथ काम करती नजर आई सन 2009 में लव आजकल 2010 में 2 द 4 2012 में जब तक है जा 2013 में बेशर्म और 2018 में फिल्म संजू में नीतू सिंह ने काम किया तो साथ ही 2020 में फिल्म जुग जुग जिओ में अनिल कपूर के साथ उन्होंने अभिनय किया था इसके अलावा नीतू सिंह टीवी के कई म्यूजिकल और रियलिटी शो में गेस्ट के रूप में भी आ चुकी हैं फिलहाल वह अपने परिवार के साथ टाइम स्पेंड करती हैं और जिंदगी एंजॉय करती नजर आती हैं उनके वीडियोज सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं जिनमें वह कभी मीडिया को पोस्ट देती हैं तो कभी अपने हेयर स्टाइल और ड्रेसेस को फ्लांट करती दिख जाती हैं भले ही नीतू सिंह अब फिल्मों में एक्टिव नहीं है पर वह अपनी जिंदगी को पूरे फिल्मी अंदाज में जिंदा दिल्ली से जीती हुई दिखती हैं तो साथ ही अपने चाहने वालों को यह संदेश भी देती हैं कि भले ही हमारी जिंदगी में लाख मुसीबतें रही हो अगर हमारे हौसले और इरादे मजबूत हो तो हमें अपनी जिंदगी को खूबसूरत बनाने से कोई नहीं रोक सकता जब-जब हिंदी सिनेमा की हसीन और बेहतरीन अभिनेत्रियों की चर्चा होगी तो नीतू सिंह का नाम भी उसमें जरूर शामिल होगा हेड्स ऑफ टू [प्रशंसा] [संगीत] यू तो दोस्तों आपको यह स्टोरी कैसी लगी हमें जरूर बताइएगा अगर आपके पास नीतू सिंह से जुड़ी कोई और जानकारी हो तो वह भी हमें कमेंट बॉक्स में बताइएगा अब दीजिए अपने दोस्त और होस्ट धीरज को इजाजत नमस्कार [संगीत]