बड़ा बचकाना सा कांसेप्ट है। जब सरकार को बदलना है तो जब जनरल इलेक्शन आए तो जनरल इलेक्शन में प्रजातंत्र में यह प्रावधान है कि अगर आपको कोई सरकार पसंद नहीं है, किसी का नेतृत्व पसंद नहीं है तो आप उस हिसाब से वोट डालें। सरकार बदल जाएगी। द्वयम बात यह है कि लोकतंत्र है इसीलिए तुम विरोध कर पा रहे हो। लोकतंत्र नहीं होता।
तो अभी तक आप जेल नहीं किसी और जगह पर पहुंच चुके होते सात समंदर आसमान के पार पे। तो यह हमारा भारतवासियों का सौभाग्य है कि जो लोग विरोध कर रहे हैं उनको भारत के पवित्र संविधान ने यह अधिकार दिया है कि आप विरोध कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि विरोध जब विद्रोह में बदलता है और विद्रोह जब अराजकता में बदलती है तो जो शासन चला रहे हैं उनको पूरा अधिकार है कि अराजकता अगर हो रही है पब्लिक प्रॉपर्टी का नुकसान हो रहा है। दंगे फसाद हो रहे हैं तो आप एक एग्जांपल देना चाहूंगा कि मैं आपके घर के बाहर आके कुछ नारे लगाता हूं। वहां तक तो ठीक है।
हाय हाय परंतु मेरे समर्थक या मैं पत्थर उठा के आपके घर पर पत्थरों का बौछार करना शुरू कर देता हूं। आप अपना घर से बाहर निकलते हैं किसी तरह से बच-बचाव करते हुए और आपके घर के जो मेंबर हैं वो लाठियां भाजना शुरू कर देते हैं। और जो विरोध करने वाले कहें कि भाई लाठियां क्यों भाज रहे तो प्रजातंत्र के खिलाफ है। तो ये बड़ा बचकाना सा कांसेप्ट है। आपको विरोध करने का पूरा अधिकार है। विद्रोह के बाद अराजकता और यह हिंसा की प्रवृत्ति जो है तो गवर्नमेंट उससे निपटेगी और वो निपटेगी। हर गवर्नमेंट ने निपटा है। बरसों पहले स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को जब लगा कि स्वर्गीय बाबू जयप्रकाश नारायण ने मिलिट्री को आवाहन दे दिया था। मिलिट्री भी हमारे साथ मिल जाए इस क्रांति के नए दौर के आवाहन के अंदर। तो माननीय प्रधानमंत्री महोदय को लगा कि यह तो विद्रोह हो गया, अराजकता हो रही है। फौरन जेपी बाबू को जेल में डाल दिया। जेपी बाबू को नहीं बहुत सारे लोगों को जेल में डाल दिया। सरकार जितने दिन चलनी है वो चलेगी और प्रजातंत्र के अंदर है लोकतंत्र। हमको खुश होना चाहिए कि लोकतंत्र है। वो जो विरोध कर रहे हैं मेरे भाई ये लोकतंत्र नहीं होता। किसी दूसरी कंट्री में जहां ऑटोक्रेसी है वहां पे तुम्हारा नामोनिशान नहीं बचता। तो तुम्हारा सौभाग्य कि तुम लोकतंत्र में तुम्हें छूट दी जा रही है और मैं इतना बोलूंगा के 2014 के बाद आप मुझे मुझे मालूम है मुझे खबर तो मिलती रहती है।
ना इधर-उधर से आप लोग कभी-कभी कुछ कमेंट मुझे गाली दे देते हैं। कोई बात नहीं भाई देखिए राजनीति से मेरा कोई मतलब नहीं है। मेरे मेरा मतलब है मेरी मातृभूमि के हित, सुरक्षा और कल्याण से। जो भी मेरे हित, सुरक्षा और कल्याण की बात करेगा मेरे देश में, मैं उसके साथ हूं। बस बात खत्म है। मेरा दृढ़ विश्वास है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर। अभी बोल लीजिए आपको क्या करना है। तो लोग तो ये भी बोलते हैं सर आप ये सब आप इसलिए बोल रहे हो, आपको राज्यसभा की सीट चाहिए। मैं लिख के दे दूं आपको। मुझे कोई सीट नहीं चाहिए। ना राज्यसभा की सीट चाहिए ना जन्नत की सीट चाहिए। मुझे कुछ नहीं चाहिए। राजनीति से, प्रत्यक्ष रूप से, अप्रत्यक्ष रूप से मेरा कोई लेना-देना नहीं है, इसलिए लेना-देना नहीं है, कि मैं राजनीति के योग्य ही नहीं हूं। मेरे अंदर वो कला ही नहीं है। मैं एक साधारण सा कलाकार हूं जो नाच- गा के एक्टिंग करके अपने परिवार का, अपने कुरबे का, अपने बीवी बच्चों का पेट पाल रहा है। मुझे इस सबसे दूर रखो भाई। बड़ी ईमानदारी के साथ टैक्स देता हूं मैं। और अभी तक तो आप सब की अनुकंपा से भारत माता की कृपा से एक कोई दाग नहीं है मेरे ऊपर। पुलिस वालों के सर फट गए हैं। नकसीर फूट चली है। उनके परिवार के उनके बच्चों ने इस बात का विरोध किया है कि हम अपने पिता को अपने भाई को ये विद्रोहकारी लोगों के सामने मरने थोड़ी भेजेंगे। आप क्या उम्मीद रखते हैं कि पुलिस वालों के ऊपर आप पत्थर बरसाएं और पुलिस वाले कुछ नहीं करेंगे। नसीर साहब मैं दिमागी नक्सल हूं। मुझे देशद्रोही कहो, मुझे टुकड़े-टुकड़े गैंग कहो सब याद रखा जाएगा। क्या याद रखा जाएगा? डायलॉग अच्छे बोलते होंगे ना इसलिए। मुझे मालूम नहीं देश के संदर्भ में, देश के हित में, देश के कल्याणकारी कितने विचार उनके मस्तिष्क में या उनके हृदय में है कि नहीं है। मुझे तो संशय है ऐसे लोगों के बारे में जो इस तरह के बयानबाजी करते हैं। सौभाग्य है हमारा कि हमारा देश ठीक है। शैशव अवस्था में है लोकतंत्र की। लेकिन लोकतंत्र है। इस लोकतंत्र के कारण ही आप बोल पा रहे हैं कि दिमागी नक्सल आप यह प्रदर्शन कर रहे हैं और जो प्रदर्शन अब विरोध नहीं विद्रोह और अराजकता की तरफ आ रहा है। तो उससे निपटने के लिए कोई भी सरकार होती उसको निपटना चाहिए और यह सरकार नरेंद्र मोदी की सरकार है। यह आतुरता के अंदर आपसे कुछ नहीं निकलेगी ना। आपका जो भी विचार है, आपके जो भी इस तरह के सो कॉल्ड रेवोलशनरी थॉट्स हैं, उनका पूरा सम्मान किया जाएगा। जब तक कि आप भारत के हित, सुरक्षा और कल्याण का सम्मान करते हैं। जब तक आपके हृदय में मां भारती के लिए आदर है। आपके विचारों का सम्मान किया जाएगा।
आपके विरोध का भी सम्मान किया जाएगा। परंतु जब यह विरोध अराजकता और हिंसा की तरफ बढ़ जाएगा तो फिर मैं याद दिलाना चाहूंगा कि कुरुक्षेत्र की रणभूमि में कहा था शिशुपाल के सामने भी कहा गया था भारत की रणनीति तो वैसी ही होनी चाहिए मैं राजनीति का नहीं हूं परंतु जुल्म को सहने की, अत्याचार को सहने की एक कोई सीमा है। आप यह बकवास करते हैं कि आपकी सीमा हो गई है। लेकिन सामने वालों की भी तो सीमा हो सकती है। जिनके जिनको पूरा देश चला रहे हैं।
आप सही मार्ग और सद्बुद्धि के साथ आप आगे बढ़े जो विरोधी पार्टियों को बोल रहा हूं। आगे बढ़े और मां भारती के हित, सुरक्षा और कल्याण के प्रति अपने कर्म आगे बढ़ाएं। बस मेरी यही है। धन्यवाद। जय भारत वंदे मातरम।