हाय दोस्तों, अह जैसा कि आपको पता होगा हमारे प्रिय मेरे तो फेवरेट थे। अह नाना पाटेकर जी का देहांत हो गया था अभी कुछ दिन पहले और फिर उनका पोस्टमार्टम हुआ क्योंकि उनको जब रात को प्रॉब्लम हुई उन्होंने अपने दोस्त को मैसेज किया 2:30 बजे के आसपास दोस्त को आने में डेढ़ घंटा लग गया और उसके बाद उनको हॉस्पिटल लेके जाया गया। कई बार कई जगह यह बोला जा रहा है कि वो हॉस्पिटल जाने से पहले ही मृत हो चुके थे। ब्रॉड डेड लाए गए। पता नहीं और उनका 45 मिनट्स तक सीपीआर हुआ। अब मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि अगर ब्रॉड डैड थे फिर सीपीआर करने की क्या जरूरत थी। हालांकि कोशिश की जाती है कई बार रिवाइव बहुत रेयर केसेस में शायद कोई रिवाइव हो भी जाता हो इसलिए कोशिश तो करनी पड़ती है जब आप हॉस्पिटल लेकर जा रहे हो। चलिए अब बात आती है कि पोस्टमार्टम क्यों? क्योंकि यह हमारे एक रूल है और मैंने पहले भी आपको बताया था कि मुझे पर्सनली लगता है कि यह केस सिंपल केस था। यह केस सिंपल केस है। यह पेशेंट हार्ट अटैक से डेथ हुई है नाना पाटेका जी की क्योंकि वह पहले से भी एक कार्डियक पेशेंट थे और जो हिस्ट्री उन्होंने बताई कि उनको घबराहट हुई, बेचैनी हुई। उन्होंने दोस्त को मैसेज किया तो मुझे इसमें कोई भी फाउल प्ले की संभावना नजर नहीं आ रही थी।
अब पोस्टमार्टम क्यों और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में क्या आया है? पोस्टमार्टम इसलिए हमारे यहां शायद कुछ रूल्स हैं कि अगर पेशेंट ब्रॉड डेड हॉस्पिटल लाया जाता है तो पोस्टमार्टम कराना चाहिए। हालांकि ये डॉक्टर पे डिपेंड करता है, हॉस्पिटल पे डिपेंड करता है कि वो क्या सोचते हैं उस पेशेंट के बारे में। अगर वो पेशेंट क्लीनिकली पुराना पेशेंट है, हार्ट पेशेंट है और पूरी हिस्ट्री ये सजेस्ट कर रही है। तो देखो हम तो अपने विवेक पे ये लेते थे डिसीजन और बहुत अब हो सकता है कोई ऐसे रूल्स आ गए हो कि भाई जो भी ब्रॉड डेड आएगा उसको पोस्टमार्टम करना ही पड़ेगा। लेकिन मैंने ये बोला था कि ये क्लियर केस है। तो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आपको दिखा देता हूं। क्या आई है? आप हैरान हो जाएंगे कि हार्ट की तीन ब्लड वेसल होती हैं। है ना? लेफ्ट, एंटीरियर, सरकमफ्लेक्स, राइट, कोोनरी आर्टरी। जैसे एक पेट पेड़ होता है ना तो पेड़ की शाखाएं निकलती है। तो तीन शाखाएं निकलती है हमारे हार्ट के अंदर। लेकिन क्या मालूम है? एक पेड़ जिसका स्टेम है अगर उसमें ब्लॉकेज हो जाए तो क्या होगा? मेन आर्टरी में अगर ब्लॉकेज हो जाए। ये समझिए ये मेरा हाथ है। यहां पे फोकस करना मेरे हाथ पे। यह मेरा हाथ है। यह मेरा हाथ है। यह समझिए यह लेफ्ट मेन आर्टरी है और इसमें से तीन ब्रांचेस निकल रही हैं। ठीक है? तो यहां पे अगर ब्लॉकेज ब्लॉकेज होती है तो हम एंजियोप्लास्टी कर देते हैं। लेकिन यहां नाना पाटेकर जी की लेफ्ट मेन आर्टरी मतलब समझिए इस आर्टरी में मेन आर्टरी जहां से सारी शाखाएं निकलती हैं, ब्रांचेस निकलती हैं, उसमें ब्लॉकेज पाई गई। तो ऐसे पेशेंट में बच पाना क्या बहुत मुश्किल होता है। सच बता रहा हूं। और ब्लॉकेज बहुत पहले से पड़ी होगी। वो प्लग बना होगा।
वो रप्चर हुआ होगा। क्लॉट बनके उसने ब्लॉकेज कर दी। मैं इसीलिए बार-बार बोलता हूं सभी लोगों से कि भाई प्लीज प्लीज प्लीज अगर आप एन आप ये जो टेस्ट होते हैं टीएमटी स्टेस्टिक को ठीक है लेकिन इनकी लिमिटेशंस हैं 60 टू 70% में ही इनकी वो हैं और फॉल्स फॉल्स पॉजिटिव फॉल्स नेगेटिव रिपोर्ट बहुत आती हैं। इसीलिए मैं बार-बार बोलता हूं कि सभी से बोलूंगा चाहे वो बॉलीवुड के एक्टर हो या कोई भी हो एक आम आदमी हो कि भाई प्लीज प्लीज प्लीज अपने दो टेस्ट जरूर करा लें। अगर हार्ट पे हार्ट की प्रॉब्लम से बचना है तीन बोलूंगा। एक तो आप लिपिड प्रोफाइल तो कराते हो। उसमें एलपीए, होमोसिस्टीन और सीआरपी, एपोलाइपोप्रोटीन बी ये तो हो गया एक टेस्ट। एलपीए एक बहुत इंपॉर्टेंट टेस्ट है जो जेनेटिकली ड्रिवन होता है। इसको डाइट वाइट या दवाइयों से कम नहीं किया जा सकता। अगर आपका एलपीए ज्यादा आ रहा है, आपकी फैमिली हिस्ट्री है, बहुत सारे और शुगर, बीपी, कोलेस्ट्रॉल ये सब भी है तो आप बहुत हाई रिस्क पे हो। तो यह तो ब्लड टेस्ट हो गया। ब्लड टेस्ट तो धोखा भी दे सकते हैं। लेकिन अब मैं वही बात कर रहा हूं कि अब आपने कहा जी डॉक्टर ने बोला कि आप स्ट्रेस इकोिको कराओ टीएमटी कराओ है ना तो मैं क्या बोलता हूं अगर आपकी उम्र 40 साल से ऊपर है आपकी उम्र 40 साल से ऊपर है आपको कोई सिम्टम छोटे-मोटे लग रहे हैं डाउट लग रहे हैं कोई हार्ट अटैक नहीं हुआ है और आप को शुगर है आपको बीपी है आपको कोलेस्ट्रॉल है आपकी फैमिली हिस्ट्री है आपको चलने में कोई दिक्कत हो रही है लेकिन आपका डॉक्टर कहता है कि आप आपने टीएमटी करा ली आपने स्टेसिको करा लिया आपने आपने इको करा लिया। ठीक है? वो सब नॉर्मल थे। लेकिन फिर भी पेशेंट को हार्ट अटैक हो गया। क्योंकि इन सब टेस्टों की लिमिटेशंस है। तो मैं हमेशा बोलता हूं बेस्ट टेस्ट।
आपको दो चीजें देखनी होंगी। कई बार बिना ब्लॉकेज के भी हार्ट प्रॉब्लम की डेथ पेशेंट की डेथ हो सकती है कि ब्लॉकेज नहीं है फिर भी डेथ हो गई। क्यों? उसको कार्डियोमापैथी थी। उसकी मसल वीक हो चुकी थी। उसकी फैमिली में रन कर रही थी। कार्डियोमापैथी। मतलब कार्डियोपैथी का मतलब होता है कि मसल वीक हो जाना। हार्ट की मसल वीक हो जाना। और ये फैमिली में रन कर रही थी या फिर आपको कुछ और प्रॉब्लम रही होगी शुगर रहा होगा कोई वायरस वायरस से भी कई बार कार्डियोमापैथी हो सकती है तो बड़े सारे कारण होते हैं कार्डियोमापैथी के मसल वीक हो जाने के यही मसल वीक अगर 30% से नीचे आ जाए तो हम सीवियर कार्डियोपैथी बोलते हैं और इसको इंजेक्शन फ्रैक्शन से पता चलता है ईएफ कितना है जब भी इको देखते हैं सबसे पहले निगाह अगर एक क्लीनिशियन की जाती है वो ईएफ पे जाती है कि ईएफ कितना है इजेक्शन फ्रैक्शन कितना होता है नॉर्मल 55 से 60% तक होता इवन 50% से ऊपर भी है तो मानते हैं ठीक है। लेकिन अगर इतना कम है 30% है, 20% है, 35% है तो बहुत सीवियर है। तो इसलिए दोनों टेस्ट जरूरी है। मैं हमेशा बोलता हूं कि दो टेस्ट कराएं। एक इकोकारार्डियोग्राफी अच्छी जगह से कराएं। दूसरा सिटी कोोनरी एंजियोग्राफी। लोग इन्वेसिव एंजियोग्राफी देखो जो डीएम कार्डियोलॉजिस्ट है वो तो आपको सीधा बोलेगा। हर वो तो हर पेशेंट में बोल देते हैं कि भाई नहीं नहीं इन्वेसिव कार्डियोलॉजिस्ट इन्वेसिव कार्डियो वो कराओ। सिटी एंजियोग्राफी भर्ती हो जाओ हम तार डालेंगे यह करेंगे वो करेंगे पेशेंट किसी भी प्रॉब्लम के लिए चला जाए ज्यादातर लोग ज्यादातर डॉक्टर कहते हैं फटाफट एडमिट हो और ये टेस्ट लिख दिया कल आज आपकी एंजियोग्राफी होगी चाहे पेशेंट को कुछ हो या ना हो मैं यह बोलता हूं कि अगर आपको हार्ट अटैक हुआ है आपके पास कोई ऑप्शन नहीं है तब तो आपको इनवेसिव एंजियोग्राफी ही करानी चाहिए लेकिन अगर आपको अपने डाउट क्लियर करने हैं ठीक है अगर आप ठीक-ठाक हो लेकिन आपको डाउट क्लियर करने हैं तो सिटी कोनरी एंजियोग्राफी करा लें सिटी कोनरी एंशिग्राफी के साथ दो प्रॉब्लम है। दो प्रॉब्लम है। एक तो अ 15,000 के आसपास इसकी एमआरपी है। चलो हमारे यहां पेशेंट को काफी कम रेट पे हम करा देते हैं। लेकिन जितनी एडवांस मशीन होगी जितने ज्यादा स्लाइस की मशीन होगी उतनी ही रिपोर्ट उतना रेडिएशन कम होगा। उतना टाइम कम लगेगा और उतनी रिपोर्ट ज्यादा अच्छी आएगी। लेकिन फिर बोलूंगा एक रेप्यूटेड लैब से कराएं। बहुत वेरिएशन आता है। एक लैब 25% ब्लॉकेज दे देती है। दूसरी 70% ब्लॉकेज दे देती है। कोई 50% दे देती है। तो यह प्रॉब्लम है। लेकिन अगर सिटी एंजियोग्राफी नॉर्मल आ जाती है मतलब आपको कुछ भी नहीं है। सबसे बड़ा ये है इसका फायदा कि अगर सिटी एंजियोग्राफी नॉर्मल आ जाती है तो मतलब आपको कुछ भी नहीं है। मैं हमेशा बोलता हूं अब हमारे एरिया में 640 स्लाइस की मशीन है। हम तो वहीं से कराते हैं और देखो डिस्काउंट डिस्काउंट सब मिल जाते हैं। अगर आपका डॉक्टर लिख के दे तो सब डिस्काउंट हो जाता है। है ना? ना लैब वाले खूब डिस्काउंट देते हैं। भरभ के डिस्काउंट देते हैं। बशर्त है कि आपका डॉक्टर आपको लिख के दे कि भाई यह डिस्काउंट मैं लिख के दे रहा हूं। आप करा लो। लेकिन जो लोग अफोर्ड कर सकते हैं। कुछ लोग कहते हैं जी हमारा मेडिकल इंश्योरेंस के थ्रू करा दो। भाई मैं मना करता हूं मेडिकल इंश्योरेंस के थ्रू इसको कराने के लिए। कई बार ₹10,000 ₹15,000 बचाने के चक्कर में पेशेंट को ₹00 देके भी जाने पड़ते हैं। तो मैं इसलिए बोलूंगा आप लालच मत करें। बहुत ही अच्छी लैब से जहां पर मिनिमम 250 स्लाइस की मशीन तो हो ही हो या हमारे यहां तो खैर 640 स्लाइस की मशीन है आसपास तो हम तो बहुत भाग्यशाली समझते हैं अपने पेशेंट्स के लिए लेकिन ये दोनों टेस्ट आपको करा लेने चाहिए अगर आप फ्यूचर को प्रोटेक्ट करना चाहते हैं। आपके अंदर क्या चल रहा है? क्या नाना पाटेकर की शक्ल देख के कोई बता सकता कि इतनी ब्लॉकेज इनके अंदर हो चुकी होगी। है ना? ठीक है। सब लोग बोलते हैं कि जब जाना है तो जाना है। कोई किसी को रोक नहीं सकता। तो लेकिन मरना भी कोई नहीं चाहता। फैक्ट यह है नाना बाटेकर भी मरना नहीं चाहते थे। इसीलिए अपने मैसेज किया था अपने दोस्त को। फैक्ट यह है कि मरना कोई भी नहीं चाहता। ना मैं मरना चाहता हूं। हम कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें कर लें लेकिन मरना कोई नहीं चाहता। सुसाइड करना एक अलग चीज है। ठीक है? वो एक अलग कहानी है
कि जो लोग मरना चाहते हैं वो तो एक एब्नॉर्मल चीज हो गई। लेकिन नॉर्मल पर्सन कोई भी जाना नहीं चाहता। चाहे वो 75 साल का हो, चाहे वो 70 साल का हो, चाहे वो 80 साल का हो, चाहे वो 85 साल का हो। फैक्ट यही बता रहा हूं और कई बार हमें बीमारी नहीं मारती। बीमारी का डर हमें मारता है। कई लोग इसलिए टेस्ट नहीं कराते कि यार पंजाबी में बोलते हैं पसूड़ी पै जाएगी। मतलब आफत आ जाएगी। मुसीबत आ जाएगी। डॉक्टर बिना बात के दवाइयां शुरू कर देंगे। इस डर की वजह से नहीं कराते। पता नहीं क्या निकल आए। हम तो हेल्थी हम तो हेल्थी खाना खाते हैं। हम सब कुछ करते हैं। ये है वो है। सर एक जेनेटिक कारण भी होता है जो आपकी जींस में चल रहा होता है। आपको पता ही नहीं होता। इसलिए बोल रहा हूं। आप सब कुछ अच्छा कर रहे फिर भी इंसान चला जाता है। ठीक है? मैं मानता हूं दुर्भाग्य है मेरा और चलिए वीडियो ज्यादा लंबा ना करते हुए मैं सिर्फ इतना ही बोलूंगा कि पोस्टमार्टम वाली बात पे फिर बोलूंगा कि अगर आप घर में मरते हो तो आपका पोस्टमार्टम नहीं होगा। अगर आप हॉस्पिटल ले जाते हो बॉडी को तो आपका पोस्टमार्टम होगा। आपके पेशेंट का नॉट आपका। अ क्या किया जाए? ऐसे में कई बार मेरे मैं 25 साल से प्रैक्टिस में हूं। पेशेंट की डेथ हो जाती है। कई बार डॉक्टर को बुला लेते हैं। अटेंडेंट सर आप देख लीजिए। डॉक्टर को अगर लगता है कि एक पुराना पेशेंट था मेरा तो डॉक्टर उसको लिख के दे देता है कि ये कारण रहा होगा जो भी है। ठीक है? लेकिन क्या हर पेशेंट का पोस्टमार्टम होना चाहिए? है ना? तो इस पे डिबेट होनी चाहिए? बिल्कुल होनी चाहिए। क्योंकि वैसे तो यह है कि लोग कहते हैं कि एक भी फाउल प्ले अगर होगा तो पकड़ा जाएगा। लेकिन जहां डॉक्टर को पता है ये केस ऐसा चल रहा है। हालांकि डॉक्टर भी इसमें बेईमानी कर सकता है। देखो आजकल कोई भी बेईमान हो सकता है। डॉक्टर को पैसे खिला के आपने पेशेंट को मार दिया और डॉक्टर को पैसे खिला के आप बोल दो सब नॉर्मल था। हार्ट अटैक हुआ फलाना हुआ। ऐसा डाउट लग रहा है और हम जा के उसका श्मशान घाट पे उसकी क्रिया करा अंतिम वो करा दें। तो होने को कुछ भी हो सकता है। तो इसीलिए यह बहुत कंट्रोवरर्शियल टॉपिक है
कि किसका पोस्टमार्टम होगा, किसका नहीं होगा। डॉक्टर का बहुत बड़ी भूमिका होती है उस समय जो ड्यूटी पे होता है और यह रूल है कि अगर पेशेंट ब्रॉड डेड अगर मरा हुआ ही जा रहा है हॉस्पिटल में लेके जा रहे हो तो पोस्टमार्टम शायद होगा ही होगा क्योंकि आपको कारण पता नहीं है लेकिन पुरानी हिस्ट्री और उस समय जैसे नाना जी के साथ हुआ कि उन्होंने मैसेज किया अब आप कहोगे सर उनका मैसेज तो कोई भी कर सकता था अगर दुश्मन होगा वो उनके फोन से मैसेज कर देगा और पेशेंट को मार सकता है होने को तो कुछ भी हो सकता है दुनिया में ठीक है तो ये था और जाते-जाते इतना इतना ही बोलूंगा कि अब तो नाना पाटेकर जी नहीं रहे हमारे बीच में और उन्होंने बोला था कि यार मैं भी यही बोलता हूं कि लोग इतना पैसा कमाते हैं इतना अपने ऊपर खर्च नहीं अपनी हेल्थ पे खर्च नहीं करते वो गांव में रहते थे सिर्फ इसलिए कि उनको एक नेचुरल एनवायरमेंट मिले 75 साल की ऐज में वो चले गए दुख है मुझे कि अगर शायद पहले टेस्ट कराया होता तो शायद बच जाते लेकिन फिर भी नाना जी बोल के गए कि भाई मेरा अंतिम क्रिया हो तो
मैंने अपनी जो लकड़ियां हैं वो इकट्ठी कर रखी हैं। सूखी लकड़ियां इकट्ठी करी हैं कि ऐसा ना हो कि जब वो लकड़ियां जलें गीली लकड़ियां और लोगों के आंखों से पानी आए तो लोग तो ये गलतफहमी हो कि यह सब मेरी याद में रो रहे हैं। फैक्ट यही है कि आपकी याद में सिर्फ आपके घर वाले रोते हैं। वो भी कुछ दिन तक कुछ दिन तक कुछ महीनों तक। याद आपको आती रहेगी अक्सर बीच-बीच में लेकिन काम रुकते नहीं है। दुनिया रुकती नहीं है। ठीक है? इसलिए मैं आज एक सॉन्ग सुनाना चाहता हूं आपको। पुराना सॉन्ग है दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई काहे को दुनिया बनाई तूने काहे को दुनिया बनाई दुनिया तो बन चुकी है दुनिया चलती रहती है रुकती नहीं है आप रहें या ना रहें आपको याद किया जाएगा आपके अच्छे कामों के लिए और बाकी तनु श्री दत्ता जी मैडम मरने वाले इंसान को तो छोड़ दो। क्या हुआ आपके साथ क्या नहीं हुआ यह सच किसी को नहीं पता। लेकिन आखिरी वक्त में भी आपने नाना पाटेकर को गालियां दी हैं। तो इसका फल तो आपको भुगतना पड़ेगा। शायद भगवान अपने आप आपको बताएगा कि कौन सच्चा था, कौन झूठा था। इस दुनिया में हमें नहीं पता किसी पर भी इल्जाम लगा देना बहुत आसान है। उसको सिद्ध करना कितना मुश्किल है। लेकिन सामने वाला शायद उस इल्जाम के वजह से ही शायद मर जाए। मैं इतना बोलता हूं बस। और जब आपके साथ होता है तब आप क्यों नहीं बोलते हो? आप आखिरी 2 साल चार साल के बाद क्यों बता रहे हो? क्योंकि एक मूवमेंट चल रहा है। अरे आपके साथ अगर आज कुछ होता है तो आज ही बोलो। इतनी हिम्मत होनी चाहिए आप में। चलिए थैंक यू वेरी मच। शुक्रिया। बाय-ब। मेरा भारत महान। मेरा भारत महान। बट