दोस्तों बात करेंगे आज एक ऐसे सिंगर की एक ऐसे कलाकार की जिसने 3 साल की उम्र में जब अपना पहला गीत गाया तो लोगों ने दांतों तले उंगलियां दबा ली लोग हैरत में पड़ गए पंजाब के जालंधर जिले के एक खानखाना गांव में एक परिवार रहा करता था खानखाना अब नवा शहर के नाम से भी जाना जाता है अमर सिंह और पूरन देवी अमर सिंह अंग्रेजों के यहां काम किया करते थे लेकिन उनकी संगीत में बहुत रुचि थी उनके घर में संगीत के बहुत सारे इंस्ट्रूमेंट यंत्र रखे रहा करते थे तब 28 दिसंबर 1927 को उनके घर में एक बच्चे ने जन्म लिया नाम रखा गया मदन जिसको मास्टर मदन के नाम से जाना जाता है मदन की बड़ी बहन थी शांति और बड़े भाई थे मोहन मदन का यह एक किस्सा भी बड़ा फेमस है कि जब वह करीब डेढ़ महीने के थे तब उनको एक बंदर उठाकर ले गया था था और तब उनकी बहन शांति ने उस बंदर को एक संतरा दिखाकर किसी तरह से अपने भाई मदन को छुड़ाया था मदन जब करीब दो या ढाई
साल के हुए तब उनकी संगीत में रुचि बढ़ने लगी और वह अपनी बहन शांति के साथ गीत का रियाज भी किया करते थे पूरा घर का माहौल एक गीत संगीत वाला ही था तो मदन की रुचि और ज्यादा संगीत में बढ़ने लगी और वह गीत गाने लगे साल 1930 में जब मदन करीब साढ़े साल के हुए तब शिमला के धरमपुर इलाके में एक इवेंट हुआ और वहां पर मदन ने अपनी जिंदगी की पहली परफॉर्मेंस दी वंदना है शारदा नमन करूं यह भजन जब उन्होंने गाया तो लोग उनकी गायकी देखकर हैरान थे और एकदम दंग थे लोग समझ नहीं पा रहे थे कि इतना छोटा बच्चा इतनी शानदार गायकी कैसे गा सकता है यह बहुत आगे की गायकी थी बहुत ही महान गायन था यह सब देखकर लोगों में इस बात की चर्चा होने लगी कि एक छोटा सा बच्चा इतना शानदार गा सकता है और पब्लिक के जरिए यह बात पहुंच गई कुंदनलाल सहगल के कानों तक वह भी उन दिनों में सोलन में ही थे जब उनको पता लगा कि एक बच्चा इतना शानदार गाता है तब कुंदन लाल सहगल पहुंच गए अमर सिंह के घर और वह मिले मास्टर मदन से मास्टर मदन को रियास करते हुए देखा तो कुंदन लाल सहगल और ज्यादा इंप्रेस हो गए थे और अक्सर कुंदन लाल सहगल न के घर पर आने जाने लगे दोनों में काफी मेलजोल हो गया था और एक बार का किस्सा यह
भी है कि एक बार मास्टर मदन कुंदन लाल सहगल उनके बड़े भाई मोहन और उनकी बड़ी बहन शांति कालका ट्रेन से शिमला जा रहे थे और जिस बोगी में यह लोग बैठे हुए थे वहां पर यह करीब पाच से छ घंटे का सफर था लेकिन कुंदन लाल और मास्टर मदन की गाय की सुन सुन के लोगों को उस सफर का पता ही नहीं चला पूरे रास्ते मास्टर मदन गाते रहे कुंदन लाल सहगल गीत गाते रहे और लोगों का मनोरंजन होता रहा वक्त कैसे बीत गया कुछ पता नहीं चला मास्टर मदन के पड़ोसी सुशील कुमार जी ने भी इस बात का एक इंटरव्यू में जिक्र किया है और आगे चलकर केएल सहगल तो हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार बने उन्होंने गीत भी गाए और एक्टिंग भी की और हर सिंगर के कुंदन लाल सहगल आइडियल बन गए थे बात मास्टर मदन की करें तो उन्होंने शिमला के स्कूल में पढ़ाई की उसके बाद दिल्ली के रामजस कॉलेज से भी उन्होंने अपनी पढ़ाई की उसके बाद जब मास्टर मदन थोड़े और बड़े होने लगे तब 121 साल की उम्र में उन्होंने हिंदुस्तान के कोने-कोने में स्टेज शो किए लाइव शो किए बहुत सारी इवेंट्स में हिस्सा लिया और वह बहुत फेमस हो गए और 1931 से लेकर 1942 तक वह एआईआर ऑल इंडिया रेडियो में भी गाने लगे वहां पर काम करने लगे और वहां पर मास्टर मदन और ज्यादा फेमस हो गए थे उनके साथ में बड़े-बड़े लोग थे जैसे बड़े गुलाम अली साहब दिलीप चंद्र वेदी साहब और मुबारक अली साहब जैसे कलाकार भी उनके साथ थे वह भी इस लड़के की गायकी से बहुत ही इंप्रेस थे और यह कुछ अलग तरह की ही गायकी होती थी मास्टर मदन की एक अलग ही पहचान बन गई थी वह दुनिया में फेमस होने लगे थे मास्टर मदन की पॉपुलर इतनी बड़ी कि यह भी कहा जाता है कि जो उनके साथी सिंगर थे व मास्टर मदन से नाखुश रहने लगे थे
उनको लग रहा था कि वह मास्ट मदन की वजह से पीछे रह जाएंगे और मास्टर मदन बहुत आगे निकल जाएगा फिर साल 1942 में मास्टर मदन ने कोलकाता में एक और लाइव स्टेज शो किया जिसमें उन्होंने एक भजन गाया विनती सुनो मेरी अवध के बसैया यह भजन गाया और साथ में और भी कई सारी परफॉर्मेंस दी लोगों को यह गीत यह भजन बहुत ही पसंद आए मास्टर मदन को लोगों ने पैसों से भर दिया यहां तक कि उनको सोना भी लोगों ने गिफ्ट किया उनको बहुत सारे इनाम भी मिले उसके बाद वह सीधा दिल्ली आ गए और ऑल इंडिया रेडियो में दोबारा से काम करने लगे फिर अचानक एक दिन उनको बहुत तेज बुखार हो गया बुखार उतरने का नाम ही नहीं ले रहा था काफी इलाज भी कराया गया लेकिन धीरे-धीरे उनकी तबीयत खराब होने लगी रिपोर्ट्स की माने तो यह पता लगा कि मास्टर मदन को दूध में मरकरी यानी के पारा एक जहर मिलाकर पिला दिया गया है जिसकी वजह से उनकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ने लगी और कुछ दिन बीमार रहने के बाद 5 जून 1942 को मदन इस दुनिया से रुखसत हो गए वह महज 15 साल के थे उनका करियर तो अभी और उड़ान भरना था कहा जाता है कि उनके किसी साथी सिंगर ने उनको दूध में मरकरी जहर मिलाकर पिला दिया था कि कहीं यह मदन उनसे आगे ना निकल जाए और कहीं मदन की इस कामयाबी में सब लोग पीछे ना रह जाएं उनके किसी साथी सिंगर ने ही यह नीच काम कर दिया था मदन ने अपने करियर में ना जाने कितनी ठुमरी यां गीत गजल और भजन भी गाए हैं लेकिन मास्टर मदन की अभी तक आठ रिकॉर्डिंग ही मिल पाई है और इन कुछ रिकॉर्डिंग्स को आप [संगीत] और हैरत से तक रहा है जाने वफा मुझे इन दोनों गजलों को सागर निजामी ने लिखा था जो कि मास्टर मदन ने बहुत ही ऑसम गाई है हैरत तक रहा है [संगीत] जहा मास्टर मदन के बारे में यह भी बहुत एक सच बात है
कि उनके दिल में अपने बड़ों के लिए बहुत श्रद्धा थी जब अक्सर वह अपने बड़े भाई या बड़ी बहन के साथ कहीं जा रहे होते थे और गलती से अगर वह आगे निकल जाते जाते थे तो फौरन पीछे हटकर अपने भाई और बहन से माफी मांगते थे कि मुझे माफ करना मैं तुमसे आगे निकल गया मैं तुम्हारा छोटा हूं मुझे तुमसे आगे नहीं जाना चाहिए था गजल सम्राट जगजीत सिंह भी मास्टर मदन को बहुत-बहुत मानते थे मास्टर मदन नाम का यह नायाब हीरा हिंदुस्तान ने बहुत ही जल्दी खो दिया अगर वह जिंदा रहते तो ना जाने हिंदुस्तान के इतिहास में कितने हीरे जड़ देते और हिंदुस्तान को और ऊंचाइयों पर ले जाते मास्टर मदन की कामयाबी का यह आलम था कि उनकी जिंदगी पर एक फिल्म भी बन चुकी है जिसमें बाबिल खान ने मास्टर मदन का किरदार निभाया है बाबिल खान इरफान खान के बेटे हैं 2021 दिसंबर के महीने में कला नाम की यह फिल्म ख्याल रखें वो देखते रहे रेट्रो शावेज जय भारत जय हिंद