नहीं मांगता हमको ले नहीं मानता हमको सरा नहीं कौन मांगता जली जली जॉनी का दिल तुम पे आया जली एक बार फिर से स्वागत है दोस्तों आपके अपने YouTube चैनल बॉलीवुड बायो पर जब हम बात करते हैं बॉलीवुड के डांसिंग लेजेंड्स की तो एक नाम सबसे ऊपर आता है वो नाम जो गरीबी से उठकर लाखों दिलों का डांसिंग स्टार बना जिसने भारतीय सिनेमा को एक नई ऊर्जा दी तेरे नाम का कुत्ता पालो साले भागने को आता नहीं और काटने को आ गया। आ जी हां, हम बात कर रहे हैं मिथुन चक्रवर्ती की। फिल्मों में उनका परिचय बस इतना ही काफी है कि इन्होंने अपने जीवन काल में तकरीबन 350 से अधिक फिल्मों में अपना योगदान दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डिस्को डांसर बनने तक का उनका सफर कितना कांटों भरा था। नक्सलवादी आंदोलन से लेकर फिल्म इंडस्ट्री के इतने लंबे करियर को बनाना उनके लिए कितना मुश्किल भरा था? और आखिर कैसे इन्होंने फ्लॉप फिल्में दे देकर भी पूरी दुनिया में एक नया गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। दोस्तों, ऐसी ही और भी कई मजेदार बातें हैं मिथुन चक्रवर्ती साहब के बारे में जो हम आगे आप सभी को बताने वाले हैं। तो अपनी सीट की पेटी बांध लीजिए क्योंकि हम शुरू करने जा रहे हैं मिथुन दा की वो अनसुनी और अनकही कहानी जिसके बिना भारतीय सिनेमा का इतिहास अधूरा है। जॉनी तुम क्यों इतना पीता है? सब लोग बोलता है तुम एक नंबर का बेवड़ा हो। ए मैं हूं क्या रे? नहीं नहीं देखा। मिथुन चक्रवर्ती साहब का जन्म 16 जून 1950 को कोलकाता के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनका असली नाम गौरांग चक्रवर्ती है। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद युवा गौरांग के रास्ते भटक गए थे। वो बंगाल के उस दौर के नक्सलवादी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हो गए। लेकिन जीवन ने तब करवट ली जब उनके भाई की एक दुर्घटना में मौत हो गई। परिवार की जिम्मेदारी और पिता के सपनों ने उन्हें उस रास्ते को छोड़ने पर मजबूर कर दिया। वे अपनी जान बचाने के लिए कोलकाता से भागकर पुणे आ गए और एफटीआईआई यानी कि फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टट्यूट ऑफ इंडिया में दाखिला लिया।
यहां से शुरू हुई एक बागी के अभिनेता बनने की प्रक्रिया। चोरी चोरी दिल तेरा चुराएंगे। अपना [संगीत] तुझे हम जब मिथुन दा पहली बार मुंबई आए तो उनके पास ना रहने को घर था और ना खाने के पैसे। उन्होंने कई रातें जूहू बीच पर और जिमखानों के बाहर फुटपाथ पर सोकर बिताई। उस दौर के प्रोड्यूसर्स उन्हें उनके सांवले रंग की वजह से रिजेक्ट कर देते थे। लोग कहते थे कि इस रंग रूप के साथ तुम कभी हीरो नहीं बन सकते। लेकिन मिथुन ने हार नहीं मानी। उन्होंने ठान लिया था कि वे अपनी पहचान बनाकर ही दम लेंगे। आखिरकार साल 1976 में मृणाल सेन की फिल्म मृगया से उन्हें पहला मौका मिला। अपनी पहली ही फिल्म में उन्होंने ऐसा जीवंत अभिनय किया कि उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। पर अफसोस नेशनल अवार्ड जीतने के बाद भी उन्हें काम के लिए संघर्ष करना पड़ा। प्यार कभी कम नहीं करे कोई [संगीत] सितम करे। साल 1982 में फिल्म आई डिस्को डांसर। इस फिल्म ने ना केवल भारत में बल्कि सोवियत संघ, चीन और अफ्रीकी देशों में भी सफलता के झंडे गाड़ दिए। जमी जिमी और डिस्को डांसर जैसे गानों ने उन्हें इंटरनेशनल आइकॉन बना दिया। लोग उनके डांस मूव्स के दीवाने हो गए। इसके बाद मिथुन दा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने कसम पैदा करने वाले की प्यार झुकता नहीं। गुलाम और अग्निपथ जैसी यादगार फिल्में दी। और मैं कृष्णन अय्यर जम गया नार पानी वाला। अरे तीन दिन से मंजी करते हैं। और दोस्तों बात जब एक्टिंग की गहराई की हो तो फिल्म अग्निपथ का जिक्र किए बिना यह कहानी अधूरी है। जरा सोचिए एक तरफ सदी के महानायक अमिताभ बच्चन अपने भारीभरकम विजय दीनाना चौहान वाले अंदाज में खड़े हो तो उनके सामने किसी और का टिक पाना नामुमकिन सा लगता है। लेकिन मिथुन दा ने वहां भी अपनी ऐसी दादागिरी दिखाई कि पूरी महफिल लूट ली। हाथ में नारियल पानी बदन पर लुंगी और वह जबरदस्त साउथ इंडियन लहजा कृष्णन अय्यर एम ए नारियल पानी वाला। इस किरदार में मिथुन दा ने ऐसी जान फूंकी कि लोग बड़े मियां अमिताभ बच्चन के साथ-साथ छोटे मियां के भी मुरीद हो गए। आप सबको वो सीन याद है ना? जब वो कहते हैं ये साला मर्दों के लड़के को तुम्हें हंसते हैं। अरे ये साला हमारा जात को बदनाम किया। हमारे दोस्त को किया, हमारा टीचर को किया। उस एक डायलॉग ने थिएटर्स में सीटियां बजने पर मजबूर कर दिया था। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर शेर के सामने कोई सवा शेर बन सकता है तो वह सिर्फ और सिर्फ मिथुन चक्रवर्ती हैं।
इसी शानदार रोल के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवार्ड भी मिला। आज भी जब कोई नारियल पानी पीता है तो दिमाग में सबसे पहले मिथुन दा की वह शरारती मुस्कान और जादुई एक्टिंग ही आती है। क्या रे साला जंगली लोग एकदम क्या रे बात [हंसी] बोलते हैं फत मार के पत्थर मार मार के साला जंगली दोस्तों क्या आप जानते हैं कि मिथुन दा के नाम एक ऐसा अनबीटेबल रिकॉर्ड दर्ज है जिसे बड़े-बड़े सुपरस्टार्स भी छूने से कतराते हैं? जरा सोचिए आज के दौर में एक्टर्स साल में एक या दो फिल्में बड़ी मुश्किल से ला पाते हैं। लेकिन साल 1989 में मिथुन दा ने 19 फिल्में बतौर लीड हीरो रिलीज करके पूरी दुनिया को हिला दिया था। यह एक ऐसा गिनीज बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड है जो आज भी चट्टान की तरह खड़ा है। मेरी तरह [संगीत] पिया लेकिन इस कहानी में ट्विस्ट तब आया जब 90 के दशक में उनकी फिल्में लगातार फ्लॉप होने लगीं। लोग कहने लगे कि मिथुन का द्वार खत्म हो गया। पर दादा को कम समझना सब की सबसे बड़ी भूल थी। उन्होंने हार मानने के बजाय अपना पूरा बेस ही बदल दिया। वह मुंबई छोड़कर ऊंट ही चले गए और वहां खड़ा किया अपना आलीशान मोनार्क ग्रुप ऑफ होटल्स। वहां उन्होंने एक नया बिजनेस मॉडल शुरू किया। कम बजट की फिल्में जिन्हें सिर्फ 30 से 40 दिनों में शूट कर लिया जाता था। भले ही क्रिटिक्स इन्हें बी ग्रेड फिल्में कहकर मजाक उड़ाते थे। लेकिन यह फिल्में छोटे शहरों के थिएटर्स में आग लगा देती थी। इन फिल्मों ने कभी किसी डिस्ट्रीब्यूटर का पैसा डूबने नहीं दिया और इसीलिए उन्हें गरीबों का मसीहा कहा जाने लगा। मिथुन दा ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक एक्टर नहीं बल्कि बॉलीवुड के सबसे शातिर बिजनेसमैन भी हैं। सिर्फ फिल्मी पर्दा ही नहीं मिथुन दा ने जब छोटे पर्दे यानी टीवी पर कदम रखा तो वहां भी महागुरु बनकर छा गए। डांस इंडिया डांस के मंच पर जब वह अपने सिग्नेचर अंदाज में कहते थे क्या बात क्या बात क्या बात तो पूरे देश की धड़कनें रुक जाती थी। उनके बिना टीवी का कोई भी डांस शो अधूरा लगने लगा था। जिंदगी के इस सफर में उन्होंने राजनीति के अखाड़े में भी अपनी किस्मत आजमाई। वह राज्यसभा सांसद बने और आज भी अपनी बेबाक बयानबाजी और अंदाज के लिए जाने जाते हैं। लेकिन सबसे बड़ा लम्हा तो अभी हाल ही में आया। जिस एक्टर को कभी उसके सांवले रंग के लिए रिजेक्ट किया गया था। आज उसी को भारत सरकार ने पद्म भूषण और भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहब पालके पुरस्कार से नवाजा है। यह सिर्फ एक अवार्ड नहीं है बल्कि उन सभी लोगों को करारा जवाब है जिन्होंने कभी उनके सपनों पर शक किया था। द कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों में उनका काम यह चीख-चीख कर कहता है कि शेर बूढ़ा जरूर हुआ है लेकिन शिकार करना नहीं भूला। तेरे नाम का कुत्ता पालूं साले।
भागने को आता नहीं और काटने को आ गया। तो चलिए दोस्तों अब बात करते हैं बॉलीवुड के डिस्को डांसर यानी मिथुन चक्रवर्ती की उस जिद्दी सोच और मास्टरमाइंड दिमाग की जिसने उन्हें आज की तारीख में पूरे ₹1200 करोड़ के विशाल साम्राज्य का अकेला शहंशाह और मालिक बना दिया है। आखिर कैसे मिथुन दा की सिर्फ एक जिद और एक दूरदर्शी फैसले ने उन्हें गरीबी के अंधेरों से निकालकर अमीरी के इस सबसे ऊंचे मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया। दरअसल दोस्तों यह उस द्वार की बात है जब फिल्म इंडस्ट्री में मिथुन चक्रवर्ती की फिल्में लगातार बैक टू बैक बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर रही थी और फ्लॉप हो रही थी। उस वक्त मिथुन दा को यह कड़वी सच्चाई अच्छी तरह से समझ में आ चुकी थी कि सिर्फ अभिनय के भरोसे बैठकर जिंदगी नहीं काटी जा सकती। कमाई का एक मजबूत और दूसरा स्थाई जरिया होना बेहद जरूरी है। और दोस्तों यहीं से शुरू हुआ मिथुन चक्रवर्ती का वो मास्टर प्लान जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हैरान कर दिया। मिथुन दा ने लगातार अंधाधुंध फिल्में साइन करनी शुरू कर दी। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि फिल्म बड़े पर्दे पर हिट होगी या फ्लॉप। बी ग्रेड होगी या ए ग्रेड। उनका सीधा और साफ फंडा था। काम करो, मेहनत करो और अपना चेक लेकर घर आओ। लेकिन दोस्तों, असली खेल तो इसके बाद शुरू हुआ। फिल्मों से मिलने वाले एक एक की खून पसीने की कमाई को मिथुन चक्रवर्ती ने फिजूल खर्ची में उड़ाने के बजाय बहुत ही चालाकी से अपने होटल बिजनेस में इन्वेस्ट करना शुरू कर दिया। उन्होंने खूबसूरत वादियों वाले शहर ऊंटी में जमीनें खरीदकर लग्जरी रिसोर्ट्स और होटल्स खड़े करने शुरू कर दिए। देखते ही देखते जो मिथुन चक्रवर्ती कभी एक-एक रोल के लिए तरसते थे उनके पास अकेले ऊंटी और दक्षिण भारत में 25 से भी ज्यादा आलीशान और लग्जरी होटल्स का एक विशाल साम्राज्य खड़ा हो गया। लेकिन मिथुन दा की इस कारोबारी दिमाग की दाद देनी पड़ेगी। दोस्तों, उन्होंने अपने इन होटल्स को सिर्फ पर्यटकों के ठहरने तक ही सीमित नहीं रखा। बल्कि बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े प्रोड्यूसर्स को अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए यह होटल्स किराए पर देने शुरू कर दिए। आलम यह था कि 90 के दशक में जितनी भी फिल्मों की शूटिंग ऊंटी में होती थी, उनका आधा बजट तो अकेले मिथुन दा के होटल्स के किराए में ही चला जाता था। यहां तक कि मिथुन चक्रवर्ती ने अपने बेटे की पहली फिल्म की शूटिंग भी अपने ही होटल में करवाई थी। इसी मास्टरमाइंड दिमाग, कड़े संघर्ष और जिद की बदौलत पिछले 22 सालों के भीतर मिथुन चक्रवर्ती आज 12 करोड़ नहीं बल्कि पूरे ₹1200 करोड़ की अकूत संपत्ति के मालिक बन चुके हैं। दोस्तों एक दौर में सड़क से शुरुआत करके आज 1200 करोड़ के होटल साम्राज्य का मालिक बनना दिखाता है कि अगर इंसान के अंदर कुछ कर गुजरने की ज़िद हो तो किस्मत को भी झुकना ही पड़ता है। मिथुन चक्रवर्ती की इस शानदार कामयाबी और उनके इस मास्टरमाइंड बिजनेस प्लान पर आपकी अपनी क्या राय है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय लिखना बिल्कुल मत भूलिएगा। तो
दोस्तों, यह थी कोलकाता की गलियों से निकलकर पूरी दुनिया पर राज करने वाले मिथुन चक्रवर्ती की वह जादुई कहानी जो हमें सिखाती है कि अगर इरादे फौलादी हो तो किस्मत की लकीरों को भी बदला जा सकता है। जिसे उसके सांवले रंग के कारण कभी तिरस्कार झेलना पड़ा। आज वह भारतीय सिनेमा का वह चमकता हुआ सितारा है जिसे दुनिया डिस्को डांसर और महागुरु के नाम से जानती है। मिथुन दा का यह सफर सिर्फ एक बायोग्राफी नहीं है बल्कि हर उस इंसान के लिए एक सबक है जो संघर्ष के दिनों में हार मान लेता है। उन्होंने हमें दिखाया कि सफलता का रास्ता नक्सलवाद की गलियों से होकर नेशनल अवार्ड के मंच तक और ऊंटी के मोनार्क होटल से लेकर संसद की सीढ़ियों तक जा सकता है। उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी सीख यही है कि मेहनत करो फल की चिंता मत करो क्योंकि वक्त सबका बदलता है। अब बारी आपकी है। हमें कमेंट्स में जरूर बताइए कि आपको मिथुन चक्रवर्ती का कौन सा रूप सबसे ज्यादा पसंद है। क्या आप उनके उस पुराने डिस्को डांस और जिमीजिमी वाले अंदाज के दीवाने हैं? या फिर आपको उनका अग्निपथ वाला कृष्णन अय्यर और उनकी धमाकेदार दादागिरी ज्यादा पसंद आती है। उनकी कौन सी फिल्म आपने सबसे ज्यादा बार देखी है, यह भी हमें नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो और मिथुन दा की यह अनसुनी कहानी आपके दिल को छू गई हो, तो इस वीडियो को एक लाइक जरूर दें। अपने दोस्तों और परिवार के साथ इसे शेयर करें ताकि वे भी जान सकें कि एक साधारण लड़का कैसे असाधारण बनता है। और हां अगर आप ऐसे ही बॉलीवुड के दिग्गजों की अनकही और मसालेदार कहानियों को देखना चाहते हैं तो आपके अपने चैनल बॉलीवुड बायोटाइ को अभी सब्सक्राइब करें और उस बेल आइकन को दबाना बिल्कुल ना भूलें ताकि हमारा अगला धमाका आप तक सबसे पहले पहुंचे। मिलते हैं आपसे बहुत जल्द एक और जबरदस्त बायोग्राफी के साथ। तब तक के लिए अपना ख्याल रखें और मुस्कुराते रहें। और याद रखिए कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।