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बेटी, मैंने गंदा गाना लिख दिया!” जब स्टूडियो छोड़कर भागे मजरूह सुल्तानपुरी

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अभी गाना रिकॉर्ड भी नहीं हुआ था कि पहले ही टेक में गीतकार मजरू सुल्तानपुरी अपनी जगह से उठे बड़ी शर्मिंदगीगी से गायिका आशा भोसले की तरफ देखा और बोले बेटी मैंने बड़ा ही गंदा गाना लिखा है। कल को मेरी बेटियां भी बड़ी होकर यह गाना गाएंगी। इतना कहकर वह तुरंत स्टूडियो से बाहर निकल आए। आशा भोसले और संगीतकार आर डी बर्मन कान से स्टूडियो मॉनिटर हेडफोन हटाते हुए बड़ी हैरानी से मजरू को देखते रहे। बर्मन ने कहा ऐसा भी क्या है इस गाने के बोल में? मुझे तो कुछ भी गंदा या अश्लील नहीं लगता। आशा भोसले चुप रही लेकिन मजरू की यह बात उनके जेहन में अब भी तैर रही थी कि बेटी मैंने बड़ा ही गंदा गाना लिखा है। यह वही मजरू सुल्तानपुरी थे जिन्होंने 50 और 60 के दशक में एक से बढ़कर एक कल्ट क्लासिक गाने लिखे थे। प्यार कभी पार लगाती है नजर।

माना जनाब ने पुकारा नहीं रहे हम महका करेंगे खोया खोया चांद खुला आसमान ये है रेशमी जुल्फों का अंधेरा ना घबराए हालांकि उनके लिखे कुछ बेहद रोमांटिक और तब के पैमानों पर उत्तेजक कहे जाने वाले गाने भी थे एक लड़की भीगी भागी सी छोटी रातों लेकिन ये पहला मौका था जब किसी गाने के बोल ने खुद गीतकार को अपराध बोध में डाल दिया था कि उसने एक गंदा या अश्लील गाना लिखा है। लेकिन वो गीतकार शायद इस बात से बेखबर था कि यह गाना ना केवल म्यूजिक ट्रैक पर चार्ट बस्टर होने वाला है बल्कि कई पीढ़ियों तक करोड़ों दिलों की धड़कन भी बन जाएगा। दोस्तों, हम बात कर रहे हैं 1971 में आई नासिर हुसैन निर्देशित फिल्म कारवा की जिसमें जितेंद्र और आशा पारिक लीड रोल में थे और आरडी बर्मन ने संगीत दिया था। गाना एक कैबरे थीम पर था जो हेललेन पर फिल्माया गया था और इस एक गाने ने हेललेन को भी बतौर कैबरे डांसर सिल्वर स्क्रीन की सनसनी बना दिया था। पिया तू अब तो आजा। यह वही नासिर हुसैन है जिन्होंने कुछ साल पहले एक फिल्म प्रोड्यूस की थी

तीसरी मंजिल जहां से आर डी बर्मन ने बतौर संगीतकार उड़ान भरी थी। जा मैं हूं प्यार तेरा। ओ हसीना जुल्फों वाले जाने जहां दीवाना मुझ सा नहीं इस अंबर के नीचे और तमाशा भोसले से उनकी नजदीकियां भी कायम नहीं हुई थी। लेकिन आशा और आर डी बर्मन की जोड़ी ने इस फिल्म के म्यूजिक ट्रैक पर जो सनसनी जो धड़कन और जो मेलडी मैजिक पैदा किया वो नई पीढ़ी के दर्शकों और श्रोताओं के सिर चढ़कर बोला था। मेरे सोना रे सोना रे सोना रे दे दूंगी जान जुदा कारवा तो नासिर के भाई ताहिर हुसैन प्रोड्यूस कर रहे थे लेकिन सारी क्रिएटिव कमांड डायरेक्टर नासिर के ही हाथ में थी। उन्होंने फिल्म के म्यूजिक के लिए तीसरी मंजिल वाली टीम ही रखी थी। यानी संगीतकार आर डी बर्मन गीतकार मजरू सुल्तानपुरी। फीमेल वॉइस के लिए लता और आशा दोनों ही थी। लेकिन आशा ने तीसरी मंजिल में जो वाइफ जो खनक पैदा की थी उसी के लिए उन्हें यहां भी रखा गया था। है। आपको तीसरी मंजिल से बस एक फ्लोर ऊपर आना है। समझदार के लिए इशारा काफी था। कैबरे धुन में कुछ ऐसे शब्द पिरोने थे कि पर्दे पर हेललेलन का डांस दिखे और पसीना दर्शकों की पेशानी पर आए। मजरू सुल्तानपुरी का हुनर और तजुर्बा तब किसी परिचय का मोहताज नहीं था। उन्होंने कई ऐसे गाने लिखे थे जो उस दौर में तो हॉट कहे जा सकते थे। लेकिन यहां शब्दों से ज्यादा आरडी की धुन और आशा का अंदाज भी मायने रखने वाला था। ऐसे में गीतकार संग इस टीम की मीटिंग भी हुई

और जो गाना मजरू की कलम से निकला उसका असर उन्हें खुद तब महसूस हुआ जब उन्होंने आशा को स्टूडियो में गाते सुना। गाना तो बड़ा कामुक और अश्लील है। मेरी फजीहत ना हो जाए। लेकिन उन्हें फिर यह भी लगा कि ना तो उनके शब्द अश्लील है और ना ही उनकी नियत। और जब उन्होंने यह कहा कि मेरी बेटियां भी बड़ी होकर इसे गाएंगी तो शायद उनके भीतर की वह ईमानदारी बोल रही हो कि मैंने तो ऐसा गाना लिखा है जिसे कोई भी सुन सकता है। नहीं रहा। फिल्म कारवा अपने गीत संगीत के दम पर ना केवल सुपरहिट हुई और साल 1971 की टॉप ग्रॉसिंग फिल्मों में शुमार भी बल्कि वर्ल्ड वाइड टिकटों की बिक्री का एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसे तब तक और अगले कई साल तक शायद ही कोई फिल्म तोड़ पाई। चढ़ती जवानी मेरी जान मस्ताई। अरे हो गोरिया कहां तेरा देश रे कितना प्यारा वादा है

हिम्मत वाली आंखों का ये मैं कहां का हल्दी पति ये फिल्म चीन में द जिप्सी के नाम से रिलीज हुई और वहां लंबी अवधि में इसने 8 करोड़ से ज्यादा टिकट बेचे थे। कहा तो यह भी जाता है कि इसने तब तक भारत की ओर से सबसे ज्यादा ओवरसीज फुटफॉल का रिकॉर्ड बनाया था और आज भी क्रिटिक्स इसकी तुलना दंगल के चाइनीज कलेक्शन से करते नहीं थकते। खैर जो भी हो फिल्म को सुपरहिट ब्लॉकबस्टर बनाने में इस गाने का भी कम योगदान नहीं था। और यह कहना गलत ना होगा कि आशा भोसले और आरडी बर्मन के अपबीट धुनों की सबसे बेहतरीन नुमाइश थी।

अब तो आजा इस फिल्म का म्यूजिक ट्रैक रिलीज होते ही इस गाने पर सेंसर की भी कैंची चली और रेडियो पर तो इसे बैन कर दिया गया था। जैसे-जैसे फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया इस गाने की भी अहमियत और पॉपुलरिटी बढ़ती चली गई। इसने गीतकार मजरू सुल्तानपुरी को कितनी पॉपुलैरिटी दिलाई यह हम नहीं कह सकते क्योंकि वह खुद ऐसे गानों के लिए नहीं जाने जाते थे। लेकिन उनकी धाक इस बात के लिए जरूर जम गई कि वह सिर्फ संजीदे और साहित्यिक गीत ही नहीं लिखते। उनकी कमर्शियल वैल्यू भी है। और दोस्तों चंद साल बाद जब फिल्मी गानों के बोल सामाजिक पैमानों से टकराने लगे तो यह गाना तो कहीं से भी गंदा और अश्लील नहीं लगा। और खुद आशा भोसले ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि जिस गाने पर मजरू साहब शर्मिंदा थे वो मेरे लिए लंबी उड़ान लेकर आया। भोला साह के आंखें बुझा। हालांकि मजरू सुल्तानपुरी का सफर भी बहुत लंबा चला और इसी खान ब्रदर्स ने उन्हें 90 के रोमांटिक जॉनर तक खूब भुनाया। पहला नशा पहला खार ऐ मेरे हमसफर एक जरा राजा को रानी से प्यार हो गया पिया तू अब तो आजा

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