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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद रो पड़े अभिजीत दीपके?

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जंतर-मंतर पर छलके अभिजीत डिपके के जज्बात: ‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए!’नीट पेपर लीक विवाद और लंबे समय से चल रहे छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद आखिरकार केंद्र सरकार से एक बहुत बड़ी खबर सामने आई। देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर के सामने आते ही जहां पूरे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है, वहीं दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे **कॉकट्रेच जनता पार्टी (CJP)

के फाउंडर अभिजीत डिपके (Abhijeet Dipke)** का एक अलग ही रूप देखने को मिला।इस्तीफे की खबर मिलते ही अभिजीत डिपके जंतर-मंतर के मंच पर भावुक हो गए और खुशी से घुटनों के बल बैठकर मंच पर हाथ पटकने लगे। उनका यह इमोशनल और एनर्जेटिक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है।### “सुबहा हो गई मामू!” – अभिजीत डिपके का जोरदार तंजजैसे ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का पत्र सार्वजनिक हुआ और जंतर-मंतर पर इसकी पुष्टि हुई, वहां मौजूद छात्रों और प्रदर्शनकारियों में जश्न की लहर दौड़ गई। मंच से मुन्ना भाई एमबीबीएस का मशहूर डायलॉग **”सुबहा हो गई मामू!”** बोलते हुए अभिजीत डिपके ने सरकार पर तीखा तंज कसा।उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए कहा,> *”कहा जाता था इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए! हमने कर दिखाया, धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया

डरने की जरूरत नहीं, यह है लोकतंत्र की ताकतअभिजीत डिपके ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यदि आप डरते नहीं हैं और लोकतंत्र में अपनी आवाज बुलंद रखते हैं, तो किसी को भी झुकना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई है और उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी बाकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।उन्होंने अपनी दो मुख्य मांगें दोहराते हुए कहा: 1. एक करोड़ रुपये का मुआवजा:**

नीट विवाद के दौरान जिन छात्रों ने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाया, उनके परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए। 2. **पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ एक्शन:** प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर सख्ती बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। “मुझे हीरो मत बनाइए…”धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जहां हर कोई उन्हें इस सफलता का श्रेय दे रहा था,

वहीं अभिजीत डिपके ने बेहद परिपक्वता दिखाते हुए समर्थकों से अपील की कि वे उन्हें व्यक्तिगत तौर पर ‘हीरो’ न बनाएं। उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देश के तमाम छात्रों और युवाओं की सामूहिक जीत है।जंतर-मंतर पर छात्रों ने एक-दूसरे को गले लगाया और ‘चक दे इंडिया’ गाने पर जमकर जश्न मनाया। बहरहाल, शिक्षा मंत्री के इस इस्तीफे ने देश की सियासत में एक नया मोड़ ला दिया है, और अभिजीत डिपके का यह अंदाज इस पूरे आंदोलन का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया है।

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