वी हैव वी हैव जो रिवार्ड रखी थी उन सबको सरकार ने सहानुभूति पूर्वक माना भी है। हम खुश है कि ये सारे डिमांड्स एक्सेप्ट। सुबह हो गई मामा। कल दोपहर को सूत्रों के हवाले से जो खबर भिजवाई गई थी, वह आज की दोपहर चढ़ते-चढ़ते पलट गई। सरकार और पूरी पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के साथ खड़े होने के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा।
दो पेज की चिट्ठी आई। धर्मेंद्र प्रधान ने असली बात सेकंड लास्ट पैरा की अंतिम पंक्ति में लिखी थी मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है। इस देश के राजनीतिक इतिहास के पन्ने आप पलटते जाइए। एक परीक्षा का पर्चा लीक होने पर कब शिक्षा मंत्री को जवाबदेह ठहराया गया। यह राजनीतिक शास्त्र में पारंगत ग्रे बाल वाले प्रोफेसर भी नहीं बता पाएंगे जिन्होंने इतिहास देखा है भारत की राजनीति का। लेकिन ये कल के लड़के लड़कियां जिनके बाल रंगीन हैं। जिन्हें एपॉलिटिकल मान करके खारिज किया जा रहा था। जिन्हें आलसी और जिद्दी कहा जा रहा था। जिसे रील वाली जनरेशन का टैग दे दिया गया था। उसी जिनजी ने शिक्षा मंत्री की कुर्सी के पेंच खोल कर के जेब में रख लिए और जंतरमंतर पर जाकर के बैठ गया।
ने रिजाइन कर दिए वी हैव रेडी क्या कहते थे ये क्या कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते क्या कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते? हम कहना चाहते हैं झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए। आज दोपहर 3:30 बजे दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार के बीच तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बैठक होनी थी। तमाम कयासों के बीच सबकी नजरें इस मीटिंग पर टिकी थी। लेकिन खबर तो मीटिंग से पहले ही बाहर आ गई। 2:18 पर खुद धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को किनारे रखकर के सरकार की प्रतिष्ठा को और नुकसान ना पहुंचाने का ऐलान कर दिया। लेकिन इसके बाद मीटिंग भी हुई।
सीजेपी के आशुतोष रांका और सौरव दास की केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ बातचीत हुई। लेकिन देखिए 24 घंटे में कैसे वक्त बदल गया। जज्बात बदल गए। कल और आज की तस्वीरों पर गौर फरमाइएगा थोड़ा गौर से। कल सरकार के मंत्री सोफे पर बैठे हुए थे। आशुतोष और सौरव कुर्सी पर थे। आज दोनों पार्टियों के लिए कॉकरोच जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के मंत्री दोनों के प्रतिनिधियों के लिए सोफा लगा हुआ था। कल आशुतोष और सौरव हाथ बांध करके बैठे थे। नड्डा और जितेंद्र सिंह सोफे पर हाथ फैलाए बैठे थे। कल अपनी तीन मांगों पर अड़े आशुतोष और सौरभ की बॉडी लैंग्वेज में असहजता स्पष्ट दिखाई पड़ती थी। आज इस्तीफे के बाद मंत्रियों के सामने तन करके बैठे सीजेपी के प्रतिनिधियों का कॉन्फिडेंस चर्चा और मीमांसा का कच्चा माल बना हुआ है। मुस्कुराते हुए दिखे सौरव दास। मीटिंग के बाद सरकार और सीजेपी की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। 12 साल के मोदी सरकार के कार्यकाल और कार्यशैली को देखते हुए क्या कोई यह सोच सकता था कि सरकार के वरिष्ठतम मंत्रियों के बगल में बैठकर 3032 साल के लड़के प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे होंगे। मंत्रियों को यह लड़के माइक पास कर रहे होंगे। तमाम नानुकुर सारे पैतरे साम दाम दंड भेद सब कुछ आजमाने के बाद आखिरकार सरकार को यह बोलना पड़ा। यह मानना पड़ा कि हमने इनकी सभी मांगे स्वीकार कर ली हैं और तब जाकर के सीजेपी के नुमाइंदों ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया। ये तीनों डिमांड बहुत रीज़नेबल डिमांड्स थे एंड बहुत ज्यादा टाइम लग गया इस चीज को एक्सेप्ट करने में। लेकिन हम खुश हैं कि ये सारे डिमांड्स एक्सेप्ट। आज भी लंबी बातचीत हुई। ये आज एक रिटन मसौदा लेकर के आए थे जिसमें उन्होंने एजिटेशन में चल रहे केसेस के बारे में चार पॉइंट्स दिए थे और उसके साथ साथ जो बाकी दो डिमांड्स थीटा मेजर्स ना लिए जाए कंपनसेशन दिया जाए और इनके फाइव पॉइंट चार्टर को कंसीडर किया जाए उस पर डिटेल में चर्चा हुई मेरे ख्याल से इन्होंने जो रिवार्ड रखी थी उन सबको सरकार ने सहानुभूति पूर्वक माना भी है और एक्सेप्ट भी किया है।
मेरा निवेदन है कि आप सब से के हमारे जो आंदोलन करने वाले हैं वो अपने एजिटेशन को विड्रॉ करें और पीसफुली हम सब लोग आगे बढ़े। बेसिकली सीजेपी की तीन मांगे थी। पहली धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। दूसरी जिन छात्रों ने नीट पेपर लीक की वजह से जान दी है उनके परिवारों को 1 करोड़ का मुआवजा और तीसरी जिन प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने एफआईआर की है वह वापस ली जाए और भविष्य में भी उन पर कोई केस ना किया जाए। दूसरी और तीसरी मांग पर सरकार ने पहले ही आश्वासन दे दिया था। यही मांगे सोनम वांगचुक ने भी सरकार के सामने रखी थी। उन्हें भी सरकार ने एक लिखित आश्वासन दे दिया था कि हम कंसीडर कर रहे हैं। पेच पहली ही मांग पर फंसा था।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर 20 जून को अभिजीत दीपके जंतरमंतर पर धरना देने आए थे। कयास यह लगाए जा रहे थे कि पिछली बार की तरह इस बार भी शाम तक बोरिया बिस्तर समेट लेंगे। लेकिन दीपके ने शाम को यह ऐलान कर दिया कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा तब तक जंतरमंतर से नहीं उठेंगे। और आखिरकार महीने से ज्यादा समय के धरने, सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन और दिल्ली में उमड़े हजारों युवाओं के अश्लील और अश्लील नारों, पोस्टर बने मीमों के बीच धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देने पर मजबूर हुए। अब इसमें बड़ा सवाल यह है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा फाइनल कब हुआ? कब यह तय हुआ कि धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री का पद छोड़ देंगे? सरकार के साथ कल की मीटिंग के बाद आशुतोष रांका ने कहा था कि सरकार ने दो मांगे तो मान ली हैं।
र्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने कल तक का समय मांगा है। रांका ने तो यहां तक कह दिया था कि उन्हें उम्मीद है कि कल तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे देंगे। बीजेपी के एक राज्यसभा सांसद ने नाम ना बताने की शर्त पर हमें यह बताया कि कल की मीटिंग में सरकार के 24 घंटे का समय मांगने से इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि इस्तीफा हो सकता है। बीजेपी कवर करने वाले एक सीनियर जर्नलिस्ट ने हमें बताया कि कल रात ही यह तय हो गया था कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे देंगे। कल रात प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर दूसरा सेल्फी वाला वीडियो पोस्ट किया। लेकिन तब तक प्रधानमंत्री यह तय कर चुके थे कि अब धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री नहीं रहेंगे।
यह बात कल रात ही धर्मेंद्र प्रधान को बता भी दी गई थी। आज सुबह उन्होंने अपना रेजिग्नेशन लिखा और दोपहर तक सार्वजनिक कर दिया। कुछ ऐसी ही है शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी। पर इस्तीफे पर हमारे पॉलिटिकल एडिटर पंकज झा क्या कह रहे हैं वह भी सुनिए। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को शुक्रवार को ही पटना जाना था बांकीपुर में बाय इलेक्शन के प्रचार के लिए। लेकिन उनका दौरा रद्द हो गया। शनिवार को पहुंचे। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कब होगा? और इस्तीफे का प्रारूप यानी वो जो कहेंगे कि हम इस्तीफा क्यों दे रहे हैं वो सब कुछ तय हो चुका था। इस्तीफा देने से करीब 24 घंटे पहले। जब बीजेपी कवर करने वाले पत्रकारों को यह बताया गया था। सूत्रों के हवाले से कि भाई ऐसा है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होगा। वह एक डायवर्जन था। इस इस्तीफे की जानकारी के मतलब इस इस्तीफे के बारे में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री और संघ के शीर्ष पर बैठे जो लोग हैं उनको भी इस बात की जानकारी थी।
और इस्तीफे के जो दो पन्ने की चिट्ठी आई है वो भी कई नजरों से होकर गुजरी है कि उसमें क्या-क्या लिखा गया है। यह मामला तब हुआ था जब जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मुलाकात कांग्रेस पार्टी के जो दो लोग हैं उनसे हुई थी और उसमें आखिरी में यह बात आई थी कि यह जो सबसे पहली मांग है हमारी कि धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफा वो हमारा पहला मा पहली मांग है और उसके लिए उनको एक समय सीमा दी गई थी कि मैं 24 घंटे बाद बताऊंगा और प्रधानमंत्री ने बहुत आउटरीच करने की कोशिश की वो नए कानून को लेकर फिर जो जजी से संवाद करने को लेकर वो सारी चीजें और ऐसा फीडबैक प्रधानमंत्री को बहुत पहले मिल चुका था।
आप याद करिए मंगलवार को जब पार्लियामेंट में एनडीए के सांसदों के साथ बैठक हुई थी तभी उन्होंने कहा था कि पेपर लीक घोर पाप है। वो जान गए थे कि इस बार मामला बहुत दूर तक जा चुका है। जो किसान मूवमेंट में हुआ या उससे पहले दूसरे तमाम आंदोलनों में हुआ। सरकार 7 साल भर तक कुछ नहीं रिएक्ट की। लेकिन यह पहला मामला था जहां मोदी अपनी लीक और ट्रेडिशन से हटकर उन्होंने काम किया। क्योंकि जान रहे थे कि चुनौती बहुत बड़ी है। इस्तीफे की कहानी के कई पहलू हो सकते हैं।
लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर मोहर लगवाने वाले तीन चेहरों पर भी बात करना जरूरी है। अभिजीत दीपके से शुरुआत करते हैं। कॉकरोच जनता पार्टी जिनका ब्रेन चाइल्ड है। इस आंदोलन के शुरू होने से पहले ही आम आदमी पार्टी के साथ उनका काम खबरों में था। 2020 से 2023 के बीच अभिजीत आम आदमी पार्टी की कम्युनिकेशन टीम से जुड़े रहे। उन्होंने सोशल मीडिया स्ट्रेटजी और डिजिटल कैंपेन पर काम किया।
2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए मीम्स और डिजिटल कंटेंट का इस्तेमाल किया। इसके बाद पढ़ाई करने वो अमेरिका चले गए। बॉसन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की पढ़ाई की। नौकरी ढूंढ रहे थे। अमेरिका में ही बसने का प्लान भी कर रहे थे और उसके बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की एक टिप्पणी आती है और 16 मई 2026 को उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी का एक Instagram पेज वो बना लेते हैं। जिसको इंस्टा क्रांति बताया गया उसने चुनी हुई सरकार के सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री के मंत्री को शिक्षा मंत्री को इस्तीफा लिखने पर मजबूर कर दिया। हालांकि दीपके ने यह जरूर कहा कि उन्हें हीरो ना बनाया जाए। आई सैल्यूट यू ऑल। और मैं अब एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज कहना चाहता हूं। आज धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ है। इसके लिए मुझे हीरो मत बनाना।
ये गलती मत करना। ये गलती मत करना। मुझे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की वजह से हीरो मत बनाना। एक इंसान को हीरो बनाने की वजह से ही देश का कपाड़ा हुआ है। अब दूसरे चेहरे की बात करते हैं। आशुतोष राका काम कंपोज्ड सीजेपी का गंभीर दिखने वाला चेहरा पढ़ा लिखा नेशनल स्पोक्सपर्सन राजस्थान के जयपुर के रहने वाले आईआईटी ग्रेजुएट आईआईटी कानपुर से मटेरियल्स इंजीनियरिंग में बीटेक किया। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशनंस में मास्टर्स किया। फिर लंदन में मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म है। मैकेंसी एंड कंपनी में काम किया।
फ्री प्रेस जनरल की मानें तो आशुतोष रांका ने कुछ ही साल बाद कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ के पब्लिक पॉलिसी और सामाजिक आंदोलनों का रास्ता चुना। अभिजीत की तरह इन्होंने भी पहले आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार के साथ एसोसिएट फेलो के तौर पर काम किया। इस दौरान उन्होंने पब्लिक पॉलिसी, गवर्नेंस और युवाओं के मुद्दों से उनका जुड़ाव रहा। पिछले एक साल में रांका, जयपुर और राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार और युवाओं के मुद्दे से जुड़े कई आंदोलन का हिस्सा रहे। 3 जून 2026 को उन्हें ऑफिशियली सीजेपी का चीफ स्पोक्सपर्सन बनाया गया था। फरवरी 2025 तक वह अरविंद केजरीवाल के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे थे।
तीसरा चेहरा है सौरव दास। एमटी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की। खुद को इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट कहते हैं। सौरव 18 साल की उम्र से आरटीआई एक्ट का इस्तेमाल करते आए हैं। सौरव ने 2020 में प्रोफेशनल पत्रकारिता की शुरुआत की। द कैरेबन आर्टिकल 14 अलजजीरा, द वायर, द हिंदू और द और न्यू लाइंस मैगज़ीन के लिए लीगल मामलों पर रिपोर्ट्स लिखी।
फुल टाइम एक्टिविस्ट बनने से पहले सौरव दास ने ग्रीन ट्रिब्यूनल, हेट स्पीच, उमर खालिद की बेल जैसे मुद्दों पर लिखा।
कैरबन मैगज़ीन में पूर्व सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूर की लंबी प्रोफाइल इनकी चर्चित स्टोरीज में रही है। हालांकि इस आंदोलन में सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। सोनम वांगचुक के गिरते वजन ने ही इस आंदोलन को शुरुआती धार दी। लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि सोनम वांगचुंग ने जब इस्तीफे की मांग आखिरी समय में छोड़ दी थी उस पर एडममेंट नहीं थे तब भी सीजेपी अपनी तीन मांगों पर अड़ी रही जिनमें सबसे ऊपर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था।
इस आंदोलन में विपक्ष ने भी उनका साथ दिया। कई बार साथ आकर के कई मौकों पर साथ ना दिख के भी प्रधानमंत्री के घर के बाहर हंगामा हो या संसद में कामकाज को ठप करना सरकार दो मोर्चों पर घिर चुकी थी। आज सुबह राहुल गांधी 10 जनपद के बाहर मीडिया से मुखातिब हुए।
साथ में 23 दिन अनशन करने वाली आयशा की नेहा बोरा और दूसरे प्रदर्शनकारी छात्र भी थे। कल शाम से सूत्रों के हवाले से इस्तीफे का खंडन करती खबरों के बीच राहुल ने अलग लाइन दी।
बोले कि शिक्षा मंत्री का मंत्रालय बदला जा सकता है। बीजेपी धर्मेंद्र प्रधान को किसी दूसरे मंत्रालय में भेजने पर विचार कर रही है। उनकी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटे बाद इस्तीफे का ऐलान हो गया और ऐलान के बाद राहुल ने फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसे छात्रों की जीत भारत के भविष्य की जीत बताया।
धर्मेंद्र प्रधान की आलोचना की। उन्हें का प्रतीक बताया। ये जो हमारे स्टूडेंट्स हैं इनकी विक्ट्री है। इनकी जीत है। प्रधान एक सिंबल है। करप्शन का सिंबल, एजुकेशन सिस्टम के डिस्ट्रक्शन का सिंबल, इनकॉम्पटेंस का सिंबल सिंबल सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लिखा कि यह इस्तीफा नहीं इंकलाब है।
उम्मीद जताई कि नया दौर आएगा, बदलाव लाएगा। कमोबेश विपक्ष के सभी नेताओं ने इसे छात्रों के संघर्षों की जीत बताया है। पूरे देश के छात्र नौजवानों की जीत हुई है। इंकलाब का नारा देने वालों की जीत हुई है। हल्ला बोल का नारा देने वालों की जीत हुई है। जिस तरीके से आंसू गैस लाठी और अपमान के बाद भी मुकाबला करते रहे बहादुरी के साथ।
बहादुरी के साथ जो मुकाबला किया और झुके नहीं उसकी जीत है। इंकलाब की जीत है। धर्मेंद्र प्रधान ने नीट पेपर लीक की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। जवाबदेही तय होने की मुनादी पीटी जा रही है। लेकिन धर्मेंद्र प्रधान की पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन उनके इस्तीफे वाली पोस्ट पर उपलब्धियां गिना रहे हैं। बता रहे हैं कि धर्मेंद्र प्रधान नेशनल एजुकेशन पॉलिसी समेत अन्य मुद्दों को सफलतापूर्वक लागू करने में अहम भूमिका निभाई। लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान का पद छोड़ने का फैसला सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के उच्चतम मानकों को दर्शाता है।
और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी बयान आया जिन्होंने एक समय कहा था कि एनडीए की एनडीए में इस्तीफे नहीं होते हैं। यह यूपीए की सरकार नहीं है। और कई सालों तक इस बात को पत्थर की लकीर माना भी गया। जब भी इस्तीफे की बात होती थी गाहे बगाहे सोशल मीडिया के गलियारों में उनका 10 साल पुराना यह बयान तैरने लगता था।
आज रक्षा मंत्री ने लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री मोदी और हमारी सरकार के लिए विद्यार्थियों और युवाओं की भावनाओं का सम्मान और उनके उज्जवल भविष्य के लिए प्रतिबद्धता सर्वोपरि है।
उम्मीद है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में बैठे सत्ताधीशों को यह भुलावा अब दोबारा नहीं होगा कि उनकी सरकार में इस्तीफे नहीं हो सकते। जनता चाहे तो कुछ भी करवा सकती है।