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क्यों महेश भट्ट ने आलिया भट्ट को कभी अपनी फिल्मों में मौका नहीं दिया?

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यार आज ना मैं तुमसे एक सवाल पूछती हूं। अगर तुम्हारे पापा महेश भट्ट हो तो तुम्हें बॉलीवुड में लॉन्च कौन करेगा? जवाब सीधा है ना? खुद महेश भट्ट। लेकिन आलिया भट्ट के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। एक बाप, दो बेटियां, एक बेटी को वो खुद लॉन्च करते हैं। खुद डायरेक्टर बन जाते हैं। खुद कैमरा के पीछे खड़े होकर उसका पूरा साथ देते हैं। देखो, अब तुम मुझ पर यह जताने की कोशिश मत करना कि तुमने मेरी वजह से बस छोड़ दी। मैं यह कहने की सोच ही रहा था। और दूसरी बेटी को उसे भेज देते हैं किसी और डायरेक्टर के पास। पूजा को महेश भट्ट ने खुद लॉन्च किया। खुद डायरेक्ट किया। कई फिल्म में साथ में काम किया। लेकिन आलिया को आलिया का डेब्यू हुआ करण जौहर के साथ स्टूडेंट ऑफ द ईयर से। गुलाबी आंखें जो मेरी देखी। आलिया के ही पापा ने उन्हें खुद लॉन्च नहीं किया। उनके लॉन्च से दूर रहे। यार सोचो जो बाप अपनी एक बेटी के लिए डायरेक्टर बन गया उसी बाप ने दूसरी बेटी को किसी और के हाथों में सौंप दिया। एक बाप अपनी बेटी के लिए क्या कुछ नहीं करता यार। एसआरके को देख लो अपनी बेटी को लॉन्च कर रहे हैं। किंग लेकर आ रहे हैं 350 करोड़ की फिल्म और मूवी फ्लॉप ना हो जाए इसीलिए खुद भी

फिल्म का हिस्सा बन रहे हैं। प्रोडक्शन हाउस भी खुद ही का है। तो महेश भट्ट ने ऐसा क्यों किया? जिस आदमी ने इमरान हाशमी को लॉन्च किया। कंगना रनौत को लॉन्च किया। विपाशा, बसु, शाइनी, अूजा जैसे कितने चेहरों को उन्होंने विशेष फिल्म्स के जरिए लॉन्च किया। ऑडियंस तक पहुंचाया। वही आदमी अपनी ही बेटी के लिए एक फिल्म नहीं बना पाया। क्यों? क्या आलिया में टैलेंट नहीं था? अब तो यह बात आज कोई नहीं कह सकता। तो फिर वजह क्या थी? आज मैं उसी राज को खोलने वाली हूं। चलो वीडियो को शुरू करते हैं। पहले बात करते हैं पूजा के लॉन्च की। महेश भट्ट ने अपनी बेटी पूजा को इंडस्ट्री में उतारा और सिर्फ उतारा नहीं बल्कि उन्हें अपनी सबसे पर्सनल और रॉ फिल्म्स में लीड रोल भी दिया।

दिल है कि मानता नहीं 1981 आमिर खान के साथ एक रोमांटिक फिल्म जिसने पूजा को रातोंरात स्टार बना दी। सड़क 1991 संजय दत्त के साथ एक ऐसी फिल्म जो आज भी अपने दर्द के लिए याद की जाती है। डेरी 1989 इसमें पूजा ने एक शराबी बाप की बेटी का रोल किया था। और यार यह कोई कोइंसिडेंस नहीं था। यह कहानी खुद महेश भट्ट की अपनी अल्कोहलिज्म की कहानी थी। बाप ने अपनी हकीकत लिखी। बेटी ने उसे स्क्रीन पर उतारा। जख्म 1998 महेश भट्ट की आखिरी डायरेक्शन फिल्म। इसमें भी पूजा ही थी। देखो दोस्तों, हर फिल्म में एक पैटर्न है। महेश भट्ट अपनी बेटी को सिर्फ लॉन्च नहीं कर रहे थे। वो उसे अपनी खुद की लाइफ की कहानियां सुना रहे थे स्क्रीन के जरिए।

लेकिन यह पैटर्न समझने के लिए हमें थोड़ा और पीछे जाना पड़ेगा। अब असली कहानी अर्थ से जख्म तक। महेश भट्ट के बारे में यह बात बहुत कम लोग जानते हैं। वह सिर्फ डायरेक्टर नहीं थे। वो अपनी पर्सनल लाइफ को सीधा स्क्रीन [संगीत] पर उतार देते थे। अर्थ 1982 प्रवीण बाबी के साथ उनकी फेल्ड अफेयर की कहानी जो फिल्म में भी आदमी अपनी वाइफ को छोड़कर किसी और के पास चला जाता है। वो महेश भट्ट खुद थे। उन्होंने यह सच पब्लिकली भी कबूला है। डैडी 1989 जैसा मैंने बताया उन्होंने अपनी अल्कोहलिज्म की कहानी जख्म में 1998 और उनकी मां की कहानी एक ऐसी मां जो मुस्लिम थी और एक हिंदू मुस्लिम फैमिली की जद्दोजहद में थी। यार ध्यान से देखो ये तीनों फिल्में एक अलग-अलग दौर की है। एक अलग-अलग कहानियां हैं। लेकिन एक चीज कॉमन है। हर फिल्म में खुद महेश भट्ट ने अपनी खुद की जिंदगी का एक टुकड़ा खोल कर रख दिया है। महेश भट्ट सिर्फ वही फिल्म बना सकते थे जो उनकी असली जिंदगी से निकली हो। जिस दिन उनकी पर्सनल लाइफ स्क्रीन पर दिखाने लायक नहीं रही।

उन्होंने डायरेक्शन करना बंद कर दिया। जख्म के बाद उन्होंने 20 साल तक कोई फिल्म डायरेक्ट नहीं की और ऑफिशियली कोई भी रीज़न क्लियर नहीं दिया कि ऐसा क्यों हुआ। लेकिन अगर उनके पूरे करियर का फार्मूला यही था कि सच बोलो अपनी लाइव स्क्रीन पर रखो तो सवाल यह है कि अचानक क्या हुआ कि यह सब बंद करना पड़ा। अब आता है असली ट्विस्ट। महेश भट्ट की पर्सनल लाइफ में एक ऐसा दौर आया जब वो बहुत कॉम्प्लिकेटेड हो गया। पूजा उनकी पहली वाइफ से थी और आलिया उनकी दूसरी वाइफ सोनी सी थी। दो बेटियां दो अलग घर, दो अलग फैमिलीज़ [संगीत] और इसी दौर में एक ऐसा मोमेंट आया जिसने स्क्रीन पर दिखा पाना नामुमकिन था। एक ऐसा सच जो इतना पर्सनल और इतना कॉम्प्लिकेटेड था कि उसे फिल्म की शक्ल देना पॉसिबल नहीं रहा। यार जो डायरेक्टर हमेशा अपनी हकीकत स्क्रीन पर लाता था उसकी हकीकत अब इतनी उलझी हुई थी कि उसे कैमरा के सामने रखना खुद के लिए बहुत मुश्किल हो गया था और शायद यही वजह हुई और कसम खाई कि वो डायरेक्ट नहीं करेंगे कोई भी मूवी। महेश भट्ट डायरेक्टर के तौर पर वहीं रुक गए। लेकिन उन्होंने फिल्में बनाना बंद नहीं किया। उन्होंने विशेष फिल्म्स के जरिए लगातार फिल्में प्रोड्यूस की। नए एक्ट्रेस का लॉन्च किया। नई एक्ट्रेसेस को मौका दिया। लेकिन खुद डायरेक्टर की कुर्सी पर कभी वापस नहीं आई। तो यहीं से मेरा सवाल शुरू होता है। अगर महेश भट्ट इतने लोगों को लॉन्च कर सकते हैं

तो डायरेक्टर के तौर पर ही ना सही प्रोड्यूसर के तौर पर ही क्यों नहीं आया को लॉन्च किया गया? क्यों किया गया अपनी ही बेटी के साथ इतनी ज्यादा नाइंसाफी? 2012 में आलिया फिल्मों में आने के लिए तैयार थी लेकिन उनका डेब्यू करण जौहर के साथ स्टूडेंट ऑफ द ईयर से किया गया। उन्होंने अपने पापा के साथ अपना लॉन्च नहीं किया। महेश भट्ट चाहते तो विशेष फिल्म की एक और फिल्म बना सकते थे। जैसे उन्होंने इमरान हाशमी के लिए बनाई, जैसे कंगना रनौत के लिए बनाई, जैसे इतने नए चेहरों के लिए बनाई। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। आलिया ने खुद एक इंट्रो में कहा कि मुझे होप है कि एक दिन पापा मुझे डायरेक्ट करेंगे। एक बेटी अपने पापा से रिक्वेस्ट कर रही है और वो उसे डायरेक्ट करें। यह चाह रही है और पापा उस कुर्सी पर बैठना ही नहीं चाहते। यही सबसे बड़ा ट्विस्ट छुपा हुआ है। हम हमेशा सोचते हैं महेश भट्ट ने आलिया को मौका नहीं दिया लेकिन सच इसके बहुत उल्टा हो। तो महेश भट्ट जानते हैं कि अगर आलि्या विशेष फिल्म्स से लॉन्च हुई तो पूरी जिंदगी लोग उन्हें महेश भट्ट की हीरोइन कहेंगे। आज भी लोग पूजा भट्ट को महेश भट्ट की फिल्मों से जोड़कर देखते हैं। लेकिन आलिया आज जब उनका नाम लेते हैं तो सबसे पहले याद आती है हाईवे उड़ता पंजाब राजी गंगूबाई काठियावाड़ी। उनकी अपनी फिल्म्स, उनकी अपनी आइडेंटिटी। आज उन्हें कोई महेश भट्ट की हीरोइन नहीं कहता। आज वो सिर्फ आलिया भट्ट है। महेश भट्ट ने एक बार कहा था कि बच्चों को अपनी जिंदगी खुद जीनी चाहिए और शायद उन्होंने वही आलिया के साथ किया।

उन्होंने उन्हें अपनी दुनिया में नहीं बुलाया और अपनी दुनिया से कहीं दूर भेज दिया जहां वो सफल हो सकती थी और सफल होकर सिर्फ आलिया भट्ट रह सकती थी। यार सोचो अगर आलिया भट्ट विशेष फिल्म से डेब्यू करती क्या उन्हें वही रिस्पेक्ट मिलता या लोग उन्हें हमेशा कहते महेश भट्ट की बेटी है इसीलिए फिल्मों में आई हैं। शायद महेश भट्ट ने आलिया को लॉन्च नहीं किया क्योंकि वह चाहते थे कि दुनिया एक दिन कहे महेश भट्ट की बेटी नहीं यह आलिया भट्ट है और आज देखो 2026 में पीछे मुड़कर तो शायद उनका फैसला सही साबित हुआ क्योंकि पूजा भट्ट एक दौर में स्टार बनी लेकिन आलिया भट्ट एक जनरेशन की लीडिंग एक्ट्रेस बन गई। तो अब सवाल मैं आपसे पूछना चाहती हूं अगर महेश भट्ट खुद आलिया भट्ट को लॉन्च करते तो क्या आलिया आज इतनी बड़ी स्टार बन पाती या उनकी सबसे बड़ी पहचान यही बनी रहती कि वो महेश भट्ट की बेटी है? यह सवाल आपके लिए छोड़ रही हूं। मुझे कमेंट में जरूर बताना। मैं तुम्हें नेक्स्ट वीडियो में मिलूंगी। तब तक तुम चैनल को सब्सक्राइब कर लेना। वीडियो को लाइक और शेयर करना और प्लीज बेल आइकॉन दबाना।

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