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निधन के बाद तीन दिन तक क्यों सड़ता रहा श!व? जानकर कलेजा कांप जाएगा।

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हिंदी सिनेमा की महान खलनायिका ललिता पवार कि उनकी जिंदगी और की सच्चाई जानकर आप हैरान हुए बिना नहीं रह सकेंगे अ कि हिंदी सिनेमा में अगर जालिम और क्रूर शासक के किरदार में कोई पर्फेक्ट लगता था तो वह ललिता पवार थी गुस्सैल चेहरा और एक खराब आपके साथ उनके अभिनय को देखकर लोग सच में ललिता से नफरत करने लग जाते थे मगर अब वह अपने जीवन में एक बहुत सौम्य महिला हुआ करती थी मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 18 अप्रैल 1962 के दिन उनकी मां अंबा मंदिर गई थी।

मंदिर के गेट पर ही उनका जन्म हो गया इसी वजह से माता अनुसूया और पिता लक्ष्मण राव ने उनका नाम कर रख दिया था बाद में वह बेकार ललिता पवार के नाम से मशहूर हो गई और बेटियों को पढ़ाने लिखाने का चलन नहीं था इस वजह से ललिता ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देख वह संपन्न परिवार से थीं इस वजह से घर पर ही उनको प्राण शिक्षा दी से उनके फिल्मों में आने का के साथ बड़ा रोचक है हुआ यूं कि एक बार उनके पिता और भाई पुणे जा रहे थे बिटिया ललिता को भी साथ ले गए थे आर्यन फिल्म कंपनी के स्टूडियो में एक फिल्म की शूटिंग देखने पहुंचे वहां मशहूर डायरेक्टर प्रोड्यूसर नानासाहेब शूटिंग कर रहे थे।

अचानक उनकी नजर नहीं पड़ी उनको पहली ही नजर में आ गई ना साहब ने अपनी अगली फिल्म के लिए अमिताभ को चूम लिया मगर पिता को फिल्मों में नियुक्त थे नासा ने काफी समझाया तब जाकर उनके पिता राजीव नानासाहेब ने फिल्म बनाई राजा हरिश्चंद्र और 11 साल की ललिता को बाल कलाकार के रूप में पहली फिल्म मिल गई से कम ही लोगों को पता होगा कि 1930 में बनी फिल्म चतुर सुंदरी में ललिता ने 17 रोल किए थे।

जो एक रिकॉर्ड है इस साल 1932 में ललिता की एक फिल्म आई थी कैलाश फिल्म में उन्होंने ट्रिपल रोल किया था इसमें नायिका मां और खलनायिका तीनों ही रोल उन्होंने किए थे वे क्या आपको पता है कि ललिता पवार गायिका भी थी 1935 में आई हिम्मते मर्दा में उन्होंने एक गीत भी गाया था जो काफी लोकप्रिय हुआ उसके थे प्यारा गुलाब मेरे दिल में अभिनेत्री ने लगभग 700 फिल्मों में काम किया जाता हम दोनों जंगली प्रोफेसर आनंद जिस देश में गंगा बहती है।

गहरा संगम बॉम्बे टो गोवा तपस्या ना काली घटा देर रात और नसीब फिल्म में उनकी भूमिका अदा कर रही हैं कि ललिता पवार की अदाकारी में कितना दम था इसका किस्सा आपको सुनाते हैं 1941 में एक फिल्म आई अमृत जिसमें उन्होंने मोची का किरदार निभाया था।

उन दिनों छुआछूत का बोलबाला था इसी वजह से लोग ललिता पवार को मोती समझकर उनसे ही छुआछूत करने लगे इसके बाद उनको अपना जाति प्रमाणपत्र बनवाकर लोगों को दिखाना पड़ा था अ है वैसे ललिता पवार बहुत सुंदर हुआ करती थी और हीरोइन के रोल करती थी मगर एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी 1942 में एक फिल्म की शूटिंग हो रही थी -ए-आजादी भगवान दादा को एक सीन में ललिता को थप्पड़ मारना था वह थप्पड़ जोर से पड़ गया और ललिता के दाएं गाल को लकवा गया और आप की नस फट गई उनके लकवे का इलाज भी गलत हो गया जिस वजह से उनकी आंखें खराब हो गई इसके बाद उनके वितरित चेहरे की वजह से डायरेक्टर उनको दुष्ट औरत के निगेटिव रोल देने लगे हैं कि 1944 में फिल्म राम शास्त्री और 1948 में फिल्म गृहस्थी में उनको क्रूर शासक का रोल मिला।

1950 में वी शांताराम की फिल्म दहेज और सऊ दिन सास के फिल्मों में भी ललिता पवार कठोर सास बनी इन फिल्मों में उनके अभिनय इतना बेजोड़ था कि दुष्ट सांसो को ललिता पवार कहकर पुकारा जाने लगा उनके निगेटिव किरदारों से रामानंद सागर इतने प्रभावित हुए कि अपनी रामायण में उनको मंत्रा का रोल दे दिया था वह किरदार तो इतना मशहूर हो गया कि घर-घर में सच में ही लोग ललिता पवार से नफरत करने लगे थे वैसे ललिता पवार अपने काम के प्रति बहुत जिम्मेदार थी एक बार रामायण सीरियल की शूटिंग के दौरान दिए से उनके दोनों पैर जल गए थे इसके बाद भी उन्होंने शूटिंग नहीं रोकी वह जले पैरों का दर्द सहते हुए ही शूटिंग करती रही थी वो इसमें रामानंद सागर ने उनकी बहुत तारीफ की थी कि हेलो दोस्तों इतनी महान अदाकारा की जिंदगी और बहुत दर्दनाक रही ललिता पवार के पति का नाम गणपत पवार था वह अपने पति से बहुत प्यार करती थी मगर उनके जीवन में तूफान उस समय आ गया ।

जब ललिता को पता लगा कि उनके पति का किसी दूसरी लड़की से अफेयर चल रहा था वह समय और हैरान हो गई जब उनको पता लगा कि वह लड़की कोई और नहीं बल्कि उनकी ही सगी बहन थी पति और सगी बहन से मिले धोखे से ललिता पूरी तरह से टूट गई उन्होंने अपने पति को तलाक दे दिया फिर सालों बाद उन्होंने दूसरी शादी राज प्रकाश गुप्ता से की कि ललिता पवार को मुंह में बहुत दर्द होने लगा था जब चेकअप करवाया तो पता लगा उनको कैंसर हो गया था बीमारी का पता लगते ही वह पुणे में मौजूद अपने बंगले में इलाज करवाने के लिए रहने लगी बेटा उनको छोड़कर अपने परिवार के साथ मुंबई शिफ्ट हो गया था वहां बस पति और ललिता राहत करते थे।

अभिनेत्री की हालत दिन-ब-दिन गिरते जा रही थी मगर कोई देखने वाला नहीं था क्योंकि उनके पति खुद बहुत बीमार रहा करते थे बेटा कभी कभार फोन कर लेता इसी बीच फरवरी 1998 को उनके पति की तबीयत ज्यादा खराब हो गई तो उनको अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया।

24 फरवरी के दिन ललिता पवार घर पर अकेली थी अचानक उनकी हालत बहुत बिगड़ गई और ललिता पवार की मौत हो गई थी तो तीन दिन तक उनका शव घर पर ही पड़ा रहा किसी को खबर ही नहीं थी कि उनकी मौत हो चुकी है तीन दिन बाद जब बेटे ने हाल-चाल जानने के लिए फोन किया तो फोन नहीं उठा फिर पड़ोसियों और पुलिस को सूचना दी गई।

इसके बाद घर का दरवाजा तोड़ने पर पुलिस को ललिता पवार की तीन दिन पुरानी मिली थी तब जाकर पूरी दुनिया को पता लगा कि अभिनेत्री की हो चुकी थी

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