प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ़ रसिक दुलारी शरण की की बुद्धि और भी उलझती जा रही है। शुरुआती तौर पर मथुरा पुलिस ने कहा था कि रसिक दुलारी ने खुद की ली थी। लेकिन रिपोर्ट सामने आने के बाद संतों ने इस केस की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। मथुरा वृंदावन के संत तो पहले ही पुलिस की थ्योरी को खारिज कर चुके थे और अब अयोध्या के संतों ने भी साफ-साफ कह दिया है कि रसिक दुलारी की की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
एक महात्मा के साथ बहुत गलत घटना घटी है और केली कुंज में ऐसी घटनाएं समय-समय पर होती रहती है और ये कई सालों से कई वर्षों से ये घटनाएं सुनने को मिल रही है कि वहां जमीन कब्जे किए जा रहे हैं। उनके चेले जमीन कब्जा कर रहे हैं और माफियागिरी कर रहे हैं। प्रशासन के बाद नजर में भी हैं। लेकिन ये घटना जो महात्मा के साथ हुआ है, यह बिल्कुल ही सनातन संस्कृति और वृंदावन को कलंकित करने वाला ये घटना है। उस महात्मा के साथ ऐसी घ अह अह दरिंदगी हुई है जो किसी के साथ हुआ है।
मैं समझता हूं कि जो है बिलकुल जवाहरबा का रूप ले लिया है। ये समय-समय पे वही घटनाएं किसी मां बहन के साथ, किसी बेटी के साथ, किसी गरीब के साथ जो वास्तविक भक्तों के साथ ये घटनाएं हो रही है। जो घटनाएं और जो कार्य प्रणाली जवाहर बाग में थी वही प्रेमानंद महाराज के चेले और भक्त ही कर रहे हैं। ये बिल्कुल जवाहर बाग का दूसरा रूप है। केली कुंजी है।
लेकिन उनके कमरे में जो जांच के बाद जो वगैरह जो सामान मिला है और वह जो है रिपोर्ट में यह भी आया है कि तीन जगह उनके शरीर में चोट है और शरीर से होने से जो उनकी मृत्यु हुई है तो निश्चित रूप से जांच का विषय है। पुलिस प्रशासन जांच कर रही है। जांच करके निष्पक्ष जो है अपने जो है जांच के बिंदुओं तक पहुंच करके अगर कोई दोषी है तो उसके ऊपर कारवाई करे कहीं ना कहीं आरोप कि उनको तीन दिन से मिलने भी नहीं दिया गया था। नहीं देखिए परिवार का आरोप मिथ्या आरोप है। कोई भी संत बन जाता है विरक्त परंपरा में आ जाता है तो परिवार से उसका कोई मतलब नहीं रहता।
वो स्वयं में प्रबुद्ध व्यक्ति था। स्वयं में बिल्कुल जो है ऐसा कोई अबोध व्यक्ति नहीं था। अज्ञानी नहीं था। वह स्वयं में अपने आप को जो है समझने वाला व्यक्ति था। तो स्वयं में व्यक्ति परिवार से अवॉयड करता है। परिवार के लोगों से उसका मिलनाजुलना नहीं रहता। इसलिए नहीं मिलते थे। लेकिन वो लोग आरोप मिथ्या आरोप लगा रहे हैं। उनके आरोप में कोई दम नहीं। हूं। यह दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं। कारण है कि संत महात्माओं के जो है एकदम या तो प्रकृति में वातावरण में रहे या तो जंगल में रहे या तो ऐसे जगह रहे जहां किसी से मुलाकात नहीं हुई।
जब इनका वैभव बढ़ेगा जब इनका वैभव बढ़ेगा और वैभव के साथ-साथ जब इनकी व्याकुलता बढ़ेगी तो कोई ना कोई घटनाएं घटित हो ही और चोला का मतलब कुछ नहीं है। रावण भी कहीं चोला पहन करके मां जान ले गया था। तो चोले की बात मत मत कहिए। निश्चित है। लेकिन योगी आदित्यनाथ के समय में मुख्यमंत्री एक संत होने के नाते अगर संतों की ऐसी घटनाएं घट रही हैं। या तो किया या तो उसको गया। दोनों चीजें मेक है। इसकी सही जांच हो और दूध का दूध और पानी का पानी स्पष्ट होना चाहिए। कि सनातन में कोई इस प्रकार से करने की हिम्मत नहीं करेगा कि से किसी के lने और एक बहुत बड़े षड्यंत्र के तहत इस प्रकार की घटना और साजिश करने का प्रयास किया और संपूर्ण हिंदू समाज को बदनाम करने की साजिश की है।
जाहिर है कि अयोध्या और वृंदावन दोनों ही जगहों के साधु संतों ने रसिक दुलारी की मौत में किसी बड़ी साजिश का इशारा किया है और यही बात रसिक दुलारी के घरवाले भी पहले दिन से कह रहे हैं। उन्होंने तो इस पूरे मुकदमे की जांच से करवाने की भी मांग की है। सुनिए घर वालों ने क्या कहा। नहीं नहीं कोई कोई बात नहीं भैया ये इनके पिताजी माता राम मतलब जब भी जाते रहे तो बड़ी जैसे बात होनी चाहिए वैसे ही होती रही आज तक उसने वहां की कोई समस्या अच्छी बुरी बताई से नहीं है और एक बात और है वो की गारंटी हम नहीं पूरा गांव दे है कि वह लड़का इतना समझदार है तो के वह अपने हाथ से तो इतनी बड़ी कदम उठा ही नहीं सकता वहां जो भी हुआ है
उसके साथ धोखा हुआ है क्योंकि हम तो मीडिया वाले जब वो वीडियो बनाते रहे तो हमने मोबाइल में देखा और उनके बतावे के हिसाब से भी हमें समझ में आया उसके 100% मार के फेंकी अगर वो वहां से छलांग लगा तो फिर कहां से आया तो वहां मतलब रूम में भी बता रहे में लगा हुआ है तो उस गैलेंडर में खून आया तो कैसे आया दूसरी ओर जिस श्रीित राधा केली कुंज आश्रम की ओर दीपक लोधी जुड़े हुए थे। उसका अभी तक इस केस में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हां, यह जरूर हुआ है कि रसिक दुलारी की के बाद आश्रम ने अपने नियम कायदे में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। आश्रम ने सोशल मीडिया पर एक सूचना जारी करके शिष्यों की वेशभूषा में बदलाव की जानकारी दी है। आश्रम ने कहा है कि जो शिष्य विरक्त या गृहस्थ हैं और कोई काम धंधा करते हैं, जैसे ठेला या दुकान चलाते हैं, उन्हें अब सामान्य कपड़े या कुर्ता पैजामा पहनना होगा।
ऐसे शिष्य अब आश्रम के सफेद कपड़े नहीं पहन सकेंगे। जो शिष्य गृहस्थ हैं और केली कुंज की सेवा से जुड़े हैं, उनके लिए भी अब सामान्य कपड़े या कुर्ता पैजामा पहनना जरूरी होगा। सफेद कपड़े पहनने की अनुमति अब सिर्फ उन लोगों को होगी जो प्रेमानंद महाराज की सेवा या केलीकुंज की व्यवस्था और सेवा में लगे हैं। दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी की 25 सितंबर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने दावा किया था कि रसिक दुलारी ने रिपोर्ट ने मौत की परिस्थितियों को और भी संदिग्ध बना दिया है। पता चला कि दीपक के कमरे में एक ग्राइंडर था। डायरी थी। में हुआ था। शरीर पर छह जगह पर चोट के निशान थे। जिसकी वजह से पुलिस की शुरुआती थ्योरी कमजोर पड़ती नजर आ रही है।