आश्रम के एक 25 वर्षीय युवा शिष्य द्वारा उठाए गए रूह कपा देने वाले आत्मघाती कदम के बाद से मचे हड़कंप के बीच पूज्य संत प्रेमानंद महाराज ने आश्रम की सदियों पुरानी और स्थापित व्यवस्था को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। शिष्य की संदिग्ध और भयावह आत्महत्या के बाद आश्रम प्रशासन पर खड़े हो रहे गंभीर सवालों के बीच प्रेमानंद जी महाराज ने लगातार तीन दिनों तक आपातकालीन बैठकें कर ऐसे कड़े और क्रांतिकारी फैसले किए जिसने देश भर में फैले उनके लाखों करोड़ों भक्तों को हैरान कर दिया। इस पूरे फैसले की गंभीरता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अब आश्रम की किसी भी सेवा व व्यवस्था में लगे शिष्य के लंबे बाल रखने और दाढ़ी बढ़ाने पर पूरी तरह से पाबंदी रख दी गई है।
गुरुवार को वृंदावन से दूर यमुना पार जहांगीरपुर स्थित अपने नए आश्रम पर संत प्रेमानंद ने अपने प्रमुख शिष्यों और आश्रम परिकर के साथ इस बैठक के बाद जारी किए निर्देशों के मुताबिक अब आश्रम परिसर में कड़ा ड्रेस कोड और कड़े अनुशासन के नियम लागू कर दिए गए हैं। नए नियमों के अनुसार अब सिर्फ वही गृहस्थ शिष्य पीला और सफेद अचला पहन सकेगा जो सीधे श्री राधा केलीकुंज शिष्य परिकर में शामिल है। या फिर पूज्य प्रेमानंद महाराज की निजी सेवा में दिन रात तैनात रहते हैं।
बाकी सभी व्यवसाय गृहस्थ शिष्यों के लिए आश्रम परिसर में सामान वस्त्र या फिर केवल कुर्ता पैजामा पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। सफेद वस्त्र पहनने का अधिकार केवल आश्रम से जुड़े गृहस्थ संतों और गृहस्थ शिष्यों को ही होगा। 25 सितंबर को घटी उस खौफनाक घटना के बाद से हमेशा श्रद्धालु और भक्तों की भारी भीड़ से घिरे रहने वाले संत प्रेमानंद महाराज बेहद चिंतित और व्यथित नजर आ रहे हैं। घटना के तुरंत बाद महाराज जी ने अपनी प्रसिद्ध और रोजाना होने वाली पद यात्रा को स्थगित कर एकांतवास में जाने का फैसला लिया है। एकांतवास के दौरान ही वह आश्रम की सुरक्षा, व्यवस्था और अनुशासन को लेकर कड़े कदम उठा रहे हैं। कड़े फैसले की इस कड़ी में सबसे बड़ा झटका उन नए भक्तों को लगा है जो दीक्षा लेने की राह में थे।
महाराज जी ने नए शिष्यों की अंतिम दीक्षा देने और आश्रम परिसर में भीतर उनकी उपस्थिति पर अनिश्चित काल के लिए पूर्ण रूप से रोक लगा दी है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि संत प्रेमानंद जी महाराज को इतने सख्त और अभूतपूर्व फैसले लेने पड़े। दरअसल इसकी शुरुआत 25 सितंबर को हुई उस खौफनाक वारदात से जिसने पूरे वृंदावन को हिला कर रख दिया। श्री राधा केलीकुंज आश्रम से महज कुछ ही दूरी पर स्थित गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट में संत प्रेमानंद के 25 वर्षीय शिष्य रसिक दुलारी शरण ने बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए पहले टाइल्स काटने वाले ग्राइंडर से अपने ही गुप्तांग काट डाला और फिर खून से लथपथ हालत में अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से छत से छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
इस दिल दला देने वाली घटना के बाद से ही पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और आत्महत्या के पीछे के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। लेकिन इस दुखद हादसे ने आश्रम की अंदरूनी सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि अब संत प्रेमानंद महाराज ने व्यवस्थाओं में आमूलचूल बदलाव किया है। आश्रम की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में साफ कहा गया है कि दीक्षा उपस्थिति और संत प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन को लेकर अब बेहद ठोस और पारदर्शी कदम उठाए गए हैं।
जो भी भक्त अब दीक्षा लेने या महाराज जी के दर्शन की इच्छा रखते हैं उन्हें अब पहले से कई अधिक सख्त व्यवस्थित और कड़े नियमों की प्रक्रिया से गुजरना होगा। प्रेमानंद जी महाराज के इन फैसलों ने साफ कर दिया है कि आश्रम के भीतर भक्ति के साथ-