अब एक और बड़ी खबर मध्य प्रदेश से आपको देते हैं। मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन बेतवा लिंग योजना के खिलाफ चल रहा चीता और जल सत्याग्रह खत्म करवा दिया गया है और आज तड़के पुलिस फ़ धरना स्थल पर पहुंची। 14 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए किसान नेता अमित भटनागर को अस्पताल में भेज दिया गया। प्रदर्शनकारी इसे कारवाई नहीं बल्कि गिरफ्तारी बता रहे हैं।
छतरपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले ने इस गिरफ्तारी से इसे इंकार किया कि गिरफ्तारी नहीं है। उनका कहना है कि किसी को ना तो गिरफ्तार किया गया है और ना ही हिरासत में लिया गया है। पन्ना जिले से आए लोगों को बसों से वापस भेजा गया। जबकि 14 दिनों से अनशन पर बैठे अमित भटनागर की तबीयत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। पुलिस का कहना है कि जिस अंडर ब्रिज के नीचे यह आंदोलन चल रहा था वहां पर निर्माण कार्य चल रहा है।
सुरक्षा कारणों से प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया है। केन बेतवा लिंग परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। लगभग 44,000 करोड़ की इस योजना से बुंदेलखंड के लाखों लोगों को सिंचाई और पीने का पानी मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इससे 10 लाख हेक्टेयर से ज्यादा की भूमि सिंचित होगी। लाखों लोगों को पेयजल मिलेगा।
लेकिन परियोजना के लिए छतरपुर और पन्ना के कई गांव का विस्थापन भी तय है। भारत का पहला रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट यहीं मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना में कैन बेतवा रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट एन इन्व किया गया। अब जब उसके लिए भूमि अधिग्रह हो रहा है तो पन्ना और छतरपुर जिले के गांवों के आदिवासी और पिछड़े समुदाय के ज्यादातर लोगों में से वैसे लोग हैं जो चिता आंदोलन कर रहे हैं जो फांसी आंदोलन कर रहे हैं और जो कह रहे हैं कि या तो न्याय दो या फिर हमें मार दो। इसी तरह की तस्वीरें हर दिन छतरपुर के इस नदी में आपको देखने को मिलता है।
जहां पर डढन डैम बनकर आएगा और यह सारा इलाका डूब जाएगा। इन ग्रामीणों का दावा है और आरोप है कि सरकार ने इनके साथ न्याय नहीं किया है। कंपनसेशन कम मिला है। आज तक इकलौता मेन स्ट्रीम न्यूज़ चैनल है जो इस वक्त ग्राउंड से आपको यह रिपोर्ट दिखा रहा है। ग्राउंड जीरो पर पहुंचा है ताकि एक और आमरण अनशन देश में हो रहा है। आपने सोनम वांगचुक की कहानी तो दिल्ली में सुनी लेकिन यहां अमित भटनागर हैं जो हर दिन इसी तरह से केन नदी की ट्रिब्यूटरी में छतरपुर जिले में लेट जाते हैं चिता पर प्रदर्शन करते हुए ताकि सत्ता में बैठे हुए लोग इन आदिवासी ग्रामीणों की आवाज को सुने जो कभी सूली पर लटक कर अपनी आवाज पहुंचाते हैं कभी चेहरे पर मिट्टी लगाकर आवाज पहुंचा रहे हैं तो महिलाएं चिताओं पर लेट के यहां का जो स्थानीय पेड़ है उसके पत्तों को को लेकर लेटकर प्रदर्शन कर रही हैं। मांग कर रही हैं कि उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाए। फेयर कंपनसेशन दिया जाए।