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कश्मीर में 33 साल बाद फिर खिले प्रसिद्ध कमल के फूल मानो भाजपा युग के आगमन का संकेत दे रहे हैं।

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यह बेहद सुखद संयोग है कि दशकों की गाद और प्रदूषण के बाद कश्मीर की प्रसिद्ध वुलर झील में कमल के फूल फिर से खिल उठे हैं। हालांकि, प्रकृति का यह कायाकल्प पारिस्थितिक सुधार और स्थानीय संरक्षण प्रयासों का परिणाम है, न कि किसी राजनीतिक युग का।

कश्मीर की सुंदरता और पारिस्थितिकी के लिहाज से यह एक अद्भुत घटना है।वुलर झील में कमलों की वापसी: मुख्य बिंदुऐतिहासिक संदर्भ: 1992 में आई विनाशकारी बाढ़ और बाद के प्रदूषण के कारण झील की सतह पर गाद और खरपतवार जमा हो गए थे, जिससे कम

ऐतिहासिक संदर्भ: 1992 में आई विनाशकारी बाढ़ और बाद के प्रदूषण के कारण झील की सतह पर गाद और खरपतवार जमा हो गए थे, जिससे कमल के फूल और कश्मीरी ‘नाद्रू’ (कमल ककड़ी) लगभग विलुप्त हो गए थे।पारिस्थितिकी में सुधार: तीन दशक से अधिक समय के बाद, वूलर संरक्षण और प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा किए गए सफाई और संरक्षण प्रयासों के कारण इन गुलाबी फूलों की आश्चर्यजनक वापसी हुई है।स्थानीय महत्व: कमलों का वापस खिलना न केवल पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, बल्कि यह झील के स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय मछुआरों व किसानों की आजीविका के लिए भी एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है

30 साल बाद गुलाबी कमल की वापसी, वुलर झील में फिर खिला कश्मीर का चमत्कार !कश्मीर की वुलर झील, जो एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है, अब फिर से अपनी पुरानी खूबसूरती की ओर लौट रही है। साल 1992 की भीषण बाढ़ में गुलाबी कमल के फूल इस झील से पूरी तरह गायब हो गए थे। लोगों को लगा था कि ये सुंदर नज़ारा अब कभी नहीं लौटेगा।लेकिन वुलर संरक्षण और प्रबंधन प्राधिकरण (WUCMA) की सालों की मेहनत रंग लाई है। झील से गाद और गंदगी हटाने का काम किया गया, जिसके बाद अब 30 साल बाद झील की सतह पर गुलाबी कमल फिर से लहराते दिखे।

हिमालय की गोद में छिपा हुआ, एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक, वुलर झील एक बार फिर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है – इस बार अपने आकार या शांति के लिए नहीं, बल्कि एक अद्भुत प्राकृतिक पुनर्जीवन के लिए। 30 वर्षों के लंबे समय के बाद, झील हजारों कमलों से खिल उठी है, जिससे यह जल निकाय गुलाबी रंग के तैरते हुए बगीचे में तब्दील हो गया है।स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के लिए, यह एक दुर्लभ और भावुक दृश्य है – एक ऐसा दृश्य जो पीढ़ियों से नहीं देखा गया है।

लुप्त कमल की कहानी सितंबर 1992 की विनाशकारी बाढ़ से शुरू होती है। बाढ़ ने कश्मीर की आर्द्रभूमि को तबाह कर दिया और वुलर झील सबसे अधिक प्रभावित हुई। भारी मात्रा में गाद जमा हो गई, जिससे झील का तल अवरुद्ध हो गया, कमल के पौधे दब गए और जल प्रवाह बुरी तरह बाधित हो गया। इसके बाद के वर्षों में, अनियंत्रित खरपतवार वृद्धि, प्रदूषण और अतिक्रमण ने झील की स्थिति को और खराब कर दिया, जिससे प्रतिष्ठित कमल स्मृतियों में विलीन हो गया।2020 में आशा की एक किरण जगी। वुलर संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (WUCMA) ने झील…

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