मिसेज का फोन आया 10:30 बजे के आसपास कि घर में जल्दी आओ। रिया ने गलत हरकत कर दी है। क्या किया? तो सुसाइड कर लिया। बोलने लगे। लगातार छात्र सुसाइड कर रहे हैं। हम इस समय मौजूद हैं उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में। यह बोल रही थी कि अब फिर से पढ़ना पड़ेगा। नया सिलेबस नया आएगा कुछ [संगीत] तो थोड़ा सा नर्वस तो थी वो सोचा नहीं था कि आगे जाके ऐसा हो जाएगा। तो [संगीत] हम उसको ऐसा सोचते ही नहीं। फिर ऐसा कुछ हम मना ही कर देते मत कर बोल के। हम 99 में कारगिल में लड़े थे। हमारे कई साथी शहीद भी हुए हैं। उस समय भी इतना वो नहीं था जब आज मेरे [संगीत] को उससे ज्यादा भारी पड़ रहा है। मैं समझता हूं यह उसने आत्महत्या उसने नहीं की। यह उसकी हत्या है। यह सिस्टम ने उसकी हत्या की है। लेकिन अब [संगीत] जब सुनते हैं कि ऐसा हो रहा है तो वह गलत हो रहा है। जो पढ़ने वाले बच्चों के साथ गलत हो रहा है। वो खुद को ही दोष दे रहा हूं कि मैंने शायद गलती करी। मुझे नहीं करवाना चाहिए था। क्या बोलूं? [संगीत] मैं तो यही बोलना चाहता हूं कि बच्चे आगे कोई भी हो। किसी के भी बच्चे हो। ऐसा ना करें प्लीज। क्योंकि जो मां-बाप है वो नहीं सहन कर पाते। मई 2026 में जो नीट की परीक्षा लीक हुई थी जो पेपर लीक हुआ था उसने अब तक 11 छात्रों की जान ले ली है। क्या राजस्थान क्या गोवा क्या नागपुर क्या अहमदाबाद क्या तमिलनाडु लगातार छात्र सुसाइड कर रहे हैं। छात्र ये कह रहे हैं कि उनमें हिम्मत नहीं है कि वह फिर से एग्जाम दे सकें। हम इस समय मौजूद हैं उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में। देहरादून में दो दिन पहले रिया कुमारी थापा रिया कुमारी मल ने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। एक सुसाइड नोट में यह लिखा कि मम्मी पापा मुझे माफ कर दीजिए। मैं आप पर बोझ नहीं बनना चाहती और मुझसे अब नहीं हो पाएगा। हम मौजूद हैं उनके घर के सामने। राजेश मल उनके पिता हैं।
1999 में कारगिल की जंग लड़ चुके हैं। वो जंग सामने की सेना दूसरे देश की सेना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाई। वो पूरी जंग उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाई। लेकिन उनकी बेटी को इस सिस्टम ने इस पेपर लीक ने मजबूर कर दिया कि वो अपनी जान ले। राजेश मलिक क्या कहते हैं सुनिए आप। मंगलवार का जो दिन था आपके लिए वो किस तरीके से था और कब आपको जो है इंफॉर्मेशन मिली कब पता चला? मंगलवार को सर हमारे यहां पे वो भंडारा था मंदिर में ना संसारी माता मंदिर में भंडारा था। मैं तो वहां वहीं था। रात को जागरण था तो सुबह फिर आया। फिर मैं प्रसाद छोड़ के गया। बल्कि रिया के लिए भी लाया था मैं सुबह प्रसाद जागरण का यहां छोड़ के फिर मैं भंडारा में काम के लिए चला गया था वहां तो जैसे मैं गया वहां थोड़ी देर के बाद मिज का फोन आया 10:30 बजे के आसपास 10:30 कितना हो रहा था कि घर में जल्दी आओ रिया ने गलत हरकत कर दी है क्या किया तो सुसाइड कर लिया बोलने लगा फिर मैं बिल्कुल जैसा था वैसे भाग के आया भाग के देखा तो मेरी मिज ने देखा हमने कि वो उसको अपना मतलब खुदकुशी कर लिया था उसने फांसी लगा के उसके बाद तो फिर पता ही होगा कब से तैयारी कर रही थी वो नीट की जो पिछला एग्जाम था कितने वक्त से कर रही थी उसका ये तीसरा अटेम्प्ट था पहले अटेम्प्ट में शुरू में तो उसने जब दिया था तब उसके लगभग 400 कुछ के आसपास उसके वो आए थे नंबर तो फिर मैंने बोला 400 आ रहा अब क्या करना है उसने बोला मैं फिर करूंगी तो मेरे को आप कोचिंग लगा दो फिर मैंने एलएन इंस्टिट्यूट में उसका कोचिंग करवा दिया था उस समय जब 12th करने के बाद तो वहां भी उसने एक बार दिया तो उसकी तबीयत खराब हो के उसका पेपर थोड़ा सा खराब हो गया था मतलब कि दे नहीं पाई थी एलन में मतलब ये जो सेकंड सेकंड बार में फिर उसने बोला कि मेरी किस्मत खराब है वो वो बोलने लगी वो मेरी तबीयत खराब हो गई है वो ओएमआर शीट भर नहीं पाई थी बस एक्चुअली तबीयत खराब होने के कारण से फिर उसके बाद मैंने उसे बोला चल खाली ये एक चीज है नहीं तो बाकी आगे और भी देख फिर हमने उसको ग्रेजुएशन के लिए हमने एडमिशन करवाया उसका तो उसमें बीएससी का भी अभी लास्ट सेमेस्टर उसने दिया था बीएससी का डीएवी से वो भी पेपर कर दिया उसने और फिर इस बार हमने फिर उसने बोला हां एक बार मैं लास्ट भर्ती हूं मैं कर लूंगी
बोला क्योंकि पढ़ने में तेज थी उसका था उसके पास होप था उसे तो मैं बोला देख ले बोला नहीं नहीं मैं कर लूंगी तो उसके बाद उसको फिर हमने एग्जाम मतलब ये भरवाया फॉर्म तो उसने भरा उसका और उन्होंने प्रिपेयर करने लगी वो मैंने बोला कोचिंग में लेगी कहीं वो लेगी पहले ले चुकी थी कोचिंग बोला नहीं नहीं मैं अपने आप सेल्फ कर लूंगी मैं कोचिंग तो मैंने पहले करके देख लिया है। मैं कर लूंगी। मैंने फिर कोचिंग नहीं लिया। वो घर में सेल्फ स्टडी करती थी। वो दिन में भी पढ़ती थी। शाम को 6:00 बजे उसका खाना हो जाता था। हल्काफुल्का खाती थी। ज्यादा नहीं खाती थी। बोलती थी कि नींद आती है। तो 6:00 बजे के बाद वो थोड़ी देर के लिए वापस आती थी। थोड़ा रोटी-वोटी बनाती थी घर का। उसके बाद फिर चली जाती थी। फिर रात भर पढ़ती थी तो कभी 2:00 बजे कभी 3:00 बजे सोती थी। तो फिर हम उसे लेट ही उठाते थे 6:00 बजे। उसने ऐसा टाइम बनाया हुआ था कि कभी 3:00 बजे से उठ के फिर पढ़ती थी। कभी रात को पढ़ती थी, कभी सुबह पढ़ती थी। ऐसे उसने अपने आप को ढाल रखा था। तो करती रहती थी, पढ़ती रहती थी दिन भर और जब कॉलेज होता था तो कॉलेज भी जाती थी। कॉलेज से भी आती थी। छोड़ने में ही जाता था, लेने जाता था। हां, वो ठीक थी, खुश थी, करती थी वो। हमने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था कि वो ऐसा कर लेगी। तो हमें भी ऐसा कुछ नॉलेज नहीं था। फिर पेपर आया पेपर भी दिया उसने तो आए तो उस दिन तो मैंने कुछ पूछा ही नहीं उससे कि कैसा हुआ क्या हुआ क्या पता खराब गया हो कुछ हो तो दो-तीन दिन के बाद तब मैंने मुझसे पूछा कि पेपर कैसा हुआ था बोला अच्छा ही हुआ मैंने कहा ईजी आया था क्या बोले नहीं नहीं नीट का कोई नीट का पेपर है ईजी थोड़ी ना आता है एशिया में टॉप का पेपर होता है तो मैंने कहा अच्छा चल ठीक है अच्छा हुआ तो कोई बात नहीं हां मेरी बायोलॉजी केमिस्ट्री अच्छी की है। फिजिक्स में थोड़ा सा कंफ्यूजन है। मैंने कोई बात नहीं जितने आता है जो आता है सही है। ठीक है। ज्यादा टाइम एस्टिमेट किए थे
अपने नंबर कि कितने नंबर आ जाएंगे जब पिछला पेपर दिया था। देखो वो ना मेरे से बात तो करती थी खुल के लेकिन वो हमेशा क्या था कि वो थोड़ा सा वो करती थी। छुपाती थी कि आप सबको बता दोगे ये कर दोगे बोल के कि मैं नीट का भरा हूं बोल के किसी को मत बताना। इस प्रकार से वह हमें बोलती थी। तो मैं पूछता था तो जिस हिसाब से बता रही थी वो बायोलॉजी और केमिस्ट्री तो मैं खुद भी मेरे को पता है कि बायोलॉजी अगर अच्छा है तो बायोलॉजी के मार्क्स ज्यादा होते हैं और फिजिक्स के कम होते हैं। 150 150 होता है। तो केमिस्ट्री फिजिक्स में अगर उसने अच्छा मार्क्स किया है तो शायद केमिस्ट्री और उसमें तो फिजिक्स में भी कुछ ना कुछ तो आता ही है। है ना? तो मैंने बोला अच्छा गया तो खुश हां अच्छा गया मेरा। मैंने कहा चिंता ना कर ज्यादा टेंशन मत लेना। उसे वो कॉन्फिडेंस थी थोड़ी। मुझे लग रहा था कि हमने बात भी की आपस में कि हां ये कॉन्फिडेंस है। तो खुश भी थी। फिर उस जब पेपर देके आई थी तो सोई भी बहुत दबा के आराम किया। उसने रिलैक्स महसूस किया। ठीक थी। मतलब खुश थी। ऐसा टेंशन में नहीं थी। जब जब पेपर लीक हो गया तब उसने एक बात बोली थी कि ये ऐसे ही हो जाता है यहां पे। पता नहीं क्या कि पढ़ने वाले के लिए थोड़ा सा दिक्कत है और ना पढ़ने वाले के लिए अगर ऐसा लीक हुआ तो तो बहुत बड़ा नुकसान है। कट ऑफ भी बहुत आगे जाता है। ऐसे ऐसी बात उसने हमें बोली थी बस फिर लीक हुआ पेपर और आप देख भी रहे हैं कि वो भी पेपर लीक हुआ और भी एग्जाम लीक हुए और भी फिर से जब एग्जाम देने की बात आई 21 जून को फिर से देना पड़ेगा। तो वापस से वही सारी तैयारियां। हां ये बोल रही थी कि अब फिर से पढ़ना पड़ेगा। नया सिलेबस नया आएगा कुछ तो थोड़ा सा नर्वस तो थी वो दोनों हां स्कूल में मतलब स्कूल में क्या वो बचपन से ही टॉपर थी क्लास फर्स्ट से ही वो टॉपर थी हमेशा उसके नंबर सबसे ज्यादा ही आते थे और हमें भी उसकी वजह से बहुत प्राउड होता था फील होता था कि हां मेरी बच्ची बहुत होनार है तो अगर ऐसा था तो फिर हमने कभी सोचा नहीं था कि आगे जाके कि ऐसा हो जाएगा तो हम उसको ऐसा सोचते ही नहीं फिर ऐसा कुछ हम मना ही कर देते हैं मत कर बोल के लेकिन अब क्या करें आप बहुत बैट्समैन रह चुके हैं 99 में आप कारगिल के बहुत हां जी हम 99 में कारगिल में लड़े थे और 16 दिन तक हम बिना खाए भी लड़े हैं है ना और हम जीते हैं कारगिल हमारे कई साथी शहीद भी हुए हैं हमारे साथ वाले शहीद शहीद हुए हैं। सेला कोई से भी शहीद हुए हैं।
देहरादून के एक भाई हमारे मेरे साथी और एक कैजुअल्टी हुए हैं। उस समय बहुत वो था। उस समय भी इतना वो नहीं था जब आज मेरे को उससे ज्यादा भारी पड़ रहा है। आप सोच पा रहे हैं किसकी वो सिस्टम को? कहीं ना कहीं तो है सर। देखो कुछ ना कुछ है। अब वो क्या है? [गला साफ़ करने की आवाज़] कैसे हो रहा है? उसके बारे में तो अब मुझे भी इतनी जानकारी नहीं है। लेकिन अब जब सुनते हैं कि ऐसा हो रहा है तो वह गलत हो रहा है। जो पढ़ने वाले बच्चों के साथ गलत हो रहा है वो। चलो मेरी बेटी होती ना होती वो अलग बात है। लेकिन कई बच्चे हैं उनको नुकसान होता है इस चीज से ना क्योंकि कट ऑफ बहुत ऊपर चला जाता है। कभी नीट का पेपर होता था जब मैं भी देख रहा हूं कई सालों से क्योंकि मेरी बेटी खुद तैयारी कर रही थी। तो कट ऑफ भी इतना ज्यादा नहीं होता था। टॉपर भी 600 650 700 के अंदर-अंदर ही रहते थे टॉपर। आज के डेट में 100% टॉपर हो रहे हैं। 720 720 ला रहे हैं। तो मुझे लगता है वो नामुमकिन है। मतलब हो नहीं सकता। इतने सारे के सारे बच्चे 720 में 720 अंक लाना कोई इतना आसान काम नहीं है। है ना? अब वो क्या है या किस हो भी सकता है बच्चा मेहनत करेंगे। लेकिन मेरी लड़की का भी यही कहना था कि इतना ज्यादा नहीं हो सकता। एक पूरे इंडिया में कभी एक बच्चा टॉपर करता था। उसके भी 720 नहीं होते थे। अभी 690 680 717 18 तक ही था। फोन नहीं आते किसी को। नहीं नहीं नहीं नहीं तो फिर ये नीट में जो सबसे एशिया में नंबर एक पेपर है उसमें कैसे आ सकते हैं? कौन सिबलिंग्स हैं रिया के भाई बहन हैं। एक बहन है छोटी एक भाईराज। दोनों ही पढ़ रहे हैं। एक 11th में है भाई। और बहन भी ग्रेजुएशन कर रही है सेकंड ईयर। जी। कुछ है अभी दो-तीन दिन बीतते हैं। आप सोच पा रहे हैं। किसी को दोष दे पा रहे हैं। खुद को ही दोष दे रहा हूं कि मैंने शायद गलती करी। मुझे नहीं करवाना चाहिए था। क्या बोलूं मैं? मैं तो यही बोलना चाहता हूं कि बच्चे आगे कोई भी हो। किसी के भी बच्चे हो ऐसा ना करें प्लीज। क्योंकि जो मां-बाप है वो नहीं सहन कर पाते। जैसे मैं सहन नहीं कर पा रहा हूं। अब कोई बच्चा ऐसा हरकत ना करे कदम ना उठाए। ये हम देख रहे हैं सर कि पिछले चार दिन में दो दिन में चार जगह पांच जगह बच्चे हैं जिन्होंने सुसाइड किया। चाहे नागपुर देखें, चाहे तमिलनाडु देखें, चाहे देहरादून, चाहे अहमदाबाद और ये लगातार हो रहा है। मतलब पिछले एक महीने से 12 मई को लीक हुआ और उस बात को अभी एक महीना और आठ दिन हो गए हैं और 10 11 12 और अगर नीट को हटा दिया जाए तो बाकी जगह 19 20 ये आंकड़ा है जो कि बच्चों ने सुसाइड कर लिया और सिर्फ नंबर नहीं है ना ये बच्चे मतलब जीते जागते बच्चे जो पढ़ाई कर रहे थे ईमानदारी से सब कुछ कर रहे थे और उन्होंने जो है सुसाइड किया है।
नहीं ये तो बड़ी दुखद बात है और मैं तो इस बात को कहता हूं कि ये जो हमारा सिस्टम है ये जो पढ़ाई का सिस्टम है या जो पूरा एजुकेशन सिस्टम है इसमें पता नहीं कहां घुंद लग गया है और इसकी जिम्मेदारी कोई आज लेने के लिए बात नहीं है। यहां देहरादून में जो ये हमारी बेटी रिया ने जो यहां पर ये कदम उठाया मैं समझता हूं ये उसने आत्महत्या उसने नहीं की। यह उसकी हत्या है। यह सिस्टम ने उसकी हत्या की है। अगर यह पेपर लीक ना होता और वो इतने पढ़ाई में इतनी अच्छी लड़की थी, इतनी इंटेलिजेंट लड़की थी कि इंटर से लेके हाई स्कूल से लेके पूरा हर जितने स्कूलिंग उसकी फर्स्ट आती थी हर क्लास में। अब उसके बाद उसके जो है उसको ये उम्मीद थी कि भाई मेरा जो है इस बार मेरा क्लियर हो जाएगा इसमें। मुझे सरकारी सीट मिल जाएगी। जबकि उसका पिछली बार हो गया था। उसका और जगह से आए भी थे उसके कि प्रस्ताव आए थे कि भाई आप प्राइवेट करा लीजिए लेकिन उसने कहा नहीं पापा आप पैसा और सोचते ही हैं बच्चे के मां-बाप का भाई पैसा ना खर्च हो ज्यादा तो उसने कहा नहीं मैं अगली बार अटेम्प्ट करके मैं निकाल और इस बार वो बहुत श्योर थी इस बात के लिए कि भाई मैं निकाल लूं लेकिन ये एक निकम्मापन मैं समझता हूं कि एजेंसी का इतना बड़ा निकम्मापन है ये कि वो देख ही नहीं पा रही है कि भाई कैसे जो है कहां पर किस तरह से कहां किस स्टेज ये हो रहा है। आज खाली जो है लेपापोती हो रही है हर चीज के लिए। ये तो बहुत गलत बात है। मैंने देखा नहीं सर कि किसी ने कोई बयान दिया हो चाहे एजुकेशन मिनिस्टर हो चाहे कोई चीफ मिनिस्टर हो चाहे प्रधानमंत्री हो। किसी ने इसको लेकर ये मुद्दा नहीं बनाया। मतलब सरकार के लोगों ने इस पर कुछ कहा नहीं। जिम्मेदारी नहीं ली। नहीं ये मैं समझता हूं कि ये तो बहुत ही खराब बात है और इन लोगों को इस इस बारे में बच्चों को ज्यादा नहीं। चलिए ठीक है। आप ये सोचते हैं कि भाई जनता शायद इसमें नाराज होगी। लेकिन इनको एक अपील तो जरूर बच्चों से सबसे एक अपील जरूर करनी चाहिए थी कि भैया चलो ये इस बार जो हो गया आगे के लिए उम्मीद उनको बढ़ानी चाहिए थी
बच्चों को कि भाई हम कोई बात नहीं आगे के भविष्य को तुम्हारा है। आगे इस तरह से ना हो। जो है बच्चे वहां डिमांड कर रहे हैं। कौन-कौन पार्टियां वहां दिल्ली में इस बात के लिए प्रोटेस्ट कर रही है कि भाई इसको जो है धर्मेंद्र प्रधान जी जिस हैं। उन्हीं की विभाग के मंत्री है लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं है। तो जनता में अब इन सब चीज का एक मैसेज तो जाता ही है ना इस बात के लिए और मैं समझता हूं ये राजनीतिक बात भी ना हो। लेकिन ये तो आम जनता से लोगों की जुड़ी हुई बात है। लाखों लोगों के कितने लाखों बच्चे इसमें बैठते हैं और लाखों बच्चे एग्जाम देते हैं। उसमें ये मैसेज जा रहा है। अब आप ये देखिए कि अब जितनी नजदीक नजदीक 21 तारीख आ रही है। अब उतने उतने जो है आत्महत्या के केस बढ़ते जा रहे हैं और सरकार सब देख रही है। चुप बैठी हुई है। कुछ कह नहीं रही है। और एक अपील ही कर दो भाई। बच्चों के लिए कह दो कि भाई कुछ आप ऐसा कदम ना उठाएं आप जिससे मां-बाप आप चलो बच्चा चला जाएगा। लेकिन मां-बाप का क्या होगा? मां-बाप के लिए तो हमेशा के लिए जिंदगी भर का दुख हो गया ना ये। तो वो तो हमेशा जब भी घर में रहेंगे या कोई उनको देखेंगे तो हमेशा के लिए दुख होगा। तो ये चीजें बड़ी खराब हमारे यहां हो रही है। इस तरह से ये सब चीजें नहीं होनी चाहिए थी। ये देहरादून है। उत्तराखंड की राजधानी है। घटना को चार दिन बीत चुके हैं।
परिवार का और जो परिजन है उनका कहना यह है। हमने आपको बताया कि हरिभट्ट ने जो पार्षद हैं उन्होंने क्या कहा? उनका बताना यह है कि अभी तक प्रशासन से कोई शख्स मिलने के लिए नहीं आया परिवार से। उनका कहना यह है कि सरकार की तरफ से कोई मंत्री, कोई प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस का कोई इंसान, कोई भी अधिकारी उनसे अभी तक मिलने नहीं आया है। सांत्वना देने के लिए भी अभी तक कोई बात परिवार से नहीं की गई है। और यह वो परिवार है जिसके जो राजेश मल हैं वो कारगिल में जंग लड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि वो 16 दिन बिना खाए, बिना पिए रह लिए वो जंग उनके लिए कुछ भी नहीं लेकिन अब जो उनकी बेटी के साथ हुआ है, उन्होंने जो आत्महत्या की है, वह उन पर ज्यादा भारी पड़ रहा है। तो यह एक और घटना है। एक और आत्महत्या है। लेकिन लगातार सवाल वही बना हुआ है कि जिम्मेदारी किसकी है? जवाबदेही किसकी है? कब इस पर कोई बात की जाएगी? कब कहा जाएगा कि हां छात्रों से माफी मांगने की जरूरत है। उम्मीद बस यही है कि इस बार लाखों बच्चों की जो फ्यूचर के साथ खिलवाड़ हुआ जो कि लगातार हो रहा है। इस बार शायद ना हो। लेकिन इस पूरे ट्रेंड को देखते हुए शायद कहना ही पड़ रहा है क्योंकि लगता नहीं है कि इतना स्मूथली कोई भी एग्जाम इस देश में कंडक्ट हो पा रहा है।