घर का झगड़ा है इनके साथ उनकी ताई करवा करवा देंगे वो करवा देंगे और आप लोगों को क्या आप लोगों को क्या कमीशन थोड़ी देना बस सिर्फ 13 साल की उम्र हाथ में कोई खिलौना नहीं बल्कि इंसाफ की उम्मीद जब बड़े-बड़े लोग अपनी बात नहीं रख पाते तब लखीमपुर खीरी का एक 13 साल का मासूम बच्चा सीधे जिला अधिकारी के सामने पहुंच गया। कक्षा आठ में पढ़ने वाले इस बच्चे का [संगीत] नाम है अमिताभ गुप्ता।
अमिताभ जब सदर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में अपनी फरियाद लेकर पहुंचा तो उसकी बेबाकी देखकर पूरा हॉल कभी खामोश हो गया तो कभी वहां मौजूद अधिकारी उस बच्चे की हाजिर जवाबी पर ठहाके लगाते दिखे। दरअसल अमिताभ के पिता मानसिक रूप से बीमार हैं और उसकी मां घरों में काम करती है। लेकिन उससे भी घर नहीं चल पाता। बच्चे का आरोप है कि उसके पैतृक मकान के एक हिस्से पर उसकी ताई ने जबरन ताला लगा रखा है। वह इस कमरे को किराए पर देकर अपनी पढ़ाई और घर का खर्च चलाना चाहता है। जब डीएम अंजनी कुमार सिंह के सामने खड़े पुलिस अधिकारी ने कहा कि काम करवा देंगे तो इस 13 साल के बच्चे ने तड़ाक से जवाब दिया। करवा देंगे नहीं करवा दीजिए। यहां अकेले आया है एक बार जाके देख लीजिए। घर का झगड़ा है उनके ताई और करवा देंगे तो करवा दीजिए।
आप बस थोड़ा टोपी लगा ले बस बस खुलता है ना कभी करवाएंगे। बच्चे की बेबाकी यहीं नहीं रुकी। पुलिस व्यवस्था पर तंज कसते हुए उसने सबके सामने कह दिया आप लोगों को तो बस कमीशन दे दो फिर काम हो जाता है। बच्चे की इस बात पर जहां एक तरफ अधिकारी मुस्कुराने लगे वहीं प्रशासनिक महकमे में सन्नाटा भी खींच गया। जब डीएम ने उसे समझाया कि इतनी छोटी उम्र में ज्यादा नहीं बोलना चाहिए और पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। तो अमिताभ ने महंगाई और गरीबी का हवाला देते हुए सीधे डीएम से सवाल कर दिया कि ₹50 में आजकल क्या आता है? मेरी बहन ने नाइंथ पास की है।
किताबें कॉपी फ्री नहीं मिलती। क्या आप दिलाओगे? बहुत ज्यादा बोलना नहीं चाहिए। बोलने से जब बहुत ज्यादा बोलते हो ना तो कई बार ऐसी चीजें बोल जाते हो जो सामने वाले को अच्छी ना लगे। ठीक है? तो बहुत ज्यादा बोलना नहीं चाहिए। पहली बात। ठीक है? ऐसी बात नहीं बोलनी चाहिए जो सामने वाले को बोल दे। सर एक बात पूछे नहीं उनसे बाद में पूछना सुन लो मेरी बात तुम्हारी उम्र कितनी है जी सर उम्र कितनी है.
13 13 साल है ना जी सर तो अभी तुम्हारा काम है केवल पढ़ना कोई परेशानी परेशानी आए तब भी उसको दिमाग से निकाल सर मुझे एक बात पूछिए सर कि हमारी और बहन दोनों पढ़ रहे हैं आप पढ़ाई का खर्चा उठा सकते हैं क्या पढ़ाई तो फ्री है फ्री है और आगे कॉपी किताब ये सब सब फ्री है तो नहीं ना के बाद दीदी का हमारा पढ़ रहे हैं कि नहीं हां नाइन के बाद तुम्हारी मम्मी काम करती है ना हां तो उससे होगा 3000 में सर आजकल होता क्या करें बातचीत के दौरान डीएम ने बच्चे को समझाते हुए कहा कि उसे इतनी छोटी उम्र में ज्यादा नहीं बोलना चाहिए और फिलहाल पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए इस पर अमिताभ ने जवाब दिया केवल पढ़ाई की सलाह देने से काम नहीं चलेगा क्योंकि घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है.
उसने कहा कि उसकी मां करीब ₹3000 महीने कमाती है और इतने पैसे में परिवार का खर्च, कॉपी, किताब और पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल है। मेरी बात सुनो तुम्हारा क्या नाम है? अमिताभ गुप्ता। अमिताभ देखो अभी हमने पढ़ा फिर भूल गया। तो अमिताभ गुप्ता एक काम करो ये सब चीजें किनारे रखो। अभी इससे दुकान देकर पढ़ो। तो पढ़ने के लिए क्या आपके सैलरी में हमको पढ़ा तो दे। उसमें एक एक कितने रुपए की मंगाई में हमें सब्जी लाती है। ₹50 की सब्जी में क्या होता है? सब्जी ले आती है या बेचती हैं? लाती हैं।
अब 50 मिनट क्या होता है? ले आती है बनाने के लिए। जी सर खाने की तो तंगाई पड़ी है हमारी। मम्मी हमारी नहीं अकेले आया। और आप लोग को क्या रुकिए? आप लोगों को क्या कमीशन थोड़ी दे दो।
इस मासूम के तीखे और लाचार सवालों के आगे कुछ पल के लिए जिला अधिकारी भी हैरान रह गए। हालांकि डीएम के निर्देश पर कोतवाली प्रभारी राजेश कुमार सिंह पुलिस टीम के साथ जांच करने पहुंचे तो कहानी में एक नया मोड़ आ गया। पुलिस जांच में पता चला कि मामला गंभीर पारिवारिक विवाद का है। जिस कमरे पर ताले की बात बच्चा कर रहा है, वह असल में उसके पिता की पहली पत्नी के बेटे का है जो फिलहाल लखनऊ में रहता है।
अमिताभ के पिता ने दो शादियां की थी और यह बच्चा दूसरी पत्नी का बेटा है। बच्चे की मां ने भी बताया कि उन्हें नहीं पता था कि बच्चा सीधे डीएम के पास चला गया है। भले ही जांच में पारिवारिक विवाद का दूसरा पहलू सामने आया हो। लेकिन 13 साल के अमिताभ का अपनी गरीबी, पढ़ाई के खर्च और हक के लिए सीधे डीएम की आंखों में आंखें डालकर बात करने का यह अंदाज