एक सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतरम-मंतर पर हैं और एक सोनम वांगचुक हैं मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में जिनका नाम अमित भटनागर है। अमित पिछले 11 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आदिवासियों पे अत्याचार नहीं सहेंगे। नहीं सहेंगे नहीं सहेंगे। फर्जी ग्रामभा नहीं चलेगी। नहीं चलेगी। नहीं चलेगी। हमारे पास इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि कोई व्यक्ति यहां भूख हड़ताल में है। रोज पेपर में छप रहा है। एसडीएम खुद आके देख रहे हैं। अगर हम भूख हड़ताल पे बैठे हैं। लिखित में नहीं दिया। यह सब कुछ ऑन द रिकॉर्ड बात हुई है। इसलिए मैं आपसे सवाल पूछ रहा हूं। उन्होंने कहा आपने लिखित में नहीं दिया कि मैं भूख हड़ताल पर हूं तो वो हम कैसे मान लें? मैंने अपने तीन साथियों को तीन बार भेजा मांगों सहित सब सहित कागज लेने के लिए यह जानकारी देने के लिए। यह पेपर में आ रहा है। एक संवेदनशील व्यक्ति ऐसी बात करेगा क्या? नेता प्रतिपक्ष आए थे तो 11 दिन में एक दिन डॉक्टर आया था। उसने सिर्फ ना शुगर-वगर ना कीटोन की जांच की। एक दिन सिर्फ बीपी नापा था कि जहां घोटालेबाजों को घोटाले करने की आजादी हो, जहां भ्रष्टाचारियों को भ्रष्टाचार करने की आजादी हो, गांव-गांव में शराब बेचने की आजादी हो, लोगों से पैसे लूटने की आजादी हो, लेकिन अपना दर्द कहने की आजादी नहीं हो इस देश में जीने का। क्या करेंगे इस ये भगत सिंह इसलिए शहादत दी थी। गांधी ने अपना पूरा जीवन जेल में इस इसलिए गुजारा था। आपकी अपनी जमीन नहीं गई है। आप इन लोगों को बरगला रहे हैं और आप जो है अपनी राजनीति चमकाने के लिए यहां पर अनशन बैठे हैं। उस अमित भटनागर बरगला के एक साथ खड़ा कर सकता है।
लोगों को चिता पे लेल देगा अमित भटनागर। यह मध्य प्रदेश का छतरपुर जिला है और केन बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए यहां पर जो लोग 3 जुलाई को फिर से बैठे थे। उस प्रदर्शन को आज 14वां दिन है। दिल्ली के जंतरमंतर का प्रदर्शन हम लगातार देख रहे हैं। उसी तरीके का प्रदर्शन एक यहां पर भी हो रहा है। मांग है कि जो रिवर रिंग प्रोजेक्ट से और अन्य प्रोजेक्ट से प्रभावित लोग हैं उनको उचित मुआवजा दिया जाए। उनकी मांगे जो है पूरी की जाए जो पिछली बार प्रदर्शन हुआ था उसके बाद प्रशासन ने कहा था कि कमेटी बनाई जाएगी और उसके ठीक तरीके से निवारण किया जाएगा। लेकिन वो नहीं हुआ तो ये लोग फिर से बैठे हैं। इस समय पर अमित भटनागर हैं हमारे साथ। अमित भटनागर को अगर मध्य प्रदेश का सोनम वांगचुक कहा जाए जो कि मीडिया में आजकल कहा जा रहा है तो बात कुछ गलत नहीं होगी लफाजी नहीं होगी। 11 दिन से यह भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में। अमित जी बात करने के लिए बहुत शुक्रिया। ये बताइए कि इस समय पर हालत आपकी कैसी? ठीक है। थोड़ा सा चक्कर आ रहे हैं। कमजोरी लग रही है। लेकिन जो देश की स्थिति है हम देख रहे हैं वो बहुत ही खराब है और उस स्थिति को बदलने के लिए अपने जान को जोखिम में डालना पड़ेगा। मुझे लगता है कि यह देश अह पूरी तरह से संवैधानिक अपने कानूनों को भूल चुका है। अपने लोगों का सम्मान करना भूल चुका है। और यह जो तंत्र है वो उतना हावी हो गया है। कलेक्टर हो चाहे जो हो जनता की सुन नहीं रहे हैं। इन परियोजनाओं में जिस परियोजना के लोग यहां चिता पे लेटने को मजबूर हैं। हम 14 दिन से यहां चिताओं पे लेटे हुए हैं। यहीं सोते हैं। पथरीली जमीनों पे सिर्फ चद्दर बिछा के किसी के पास वो चद्दर भी नहीं है। भूखे सो रहे हैं। रूखी रोटी खा रहे हैं। इसके बाद यहां कलेक्टर कहते हैं ये कोई पात्र लोग नहीं है। पहले कहते हैं लोग नहीं है। फिर कहते हैं पात्र नहीं है। फिर कहते हैं ये छतरपुर के नहीं पन्ना के लोग हैं। ये समझाइए थोड़ा कि अगर मैं ये पूछूं कि जब पिछली बार प्रदर्शन हुआ था वो पहली बात कि वो खत्म किस आश्वासन पर हुआ और फिर से क्यों शुरू हुआ? यह अगर एक टाइमलाइन थोड़ा बता दें दर्शकों को। पिछला जो प्रदर्शन हमने खत्म किया था क्योंकि हमको प्रशासन ने बहुत सारा आश्वासन दिया था कि सारी चीजें होंगी। आपको बैठाल के दिल्ली के प्रतिनिधि से बात कराई जाएगी। मंडल से आपकी राज्य प्रतिनिधियों से बात कराई जाएगी
और आपकी सर्वे पारदर्शी तरीके से होगा। सारी एक-एक समस्याएं हल होंगी। जब तक समस्या हल नहीं तब तक मकान नहीं तोड़े जाएंगे। लोगों के कानून का पालन होगा। ये सारी बातें कही थी। तो हम लोगों ने अपना अनशन जो है वो समाप्त नहीं किया था। स्थगित किया था। उन्होंने 7 दिन मांगे थे। हमने उनको 10 दिन दिए थे। फिर उन्होंने 10 दिन और मांगे। हमने 10 दिन और दिए। लेकिन फिर उन्होंने क्या किया? हमको जेल भेज दिया। फर्जी तरीके से हमारे साथियों को जेल भेजना शुरू कर दिया। हम जेल से निकले। फिर निकले तो निकलते ही साथ दूसरे फर्जी केस में फिर जेल भेज दिया। तो इस तरह से प्रशासन ने एक डर भय लोगों के मकान गिराने शुरू कर दिए। 250 से ज्यादा आदिवासी लोगों पे केस लगा दिए। यहां एक ऐसी स्थिति बना दी कि लोग अपने हक अधिकार की बात छोड़ो। अपने घर नहीं जा पा रहे थे। और ऐसी विषम परिस्थिति में भीकि देश के सामने एक विकट संकट है। वही मैं देख रहा हूं कि इन परियोजनाओं में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार किया गया। इसलिए इन परियोजनाओं में कानूनी प्रक्रिया जो है वो पूरी नहीं की गई और 21 आदिवासी गांव बगैर ग्रामभा बिना सहमति बिना अनुमति के उजाड़ दिए गए हैं और इसमें जो उनका मुआवजा भी इनके संवैधानिक अधिकार इनके जीवन का अधिकार इनके जल जंगल जमीन सब छीनना लग जो ओनापौना थोड़ा सा मुआवजा था जिससे ये किसी तरीके से एक झोपड़ी मकान बना के रह सकते थे वो मुआवजा भी इन्होंने दलालों को अपात्र लोगों को दे दिया आदिवासियों के हिस्से में बहुत थोड़ी सा पैसा पैसा आया जिसे बैंक वाले अधिकारी कर्मचारी लूट के और गांव-गांव में अवैध शराब बेच के इस तरह से पूरा बर्बाद कर दिया। इस समय पर क्या मांग है मुआवजे के अमाउंट की अगर मैं बात करूं तो कितना मुआवजा के इन बेतवा से जो प्रभावित लोग हैं वो मांग रहे हैं क्या इन वेतवा प्रभावितों की बात पैसे की नहीं है उनकी मांग यही है कि भाई हमको तीन एकड़ जमीन दे दो आप जमीन के बदले वो जमीन कहां कहीं भी सरकार को जहां लगे और इनको जहां लगे दोनों लोग तय कर लें दो-तीन जगह दिखा लें जहां के ये हैं छतरपुर जिले के या पास का पन्ना जिला है जहां भी एक बीच की जगह हो जहां इन लोगों को थोड़ा-थोड़ा सा पानी की व्यवस्था हो यह अपनी खेती कर सके जीवन गुजार सके जंगल इनका छीन लिया इनकी जीविका तो जंगल से चलती थी ये समझाइए कि एक आदिवासी व्यक्ति के लिए जो कि आपने खुद कहा कि जीविका जंगल से ही चलती थी तो उस जंगल को उस पहाड़ को छोड़कर जाना कहीं और रहना कितना आसान या कितना मुश्किल ये मानिए कि पानी से मछली को निकाल दें और आदिवासी को जंगल से निकाल दें दोनों नहीं जी पाएंगे लेकिन जबरा मारे रोने ना दें सरकार का लठ चल रहा है जबरन विस्थापन को मजबूर किया जा रहा है और पैसे भी नहीं दिए जा रहे हैं और मकान भी तोड़ दिए जा रहे हैं। मकान तोड़ दिए गए। स्कूल तोड़ दिया गया। अस्पताल तोड़ दिए गए। आंगनबाड़ी तोड़ दी गई। लाइट काट दी गई कि रहो वैसे ही। अब कहां बच्चे पड़ेंगे? नदी है। दूसरे गांव जा नहीं सकते। अब लेकिन फिर भी रहना है। आप भूख हड़ताल पर कब से बैठे हैं? एक बार ये बताएं। कितने दिन से? मैं आज 11वां दिन है। मेरी मजबूरी है क्योंकि यहां भ्रष्टाचारियों को भ्रष्टाचार करने की अनुमति है। अत्याचारियों को अत्याचार करने की अनुमति है। निर्दोष लोगों को जेल डालना ये सब करने की है। लेकिन हम अपने हक अधिकार की बात नहीं कह सकते। मैंने एसडीएम से बात की थी। कल हम जब यहां पर आए थे तो उनका यह कहना था कि पहली बात तो उनका यह कहना था कि छतरपुर जिले के लोग यहां पर बहुत कम हैं। यह पन्ना जिले के लोग हैं। पन्ना जिले के लोग यहां पर क्यों हैं? जबकि छतरपुर जिला है। वहां जाकर प्रोटेस्ट करें। देखिए एसडीएम एक संवैधानिक पद होता है और एसडीएम को ऐसी बात शायद नहीं करनी चाहिए। आप कह रहे हैं तो मैं मान रहा हूं क्योंकि ये देश के किसी भी हिस्से में हमारा संविधान कहता है कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति की मांग को संवैधानिक तरीके से उठा सकता है, रख सकता है। है ना? एसडीएम ऐसी बात क्यों कह रहे हैं पता नहीं। हां लेकिन यहां छतरपुर जिले के लोग ज्यादा है। डराया जा रहा है, धमकाया जा रहा है। लेकिन फिर भी लोगों की समस्या इतनी जेन्युइन है कि लोग आ ही जाते हैं अपने आप। कोई मेडिकल चेकअप होता है। क्या सरकार की तरफ से कोई डॉक्टर, कोई प्रशासन की तरफ से हर रोज का मेडिकल चेकअप ऐसा कुछ प्रोवाइड कराया गया। नेता प्रतिपक्ष आए थे तो 11 दिन में एक दिन डॉक्टर आया था। उसने सिर्फ ना शुगर-वगर ना कीटोन की जांच की। एक दिन सिर्फ बीपी नापा था। बाकी उसके अलावा फिर वो सवाल मैंने एसडीएम से पूछा था। एसडीएम का कहना है कि उनके पास यह जानकारी नहीं है कि आप भूख हड़ताल पर बैठो। रोज पेपर में छप रहा है। एसडीएम खुद आके देख रहे हैं। अगर हम भूख हड़ताल पे बैठे लिखित में नहीं दिया। यह सब कुछ ऑन द रिकॉर्ड बात हुई है। इसलिए मैं आपसे सवाल पूछ रहा हूं। उन्होंने कहा आपने लिखित में नहीं दिया कि मैं भूख हड़ताल पर हूं तो हम कैसे मान लें? मैंने अपने तीन साथियों को तीन बार भेजा मांगों सहित सब सहित कागज लेने के लिए यह जानकारी देने के लिए यह पेपर में आ रहा है। एक संवेदनशील व्यक्ति ऐसी बात करेगा क्या कि लिखित में नहीं दिया है ना हमने भेजा डरा देते हैं
धमका देते हैं। है ना? यह व्यापक भ्रष्टाचार है कि खरियानी गांव है यहां पर कैनवेतवा का। उसमें ₹1 करोड़ उनके मकानों का मुआवजा है। 11 करोड़ में ₹8 करोड़ सिर्फ दलाल खा गए। दलालों को दे दिया। 3 करोड़ सिर्फ ग्रामीणों को मिला है। जिसका कुआं नहीं है। सरकारी कुआं मोहित मिश्रा जी के नाम चढ़ा दिया जाता है जो उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल हैं। और उस सरकारी कुएं का मुआवजा इनकी गाइडलाइन कहती है ₹ लाख और उनको ₹9.5 लाख मिल जाता है। है ना? और वही आदिवासी ही लोग हैं और कई लोग हैं जिनके कुएं हैं। वह अपना कुआं ढूंढते फिर रहे हैं। उनको कोई कुएं का मुआवजा नहीं मिल रहा है। बीजेपी की सरकार है राज्य में। क्या सत्ता पक्ष की ओर से किसी ने आपसे कोई बात करने की कोशिश की? क्या आपको ये आश्वासन दिया गया? कहा गया कि भूख हड़ताल खत्म कर दीजिए या उठ जाइए धरना खत्म कर दीजिए। किसी ने कांटेक्ट किया। नहीं ऐसा कोई नहीं आया। पता नहीं कौन से लोग हैं ये। अह ना कोई यहां आया ना कोई अपने मुख्यमंत्री से या बस इतना मांग कर रहे हैं कि संविधान का कानून का इस देश में लोकतंत्र की सम्मान कीजिए। लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान कीजिए और किसानों की आजीविका और आदिवासियों की आजीविका जंगल सब कुछ छीना जा रहा है। तीन एकड़ जमीन दीजिए और इनकी धारा 11 जो है यह सब विसंगतियां फर्जी ग्रामभा कम से कम ग्रामभा कराइए। कट ऑफ डेट 26 लगाइए और इन परियोजनाओं की उच्च स्तरीय जांच कराइए। जिन लोगों ने भ्रष्टाचार किया है यदि आप लोग शामिल नहीं है ये लोग इन तक पैसा नहीं पहुंचा है तो इन परियोजनाओं की जांच करा लें एक बार सच का सच दूध का दूध पानी का पानी आ जाएगा। जो लड़ाई अमित जी पहले जल जंगल जमीन की लड़ाई होती थी। कहा जाता था कोई परियोजनाएं अगर आती थी चाहे झारखंड हो चाहे छत्तीसगढ़ हो कहा जाता था जंगल हम नहीं छोड़ेंगे। अपनी जमीन हम नहीं छोड़ेंगे। लेकिन वो लड़ाई अब यहां पर आ गई है। ठीक है। चाहे कहीं जमीन दीजिए वहां पर दे दीजिए। जब आपने डंडा मार के हमारे मकान तोड़ दिए। हमें मार मार के हमारे 250 लोगों पे केस लगा दिए। आपने उठा के हमको कहीं और पटक दिया तो अब हम हम अपना हमारा जंगल तो छूट ही गया। हमारे लिए सिर्फ इतना बचा है कि अब हम सिर्फ भीख मांग रहे हैं। है ना? अब हम और अब हम इस मोड़ पर पहुंच गए हैं कि अब हमारा मतलब जीने का वास्तव में यह अमरण अनशन जो है वास्तविक रूप से कि अब जीने का मन नहीं करता उस देश में कि जहां घोटालेबाजों को घोटाले करने की आजादी हो। जहां भ्रष्टाचारियों को भ्रष्टाचार करने की आजादी हो, गांव-गांव में शराब बेचने की आजादी हो, लोगों से पैसे लूटने की आजादी हो। लेकिन अपना दर्द कहने की आजादी नहीं हो। इस देश में जीने का क्या करेंगे? ये ये ये भगत सिंह ने इसलिए आप शहादत दी थी। गांधी ने अपना पूरा जीवन जेल में इस इस इसलिए गुजारा था। आप ये मानिए कि इस देश की जो स्थिति है मेरे ऊपर 11 फर्जी केस है। मैंने कुछ नहीं किया। ये लड़की वहां बैठी हुई है। दिव्या अहरवार कानून की छात्र है वो। कुंवारी लड़की है। उसके ऊपर आठ केस दर्ज है। कभी उसने एक छोटी सी ची नहीं की। इन इन आदिवासियों के ऊपर जो लोग कहीं नहीं थे इन महिलाओं को इनसे पूछिए आप इनसे दौड़ा दौड़ा के मारा है इनको पेशाब कर दी इन्हने दौड़ मतलब सिर्फ अपना हक हम ग्राम सभा के कागज मांगने गए ग्राम सभाएं इनकी फर्जी है जो सरपंच खत्म हो गए उन सरपंचों के दस्तखत है एक आखिरी सवाल मेरा यह रहेगा कि आप पर यह भी आरोप लगता है कि आप एक स्पेसिफिक पार्टी में रह चुके हैं चुनाव लड़ चुके हैं और आप जो है आपकी अपनी जमीन नहीं गई है। आप इन लोगों को बरगला रहे हैं और आप जो है अपनी राजनीति चमकाने के लिए यहां पर अंचल पर बैठे हैं। उस आरोप पर आप क्या? देखिए असंवेदनशील लोग कुछ भी कह सकते हैं। अगर मुझे अपनी राजनीति चमकानी है तो जान थोड़ी ना दूंगा मैं। है ना? मैं स्पेसिफिक पार्टी से रहा। मैंने पार्टी छोड़ दी। लेकिन मैं यह मानता हूं कि क्या राजनीतिक पार्टी आप छोड़ चुके? छोड़ चुका हूं। क्या मैं तो कह रहा हूं कि जैसे मान लीजिए मैं होता। क्या कोई राजनीतिक व्यक्ति को मुद्दा नहीं उठाना चाहिए? किसानों की बात नहीं कहनी चाहिए और मैं तो यह कह रहा हूं कि यह परियोजना भ्रष्टाचार हुआ भ्रष्टाचार की जांच कर ले दोषियों को जेल पहुंचा दे। क्यों मुझे चमकाने का मौका दे रहे हैं?
बगैर कानून के आपने कैसे घर तोड़ दिए? मैं तो वो बात कह रहा हूं ना। अब इस बात कहने से अगर मेरी राजनीति चमक रही है। अपनी जान पे खेलने से मेरी राजनीति चमक रही है। लोगों के दिल में जगह बन रही है। मेरे इस कड़े संघर्ष के बाद अगर मेरी मौत के बाद लोग जाग जाते हैं। तो इसमें इसमें यह यह एसडीएम को बात करना चाहिए। यह कलेक्टर को बात करना कलेक्टर को यह पूछना चाहिए कि यह जो बात कह रहे हैं खरियानी में सारे लोग पात्र हैं। हमने स्कूल नहीं तोड़ा है। लोग वहां रह रहे हैं। आपने कैसे कहा उन्होंने कि स्कूल नहीं तोड़ा। हमने एक जजर बिल्डिंग तोड़ी। आप वहां जाके देखिए। मैं आपको वीडियो देख रहा हूं। आपको झूठ पता चल जाएगा। पलकुआ में जाके देखिए आप। आप यहां जो विश्रामगंज के लोग हैं उनसे पूछिए कि ढाई साल पहले लाइट काट दी गई। आप इन महिलाओं से पूछिए कि कितनी लाठियां इनको 12 किलोमीटर तक दौड़ाया इन्होंने अपने कपड़ों में पेशाब कर ली। उन्हें आ के धारा धमकाया जाता है कि तुम्हारे खिलाफ एफआईआर कर देंगे, जेल भेज देंगे, ये कर देंगे। इनके मुआवजे नहीं मिले हैं। इनकी जमीनें खोद ली गई। जमीनें जोत दी गई। आज इनके सामने इनके दिल पे जो बीत रही है। इस भीगते पानी में चिता पे जीते जी चिता पे नहीं लेटते। और यह हिंदुओं की बात करने वाली सरकार है। जीते जी कौन अमित भटनागर बरगला के एक साथ खड़ा कर सकता है। लोगों को चिता पर ले डाल देगा। अमित भटनागर सैकड़ों महिलाएं चिता पे लेट जाएंगी और आदमी उन महिलाओं को यहां 15 17 दिन रहने देगा। चिता पे लेटने देगा। यहां साहब बिच्छू में ये पत्थर इतने बड़े-बड़े गढ़ रहे हैं। बरगला के किसी को ऐसे लिटा जा सकता है? आखरी सवाल पूछूं। कब तक आप लोग और यह प्रदर्शन कब तक जारी रहेगा? यह प्रदर्शन यह प्रदर्शन 500 लोगों की जिंदगी का सवाल है। उसके मजबूरी में यह प्रदर्शन करना पड़ रहा है। जब तक न्याय नहीं मिल जाता हर उस आखिरी व्यक्ति को या जब तक जान नहीं चली जाती तब तक मेरा मरण अनशन और जब तक न्याय नहीं मिल जाता तब तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा।
कलेक्टर जितने झूठ बोल रहे हैं। एसडीएम जितने झूठ बोल रहे जेल में डाल देंगे। जेल के अंदर से यह चलेगा। यह फांसी पर लटका देंगे तो हंसते हुए फांसी पर लटकेंगे और इनके घोटाले और इनके पाप एक-ए खोल के जाएंगे। इन्होंने 5000 लोगों की जिंदगियां छीनी है। हमारे बुंदेलखंड का जो फेफड़ा कहलाता था 40 लाख पेड़ यह बुंदेलखंड की ये जो नदियां हैं बराना नदी केन नदी श्यामरी नदी ये जीवनदा दाहियनी नदियां हैं। यह नदियों का अस्तित्व खत्म करने जा रहे हैं। इस देश के संविधान के साथ इस देश के लोकतंत्र के साथ खेल रहे हैं। हम भी अपनी जान पे खेल रहे हैं। और अहिंसक तरीके से हमारा यह आंदोलन आखिरी सांस तक जारी रहेगा जब तक न्याय नहीं मिल जाता। यह अमित भटनागर हैं। केन बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट हो, एनटीपीसी का प्रोजेक्ट हो, रुंज मजगांव डैम का प्रोजेक्ट हो। इस सबसे जो प्रभावित लोग हैं जिनकी मांग है कि उनको उचित मुआवजा नहीं दिया गया। वो 3 जुलाई 2026 से यहां पर प्रदर्शन कर रहे हैं। गर्मी हो, बरसात का मौसम आ चुका है। यह लोग चिताओं पर लेटे हैं। सूलियों पर लटके हैं। गले में फंदे हैं और अमित भटनागर अनशन पर हैं। इन सबकी मांग यही है कि सरकार इनको उचित मुआवजा दे। इनको इनकी जो जो मांगे हैं जो पात्र लोग हैं उन्हीं को मुआवजा मिले। यह सारे गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि भ्रष्टाचार भी इस पूरी परियोजनाओं में हो रहा है। खबरगांव पर आप इस प्रोटेस्ट से जुड़ी तमाम रिपोर्ट्स देखेंगे। छतरपुर जिले में कुपी गांव के पास मैं मौजूद हूं सत्यम जै ने रिपोर्ट की यह रिपोर्ट रिकॉर्ड की है। देखते रहिए खबरगा। शुक्रिया।