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वो खतर!नाक साजिश जिसने जॉनी लीवर का करियर कर दिया बर्बाद, जानकर रूह कांप जाएंगे।

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90 की बॉलीवुड फिल्मों में जिसके मुकाबले दूसरा कोई हास्य कलाकार नहीं होता। वो कॉमेडियन जिसकी कॉमेडी देखने लोग सिनेमाघरों में धक्कामुक्कीकरके भी आते। वो अभिनेता जो फिल्मों के लीड हीरोज़ पर भारी पड़ जाता। वो अचानक कैसे फिल्मों से गायब हो गया? जी नहीं। वो गायब नहीं हुआ। उसे गायब कर दिया गया। क्या आपको वो साजिश पता है जो जॉनी के साथ हुई और उसका करियर कैसे बर्बाद कर दिया गया? अगर नहीं तो वीडियो पूरादेखिए। ऐसा खुलासा होगा कि आप दंग रह जाएंगे। दोस्तों, जॉनी लीवर वैसे तो आंध्र प्रदेश के ईसाई परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

मगर इनके माता-पिता मुंबई के धारावी में रहा करते थे। उनकी मां जब गर्भवती थी तब वह आंध्र के ओंगोल जिले में अपने घर चली गई थी। यहीं जॉनी पैदा हुए [संगीत] और सिर्फ एक महीने में परिवार उनको लेकर वापस धारावी चला आया था। इनके दादा चर्च के [संगीत] पुजारी हुआ करते। उन्होंने इनके पैदा होने से पहले ही आदेश दे दिया थाकि लड़का हुआ तो नाम जॉन रखा जाएगा। बस दादा के आदेशपर उनका नाम जॉन राव रख दिया गया।

अब वह जॉनी लीवर कैसे बन गए? यह किस्सा बड़ा मजेदार है। जॉनी का बचपन बड़ा गरीबी में बीता। पिता हिंदुस्तान लीवर कंपनी में छोटी नौकरी करते। बहुत शराबी थे। तो जो भी कमाते में उड़ा देते। हालत यह थी कि जॉनी की फीस भरने तक का पैसा उनके पास नहीं होता। इसी वजह से सातवीं क्लास में उनको स्कूल से निकाल दिया गया। वैसे स्कूल से ही उनको दूसरों की आवाजों की नकल करने का बड़ा शौक था।

वहां भी अपने टीचरों की नकल किया करते। स्कूल से निकाल दिए गए और घर के सबसे बड़े बेटे थे तो कमाकर घर चलाने की सोचने लगे। उनकी उम्र रही होगी करीब 14 साल की। घर के पास में ही सिंधी कैंप था जहां सिंधी लोग रहा करते। आते-जाते एक सिंधी से जान पहचान हो गई। सिंधी जब भी उनको मिमिक्री करते देखता तो नाराजहोता। वो बोलता कुछ काम धंधा कर। एक बार जॉनी ने पूछा क्या करूं?

तो बोला मैं सड़क के किनारे पेन बेचता हूं। तू बेच लेगा। जॉनी ने हां कर दी। तो पेन के [संगीत] कुछ पैकेट उनको भी पकड़ा दिए। दोनों पासपास ही पेन बेचा करते। दिन की 2025 की बचत होने लगी। मगर फिर एक दिन बड़ी मजेदार घटना हुई। जॉनी पेनबेचकर घर लौट रहे थे। रास्ते में शर्मुखानंद हॉल पड़ा जहां कार्यक्रम चल रहा था। वो अंदर गए तो वहां महान कॉमेडियन दिनेश हिंू मिमिक्री कर रहे थे।

कभी ओम प्रकाश तो कभी अशोक कुमार की आवाज निकाल कर खूब तालियां बटोर रहे थे। बस यहीं से जॉनी को आईडिया आ गया। वो अब पेन बेचते मगर अपनी आवाज में नहीं। कभी दादा मुनि तो कभी ओम प्रकाश की आवाज में। अचानक उनके टैलेंट से पेन की बिक्री कई गुना बढ़ने लगी। लोग उनकी मिमिक्री सुनने आया करते औरपेन खरीद लेते। 2025 की कमाई कुछ ही समय में ₹200 ₹250 पहुंच गई।

कुछ साल उन्होंने यही काम किया। फिर 18 साल के हुए तो पिता ने उनको भी हिंदुस्तान लीवर में नौकरी दिलवा दी। मगर पिता बेटे की मिमिक्री से [संगीत] चिढ़ते थे। उन्होंने साफ कह दिया था कि तू मुझे स्टेज पर मत दिखना कभी। फिर भी जॉनी उनसे छिप-छिप कर कंपनी के प्रोग्रामों में जाते और अफसरों की आवाजें निकाल कर खूब हंसाया करते।

1977 की बात है। एक बार उनका प्रोग्राम कंपनी का यूनियन लीडर भी देख रहा था। वो इतना खुश हो गया कि अचानक से स्टेज पर चढ़ाऔर जॉनी से माइक छीनकर बोला इसका नाम आज से जॉनी राऊ नहीं जॉनी लीवर पुकारा जाएगा।

बस उसी दिन से जॉन राव जॉनी लीवर [संगीत] बन गए। अब यह फिल्मों में कैसे पहुंचे? यह दिलचस्प किस्सा भी आपको सुनाते हैं। कंपनी में नौकरी करने के साथ ही जॉनी छोटे-मोटे मिमिक्री शोज़ भी किया करते थे। उनके साथ दो म्यूजिशियन भीकाम करते। मुशर्रफ खान और किशोर भाम खुशकिस्मती सेदोनों उन दिनों कल्याण जी आनंद जी के लिए भी काम किया करते थे। एक बार दोनों ने कहा चल तुझे आज कल्याण जी आनंद जी से मिलवाते हैं।

उन दिनों इस जोड़ी की तूती बोला करती थी। जॉनी की मुलाकात हुई और बस यहीं से उनकी जिंदगी बदल गई। कल्याण जी आनंद जी के देश विदेश में बड़े-बड़े शोज़ हुआ करते। बड़े-बड़े अभिनेताओंजैसे अमिताभ बच्चन अनिल कपूर के साथ आने जाने लगे। इसी दौरान उनकी ऑडियोकैसेट भी निकल गई।

फिर एक दिन बड़ी मजेदार घटना हुई जहां से वह बॉलीवुड में पहुंच गए। 1980 की बात है। एक दिन जॉनी कल्याण जी के ऑफिस में कैरम खेल रहे थे। अचानक साउथ का प्रोड्यूसर कल्याण जी आनंद जी से मिलने पहुंचा। बातों ही बातों में कल्याण जी ने उसकी फिल्म के बारे में पूछा तो बोला कि फिल्म पूरी हो गई। बस कॉमेडी के दो सींस बाकी हैं। जगदीप के साथ कोईछोटा-मोटा कॉमेडियन मिल जाए तो।

अचानक कल्याण जी ने जॉनी की तरफ इशारा करके बोल दिया, यह है ना कॉमेडियन इसे ले जाओ। बस अगले ही दिन प्रोड्यूसर जॉनी को चेन्नई ले गया और फिल्म पूरी करवाई। विनोद मेहरा राज बब्बर की 1981 में आई वो फिल्म थी यह रिश्ता ना टूटे। इसी फिल्म से पहली बार जॉनी ने बॉलीवुड में एंट्री ली।

अगले ही साल उनको सुनील दत्त की दर्द का रिश्ता मिल गई। काम मिलना तो शुरू हो गया, मगर अब तक वह पहचान नहीं मिल पा रही थी। फिर 1986 में आई लव [संगीत] 86 फिल्म। गोविंदा के साथ पहली बार उत्तम के किरदार में जॉनी कोथोड़ी पहचान मिली। यहीं से इनको दूसरी फिल्म मिल गई जलवा। जिसमें इनका मुथू का किरदार लोगों को बहा गया। इसके बाद 1988 में आई हीरो हीरालाल के कॉन्स्टेबल और में मुन्ना के दोस्त के रोल में जॉनी लिवर ने खूब तालियां बटोरी। 1989 में चालबाज फिल्म में इनको जॉनी बाबा तांत्रिक का किरदार मिला जिसने लोगों को खूब हंसाया। फिर तो किशन कन्हैयाlका लोबो हो या नरसिम्हा का टेमो दादा जॉनी आगे बढ़ते गए।

मगर अभी वो किरदार तो आना ही बाकी थी जिसके लिए लोग आज भी उनको याद करते हैं। अब्बास मस्तान शाहरुख खान काजोल को लेकर फिल्म बनाने जा रहे थे। उनको एक नौकर का किरदार चाहिए था, जिसको भूलने की बीमारी होती है। इस रोल के लिए उनको जॉनी पसंद आ गए। 1993 में फिल्म आई बाजीगर। उनको किरदार मिला बाबूलाल का। इस किरदार ने ऐसा जादू कर दिया कि शाहरुख खान के बाद अगर दर्शकों को कोई दूसरा एक्टर याद रहा, तो वह जॉनी लीवर ही थे।

बाजीगरके बाद जॉनी 90 के सबसे बड़े कॉमेडियन बनकर उभरने लगे। 1993 में 12 तो 1994 में 13 90ज का ऐसा कोई साल नहीं जब जॉनी की 8 10 फिल्में ना आती हो। खासकर गोविंदा और जॉनी लीवर की जोड़ी ही पूरे बॉलीवुड पर छाई हुई थी। दोनों दिन ही नहीं रात में भी काम कियाकरते। कई कई बार तो जॉनी का सोते-सोते ही मेकअप हो जाया करता।

90 का दौर खत्म होते-होते जॉनी लीवर की फीस बड़े-बड़ेहीरोज़ से भी ज्यादा हो गई। आलम यह था कि फिल्मों में जॉनी लीवर का छोटा सा रोल लीड हीरो पर भारी पड़ने लगा। 1997 मेंआई जुदाई फिल्म में तो एक से बढ़कर एक एक्टर थे।

मगर पूरी फिल्म में हीरालाल बने जॉनी लीवर का वो अब्बा डब्बा झब्बा वाला सीन सब पर भारी पड़ बैठा था। अपने हुनर के दम पर उनको गाड़ी, बंगला, इज्जत, शोहरत सब हासिल हो गई। वो कामयाबी के सातवें आसमानपर दौड़ रहे थे।

मगर फिर साल 2000 में अचानक वो फिल्मी पर्दी से गायब होने लगे। जो अभिनेता हर दूसरी फिल्म में नजर आ जाता था वो अचानक फिल्मी पर्दी से गायब क्यों हो गया? चलिए हम वो काला सच बताते हैं। जॉनी ने साल 1984 में सुजाता नाम की लड़की से शादी की थी।

दोनों के दो बच्चे हुए। बेटी जमी और बेटा जैज़। सब कुछ सही चल रहा था। लेकिन साल 2000 में अचानक किसी की बुरी नजर इनके परिवार को लग गई। इनके बेटे जै के गर्दन पर एक छोटी उभर आई। पहले तो किसी के समझ में नहीं आया कि क्या हुआ। फिर धीरे-धीरे वो बढ़ने लगी।

तब जॉनी को चिंता हुई तो वो बेटे को लेकर नानावटी हॉस्पिटल पहुंचे। यहां जांच हुई तो पता लगा कि वो की थी जो धीरे-धीरे बढ़ रही थी। डॉक्टरों ने कर निकालने की योजना बनाई। मगर जैसे ही का चीरा लगा तो वह नसों में दबी हुई थी। ऐसे में वापस उसे सिल दिया गया। डॉक्टरोंने साफ बोल दिया कि इसका भी नहीं हो सकता क्योंकि गलत नस कट गई तो यह जिंदगी भर के लिए अपाहिज याअंधा भी हो सकता है और जान भी जा सकती है। सब ने बोल दिया यह कुछ ही समय का मेहमान है।

बस बेटे के इसी गम ने जॉनी को अंदर से तोड़ कर रख दिया। उन्होंने एक्टिंग छोड़ दी और बेटे के गम में शराब के में डूब गए। फिल्म मेकर्स की लाइन लगी रहती लेकिन वो सबको मना कर देते। बेटी को कभी इस चर्चतो कभी उस चर्च में लेकर जाती। दो साल तक वो बेटी को ऐसी हालत में देखकर रोतीरही। फिर एक दिन चमत्कार हो गया। साल 2002 की बात है। जॉनी बेटे को लेकर एक चर्च में गए। वहां पादरी ने बेटे को देखा और बोला इसे न्यूयॉर्क के अस्पताल में ले जाओ। गॉड इसकोठीक कर देगा। हर तरफ से हार चुके जॉनी सिर्फ गॉड के ही भरोसे बैठे थे। वो बेटे को न्यूयॉर्क के उसी अस्पताल ले गए। वहां सच में चमत्कार हो गया।

डॉक्टरों ने चेक किया और10 दिन में ही ऑपरेशन कर बेटी की गांठ निकाल दी। इस चमत्कार ने जॉनी को इतना प्रभावित कर दिया कि वो बॉलीवुड, एक्टिंग सब

भूल गए और चर्च में धार्मिक कामों में लग गए। सालों तक वोlएक्टिंग से दूर रहकर बाइबल के उपदेश विदेश में सुनाते रहे। फिर कुछ सालों बाद उन्होंने दोबारा वापसी की कोशिश की।

मगर इसबार उनको साजिश ले डूबी। हुआ यह कि जॉनी लीवर की वापसी की खबर सुनकर फिल्म मेकर्स दोबारा उनके पास आने लगे। उनको गोलमाल ऑल द बेस्ट या गोलमाल 3 जैसी कई अच्छी फिल्में भी ऑफर हुई। फिर से जॉनी का नाम होने लगा तो बड़े हीरोस को वो खतरा दिखने लगे। वह जानते थे कि जॉनीफिर से लय में आ गए तो उनका पत्ता कटते देर ना लगेगी। इसी वजह से बड़े-बड़े स्टार्स ने मिलकर साजिशशुरू कर दी।

जॉनी लीवर के सींस एडिट होने लगे। लीड हीरोज़ डायरेक्टरों पर दबाव डालकर जॉनी के कॉमेडी डायलॉग्स अपने नाम करवाने लग गए। इस साजिश ने धीरे-धीरे इस बेमिसाल हास्य अभिनेता का फिर से उभरताकरियर बर्बाद कर दिया। कुछ ही सालों में जॉनी को काम मिलना ही मुश्किल हो गया।

बॉलीवुड से गुमनाम हो चुके जॉनी मजबूरी में फिर से वहीं पहुंच गए जहां से उन्होंने शुरुआत की थी। वो स्टेज शो करके लोगों का मनोरंजन करने लगे। वो परिवार के साथ मुंबई रहते हैं। दोनों बच्चों को उन्होंने लंदन में पढ़ाया। वैसे उनकी बेटी भी अब कॉमेडियन बन चुकी है। जॉनी को अब कभी कभार ही फिल्म मिलती है।

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