सदियों पुराना यह शाही किला अपनी ऊंची-ऊंची दीवारों के पीछे ना जाने कितने राज छुपाए बैठा है। कहते हैं कि इस किले में मौजूद भूल भुलैया का रास्ता हर किसी को समझ नहीं आता। एक गलत मोड़ और इंसान खुद को उलझे हुए रास्तों के बीच पा सकता है। आखिर क्यों बनाया गया था यह रहस्यमई किला? क्या यह दुश्मनों को भ्रमित करने की रणनीति थी या फिर इसके पीछे कोई ऐसा राज छुपा है जो आज आज भी इतिहास के पन्नों में दफन है। आइए चलते हैं जौनपुर के शाही किले के अंदर और जानते हैं इसके इतिहास, रहस्य और बुलबुलिया की अनकही कहानी। तो गाइस आज हम आए हैं उत्तर प्रदेश के वन ऑफ द फेमस सिटी जौनपुर जो काफी ज्यादा हिस्टोरिकल सिटी है। और यहां की शान है शाही किला। तो आज हम एक्सप्लोर कराएंगे शाही किला। यहां अगर आप ऑनलाइन टिकट लेते हैं तो ₹20 में पड़ेगा। अगर ऑफलाइन लेते हैं तो ₹25 का। तो काफी इंटरेस्टिंग वीडियो होने वाला है।
बहुत जबरदस्त वाली गर्मी है। बिल्कुल 1:00 बज रहे हैं। 45 46 डिग्री का टेंपरेचर है। बहुत तगड़ी वाली गर्मी है यहां पे और किलेव में डबल गर्मी होती है भाई। तो अंदर की भूल भुलैया खोजने के लिए मैं आया हूं। देखता हूं भूल भुलैया मिलती है कि नहीं। जब मैं इस विशाल दरवाजे को देखता हूं तो सोचता हूं कभी यहीं से हाथियों के काफिले गुजरते होंगे। सैनिकों की टुकड़ियां आती जाती होंगी और शाही मेहमानों का स्वागत होता होगा। लेकिन आज वही जगह वीरान है। कल्पना कीजिए 650 साल पहले आप इसी जगह खड़े होते तो आपके चारों तरफ सैनिक, घोड़े और शाही रौनक दिखाई देती। इस किले का निर्माण सन 1362 ईस्वी में फिरोजशाह तुगलक ने करवाया था। उस समय जौनपुर सिर्फ एक शहर नहीं था बल्कि सत्ता का एक बड़ा केंद्र था। बाद में शरकी शासकों ने जौनपुर को अपनी राजधानी बनाया और इस शहर को इतना विकसित किया कि इसे सिराज हिंद कहा जाने लगा। लेकिन इतिहास हमेशा एक जैसा नहीं रहता। सत्ता बदली, शासक बदले और धीरे-धीरे इस किले की चमक भी फीकी पड़ती चली गई। तो, यह किला सामने से जितना रहस्यमई है, उतना अंदर से भी रहस्यमई है। तो, मैं अंदर चलता हूं और परत दर-परत इसके रहस्य को खोलता हूं। किले के परिसर में एक खूबसूरत सी मस्जिद है जो कि किले के बीचोंबीच मौजूद है। इस मस्जिद का निर्माण सन 1376 ईस्वी में इब्राहिम नायब बरबक ने कराई थी। यह मस्जिद तुर्की स्टाइल में बनाई गई है। यह जौनपुर की सभी इमारतों से पुरानी इमारत है।
इस मस्जिद की लंबाई 133 फीट और चौड़ाई 22 फीट है। इस मस्जिद में तीन गुंबद हैं। मस्जिद की डिजाइन काफी ज्यादा बेहतरीन है। इसे बनाने वाले कारीगरों का जवाब नहीं। पत्थरों को तराश कर नायाब चीज बना देते थे। इसमें एक मीनार भी है। इस मस्जिद में सिर्फ जुमा की नमाज पढ़ने की अनुमति है। ओवरऑल मस्जिद काफी ज्यादा खूबसूरत है। मस्जिद से आगे बढ़ते ही एक शाही हम्माम है। इसे शाही हम्माम भूल भुलैया भी कहते हैं। तो चलिए देखते हैं इस भूल भुलैया में हम रास्ता भूल जाते हैं या नहीं। शाही हम्माम को काफी बड़ा बनाया गया है। इतना बड़ा बाथरूम और कहीं देखने को आपको जल्दी नहीं मिलेगा। तो देखिए शाही अम्माम के अंदर जाते ही यह देखिए पानी लाने वाला रास्ता बनाया गया है। तो गाइज़ यह देखिए रास्ता यहां से होकर जाता है भूल भुलैया वाला। ये देखिए आगे की तरफ मैं चल रहा हूं यहां पे। तो गाइज ये देखिए एक यह भी बनाया गया है। ये सब जजर होते जा रहा है। ये देखिए। तो शाही किला का जो यह हम्माम है वह कहीं ना कहीं जजर होते जा रहा है। तो सरकार से गुजारिश है कि इसके संरक्षित कराया जाए क्योंकि ऐतिहासिक धरोहर है। यह देखिए अंदर की तरफ का व्यू कितना शानदार है। उसके अलावा रोशनी आने के लिए बनाया गया है। तो पहले की नक्काशी काफी अलग तरीके की रहती थी। यह देख सकते हैं यहां से। यह देखिए इसको भूल भुलैया जैसा शेप दिया गया है। लेकिन मैं आपको बताता चलूं जो लखनऊ वाली भूल भुलैया है वो इसके बहुत बाद की है। यह 14वीं शताब्दी की है। तो यह भी काफी अच्छी वास्तुकला है। देखिए रास्ते के अंदर रास्ता यह पूरा बाथरूम है। जो शाही परिवार था उनके नहाने का बाथरूम हुआ करता था। यह देखिए एक बात मैं दिखा रहा हूं। पहले के जमाने के भाई साहब देखिए बाट टट्टब होते कैसे थे। पहले के बाट टब ऐसे ही होते थे। यह भी बिल्कुल शाही। इसमें गर्म पानी भी आता था, ठंडा पानी भी आता था। उस जमाने की लग्जुरियस लाइफ यही वाली थी जो राजा महाराजा यूज़ करते थे। तो आप देख सकते हैं नहाने वाला बनाया गया है। दोनों तरफ से छेद बने हुए हैं जिसमें से गर्म पानी भी आता था। ठंडा पानी भी आता था। और पानी आने के लिए कई सारे द्वार बनाए गए थे। देखिए पानी इन्हीं रास्तों से आता था।
ऐसे-ऐसे करके कई रास्ते बनाए गए हैं जिनके द्वारा यहां पर पानी दौड़ाया जाता था। गाइज़ यह देखिए लड़का बिल्कुल अपने आप को राजा समझ रहा है। राजा समझ के कूद गए हो क्या? तो पहले राजा ऐसे ही नहाते थे। लड़का भी अंदर नहाने के लिए चला गया है। मजा आ रहा है? यस यस। तो गाइज ये देखिए एक और शाही हम्माम टाइप में यहां पर बना हुआ है। बिल्कुल नहाने वाला जैसे होता था पहले जमाने में। तो राजाओं का भी अलग मामला था। उसके अलावा देखिए गंदगी फैलाने वाले। यहां भी गंदगी फैलाए। वो देखिए दिल बनाए हैं। तो पूरी दीवार गंदी कर देते हैं। तो व्यू काफी बढ़िया यहां का है। उसके अलावा चलिए दूसरे रास्ते की तरफ मैं चलता हूं। देखिए यहां से एक भूल भुलैया वाला रास्ता है। यहां से भी निकल सकते थे। तो छोटी-छोटी भूल भुलैया यहीं से है। जाओ ये देखो छोटा भाई अभी निकल के दिखाएगा। तो इसी को भूल भुलैया बताया गया है। ये देखिए यहां से एक निकलने वाला रास्ता है। यहां से भाई निकल गया। तो गाइज़ यह बेसिकली यह एक बाथरूम टाइप का है। शाही हम्माम भूल भुलैया जैसा यहां कुछ नहीं है। सिर्फ नाम की भूल भुलैया है। बस थोड़ा सा रास्ता ऐसे इधर से उधर निकला है। लखनऊ वाली भूल भुलैया का टक्कर का हिंदुस्तान भर में कहीं कुछ नहीं है। सबसे नंबर वन भूल भुलैया लखनऊ में। तो शाही अम्माम में वाटर सप्लाई इसी कुएं से होती थी और यह कुआं जुड़ा है गोमती नदी से। शाही किला जो है गोमती नदी से जुड़ा हुआ है। तो सारी पानी की सप्लाई इसी से होती थी। तो आज भी जो गार्डन की सिंचाई होती है इसी कुएं से होती है। ये देखिए बहुत भारीभारी पेड़ हैं लेकिन ये सब मुझे लगता है आंधियों में उखड़ गए हैं। यहां पर काफी सारे पेड़ उखड़े हुए लग रहे हैं। देख सकते हैं आप एक पेड़ दो पेड़ पूरा जड़ से उखड़ गया है पेड़ देख सकते हैं। उसके अलावा ये तीसरा वाला पेड़ है।
सागोन का पेड़ है। यह भी पूरा जड़ से ही उखड़ गया है। देखिए। तो गाइज़ यह देखिए सामने की तरफ जो दिख रहा है वह ऐतिहासिक शाही पुल है। किसी ब्लॉग में उसे भी कवर किया जाएगा। उसके तो गाइज़ देखिए कितना शानदार नजारा पीछे है। गोमती नदी पीछे है। उसके अलावा ऐतिहासिक शाही पुल है और ऐतिहासिक शहर जौनपुर है। तो ये किला सबसे ऊंचा प्लेस है यहां का। यहां से पूरा व्यू काफी शानदार दिख रहा है। 43° टेंपरेचर में हम लोग काफी मजा ले रहे हैं। उसके अलावा देखिए भैया लोग भी 43° में गजब का मजा ले रहे हैं। भाई टोपीवपी बहुत बढ़िया लगाए हो भाई तुम। गाइज़ यह देखिए किला यही है। उसके अलावा यह देखिए जहां मैं खड़ा था वहां टूटा हुआ बिल्कुल खंडार है। तो यह ब्रिटिश हुकूमत ने इस पे गोले दागे थे। मुगलों ने बहुत अच्छे से इसको बना कर रखा था। लेकिन ब्रिटिश हुकूमत ने काफी गोले दागे थे। इस वजह से ये क्षतिग्रस्त हो गया था। देखिए यह तो इसी परिसर के अंदर देखिए एक बारादरी भी है। बारादरी का मतलब होता है 12 दरवाजे जहां से हवा आती है। लेकिन इसमें 12 दरवाजे नहीं एक ही दरवाजे हैं। तो इसको देखकर लग रहा है ये सैन्य सुरक्षा के लिहाज से बनाया गया था क्योंकि ये बिल्कुल नदी के ऊपर है। तो यहां से सैनिक बैठकर सुरक्षा करते थे।
पुराने जमाने में किले का निर्माण इसलिए कराया जाता था क्योंकि वह सैन्य सुरक्षा के काम आता था। वहीं से रणनीति भी बनती थी और खासकर जो सिक्योरिटी होती थी वह किलों से होती थी। यह देखिए यहां सब सैनिक हुआ करते आप इमेजिन करिए कि चारों तरफ सैनिक लगे हो, नीचे से घोड़े से लोग आ रहे हो। तो एक तरह का विजुअल इस तरह का बन सकता है। चारों तरफ सैनिक आप लोग सीरियल्स में देखते होंगे। तो किले सुरक्षा की दृष्टि से काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हुआ करते थे और शाही किला काफी शानदार है। काफी बेहतरीन है। तो किले का सफर काफी अच्छा रहा। मुझे किला काफी ज्यादा पसंद आया। उसके अलावा यह दरवाजा जो है अपने आप में अल्टीमेट है। ऐतिहासिक है। बहुत शानदार है। फोटोग्राफी और रील्स के लिए भी एक नंबर है। गाइस शाही किला का सफर काफी ज्यादा इंटरेस्टिंग रहा। काफी छोटे में किला है लेकिन काफी शानदार है। तो आई होप अगर आप लोग कभी जौनपुर आते हैं तो यहां एक बार जरूर आएंगे। काफी बढ़िया जगह है। जौनपार जौनपुर में तीनचार साइटें घूमने के लिए बढ़िया है। शाही पुल है, अटाला मस्जिद है, जामा मस्जिद है, शाही किला है। तीन चार प्लेसेस काफी बढ़िया है। तो मिलते हैं किसी नए वीडियो में। जय हिंद, जय भारत।