कि बॉलीवुड के शो मैन कहलाए जाने वाले सुभाष घई को तो आप जानती हो कि इन अपने शानदार फिर भी सफर के दौरान कई सारी बड़ी फिल्मों को जन्म दिया जिन फिल्मों कुमारी आज भी तरोताजा स्वास्थ्य की बात करें तो उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों लाइक काफी विवादों खरीदनी है क्योंकि इनके फिल्म को लेकर कई बार ऐसे विवाद देखने को मिलेंगे इसके बाद यह काफी ज्यादा सुर्खियों में भी आ गए थे तो वहीं दूसरी ओर इन्होंने अपने शानदार अदाकारी का नमूना भी पेश किया है और उन्होंने अपने करियर के दौरान कई सारे ऐसी फिल्मों का निर्देशन किया है
जो फिल्में आज भी काफी अधिक पसंद की जाती हैं और उन फिल्मों की तरह मिला लें तो आज से करें 31 साल पहले रिलीज हुई पर सौदागर तो आपको याद ही होगी यह फिर मत दो दोस्तों की कहानी पर आधारित थी जिसे उस दौरान काफी ज्यादा पसंद भी किया गया आज भले 31 साल से ज्यादा समय हो गया इस फिल्म को रिलीज हुए लेकिन आज भी इस फिल्म को काफी ज्यादा पसंद किया जाता है सौदागर फिल्म को लेकर कई सारी दिलचस्प किस्से कहानियां है जो इस समय काफी ज्यादा वायरल भी हो रहे हैं यहां आपको इस बात की जानकारी देना चाहेंगे कि फिल्म के लीड हीरो दिलीप साहब और राजकुमार साहब थे लेकिन उस दौरान इन कि बिल्कुल भी निभाते थी लेकिन बावजूद इसके सुभाष घई ने इन दोनों कलाकारों को अपने फिल्म के जरिए बड़े पर्दे पर लेकर आए थे अब दिलीप साहब
की बात करें तो यह बॉलीवुड के ट्रेजडी किंग कहना है कि जिन्होंने अपने करियर के दौरान कई सारी बड़ी फिल्मों में काम किया और हिंदी सिनेमा में इनका रुतबा भी काफी ऊंचा आप तो है दूसरी ओर राजकुमार साहब की बात करें तो यह सॉफ्ट अंदाज के लिए काफी ज्यादा बदनाम थे किसी भी सुपर स्टार की बेइज्जती करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ते थे बावजूद इसके कुछ सुपरस्टार को उनकी बातें बुरी भी चूना लगता है हालांकि अपने करियर के दौरान इन दोनों कलाकारों ने काफी नाम और शोहरत कमाई और सौदागर फिल्म से पहले दिलीप साहब और आसमान साहब ने साथ 1968 में रिलीज़ हुई फ़िल्म पैगाम में साथ काम किया था और दोनों के बीच उस समय फिल्म के सेट पर थोड़ा मर मोटा हो गया और इसके बाद बताया जाता है कि दोनों की दुश्मनी शुरू हो गई थी और करीब 32 सालों तक इन्होंने इंडस्ट्री में रहते हुए एक साथ काम नहीं किया था लेकिन सौदागर फिल्म के जरिए करीब 32 सालों के बाद इन्होंने एक दूसरे के साथ स्क्रीन सेट किया था पेशंट 221 जो खबर की मानें तो बताया जाता है कि इस है क्वार्ट्ज गई ने सबसे पहले दिलीप साहब से बात की क्योंकि उनका मानना था कि दिलीप साहब को बनाने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी दिलीप साहब इससे पहले सुभाष घई के साथ
विधाताओं क्रांति जैसी सुपर-डुपर हिट फिल्मों में काम कर चुके थे और इस बार में सुभाष घई ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि दिलीप साहब को जब मैंने फिल्म की कहानी सुनाया तो वह तुरंत राजी हो गए मगर जब उन्हें बाकी कास्ट के बारे में पूछा तो मैंने अपनी कार में बैठकर राजकुमार साहब का नाम दिया और मैं वहां से चला था बहरा आने वाले समय में दिलीप साहब तो मान गए पर सुभाष घई के राजकुमार साह आपको बनाना इतना आसान नहीं था मगर ताज्जुब की बात तो यह है कि जब सुभाष घई ने राजकुमार साहब स्क्रिप्ट सुनाई तो उन्होंने सुभाष घई से पूछा कि मेरे साथ फिल्मों में दूसरा हीरो कौन है और जवाब है जो सुभाष घई ने दिलीप साहब का नाम लिया तो राजकुमार साहब बोले जानी हिंदुस्तान में अपने बाद अगर हम किसी को एक्टर मानते हैं तो वह दिलीप कुमार को मानते हैं हमारे सामने जब दिलीप कुमार आएंगे तो जलवा तो
आएगा यह सब कुछ ठीक-ठाक रहा लेकिन अभी तो सिर्फ दोनों कलाकारों के साथ काम करने की तैयारी शुरू हुई थी छुट्टी शुरू करते खत्म करने का सफर बहुत ज्यादा लंबा शुक्रवार शाम जब फिल्म के सेट पर पहुंचे तो उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि दिलीप साहब का किरदार यूपी और बिहारी टोन में हिंदी बोलता है इस बात को लेकर वह मान गई से गुस्सा होगे कि फिल्म में उन्हें सिर्फ हिंदी बोलनी चाहिए क्योंकि सुभाष घई ने दिलीप साहब के किरदार के बारे में यह बात नहीं बताई थी इसलिए वृषभ गई से कह दिया था कि फिल्म में काम नहीं करेंगी वह मुंबई जाने की तैयारी करने लगे थे उस उस गईं 2 घंटे की मशक्कत के बाद राजकुमार साहब को मरा है और उत्तर दिया कि फिल्म में राजकुमार सा किरदार अमीर है और दिलीप साहब का किरदार गरीब है स्वास गई के बात सुनकर रात मार साहब का गुस्सा शांत हो गया और उस सेट पर वापस लौट गए और बताया जाता है कि उन्होंने फिर भी शूटिंग शुरू कर दी थी अब किसानों की दुश्मनी ऐसे ही खत्म न होने वाली थी सुभाष घई ने दोनों सुपरस्टार को एक साथ लाने की जीतोड़ कोशिश की और यह दोनों कलाकार एक फिल्म के लिए राजी भी हो गए लेकिन बावजूद इसके राजकुमार साह दिलीप साहब के बीच में सेट के दौरान तल्खियां भी देखने
को मिली दोनों साथ में काम तो कर रहे थे मगर आपसी बातचीत बिल्कुल भी बनती और यहां पर सुभाष घई ने इन दोनों के बीच में दुश्मनी को दोस्ती में बदलने की भी कोशिश की थी विश्वास गई कि इस फिल्म को लेकर एक और किस्सा भी रहा है यहां आपको इस बात की जानकारी देना चाहेंगे कि बॉलीवुड के ही मैन कहलाए जाने वाले धर्मेंद्र के बेटे बॉबी देओल इस फिल्म के जरिए लोच होना चाहते थे लेकिन उधर मैंने मना कर दिया था क्योंकि वो खुद बॉबी देओल को लांच करना चाहते थे बताया जाता है कि फिल्म में विवेक मिश्रा के किरदार वास्तु के लिए सबसे पहले आमिर खान को भी एप्रोच किया गया था पर उन्हें यह रोल काफी छोटा लगा इसके अलावा चंद्रचूड़ सिंह ने भी रोल के लिए ऑडिशन दिया था लेकिन वह इसके लिए रिजेक्ट हो गए और बाद में विवेक मुशरान के वाले किरदार के लिए बॉबी देओल को भी मनाने की कोशिश की थी लेकिन यह धर्म में ने मना कर दिया अब जैसा मर्जी रफ्तार के सौदागर फिल्म में दिलीप साहब राजकुमार साहब की दोस्ती एक बार फिर से बड़े पर्दे पर काफी ज्यादा मशहूर हुई और 31 सालों के बावजूद भी आज भी इस पिंकी कुमारी तरोताजा आज भी सौदागर फिल्म को लोग देखना बहुत ज्यादा पसंद करते हैं हर भले ही दिलीप साहब और राजकुमार साह इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनके दिए गए याद घर पर आज भी तरोताजा हे हुआ है [संगीत]