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ईरान ने खोल दिया दूसरा होर्मुज? पार हुए 20 जहाज, ट्रंप अनजान!

Hindi Post

[संगीत] दुनिया की सबसे संकरी नस और उस पर अमेरिका का सख्त पहरा। लेकिन क्या वाशिंगटन का यह चक्रव्यूह महज 24 घंटे में टूट गया। एक तरफ अमेरिकी नेवी के सबसे घातक डिस्ट्रॉय तैनात है। हजारों सैनिक मुस्तैद है और आसमान से ड्रोन नजर रख रहे हैं। मकसद एक ही है। ईरान की आर्थिक घेराबंदी। लेकिन इसी बीच दिन के उजाले में एक चीनी टैंकर आता है और सीना तानकर उस अमेरिकी नाकाबंदी के बीच से निकल जाता है। ना कोई डर ना कोई हिचकिचाहट। यह खेल सिर्फ जहाजों का नहीं बल्कि पावर का है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मोस जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। अमेरिका ने यहां अपनी ताकत झोंकी समुद्री रेखा खींची। लेकिन चीन ने उस रेखा को पार करके मुस्कुराते हुए मैसेज दिया कि अब समंदर पर आपकी हुकूमत [संगीत] नहीं चलेगी। पूरा मामला समझिए।

13 अप्रैल को जब ईरान के साथ युद्ध विराम की बातचीत फेल हुई तो अमेरिका ने अपनी आखिरी चाल चली। नौसैनिक नाकाबंदी। शुरुआत में लगा कि अमेरिका जीत रहा है। कई जहाज लौट गए। कई ने रास्ता बदल लिया। लेकिन तभी एंट्री हुई चीनी टैंकर रिच टेरी की। प्रतिबंधों की लिस्ट में होने के बावजूद यह जहाज नहीं रुका और इसके पीछे 20 और व्यापारिक जहाजों ने अमेरिकी रडार की धज्जियां उड़ा दी। चीन ने इसे खतरनाक कदम बताया है तो दूसरी तरफ ईरान के बंदरगाहों की धड़कनें अभी थमी नहीं है। सवाल यह है कि क्या अमेरिका सिर्फ मूकदर्शक बनकर रह गया है या फिर यह आने वाले किसी बहुत बड़े तूफान से पहले की खामोशी है? देखिए इस रिपोर्ट में। संयुक्त राज्य अमेरिका ने दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक पर नौसैनिक नाकाबंदी स्थापित कर दी। युद्धपोत, डिस्ट्रयर, हजारों सैनिक और सिर्फ 24 घंटों के भीतर चाइना और ईरान ने उस नाकाबंदी को पार कर लिया। ना छिपकर ना रात में बल्कि खुले दिन के उजाले में। और यूनाइटेड स्टेट्स बस देखता रह गया। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस दुनिया के कुल तेल का लगभग 20% हर दिन इसी एक संकरे रास्ते से गुजरता है।

जो इसे नियंत्रित करता है वो वैश्विक अर्थव्यवस्था की नस पर नियंत्रण रखता है। अभी अमेरिका इसे नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन पिछले 24 घंटों में जो हुआ उससे यह नियंत्रण उतना मजबूत नहीं दिख रहा जितना वाशिंगटन मानना चाहता है। तो पूरा मामला समझिए। 13 अप्रैल को यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच युद्ध विराम वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने सख्त कदम उठाया। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस में नौसैनिक नाकाबंदी। निशाना था ईरानी बंदरगाहों की ओर आने जाने वाले जहाज ताकि तेहरान की तेल आय को रोका जा सके और उसे फिर से बातचीत की मेज पर लाया जा सके। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रयर और सपोर्ट वेसल गल्फ ऑफ ओमान और अरेबियन सी में तैनात किए। पहले 24 घंटों में छह व्यापारी जहाजों को अमेरिकी बलों ने रेडियो निर्देश दिए और वे वापस लौट गए। आठ ईरान संबंधित तेल टैंकरों ने भी अपना रास्ता बदल लिया बिना गोली चले। शुरुआत अमेरिका के लिए सकारात्मक दिखी। फिर सामने आया रिच स्टारी। रिच स्टारी एक चीनी स्वामित्व वाला टैंकर है जो मलावी का झंडा लिए हुए है

और शेंघाई से संचालित होता है। खास बात यह जहाज 2023 से अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत है क्योंकि यह ईरानी तेल की ढुलाई करता रहा है। लेकिन यह अकेला नहीं था। उसी 24 घंटे के दौरान 20 से अधिक वाणिज्यिक जहाज, टैंकर, बल्क कैरियर और कंटेनर वेसल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस से गुजर गए। मरीन ट्रैफिक, केप्लर और ब्लूमबर्ग के आंकड़े दिखाते हैं कि इस नाकाबंदी का कुल समुद्री यातायात पर सीमित असर पड़ा है। हां, इसने जहाजों को ईरानी बंदरगाहों पर रुकने से रोका है। लेकिन ईरान की आर्थिक जीवन रेखा को पूरी तरह बंद करना अभी उससे काफी दूर है।

चीन की प्रतिक्रिया तेज और स्पष्ट थी। बीजिंग ने इस कदम को खतरनाक और गैर जिम्मेदाराना बताया और साफ कर दिया कि ईरान के साथ उसकी ऊर्जा साझेदारी जो उसका प्रमुख तेल आपूर्ति करता है, प्रभावित नहीं होगी। 24 घंटों में 20 जहाज, एक प्रतिबंधित चीनी टैंकर का खुलेआम गुजरना, ईरान से जुड़े जहाजों का बिना रुके आगे बढ़ना। जब तक वे तेहरान के बंदरगाहों पर नहीं रुकते। अमेरिका ने समुद्र में एक रेखा खींची। चीन ने उसे पार कर लिया और मुस्कुराते हुए किया। युद्ध विराम 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। इस हफ्ते बातचीत होगी या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन फिलहाल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस में हर गतिविधि पर दुनिया की हर बड़ी ताकत की नजर बनी हुई है। [संगीत] सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ। [संगीत]

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