ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा अली खाम नई कहां है? मोजतबा ताबूत में है या तेहरान में? सुप्रीम लीडर कब्र में है या अस्पताल में? यह सवाल आज पूरी दुनिया पूछ रही है। और इस सवाल के पीछे है एक वीडियो। यह वीडियो ईरान के मशहूर शहर मशहद का बताया जा रहा है। दावा है कि यह आईआरजीसी की एक सभा का वीडियो है। इस सभा में युद्ध में शहीद हुए लोगों को फोटो लगाकर श्रद्धांजलि दी जा रही है। सामने जिन लोगों की तस्वीरें लगी हैं, उसे बहुत गौर से देखिए।
इसमें आईआरजीसी के पूर्व जनरल कासिम सुलेमानी की तस्वीर है। जनवरी 2020 में अमेरिकी हमले में मारे जाने के बाद ईरान में कासिम सुलेमानी को शहीद का दर्जा दिया गया है। इसी पोस्टर में ईरान के पहले सुप्रीम लीडर आयातुल्ला रोहुल्ला खुमैनी की भी तस्वीर है और इसी पोस्टर में आया अली खामनई की तस्वीर भी साफ तौर पर देखी जा सकती है। ईरान के मारे गए इन प्रमुख लीडर्स के अलावा इस पोस्टर में 80 और लोगों की तस्वीरें हैं जो इजराइल और अमेरिका के हमले में मारे गए। लेकिन इन 80 तस्वीरों में से एक तस्वीर मोजतबा अली खामने की है और इसी तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ऐसे में पूरी दुनिया सवाल पूछ रही है कि मोजतबा खामने की तस्वीर शहीदों की तस्वीरों के बीच में क्या कर रही है? क्या मोजतबा खामने की मौत हो गई है? क्या बाकी शहीदों के साथ-साथ मशहद में मोजतबा खामन को भी श्रद्धांजलि दी जा रही है? इस तस्वीर परर्शियन भाषा में जो कुछ भी लिखा है उससे भी मोजतबा की मौत के सवाल खड़े हो रहे हैं। तस्वीर के एक हिस्से पर लिखा गया है
यह शहीदों की गाथा का सिलसिला है। अमेरिका और इजरली शासन [संगीत] की आक्रामकता में शहीद हुए लोग। तो क्या मोजतबा खामनई की मौत हो चुकी है। मशद शहर में आया अली खामनई को दफनाया जाना है। आया अली खामनई ने मरने से पहले मशद शहर में ही दफन होने की इच्छा जताई थी। इसीलिए मशहद में कई दिनों से लगातार श्रद्धांजलि सभाएं चल रही हैं। इस बीच ईरान से आए इस वीडियो ने कई सवाल खड़े कर दिए। इसे एक वीडियो ने दुनिया भर के खुफिया तंत्र में खलबली मचा दी। लेकिन यहां बड़ा सवाल तो यह है कि जब ईरान में टोटल इंटरनेट ब्लैकउ है तो यह तस्वीर बाहर आई कैसे?
एक थ्योरी तो यह कहती है कि ईरान में सुप्रीम लीडर के विरोधियों ने इस तस्वीर को इंटेलिजेंस एजेंसियों को शेयर किया। लेकिन दूसरी थ्योरी यह भी कहती है कि इस तस्वीर को जानबूझकर ईरान ने जारी किया है। तो क्या ईरान ने गलती से यह मान लिया कि मोजतबा की मौत हो गई या फिर पूरी दुनिया को यह कोई मैसेज। मोजतबा की मौत को लेकर सवाल उठने लाजमी है क्योंकि जब से आया अली खामने की मौत हुई है। मोजतबा को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया तब से मोजतबा एक बार भी जनता के सामने नहीं आए। ना उनका कोई वीडियो संदेश आया है और ना ही कोई ऑडियो। मोशनवा की मारे जाने की थ्योरी को सच, झूठ और ताजा रिपोर्ट्स के तराजू पर भी तोड़ कर देख लेते हैं।
एक थ्योरी यह कहती है कि 28 फरवरी को अमेरिकी इजरली एयर स्ट्राइक में जब अली खामने की जान गई तो मोजतबा भी उसी हमले में मारे गए। लेकिन ईरान ने देश में गृह युद्ध और जनता के बीच पैनिकिक को रोकने के लिए उनकी मौत की खबर छिपा दी। थ्योरी नंबर दो यह कहती है कि मोजतबा हमले में गंभीर रूप से घायल हुए लेकिन उनके शरीर ने अब जवाब दे दिया और अस्पताल में उनकी मौत हो गई। तीसरी थ्योरी यह कहती है कि यह सत्ता का आंतरिक संघर्ष है। इस थ्योरी के हिसाब से ईरान की ताकतवर सेना आईआरजीसी ने सत्ता पर पूरी तरह से कब्जा करने के लिए मोच तबाह को रास्ते से हटा दिया। क्योंकि मोच तबाह कमजोर पड़ गए थे। इसीलिए जनरल्स ने तख्ता पलट जैसी स्थिति पैदा कर दी। लेकिन इन सब से इतर थ्योरी यह भी कहती है कि इस वीडियो को एक प्रोपोगेंडा के तौर पर जारी किया गया है। यह प्रोपोगेंडा क्या हो सकता है? उसे गौर से समझिए। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हाल ही में यह खुलासा किया कि मोजतबा खाम नहीं अभी जिंदा है। लेकिन वो बुरी तरह झुलस चुके हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उनका एक पांव खराब हो चुका है।
चेहरा इतना झुलस गया है कि वह कुछ बोल भी नहीं पा रहे। सिर्फ लिखित संदेश के जरिए आदेश दे रहे हैं। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशियन [संगीत] जो पेशे से एक हार्ट सर्जन है वो खुद उनके इलाज की निगरानी कर रहे हैं। अब न्यूयॉर्क टाइम्स के इस खुलासे के ठीक दो दिन बाद यह वीडियो सामने आता है। जिससे सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह आईआरजीसी की कोई साजिश है? क्या आईआरजीसी मौज दबा के घायल होने का फायदा उठा रही है? और ईरान की आवाम समेत पूरी दुनिया को मोच तबाह की मौत की खबर देकर सत्ता को हाईजैक कर रही है। ब्यूरो रिपोर्ट जीमी हां।