नमस्कार दोस्तों रोचक टेल्स पर आप सभी का स्वागत है करपात्री जी महाराज ने रोटी हुए इंदिरा गांधी को श्राप दिया की तुमने निर्दोष साधुओं की हत्या करवाई है वह क्षमा की योग्य नहीं है इसलिए मैं आज तुम्हें श्राप देता हूं की तुम्हारा भी नस होगा एक संत ने इंदिरा गांधी को ऐसा श्राप क्यों दिया था ऐसा क्या हो गया की एक संत को इस तरह के अपशब्द कहना पड़ा कौन थे यह सन करपात्री महाराज तो आई जानते हैं पुरी जानकारी तो दोस्तों वीडियो के अंत तक बने रहिएगा
स्वामी करपात्री महाराज का नाम हरि नारायण ओझा था उनका जन्म उत्तर प्रदेश के भटनी ग्राम में हुआ था उन्होंने 17 साल की उम्र में ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती से ब्रह्मचारी की दीक्षा लिक्षा के बाद उनका नाम हरेंद्र नाथ सरस्वती पड़ा परंतु दुनिया में जान के स्वामी करपात्री महाराज के नाम से दरअसल अंजलि यानी हथेली में जितना भजन प्रसाद स्वरूप आता था वह उतना ही भजन ग्रहण करते थे धर्म शास्त्रों में बल्कि आदित्य एवं अतुलनीय विद्वता को देखते हुए स्वामी ब्रह्मानंद स्वामी ने इन्हें धर्म सम्राट की उपाधि प्रधान की थी संत महाराज के स्मरण शक्ति इतनी तीव्रता की एक बार कोई चीज पढ़ लेने के बाद बरसों बाद भी बता देते थे वह एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे देश स्वतंत्र होने पर 1948 में अखिल भारतीय रामराज्य परिषद दाल बनाया 1965 में भारत के लाखों संतो ने गौ हत्या बंदी और गौ रक्षा पर कानून बनाने के
लिए एक बहुत बड़ा आंदोलन चलाया था जिसमें संविधान में संशोधन करके देश में गौ वंश की हत्या पर पाबंदी लगाने की मांग की गई थी तो संतो ने अपने इसी मांग को लेकर 7 नवंबर 1966 को सांसद भवन के सामने धरना दिया था हिंदू पंचांग के अनुसार उसे दिन कार्तिक शुक्ला पक्ष के अष्टमी तिथि थी जिसे गोपाल अष्टमी भी कहा जाता है मान्यता के अनुसार इस दिन गायों की पूजा की जाति है सभी संतो ने दिल्ली में एक बहुत बड़ी रैली निकाल बड़े नेताओं में विनोबा भावे विनोबा भावे जी का आशीर्वाद लेकर लाखों साधु संतो ने करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में बहुत बड़ा जुलूस निकाला उसे वक्त देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी कहते हैं की चुनाव से पहले इंदिरा गांधी करपात्री महाराज से मिलने गई थी इंदिरा गांधी स्वामी करपात्री जी महाराज और विनोबा भावे जी को बहुत मानते थे इंदिरा गांधी ने करपात्री जिसे आशीर्वाद लेने के बाद वादा किया था की चुनाव जितने के बाद गे के सारे कत्ल खाने बैंड करवा देंगे जो अंग्रेजन के समय से चल रहे थे इंदिरा गांधी चुनाव जीत गई ऐसे में स्वामी करपात्री महाराज को लगा था
की इंदिरा गांधी उनकी प्रस्ताव मांगी उन्होंने इंदिरा गांधी को याद भी दिलाया की आपने वादा किया था की सांसद में गौ हत्या पर आपका कानून लाएंगी लेकिन कई दिनों तक इंदिरा गांधी उनकी इस बात को तलती रहे ऐसे में मजबूर होकर करपात्री जी को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा था गौरक्षा मा अभियान समिति के संचालक करपात्री जी महाराज ने चांदनी चौक स्थित आर्य समाज मंदिर से अपना सत्याग्रह आरंभ किया करने में सभी भारतीय धार्मिक समुदायों ने इसमें बाढ़ चढ़कर भाग लिया था सांसद गेट से लेकर चांदनी चौक तक लाखों लोगों की भीड़ जूती थी इसमें 10000 से 20000 तक तो केवल महिलाएं ही शामिल थी हजारों संत थे और हजारों गौ रक्षक थे सभी सांसद की और कुछ कर रहे थे और सांसद का घेराव किया कहा जाता है की जब इंदिरा गांधी को यह सूचना मिली तो उन्होंने निहत्थे करपात्री महाराज और संतो पर लाठी चार्ज के आदेश दे दिए पुलिसकर्मी पहले से ही लाठी बंदूक के साथ तैनात थे पुलिस ने लाठी और आशु गैस चलाना शुरू कर दिया भीड़ आक्रामक हो गई इतने में अंदर से गली चलने का आदेश हुआ और पुलिस ने संतो और गौरक्षकों का भीड़ पर अंधाधुन फायरिंग शुरू कर दी सांसद के सामने की पुरी सड़क खून से लाल हो गई लोग मा रहे थे एक दूसरे के शरीर पर गिर रहे थे
और पुलिस की गोलाबारी जारी थी माना जाता है की एक नहीं उसे गली कांड में सैकड़ो साधु और गौ रक्षक मा गए दिल्ली में कर्फ्यू लगा दिया गया संचार माध्यमों को सेंसर दिया गया और हजारों संतो को गिरफ्तार करती हर जय में दाल दिया गया इस हत्याकांड से चुप होकर तत्कालीन गिरी हम मंत्री गुलजारी लाल नंदा ने अपना त्यागपत्र दे दिया और इस कांड के लिए खुद को जिम्मेदार बताया देश के इतने बड़े घटनाक्रम को किसी भी राष्ट्रीय अखबार ने छापने की हिम्मत नहीं दिखाई यह खबर सिर्फ मासिक पत्रिका आर्यभट्ट और केसरी महेश छापे थी इस घटना के बाद स्वामी करपात्री जी के सीट से बताते हैं की करपात्री जी ने इंदिरा गांधी को श्राप दे दिया की जी तरह से इंदिरा गांधी ने संतो और गौ रक्षों पर अंधाधुन गोलीबारी करवरकर उन्हें मारा है उनका भी हश्र यही होगा कहते हैं की सांसद के सामने साधुओं की ल से उठाते हुए करपात्री महाराज ने रोटी हुए ये श्राप दिया था
उसे समय गोरखपुर से छापने वाली मासिक पत्रिका कल्याण ने अपने संपादक के विशेषांक में विस्तारपूर्वक इस घटना का वर्णन किया था कल्याण में लिखा था की करपात्री जी महाराज ने इंदिरा गांधी को संबोधित करते हुए कहा था की तुमने निर्दोष साधु की हत्या करवाई है वह क्षमा के योग्य नहीं है इसलिए मैं आज तुम्हें श्राप देता हूं पेस्टमी के दिन भी तुम्हारा ही नस होगा जब करपात्री जी ने श्राप दिया था तो वहां प्रमुख संत प्रभु डेट ब्रह्मचारी मौजूद थे कहते हैं की इस घटना के बाद और करपात्री जी बहुत दोनों तक डिप्रेशन में चले गए थे
अब इसे उन संतो का श्राप कहिए या कुदरत का करिश्मा कहिए एक पिक्स अक्टूबर 1984 की सुबह इंदिरा गांधी के ही दो सिख सुरक्षाकर्मियों बेवंत सिंह और सतवंत सिंह ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर उनकी हत्या कर दी और उसे दिन इत्तेफाक से वो पेस्ट में भी था 7 फरवरी 1982 को करपात्री जी महाराज का निधन हुआ उनके निर्देशानुसार उनके नश्वर पाठ शरीर का केदार घाट स्थित श्री गंगा नदी में जल समाधि दी गई कहा जाता है की इस संत के श्राप का असर गांधी परिवार को झेलना पड़ा और कांग्रेस पार्टी को भी तो दोस्तों यह थी आज की जानकारी इस घटना से जुड़ी आपके पास भी कोई जानकारी या आपका कोई विचार हो तो कमेंट के मध्य से जरूर बताइएगा तो फिर मिलती हूं अगले वीडियो में एक नई जानकारी के साथ तब तक अपना ख्याल रखिए जय हिंद जय भारत