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भारतीय जहाजों पर फायरिंग की असली वजह.. खुलासा!

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ईरान ने दुनिया की लाइफलाइन स्टेट ऑफ होमूस को एक डेथ ट्रैप बना दिया है? क्या होमूस के पानी के नीचे तेहरान ने ऐसी चाल चल दी है जिससे सुपर पावर अमेरिका और उसकी सबसे शक्तिशाली नेवी भी डर गई है। दर्शकों आज बात उस क्राइसिस की जो ग्लोबल ऑयल मार्केट और वाशिंगटन दोनों को हिला के बैठा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक होरमूस में ईरान ने डेडली सी माइंस डिप्लॉय की है। और सिचुएशन इतनी घातक है कि डोनल्ड ट्रंप जैसा अग्रेसिव लीडर भी यहां पर हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है

और हर एक कदम केयरफुली ले रहा है। यूएस नेवी ने अपने एडवांस सी ड्रोंस और रोबोटिक सिस्टम्स डिप्लॉय किए हैं सिर्फ इसीलिए ताकि भैया समुंदर में बिछे सारे माइंस का पता लगाया जा सके। सवाल ये है क्या ये दुनिया के सबसे इंपॉर्टेंट ऑयल रूट को बचाने की आखिरी फाइट है? क्योंकि अगर होरमूस पर जगह-जगह माइंस बिछा दिए ईरान ने तो भैया आने वाले कई सालों तक इस रास्ते पर ऐसा खतरा मंडरा जाएगा जो हर एक सेलर जिंदगी भर याद रखेगा।

द वॉल शीट जर्नल की रिपोर्ट ने ग्लोबल टेंशनंस को और बढ़ा दिया है। यूएस नेवी ने अनमैन अंडर वाटर व्हीकल्स यानी अंडर वाटर ड्रोंस की फुल डिप्लॉयमेंट कर दी है। और इनका एक ही मिशन है समंदर के नीचे छुपे नेवल माइंस को डिटेक्ट करना और उन्हें न्यूट्रलाइज करना। यानी एक पूरी टुकड़ी अब यही काम में लगी है कि भैया समुंदर के नीचे माइंस तो नहीं है। ईरान ने एक स्मार्ट स्ट्रेटेजिक मूव खेला है। पहले सीज फायर का सिग्नल दिया। ऑयल प्राइसेस नीचे आए और फिर अचानक नैरेटिव बदल दिया। अब ईरान कह रहा है कि सेंट्रल शिपिंग लेंस अनसेफ है और उसने कल ही कई सारी शिप्स पर हमला किया। मतलब बिल्कुल सिंपल है। शिप्स को ईरानियन कोस्ट लाइन के पास से गुजरने के लिए फोर्स किया जा रहा है।

कंट्रोल क्लियरली तेहरान के हाथ में शिफ्ट हो चुका है और माइंस वाली रिपोर्ट से ट्रंप हक्काबक्का रह चुका है। अब एक बार इसका स्ट्रेटेजिक एनालिसिस करते हैं। आप सोच रहे होंगे कि दुनिया की सबसे पावरफुल नेवी एक माइन से क्यों डर रही है? रियलिटी यह है दर्शकों समंदर में बिछी एक छोटी सी माइन भी 100 मिलियन डॉलर के टैंकर को सेकंड्स में डिस्ट्रॉय कर सकती है। यानी कुछ क्षणों के अंदर ही 100 मिलियन डॉलर का बड़ा टैंकर भी धुआधुआ हो सकता है। ईरान के पावरफुल लीडर मोहम्मद बगैर गलबाफ ने क्लियर मैसेज दिया है। जब तक सेंशंस नहीं हटेंगे गल्फ नॉर्मल नहीं होगा। अब ट्रंप सोच रहा है कि भैया सेंशंस नहीं हटाए तो कहीं माइंस की संख्या बढ़ ना जाए। अब दूसरी तरफ डोनल्ड ट्रंप डिप्लोमेसी की बात कर रहे हैं। लेकिन उनके मिलिट्री मूव्स कुछ और ही स्टोरी बताते हैं।

अगर एक भी यूएस टैंकर यहां हिट होता है तो यह सिर्फ गल्फ कॉन्फ्लिक्ट नहीं रहेगा। यह ग्लोबल वॉर एस्केलेशन बन जाएगा। इसीलिए अमेरिका ने ह्यूमन रिस्क कम करने के लिए रोबोटिक वॉरफेयर का सहारा लिया है। क्योंकि भैया मिडिल ईस्ट में अगर अमेरिकी सैनिक की जान जाएगी तो अमेरिका का आम इंसान ट्रंप से सवाल पूछेगा। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यूएस के ये सी ड्रोंस गेम चेंजर हो सकते हैं। फॉर्मर वाइस एडमिरल केविन डोनगन के अकॉर्डिंग ये सिस्टम्स अंडर वाटर मैपिंग करते हैं। मतलब समंदर के अंदर एक-एक इंच को स्कैन करते हैं। यूएस के पास टेक्नोलॉजी तो कमाल की है। पर भैया डर तो देखो। सिर्फ एक रिपोर्ट है ईरान की तरफ से कि शायद होरमूस के नीचे माइंस बिछे हो और कैसे अपनी सारी टेक्नोलॉजी लाने पर यूएस मजबूर हो गया है। दर्शकों लेकिन चैलेंज सिर्फ माइंस डिटेक्ट करना नहीं है।

सवाल यह भी है क्या ईरान इन ड्रोंस को फ्रीली ऑपरेट करने देगा? ईरान अपनी मॉस्किटो बोट से इन ड्रोंस पर भी तो हमला करेगा और अगर ईरानियन फोर्सेस ने इन रोबोटिक सिस्टम्स को टारगेट किया तो सिचुएशन इंस्टेंटली एस्केलेट हो सकती है। यह एक हाई स्टेक स्कैट अनमाउस गेम बन चुका है। जहां चूहे और बिल्ली के इस खेल में ईरान जीतता नजर आ रहा है।

स्टेट ऑफ फोरमूस से दुनिया का 20% ऑयल फ्लो होता है और अब ईरान के कब्जे में वहां से गुजर रही हर एक शिप इनडायरेक्टली है। और इस रूट के डिसरप्शन से दुनिया भर में पेट्रोल के दामों पर फर्क पड़ेगा। ग्लोबल इकॉनमी और आम आदमी की बजट पर भी बहुत फर्क पड़ सकता है। ट्रंप के लिए यह क्रेडिबिलिटी का इशू है और ईरान के लिए एकिस्टेंस का। फिलहाल समंदर ऊपर से शांत दिख रहा है लेकिन नीचे बिछे हो सकते हैं माइंस और उन्हें तलाशते अमेरिका के ड्रोंस। आप देख रहे हैं वन इंडिया। मैं हूं आकर्ष कौशिक। [संगीत] सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। [संगीत] डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ।

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