अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू एक बार फिर ईरान पर बहुत बड़े हमले की तैयारी कर रहे हैं। इसी बीच ईरान पीएम मोदी से मिला है। दुनिया में एक बार फिर बहुत बड़ा ऊर्जा संकट आ सकता है। इस बड़े खतरे के बीच भारत ने एक ऐतिहासिक फैसला ले लिया है।
भारत में जल्द ही ऐसी कारें सड़कों पर दौड़ती दिखेंगी जो ना तो पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी से चलेंगी और ना ही उनमें बैटरी होगी। मोदी सरकार ने 100% एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। अब भारत की सड़कों पर ऐसी गाड़ियां दौड़ेंगी जो सिर्फ और सिर्फ एथेनॉल से चलेंगी। उन गाड़ियों में ना तो पेट्रोल डलाने की जरूरत है ना ही डीजल और सीएनजी। आपने देखा होगा कि एथेनॉल पर हल्ला काटने वाले अचानक चुप हो गए थे। झूठी रील बनाने वालों को शायद पूरी पेमेंट मिल गई थी। इसी झूठे नैरेटिव के बीच केंद्र सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स में बदलाव करते हुए 100% एथेनॉल यानी ई00 फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों को मंजूरी दे दी है।
100% एथेनॉल फ्यूल को सिर्फ उन्हीं गाड़ियों में इस्तेमाल किया जा सकेगा जिन्हें कंपनी ने खासतौर पर ई00 फ्यूल से चलने के लिए बनाया हो। अब केंद्र सरकार के नए फैसले के बाद ऐसी कारों की टेस्टिंग और उन्हें चलाने की मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है। आपको बता दें कि ई00 फ्यूल का मतलब है 100% शुद्ध एथेनॉल फ्यूल। एथेनॉल [संगीत] गन्ने और मक्के से तैयार किया जाने वाला एक बायोफ्यूल है। इसमें पेट्रोल की मिलावट नहीं की जाती। अब सवाल है कि क्या भविष्य में नॉर्मल पेट्रोल वाली कारें बंद हो जाएंगी? इसका जवाब है नहीं। 100% एथेनॉल वाली गाड़ियां वर्तमान और भविष्य दोनों समय के लिए पूरी तरह से अल्टरनेटिव अरेंजमेंट है। यानी पेट्रोल की गाड़ियों के साथ-साथ अब आपको एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां भी मिलेंगी।
मौजूदा वाहन मालिकों पर इस नए नियम का कोई असर नहीं पड़ेगा। फिलहाल जो लोग गाड़ियां चला रहे हैं उन्हें 100% एथेनॉल फ्यूल पर शिफ्ट करने या गाड़ियों में किसी तरह के मॉडिफिकेशन कराने की कोई जरूरत नहीं है। आगे चलकर अगर आप 100% एथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियां लेना चाहते हैं तो आप ले सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे देश की पेट्रोलियम ईंधन आयात पर निर्भरता कम होगी और स्वदेशी ऊर्जा स्त्रोतों को बढ़ावा मिलेगा। भारत हर साल ईंधन आयात पर करीब ₹22 लाख करोड़ रुपए खर्च करता है। ऐसे में अगर एथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल बढ़ता है तो इससे भारी आयात बिल को कम करने में मदद मिलेगी। दुनिया भर में जिस तरह से जंगे लड़ी जा रही हैं उसे देखते हुए भारत ने फैसला किया है कि वह किसी भी एक प्रकार के फ्यूल पर पूरी तरह से निर्भर नहीं होगा और आने वाले समय में भारत अपना फ्यूल खुद तैयार करेगा।