आज जो खबर हम दिखाने जा रहे हैं, उसे देखकर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। यह होश उड़ा देने वाली खबर आप एक-एक व्यक्ति और एक-एक बच्चे तक पहुंचाइए। इतिहास में पहली बार भारत के लोगों ने चीन पर बड़ा हमला करते हुए उसे इतना नुकसान पहुंचाया है जितना नुकसान कोई बड़ी मिसाइल तक नहीं पहुंचा सकती। भारतीय लोगों ने पहली बार चीन का गुरूर तोड़ा है। चीन ने अपनी सच्चाई छुपाने के लिए दशकों से जो झूठी इमेज की फायर वॉल बना रखी थी उसे भारत के सोशल मीडिया यूज़र्स ने तोड़ दिया है।
पहली बार चीन की गरीबी, चीन का कूड़ा, चीन की झुग्गियां, सड़कों पर रहने को मजबूर लोग और चीन की जाति व्यवस्था का काला चिट्ठा खोल दिया गया है। यह सब कुछ भारत के लोगों ने किया है। चीन का समाज कितना बटा हुआ है और चीन में किस तरह की जातियां हैं, वह आज हम आपको इस वीडियो में दिखाने जा रहे हैं। भारत की इमेज खराब करने वाले चीन पर जब भारतीय लोगों ने पलटवार किया तो पूरे चीन में बवाल मच गया। पिछले 70 सालों से भारत के कुछ इलाकों की गंदगी दिखाकर, कुछ इलाकों के स्लम और गरीबी दिखाकर यह नैरेटिव चलाया जाता था कि पूरा भारत गंदा है। पूरा भारत गरीब है। चीन के इशारे पर काम करने वाले वामपंथियों ने हमेशा से भारत की वर्ण व्यवस्था को जाति प्रथा बताकर भारतीय समाज में दरार तो डाली ही थी, लेकिन दुनिया भर में भारत की जातियों का नाम
लेकर भारत का मजाक भी उड़वाया। 70 सालों से भारत की झूठी इमेज दुनिया में वायरल की जा रही है। दुख की बात यह है कि भारत के ही सैकड़ों ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर्स, फर्जी पत्रकार और इन्फ्लुएंस भी चीन की तारीफ करने में लगे रहे। यह अपनी वीडियो में चीन का सिर्फ 20% हिस्सा ही दिखाते आए हैं। जिनमें ऊंची-ऊंची बिल्डिंग, बुलेट ट्रेन, फैक्ट्रियां और चमकते शहर हैं। इन सभी ने बार-बार कहा कि चीन तो 2060 में जी रहा है। लेकिन अब भारत के ही कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने चीन का वो 80% हिस्सा वायरल करना शुरू कर दिया है जिसमें चीन की झुग्गी, गरीबी, गंदगी और खाली पड़े शहर दिख रहे हैं। वैसे आपको बता दें कि इन वीडियोस की पुष्टि हम नहीं करते। हालांकि इन वीडियोस को झूठ मानना भी गलत होगा। बहरहाल अब आते हैं चीन की जाति व्यवस्था पर। चीन की सामाजिक असमानता पर। दावों के मुताबिक चीन का अपना समाज ही कहीं से बराबरी वाला नहीं है। चीन में भी जाति व्यवस्था के समानांतर एक परंपरा चलती आ रही है। कम्युनिस्ट चीन में आज भी क्लास के नाम पर भेदभाव किया जाता है।
भारत के सोशल मीडिया यूज़र्स ने चीन के प्राचीन समाज की चर्चा शुरू कर दी है। इसमें बताया जा रहा है कि सदियों से चीन का समाज चार बड़े वर्गों में बटा हुआ है। यह वर्ग है शी, नोंग, गोंग और शोंग। शी वर्ग में आते हैं विद्वान और आधिकारिक प्रशासक। नोंग वर्ग में किसान आते हैं। गोंग में कारीगर और शिल्पकार आते हैं। जबकि शंग में व्यापारियों का वर्ग आता है। दावों के मुताबिक आज भी इसी के आधार पर चीन में भेदभाव होता है। ऊंचे वर्ग के लोगों को अधिक सम्मान मिलता है। चीन का समाज एक और व्यवस्था से बटा हुआ है। इसे चीन का होऊ सिस्टम कहा जाता है। होकोऊ चीन की सरकारी रजिस्ट्रेशन व्यवस्था है
जो यह तय करती है कि किसी नागरिक का निवास क्षेत्र कौन सा है। इसी व्यवस्था के अंदर बताया जाता है कि चीन के व्यक्ति को सरकारी सुविधाएं कहां से मिलेंगी। दशकों से इस व्यवस्था ने ग्रामीण और शहरी चीन में एक बड़ा अंतर पैदा कर रखा है। चीन के करोड़ों ग्रामीण मजदूर शहरों में तो काम कर रहे हैं लेकिन उन्हें शहरों के स्थाई निवासियों जैसी व्यवस्था, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाती। अब तो सोशल मीडिया यूज़र्स ने अमेरिका और यूरोपीय देशों की गंदगी और गरीबी भी सोशल मीडिया पर डालनी शुरू कर दी है। पश्चिमी देशों में भी स्लम है। पश्चिमी देशों में भी कूड़ा कर्कट है।