आखिर कौन थी? आखिर कौन थी वो 101 साल की वह बुजुर्ग महिला जिसे पद्म पुरस्कार लेते देख स्वयं प्रधानमंत्री मोदी की आंखें भी नम हो गई और सीना गर्व से चौड़ा हो गया। राष्ट्रपति भवन का वो विशाल हॉल जहां देश के बड़े-बड़े दिग्गज मौजूद थे। लेकिन जब 101 साल की वह महिला अपने कांपते लेकिन मजबूत कदमों से चलकर अवार्ड लेने आई, तो उन्हें देखकर सब की आंखें फटी की फटी रह गई।
सिर्फ इतना ही नहीं जब उनका कारनामा बताया गया, तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लेकिन वहीं [संगीत] एक सवाल सबकी जुबान पर था कि आखिर कभी हिंदुस्तान की जमीन पर पैर ना रखने वाली उस विदेशी महिला ने ऐसा क्या कर दिया कि भारत सरकार उन्हें बुलाकर इतना बड़ा सम्मान दे रही थी। लेकिन असली सस्पेंस यह नहीं है कि वह 101 साल की हैं। असली सस्पेंस तो यहहै कि जिस उम्र में लोग बिस्तर पकड़ लेते हैं उस उम्र में वह एक ऐसा चमत्कार कर रही हैं जो हम सोच भी नहीं सकते।
आज जब हम भारतीय अपनी ही जड़ों को भूलते जा रहे हैं, तब सात [संगीत] समंदर पार बैठी वो महिला, हमारी संस्कृति और हमारे ज्ञान के सहारे हजारों लोगों की जिंदगी बचा रही हैं। आखिर क्या है वो राज जिसने मोदी जी को भी भावुक कर दिया? जानिए इस वीडियो में। तो चलिए चलते हैं उस ऐतिहासिक पल में। साल 2024 राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली। उस विशाल हॉल में सुई गिरने जितनी शांति पिन ड्रॉप साइलेंस थी। तभी एंकर [संगीत] ने एक नाम पुकारा शार्लेट चौपेन फ्रांस।
तभी एक परछाई उभरी। हरे रंग की साड़ी, चेहरे पर [संगीत] 100 साल का अनुभव और आंखों में एक तपस्विनी की चमकजब वो रेड कारपेट पर चल रही थी तो वह दुनिया को दिखा रही थी कि इच्छाशक्ति क्या होती है। हॉल में बैठी युवा हस्तियां भी शर्मिंदा थी क्योंकि जिस उम्र में हम लाठी ढूंढते हैं यह माता किसी शेरनी की तरह चल रही थी। जब वो राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के पास पहुंची तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
लेकिन वहां बैठे बहुत कम लोग जानते थे कि यह शार्लट की जिंदगी की पहली भारत यात्रा थी। लेकिन दोस्तों भारत सरकार ने उन्हें सम्मान सिर्फ [संगीत] उनकी उम्र देखकर नहीं दिया। सम्मान इसलिए मिला क्योंकि फ्रांस के एक छोटे से गांव में बैठकर उन्होंने एक छोटा भारत बसा रखा था। वो पिछले 40 सालों से वहां हजारों लोगों को मौत के मुंह से बाहर खींच रही हैं। किसी एलोपैथी दवा से नहीं बल्कि भारत के प्राचीन ज्ञान से। मैं आपको उनकी क्लास की एक सच्ची घटना बताता हूं जो आपको हैरान कर देगी। एक बार उनके पास मारिया नाम की एक महिला आई।
डॉक्टरों ने मारिया को जवाबदे दिया था। उन्हें रीड की हड्डी की इतनी भयानक समस्या थी कि उनका चलना फिरना मुश्किल था। डॉक्टरों ने कहा था, अब सर्जरी के अलावा कोई रास्ता नहीं और उसमें भी जान का खतरा है। मारिया रोते हुए शार्लेट के पास आई।शार्लेट ने मारिया का हाथ थाम कर कहा। डरो मत।
भारत के ऋषियों ने हमें एक ऐसी संजीवनी दी है जो हर दर्द को मिटा सकती है। शार्लेट ने मारिया को धीरे-धीरे भुजंगासन और प्राणायाम सिखाना शुरू किया। और दोस्तों चमत्कार देखिए जिस महिला को डॉक्टरों ने बिस्तर पर रहने को कहा था। 6 महीने बाद वही मारिया अपने पैरों पर दौड़ रही थी।
जब मारिया ने शार्लट का धन्यवाद किया तो शार्लट ने एक ऐसी बात कही जो आपका दिल जीत लेगी। शार्लेट ने कहा धन्यवाद मुझे मत दो। धन्यवाद भारत को दो। धन्यवाद भगवान शिव को दो। जिन्होंनेदुनिया को योग दिया। शार्लेट सिर्फ योग नहीं सिखाती। वो फ्रांस के लोगों को शाकाहारी बनना सिखाती हैं। वो उन्हें हाथ मिलाकर हेलो बोलना नहीं बल्कि हाथ जोड़कर नमस्ते करना सिखाती हैं। वो गर्व से कहती हैं मैं शरीर से फ्रेंच हूं लेकिन मेरी आत्मा भारतीय है।
सोचिए एक विदेशी महिला फ्रांस की गलियों में भारतीय संस्कृति का प्रचार कर रही थी। वह भी बिना किसी स्वार्थ के। लेकिन सवाल यह है कि फ्रांस की यह महिला इस रास्ते पर आई कैसे? यह सब शुरू हुआ 50 साल पहले।
शार्लट बचपन से योगी नहीं थी। वो एक आम फ्रांसीसी महिला थी जो एक ऑफिस में सेक्रेटरी का काम करती थी। जब वो 50 साल की हुई तो उनका शरीर [संगीत] जवाब देने लगा था। कमर में दर्द, जोड़ों में जकड़न और तनाव। डॉक्टर्स ने कहा, अब उम्र हो गई है आराम करो। लेकिन शार्लट के एक दोस्त ने [संगीत] उनसे कहा, शार्लट, तुम भारत की प्राचीन विद्या योग क्यों नहीं [संगीत] अपनाती? शार्लट पहले हंसी। उन्होंने सोचा इस उम्र में क्या मैं हाथ पैर मोड़ पाऊंगी? लेकिन दर्द से परेशान होकर उन्होंने एक योग क्लासज्वाइन कर ली। और जैसे ही उन्होंने अपना पहला सूर्य नमस्कार किया, उन्हें लगा जैसे उनके शरीर में एक नई बिजली दौड़ गई है। उन्होंने महसूस किया कि जो सांसे अब तक सिर्फ जिंदा रहने के लिए चल रही थी, अब वह शरीर को हील कर रही थी।
लोग कहते थे बुढ़ापे में हड्डियां टूटजाएंगी। लेकिन शार्लट ने दुनिया को गलत साबित कर दिया। उन्होंने कहा योग हड्डियों का नहीं सांसों का खेल है। शार्लट ने डॉक्टरों के विज्ञान को नहीं बल्कि भारत के ऋषि मुनियों के विज्ञान को अपनाया। आज 101 साल की उम्र में उन्हें ना ब्लड प्रेशर है ना । कैसे? एक प्राणवायु, वाइटल फोर्स। शारलॉट कहती हैं कि हम अपनी सांसों का सिर्फ 30% इस्तेमाल करते हैं और जिम में हम सिर्फ फेफड़े फुलाते हैं। लेकिन योग से ऑक्सीजन शरीर के हर सेल तक पहुंचती है। यही एंटी एजिंग का राज है जो बुढ़ापे को रोकता है। दो लचीलापन फ्लेक्सिबिलिटी।
उन्होंने साबित किया कि बूढ़ा होना शरीर की मजबूरी हो सकती है लेकिन मन का चुनाव है। फ्रांस के लोग जो जिम में लोहे उठाने के दीवाने थेवो इस महिला के पास सुकून उठाने आने लगे। उन्होंने पश्चिम यानी वेस्ट को बताया कि अगर तुम्हें असली इलाज चाहिए तो तुम्हें मेडिसिन की नहीं मेडिटेशन की जरूरत है। यह उनकी तपस्या छिप नहीं सकती थी। जुलाई 2023 पेरिस फ्रांस पीएम मोदी ने खासतौर पर वक्त निकाला [संगीत] एक 100 साल की महिला से मिलने के लिए जब मोदी जी उनसे मिले तो शारोट ने झुक कर नमस्ते किया। मोदी जी हैरान थे 100 साल की उम्र में इतनी ऊर्जा। मोदी जी ने उनसे पूछा आपकी इस फिटनेस का राज क्या है?
[संगीत] शार्लट ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया योग। उन्होंने कहा मैं खुद को 100 साल का नहीं मानती। मैं तो बस [संगीत] थोड़ी विंटेज हो गई हूं। योग ने मुझे दोबारा जन्म दिया है। यह मुलाकात इतनी प्रभावशाली थी कि वापस आकर मोदी जी ने मन की बात में पूरीदुनिया को बताया। शार्लट चौपेन भारतीय संस्कृति की असली ब्रांड एंबेसडर हैं। यही वो पल था जब भारत सरकार ने फैसला किया कि इस तपस्या का सम्मान होना चाहिए और उन्हें 2024 में पद्मश्री देने की घोषणा की गई।
लेकिन दोस्तों, इस कहानी का सबसे भावुक पहलू अभी बाकी है। 101 साल की उम्र में जब लोग घर से बाहर निकलने में डरते हैं। शार्लोट ने भारत आने का फैसला किया। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं थी। यह एक तीर्थ यात्रा थी। जब उन्होंने पहली बार भारत की धरती पर कदम रखा तो उनकी आंखों में आंसू थे। यह वह देश था जिसके ज्ञान ने उनकी जान बचाई थी। यह वह देश था जिसे वह 50 सालों से अपने सपनों में जी रही थी। जब उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू के हाथों से पद्मश्री लिया तो वह माहौल देखिए। मोदी जी की आंखों में वह सम्मान साफ दिख रहा था। मानो वो कह रहे हो आपने हम भारतीयों का सिर ऊंचा कर दिया।
वो सम्मान सिर्फ शारलॉट का नहीं था। वह सम्मान था उस विश्वास का जो दुनिया अब भारत पर कर रही है। भारत अब विश्व गुरु है जो दुनिया को जीने की कला सिखा रहा है। लेकिन दोस्तों कड़वा सच यह है कि यह घटना हमारे गाल पर एक जोरदार तमाचा है। एक फ्रांसीसी महिला ने 50 साल बिना भारत देखे एकलव्य बनकर हमारी विद्या को पूजा और हम हम भारत में पैदा होकर भी अपनी जड़ों को पिछड़ा कहकर काट रहे हैं। [संगीत] आज शार्लॉट चोपिन 101 साल की उम्र में सूर्य नमस्कार कर रही हैं और हमारे युवा 25 की उम्र में जिम के सप्लीमेंट्स फांक रहे हैं। हमें अपनी संस्कृति पर शर्म आती है और दुनिया उसी संस्कृति को सिर का ताज बना रही है। आज वह हमें बता रही हैं कि जागो तुम्हारी विरासत अनमोल है। शारलॉट ने अपना धर्म निभा दिया।