फ्लाईदुबई की फ्लाइट को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जहाँ ओमानी को-पायलट हम्मामी ने भारतीय पायलट स्मिथ पर हमला किया था। हमले के बाद यात्रियों ने जिहादी हमलावर हम्मामी को बांध दिया था, और उस फ्लाइट के कुछ यात्रियों ने दावा किया है कि कुछ क्रू मेंबर्स ने उनसे उसे खोलने के लिए कहा। सवाल है, कुछ क्रू मेंबर्स को हम्मामी से सहानुभूति क्यों थी? देखिए।तारीख थी 30 सितंबर। कहानी शुरू होती है फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ 1073 से।
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में सब कुछ सामान्य था। लेकिन अचानक कॉकपिट के अंदर हालात बदल गए। ओमानी को-पायलट हमाम अल हम्मामी ने अचानक भारतीय कमांडिंग पायलट स्मिथ मच्छर पर हमला कर दिया। हमले में कॉकपिट में रखी इमरजेंसी कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया गया।जिहादी मानसिकता वाले को-पायलट हमाम अल हम्मामी के हमले में कैप्टन स्मिथ गंभीर रूप से घायल हो गए।
लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। घायल अवस्था में ही वे कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचे और उसे खोलने में कामयाब रहे। इसके बाद यात्रियों को अंदर आकर संदिग्ध को रोकने का मौका मिला।कॉकपिट में दाखिल होने वाले यात्रियों में तिजुका मानेस और डेनियल शिस्टर शामिल थे। यात्रियों ने अल हम्मामी को काबू में कर लिया। उनके पास कोई हथकड़ी नहीं थी। इसलिए उसके हाथों को हेडफोन के तारों और प्लास्टिक की ज़िप टाई से बांधा गया।इसी बीच फ्लाइट में मौजूद दो अन्य पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाल लिया। ये पायलट ड्यूटी पर नहीं थे। लेकिन विमान में उनकी मौजूदगी ने स्थिति को नियंत्रित करने में बहुत मदद की। विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब में उतारा गया, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
फ्लाइट में मौजूद यात्रियों के अनुसार, जब वे ओमानी को-पायलट को काबू में कर रहे थे, तब वह चरमपंथी टिप्पणियां कर रहा था। लेकिन यात्रियों का दावा है कि वे उसे मारना नहीं चाहते थे। उनका एकमात्र मकसद उसके हाथों को बांधना था ताकि वह दोबारा हमला न कर सके।शिस्टर के अनुसार, वे चाहते थे कि संदिग्ध जिंदा रहे ताकि उससे पूछताछ की जा सके कि उसने कैप्टन स्मिथ पर हमला क्यों किया। वह विमान को क्रैश क्यों करना चाहता था।लेकिन फिर कहानी ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसने यात्रियों के शक को और गहरा कर दिया। यात्रियों के दावों के अनुसार, कुछ फ्लाईदुबई क्रू मेंबर्स उनसे को-पायलट के हाथ खोलने के लिए कहने लगे। फ्लाइट के यात्री मानेस ने इस मांग पर हैरानी जताई। जबकि शिस्टर ने दावा किया कि इस वजह से उन्हें क्रू पर भी शक होने लगा।जरा सोचिए, कॉकपिट पर हमला करने और विमान को हाईजैक करने की कोशिश के आरोपी एक व्यक्ति को यात्री बड़ी मुश्किल से बांधते हैं, और फिर कथित तौर पर कुछ क्रू मेंबर्स कहते हैं कि उसे छोड़ दो।यात्रियों को यह भी नहीं पता था कि हमले में केवल एक ही व्यक्ति शामिल था या और भी लोग थे। इसलिए संदिग्ध को छोड़ने की मांग ने उन्हें और भी ज्यादा सतर्क कर दिया।
हालांकि, किसी भी क्रू मेंबर पर इस साजिश में शामिल होने का आरोप नहीं लगाया गया है।इसके बाद विमान के अंदर यात्रियों और क्रू के बीच बहस शुरू हो गई। मानेस के अनुसार, क्रू ने कहा कि यात्री किसी की जान लेने का फैसला नहीं कर सकते। यात्रियों ने जवाब दिया कि उनका मकसद हत्या नहीं है। यह संदिग्ध को दोबारा हमला करने से रोकना है।इसके बाद यात्रियों ने क्रू मेंबर्स से कॉकपिट से दूर जाने के लिए कहा। यात्रियों के अनुसार, क्रू ने कहा कि वे विमान के लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें कॉकपिट के बाहर रहने की जरूरत है। लेकिन यात्री पीछे हटने को तैयार नहीं थे। उनके लिए उस समय हर सेकंड अहम था, और किसी नए जोखिम की कोई गुंजाइश नहीं थी।मानेस के अनुसार, उन्होंने क्रू से कहा कि उस समय सुरक्षा के लिए उनके निर्देशों का पालन करना जरूरी है। कहा जा रहा है कि कुछ क्रू मेंबर्स को विमान के बीच की सीटों पर भेजा गया और बैठने के लिए कहा गया। कॉकपिट की निगरानी के लिए एक यात्री को भी तैनात किया गया था।सवाल है, ओमानी को-पायलट अल हम्मामी ने ऐसा क्यों किया?
उस पर कैप्टन पर हमला करने और विमान को हाईजैक करने की कोशिश का आरोप है। कहा जा रहा है कि उसका दिमाग नफरत और आतंकवाद के जहर से भरा हुआ था। वह इजराइल जा रहे विमान को क्रैश करना चाहता था।तो क्या अल हम्मामी कॉकपिट में बैठा एक आत्मघाती हमलावर था? उसका पूरा इरादा क्या था? और क्या वह इस कथित साजिश में अकेला था? इसका जवाब जांच से ही सामने आएगा।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी भी यात्री ने किसी क्रू मेंबर पर साजिश में शामिल होने का आरोप नहीं लगाया है। इसलिए यात्रियों के शक और जांच में साबित हुए तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।फिर भी, इस घटना का यह पहलू बहुत महत्वपूर्ण है: यात्रियों को लगा कि कुछ क्रू मेंबर्स को हम्मामी से सहानुभूति थी। उन क्रू मेंबर्स के सामने कैप्टन स्मिथ खून से लथपथ पड़े थे। लेकिन वे चाहते थे कि हम्मामी को छोड़ दिया जाए। इसलिए एक समय ऐसा लगा कि खतरा कॉकपिट के अंदर मौजूद संदिग्ध तक ही सीमित नहीं हो सकता है। इस आशंका के कारण उनका क्रू के साथ भी टकराव हुआ।यह कहानी इसलिए भी असामान्य है क्योंकि संकट की घड़ी में यात्रियों ने खुद ही सुरक्षा की पहली दीवार बनाई। जब पायलट पर हमला हुआ, तो वे कॉकपिट तक पहुंचे। उन्होंने संदिग्ध को रोका और उसके हाथों को हेडफोन के तारों और प्लास्टिक की ज़िप टाई से बांधा।
घायल कैप्टन को मदद मिली और अन्य पायलटों ने नियंत्रण संभाल लिया।लेकिन जब कथित तौर पर को-पायलट को छोड़ने की मांग की गई, तो यात्रियों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया। किसी भी कीमत पर, वे उस संदिग्ध जिहादी को-पायलट हम्मामी को उसकी आतंकी साजिश को अंजाम देने का दूसरा मौका नहीं देना चाहते थे।सवाल है, कुछ क्रू मेंबर्स को हम्मामी से सहानुभूति क्यों थी? उन्होंने को-पायलट को छोड़ने की मांग क्यों की? क्या यह कथित मांग किसी सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा थी? क्या संकट के दौरान यात्रियों ने क्रू के व्यवहार को गलत समझा? इन सभी सवालों के जवाब पूरी जांच रिपोर्ट के बाद ही पता चलेंगे।