मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब हवाई सेवाओं पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लग गया है। ईरान की ओर से कुवैत और बहरीन को निशाना बनाने को लेकर जो हमले जो किए गए थे उसके बाद अब जो है पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
जब यह हमला किया गया उसके बाद से ही अलर्ट मोड पर तमाम जो क्षेत्र है उसको डाला गया है। कई ऐसे देश हैं जहां पर एतियात के तौर पर अपने हवाई क्षेत्र में पाबंदियां भी वहां पर लगाई गई हैं। जबकि बड़ी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस की अगर बात करें तो उन्होंने दर्जनों उड़ाने रद्द या फिर निलंबित करने का फैसला लिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक जो जानकारी मिली है उसमें बताया गया है कि क्षेत्रीय तनाव के बढ़ते के बढ़ने की वजह से बहरीन ने अस्थाई तौर पर अपने एयर स्पेस को बंद कर दिया है। वहीं कुवैत और यूएई में भी अब विमानन सेवाएं जो है वह प्रभावित होती हुई नजर आ रही हैं। अमेरिकी सेना का दावा है कि ईरान द्वारा जो मिसाइलें दागी गई अह उनको लेकर इस तरीके से या तो जो दावा किया जा रहा है उसमें यह कहा जा रहा है कि या तो उनको रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया है या फिर उन्हें लक्ष्य पर पहुंचने से पहले ही नाकाम कर दिया गया है। लेकिन इसके बाद जो अलर्ट मोड पर तमाम जो एयरपोर्ट्स हैं वो साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं।
इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान की एक सैन्य सुविधा पर एयर स्ट्राइक की कारवाई की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार यह हमला हॉर्मू स्ट्रीट के पास स्थित केशद्वीप के पास हुआ है और यहां पर ईरान की एक सैन्य ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन भी यहां पर उनका मौजूद था जिसके आसपास एक डिसलिनेशन प्लांट जो है वह भी स्थापित किया गया था और यह डिसलिनेशन प्लांट जो है इसको स्थापित करने को लेकर जानकारी मिल रही है और माना यह जा रहा है कि यह कारवाई ईरान के हालिया हमलों के जवाब में की गई है।
इसी बीच खबर यह भी आई है कि ईरान ने अमेरिका के साथ संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने को लेकर मध्यस्थ देशों के बीच बातचीत बंद कर दी है। इसके बाद पूरे क्षेत्र में हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। मौजूदा हालात का सबसे बड़ा असर इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर पड़ रहा है और दुनिया की कई ऐसी बड़ी एयरलाइंस हैं जिन्होंने सुरक्षा कारणों से मध्य पूर्व के कई शहरों के लिए अपनी उड़ाने जो हैं उनको रद्द कर दिया है या फिर निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही एक रिपोर्ट में जो जानकारी साबित हो सामने आ रही है उसमें यह बताया गया है कि ग्रीस की सबसे बड़ी एयरलाइन जो कंपनी है उसने एशियन एयरलाइंस ने 31 अगस्त तक दुबई के लिए अपनी उड़ाने रद्द कर दी हैं।
इसके साथ ही 2 जुलाई तक एयर बिल और बगदाद की सेवाएं भी रोक दी गई हैं और एयर बाल्टिक ने जो है 28 जून तक तेल अीब और 24 अक्टूबर तक दुबई के लिए अपनी उड़ाने निलंबित कर दी हैं। यह बड़ा फैसला लिया गया है। वहीं एयर कनाडा ने 7 सितंबर तक तेल अीब और दुबई के लिए अपनी जो सभी उड़ाने हैं उनको रद्द कर दिया है। एयर फ्रांस केएलएम ने 17 जून तक वेरूत और इसके साथ ही दुबई की उड़ानों को रोक लगा दी है और जबकि रियाद के लिए सेवाएं सिर्फ 2 जून तक बंद रखने का फैसला लिया गया है।
इसके अलावा ब्रिटिश एयरवेज की परसेंट कंपनी जो है पैरेंट कंपनी माफ़ कीजिएगा जो है आईएजी उसने दुबई, दोहा और तेल अभीब के लिए उड़ानों की बहाली को 1 अगस्त तक के लिए टाल दिया है। कंपनी ने यह भी संकेत दिए हैं कि क्षेत्र में उड़ानों की संख्या कम की जा सकती है। जर्मनी की जो कंपनी है और इसके साथ ही जर्मनी की कंपनी जो SIS है और आईटीए है आईटी एयरवेज ने भी 13 सितंबर तक दुबई के लिए अपनी उड़ाने निलंबित रखने का ही फैसला लिया है।
मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे सैन्य तनाव और संभावित जवाबी कारवाइयों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस फिलहाल कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं नजर आ रहा है। और ऐसे में तमाम जो एक्सपर्ट्स हैं उनका यह मानना है कि अगर हालात जल्द सुधार में नहीं आते हैं तो आने वाले दिनों में और ज्यादा उड़ाने भी प्रभावित हो सकती हैं। जिसका असर सीधे तौर पर आम लोगों को पड़ेगा और यात्रियों पर पड़ेगा।