नीट यूजी री एग्जाम के नतीजे घोषित होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार सवाल उठाए हैं कानपुर की छात्रा आर्या सिंह ने। जिनका आरोप है कि एनटीए की वेबसाइट पर महज 2 घंटे के भीतर उनका स्कोर बोर्ड दो बार बदल गया। ओएमआर शीट के हिसाब से 609 नंबर का दावा करने वाली आर्य का स्कोर घटकर पहले 540 और फिर सीधे 167 रह गया।
नीट यूजी री एग्जाम का परिणाम सामने आते ही कानपुर की रहने वाली छात्रा आर्या सिंह के सपनों पर जैसे [संगीत] पानी फिर गया। आर्य का दावा है कि जब 13 तारीख की रात एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर उनकी ओएमआर शीट अपलोड हुई तो प्रश्नों के सही मिलान के हिसाब से उनके 609 नंबर बन रहे थे। हालांकि सीक्वेंस में गड़बड़ी की वजह से उन्होंने एनटीए के चैलेंज पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
जिसके बाद अपडेटेड ओएमआर तो मिली लेकिन असली खेल शुरू हुआ 16 तारीख की रात रिजल्ट आने के बाद। गुरुवार रात 12:00 बजे जब आर्या ने अपना रिजल्ट चेक किया तो स्क्रीन पर उनका स्कोर 540 नंबर दिख रहा था। लेकिन हैरान करने वाली बात तब हुई जब महज 2 घंटे के बाद यानी रात 2:00 बजे दोबारा चेक करने पर उनका स्कोर घटकर सीधे 167 नंबर रह गया। 609 नंबर की उम्मीद लगाए बैठी छात्रा का स्कोर 167 पर सिमट गया और उनकी ऑल इंडिया रैंक 12 लाख के पार पहुंच गई। मैम हमने दोनों मार्कशीट के हिसाब से उनकी ही भेजी हुई ऑफिशियल आंसर की से मैंने उनको दोनों को मैच करा था जो कि 69 आ रहे थे मेरे दोनों मार्कशीट से।
बाकी जो भी दिक्कतें अह इससे ओएमआर में थी लेकिन बबलिंग दोनों में सेम थी। कोई चेंजमेंट ब्ल बबलिंग में कोई चेंजमेंट नहीं था। अब हमारा 16 को रात के 10:00 बजे के लगभग उन्होंने अपने पोर्टल पे ये रिजल्ट आउट कर दिया जो कि मेरा रिजल्ट खुलता है 11 38 पे रात में 16 को। जी। तो मैंने जब देखा तो 540 था। लेकिन मैंने तो ये उम्मीद ही नहीं कर रहे थे। मैंने सोचा छह 609 के लगभग ऊपर नीचे जितने भी नंबर आ सकते हैं इतने। तो मुझे लगा कि कुछ साइट एरर होगा। तो मैंने तीन से चार बार ओपन करा इसको तो 540 ही थे। उसमें उसके बाद जब हमने 2:00 बजे के लगभग जब अपना वापस रिचेक करने के लिए रिजल्ट ओपन करा तो ये हो जाता है।
167 मात्र। यहां पे टाइम भी है 17 2:34 पे। एक ही परीक्षा के रिजल्ट में महज 2 घंटे के भीतर इतने बड़े फेरबदल ने आर्या और उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया। आर्य के पिता राकेश सिंह जो 24 साल तक राजपूताना राइफलल्स में देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिक हैं। अपनी बेटी के साथ साक्ष्यों को लेकर एनटीए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को ईमेल भेज चुके हैं। लेकिन शनिवार दोपहर तक एनटीए की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। हमने एनटीए को मेल भी करा। अपनी जितनी भी मेरे साथ स्टार्टिंग से दिक्कतें हुई हैं, मैंने सब कुछ अच्छे से लिख के उनको मेल करा। लेकिन आज तक भी कोई भी रिप्लाई नहीं आता है।
यह इनकी मेल थी। ये देखिए ये इनकी मेल मैंने इनको मेल करा था। जितनी भी मेरी दिक्कतें थी मैंने सब कुछ इसमें करा है। अपने जितनी भी पेपर भी बाइंड करा है मैंने जितना भी उनकी तरफ से मिला है मुझे यहां पे मैंने इनको सब कुछ भेजा है। और सेकंड मेल मैंने एजुकेशन मिनिस्टर सर को करा है। ये इनकी तरफ से भी मुझे कोई रिप्लाई नहीं आता है। ना तो एनटीए की तरफ से कोई रिप्लाई आता है ना तो हमारे एजुकेशन मिनिस्टर सर की तरफ से कोई भी रिप्लाई नहीं आता है।
अभी तक आर्या ने आरोप लगाया कि एनटीए के अधिकारी अपनी कमियों को छुपाने के लिए मीडिया में भ्रामक बयानबाजी कर रहे हैं। ओएमआर शीट को ही फर्जी बता रहे हैं। ऐसे में आर्य के पिता ने सीधा सवाल उठाया है कि अगर यह ओएमआर शीट फर्जी है तो एनटीए की असली ओएमआर शीट कहां है? यह लगातार दूसरा साल है जब आर्य को इस तरह की तकनीकी या प्रशासनिक अव्यवस्था का सामना करना पड़ा है।
साल 2025 के अपने पहले अटेम्प्ट में भी आर्या को ऐसी ही दिक्कतों से जूझना पड़ा था। लेकिन तब सबूत ना होने के कारण वह चुप रह गई। हालांकि इस बार आर्या और उनका परिवार पीछे हटने के मूड में नहीं है। मैम मेरी 2 साल की पूरी प्रिपरेशन थी मैं मेरा दूसरा अटेम्प्ट था फर्स्ट अटेम्प्ट टू 2025 सेकंड अटेम्प्ट 2026 तो मैम मुझे एनटीए से यह पूछना है कि हम दिन रात 8 से 7 आठ घंटे रात-रात की नींद भूल जाते हैं हम एक पेपर देने के लिए तो हमें एनटीए से पूछना है कि 167 किस बेसिस पे मेरे नंबर आ रहे हैं? 167 तो मतलब जैसे कि मेरे पिताजी ने बताया कि आप हमें मुझसे वापस से पेपर दिलवा दीजिए। अगर 167 आते हैं तो हम इसका ये छोड़ देंगे। 167 तो मेरे आ ही नहीं सकते।
अगर कोई बच्चा चाहे जितना भी अगर वो पढ़ने में नहीं अच्छा होगा लेकिन दो साल के प्रिपरेशन में उसकी बायोलॉजी तो इतनी स्ट्रांग हो जाएगी कि 300 प्लस नंबर आ जाएंगे उसके भले फिजिक्स केमिस्ट्री जैसे भी हैं उसके लेकिन बायोलॉजी इतनी स्ट्रांग हो सकती है कि 300 प्लस हम नंबर ला सकते हैं उसमें 167 का तो सवाल ही नहीं पैदा होता कि कैसे किस बेसिस पे 167 उन्होंने मुझे दिए हैं। अगर वो उन उनका कहना है कि 167 मेरा फाइनल रिजल्ट है तो मेरी 167 वाली ओएमआर मुझे सेंड करी जाए। मैंने ओएमआर की मांग करी है उनसे लेकिन रिप्लाई आया नहीं उनकी तरफ से तो मेरी 167 वाली ओएमआर मुझे दी जाए। कानपुर की आर्या सिंह अकेली ऐसी छात्रा नहीं है। ऐसा ही एक और मामला झारखंड की राजधानी रांची से आया है। अन्नी प्रिया को जब ओएमआर भेजा गया तो उनके 596 मार्क्स थे। अन्नी ने रिजल्ट आने का वेट किया और जब रिजल्ट जारी किया तो अन्नी के परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मार्क्स आए थे 546 ये नंबर देखकर अन्नी के घर वालों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्हें लगा कि उनकी बेटी अब डॉक्टर बन जाएगी।
बधाइयां मिलने लगी। एनटीए ने भी बकायदा मेल करके स्कोर बताया। एनटीए से जारी हुआ यह मेल देखिए जिसमें बकायदा स्कोर कार्ड जारी किया गया। इस मेल में भी अन्नी को एनटीए की तरफ से आधिकारिक [संगीत] तौर पर बताया गया कि आपका 546 नंबर आया है। लेकिन जैसे ही अन्नी को यह खबर मिली कि नीट के रिजल्ट में गड़बड़ी की खबरें आ रही हैं। उसने दोबारा अपना रिजल्ट चेक करने के लिए रिजल्ट का पोर्टल खोला और सामने जो स्क्रीन पर था उससे पूरा परिवार परेशान हो गया। 546 नंबर लाने वाली अन्नी का रिजल्ट अब 146 दिख रहा था। मेरा नाम अन्नी प्रिया है। मैं रांची की रहने वाली हूं और मैंने भी यह रीट एग्जाम दिया था जिसमें मेरा ओएमआर आया था।
जिसमें मुझे 596 नंबर मिले हैं। और फिर मेरा जब रिजल्ट भी आया तो मुझे 596 नंबर ही मिले हैं इसमें। लेकिन मैंने जब कुछ देर बाद चेक किया है तो मेरे नंबर 596 से 146 हो गए हैं। और फिर मुझे सुबह में एक बार जब मेरा 596 रिजल्ट आया था तो मेल भी आया था 596 नंबर का। मैंने एनटीए को मेल भी किया है और यह दरख्वास्त भी की है और एजुकेशन मिनिस्टर को भी कि मेरा जल्दी से जल्दी इस चीज को देखा जाए। पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने तंज कसा है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखा है क्या यह नीट है या चीट? नीट की दोबारा परीक्षा में गड़बड़ी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। लेकिन बीजेपी सरकार में किसी को भी जवाब दे या जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। इस्तीफा देने या इस्तीफा दिलवाने की तो बात ही नहीं उठती।
कुल मिलाकर यह तो साफ है कि गड़बड़ी कहीं ना कहीं से तो हुई है। अब देखना यह है कि भविष्य में डॉक्टर बनने का सपना संजोने वाली इन छात्राओं को इंसाफ मिल भी पाता है या नहीं।