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बेटे की पढ़ाई के लिए मौत से भिड़ गया पिता, रोंगटे खड़े कर देगा बिहार का ये सच

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तो एक पिता कंधे पर बैठा उसका मासूम बेटा सामने उफती नदी तेज बहाव और हर कदम पर मौत का खतरा लेकिन पिता के कदम नहीं डगमगाए क्योंकि उसके लिए सबसे बड़ी चिंता अपनी जान नहीं बल्कि बेटे की पढ़ाई थी। पश्चिम चंपारण के सीमावर्ती रामनगर प्रखंड के दोनोन इलाके से सामने आया यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पहली नजर में यह सिर्फ एक भावुक कर देने वाला दृश्य लगता है। लेकिन असल में यह बिहार के दूरदराज इलाकों की उस सच्चाई को उजागर करता है जहां आज भी शिक्षा तक पहुंचने के लिए लोगों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।

ढोकनी दौन गांव के रहने वाले देवराज महतो अपने बेटे शुभम कुमार को कंधे पर बिठाकर तेज बहाव वाली नदी पार करते नजर आ रहे हैं। बारिश के कारण नदी उफान पर है। पानी का बहाव इतना तेज कि एक छोटी सी चूक बड़ा हादसा बन सकती थी। लेकिन बेटे को समय पर स्कूल पहुंचाने की जिम्मेदारी ने पिता के कदमों को रुकने नहीं दिया। वीडियो में हर तरफ कदम के साथ डर साफ दिखाई देता है। एक तरफ तेज बहता पानी दूसरी तरफ बेटे के भविष्य की चिंता। यही चिंता एक पिता को नदी में उतरने का साहस देती है। शुभम कुमार बेलाटाडी मॉडलसीय विद्यालय में पढ़ाई करता है। गांव से स्कूल की दूरी महज 7 कि.मी. है। लेकिन इस रास्ते में पड़ने वाली नदी इस दूरी को बेहद ही कठिन बना देती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि नदी पर आज तक पुल नहीं बन सका।

बरसात शुरू होते ही यह नदी गांव और स्कूल के बीच सबसे बड़ी दीवार बन जाती है। ऐसे में बच्चों को स्कूल पहुंचाने का यही एक रास्ता बचता है। दोनों क्षेत्र के लोगों के लिए यह कोई नई कहानी नहीं। हर साल मानसून आते ही करीब 22 गांव चारों तरफ से पानी से घिर जाते हैं। सड़क संपर्क टूट जाता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। बीमारों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है

और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी किसी चुनौती से कम नहीं रहता। देवराज मेहतो का यह वीडियो सिर्फ एक पिता के साहस की कहानी नहीं। यह उन हजारों परिवारों की तस्वीर भी है जो आज भी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में है। जब सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने, स्कूलों के आधुनिकरण और डिजिटल क्लासरूम की बात करती है तब बिहार के कई गांवों में बच्चे आज भी स्कूल पहुंचने के लिए उफती नदियां पार करने पर मजबूर हैं। पहले तो बेटिया से अभिषेक पांडे की रिपोर्ट बिहार तक। [संगीत] [संगीत]

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