Cli

आमिर खान का असली चेहरा बेनकाब! ‘चतुर’ ने खोल दी आमिर की पोल

Uncategorized

क्या बॉलीवुड का मिस्टर परफेक्शनिस्ट असल जिंदगी में एक डरपोक सुपरस्टार है जिसने सिर्फ पैसे और नाम के लिए एक असली हीरो की जिंदगी को पर्दे पर बेच दिया। लेकिन जब उस असली हीरो को उसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी तो उसने साफ पल्ला झाड़ लिया। आखिर क्यों? जब असल जिंदगी का फुनसुख वांगड़ू दिल्ली के जंतरम-मंतर की चिलचिलाती धूप और कड़कड़ाती बारिश में देश के युवाओं के भविष्य के लिए मौत से जंग लड़ रहा था। तब रियल लाइफ का वही हीरो लंदन के एक इवेंट में बैठकर अपने पुराने बयानों से मुकर रहा था। और कैसे आमिर खान की अपनी ही पूर्व पत्नी किरण राव ने सरेआम सोशल मीडिया पर उनके इस पाखंड का पर्दाफाश कर दिया। दोस्तों जरा अपने दिमाग में एक बार कल्पना कीजिए। दिल्ली के जंतरमंतर की जहां 40° से ऊपर के तापमान और अचानक होने वाली बारिश के बीच भारत के हजारों युवाओं का एक जबरदस्त रेला जमा है। इसी आंदोलन के बीच एक 59 साल का बुजुर्ग शख्स बैठा है जिसकी सांसे हर गुजरते दिन के साथ उखड़ती जा रही हैं और जो बिना अन्न का एक भी दाना खाए पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर मौत को चुनौती दे रहा है। यह बुजुर्ग शख्स कोई और नहीं बल्कि लद्दाख के एजुकेशन रिफॉर्मर और एनवायरमेंटलिस्ट सोनम वांगचुक हैं। वांगचुक का शरीर दिन-ब दिन गलता जा रहा है। उनका वजन 9 किलो से भी ज्यादा कम हो चुका है। उनका ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक नीचे गिर चुका है। उनकी मांसपेशियां धीरे-धीरे पिघल रही हैं और डॉक्टर लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि उनके शरीर के मुख्य अंग अब किसी भी समय काम करना पूरी तरह बंद कर सकते हैं। देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के

तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहे इस नायक के समर्थन में जब पूरा देश एकजुट हो रहा था और हर तरफ न्याय की गुहार लगाई जा रही थी तब अचानक एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आता है जो इस पूरे आंदोलन को सीधे बॉलीवुड के सबसे बड़े विवाद में तब्दील कर देता है। यह वीडियो तीन इडियट्स फिल्म में चतुर रामलिंगम यानी साइलेंसर का किरदार निभाने वाले अभिनेता ओमी वैद्य का था। लेकिन इस बार ओमी वैद्य के चेहरे पर कोई हंसी नहीं था बल्कि वह कैमरे के सामने बेहद गंभीर, मायूस और भावुक नजर आ रहे थे। ओमी वैद्य ने अपने वीडियो में सीधे तौर पर कहा कि मैं नहीं चाहता कि असल जिंदगी का फुंसुक वांगड़ू इस तरह तड़प-तड़प कर मर जाए। चतुर ने पूरी दुनिया को एक बार फिर से वह सच याद दिला दिया जिसे लोग शायद भूलते जा रहे थे कि आमिर खान ने जिस रणछोड़ दास चांचड़ या फुंसुख वांगड़ू का किरदार निभाकर दुनिया भर में वाहवाही और करोड़ों रुपए बटोरे थे वो असल में लद्दाख के इसी सोनम वांगचुक की जिंदगी और विचारों से प्रेरित था। चतुर की इस अपील ने इंटरनेट की दुनिया में मानो एक भयंकर आग लगा दी और देश की जनता की निगाहें सीधे उस सुपरस्टार की तरफ मुड़ गई जिसने कभी पर्दे पर इस शख्स का मुखौटा पहनकर वाहवाही लूटी थी। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा और कड़वा मोड़ तब आता है जब लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल के एक मंच पर आमिर खान से सोनम वांगचुक के इस जानलेवा अनशन को लेकर एक सीधा सवाल पूछा जाता है। पूरी दुनिया यह उम्मीद कर रही थी कि आमिर खान कम से कम मानवीय आधार पर उनके प्रति अपना समर्थन जताएंगे। लेकिन आमिर खान ने वहां जो कहा उसने पूरे देश को सन्न कर दिया। आमिर खान ने बहुत ही चौंकाने वाले शब्दों में एक ऐसा बयान दे डाला जिसने बवंडर खड़ा कर दिया। आमिर ने सरेआम कहा कि यह पूरी तरह से एक बहुत बड़ी गलतफहमी है और मैंने हाल ही में सोशल मीडिया पर चतुर यानी ओमी वैद्य का वो वीडियो देखा है। लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि चतुर बिल्कुल गलत कह रहा है। शायद चतुर अपने दिमाग में यही सोच रहा था लेकिन मैं आज यह पूरी तरह स्पष्ट करना चाहता हूं कि ना तो मैं और ना ही हमारी फिल्म के लेखक राजकुमार हिरानी और अभिजात जोशी फिल्म की कहानी लिखते समय [संगीत] या फिल्म बनाते समय मिस्टर सोनम वांगचुक को जानते तक थे। हालांकि आमिर ने वांगचुक के तेजी से गिरते स्वास्थ्य पर ऊपरी तौर पर चिंता जरूर जताई और यह खोखली उम्मीद भी की कि उनका यह उपवास जल्द से जल्द खत्म हो जाए। लेकिन उनके इस साफ और सीधे इंकार ने इंटरनेट पर एक ऐसा भूचाल ला दिया जिसकी उम्मीद शायद खुद मिस्टर परफेक्शनिस्ट को भी नहीं रही होगी। आमिर खान का यह बयान जैसे ही लंदन से निकलकर सोशल मीडिया की गलियों तक पहुंचा इंटरनेट और खासकर रेडिट के जासूसों के बीच जैसे एक बहुत बड़ा धमाका हो गया।

नेटिजंस को आमिर खान के इस झूठ की कलई खोलने और उनके दावों की धज्जियां उड़ाने में चंद घंटों का भी वक्त नहीं लगा। सोशल मीडिया के महारथियों ने तुरंत इंटरनेट के तहखानों से निकाल कर साल 2008 का एक बहुत ही पुराना धुंधला लेकिन बेहद विस्फोटक वीडियो वायरल कर दिया। जिसने आमिर खान के उस दावे को सरेआम झूठा साबित कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि हम उन्हें जानते तक नहीं थे। यह वीडियो कोई आम वीडियो नहीं था बल्कि यह साल 2008 में आयोजित हुए सीएनए आईबीn के रियल हीरोज़ अवार्ड्स का था। [संगीत] इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सोनम वांगचुक खुद मंच पर खड़े हैं और उन्हें एक असली हीरो के रूप में सम्मानित किया जा रहा है। जहां वो देश की पुरानी शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर खुलकर बात कर रहे हैं और साथ ही सियाचीन विवाद पर एक ऐसी फिल्म बनाने का शानदार आईडिया भी दे रहे हैं जिसमें दोनों देशों का पैसा हथियारों के बजाय बच्चों की पढ़ाई पर खर्च हो। और जब वांगचुक मंच से यह सब बोल रहे थे तब उनके ठीक सामने कौन बैठा था। वहां अपनी पत्नी किरण राव के साथ कोई और नहीं बल्कि खुद आमिर खान मौजूद थे। जैसे ही यह 2008 का वीडियो दुनिया के सामने आया, आमिर खान का वो सफेद झूठ पूरी तरह से बेनकाब हो गया। यह रियल हीरोज़ अवार्ड शो साल 2008 की शुरुआत में हुआ था और इसके ठीक कुछ महीनों बाद यानी जुलाई और अगस्त 2008 के आसपास फिल्म तीन इडियट्स की शूटिंग शुरू हुई थी। जिसमें आमिर खान ने गजनी के बाद अपने बालों को छोटा ही रखा था। ऐसे में आमिर खान का यह कहना कि साल 2009 में फिल्म रिलीज होने तक या फिल्म की मेकिंग के दौरान वो वांगचुक के नाम और उनके काम से पूरी तरह अनजान थे। एक ऐसा सफेद झूठ साबित हुआ जिसने आमिर खान की पूरी क्रेडिबिलिटी पर हमेशा हमेशा के लिए एक बहुत गहरा दाग लगा दिया।

लोगों ने आमिर खान को डरपोक सुपरस्टार कहना शुरू कर दिया। एक सोशल मीडिया यूजर ने तो यहां तक लिख दिया कि आज जाकर हमें असली सच्चाई पता चली है कि फिल्म में चतुर ही सबसे ज्यादा समझदार था और बाकी के तीन कैरेक्टर सच में इडियट थे क्योंकि ओमी वैद्य ने सात समंदर पार बैठकर भी आमिर खान से कहीं ज्यादा हिम्मत और अपनी रीड की हड्डी दिखाई है। लोगों का साफ तौर पर कहना था कि जो अभिनेता कभी टीवी पर बैठकर देश को सुधारने की बड़ी-बड़ी बातें करता था, आज वह सिर्फ सत्ता और राजनीति के डर से अपने ही असली जीवन के नायक को पहचानने से सरेआम मुकर रहा है। सोनम वांगचुक ने खुद कुछ समय पहले यह खुलासा किया था कि फिल्म तीन इडियट्स के निर्माताओं और क्रू मेंबर्स ने साल 2008 में चुपके से लद्दाख में स्थित उनके स्कूल का दौरा किया था। वो लोग वहां भारी मात्रा में प्लास्टिक का कचरा और गाड़ियां लेकर आए थे और उस खूबसूरत जगह पर शूटिंग करना चाहते थे। लेकिन पर्यावरण को होने वाले भारी नुकसान को देखते हुए वांगचुक ने उन्हें वहां से डांट कर खदेड़ दिया था। जिसके बाद उस क्रू ने पास के ही एक दूसरे स्कूल में जाकर फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग पूरी की थी। जब साल 2009 में यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई और पूरी दुनिया भर से लोग वांगचुक को फोन करके बधाइयां देने लगे कि फिल्म का मुख्य किरदार हूबहू उनकी तरह दिखता है। तब वांगचुक खुद हैरान रह गए थे। उन्होंने उस समय फिल्म के मेकर्स के खिलाफ कोई कानूनी कदम या सार्वजनिक दावा इसलिए नहीं किया क्योंकि उस दौरान फिल्म के निर्माताओं और मशहूर लेखक चेतन भगत के बीच कहानी का क्रेडिट चुराने को लेकर पहले से ही एक बहुत गंदा विवाद चल रहा था। वांगचुक नहीं चाहते थे कि देश के लोग उन्हें कोई ऐसा लालची इंसान समझें जो सिर्फ चंद रुपयों और पब्लिसिटी के लिए बॉलीवुड के बड़े निर्माताओं से झगड़ा कर रहा है। जब कानूनी तौर पर एक्शन लेने की समय सीमा पूरी तरह खत्म हो गई तब वांगचुक ने बेहद शालीनता से निर्माताओं को एक निजी खत लिखा और उन्हें साल 2008 की वो मुलाकात याद दिलाई लेकिन घमंड और पैसे के नशे में चूर बॉलीवुड के उन बड़े निर्माताओं ने आज तक उस खत का एक अद जवाब देने की जहमत भी नहीं उठाई।

फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी ने एक बार मीडिया के सामने यह मनगढ़ंत कहानी गढ़ी थी कि रणछोड़ दास चांचड़ का यह किरदार असल में एफटीआईआई के एक ऐसे छात्र से प्रेरित था जो अपने एक अमीर दोस्त के नाम पर फर्जी तरीके से सिर्फ ज्ञान हासिल करने के लिए पढ़ाई करता था। लेकिन वहीं दूसरी तरफ फिल्म के मुख्य निर्माता विधु विनोद चोपड़ा ने एक बिल्कुल ही अलग राग अलापते हुए सरेआम यह अजीब और गरीब दावा कर दिया था कि रेंचो का यह मशहूर किरदार किसी बाहरी इंसान पर नहीं बल्कि सीधे तौर पर खुद मुझ पर ही आधारित है। और फिर जब लोगों ने सवाल उठाए तो उन्होंने बाद में बात पलटते हुए यह भी कह दिया कि फुसुख वांगड़ू नाम उनके एक पुराने कश्मीरी सहपाठी फुटसोक लद्दाखी के नाम से प्रेरित होकर रखा गया था। निर्माताओं के यह बार-बार बदलते बयान यह साफ तौर पर साबित करते हैं कि कॉपीराइट के पचड़ों से खुद को बचाने के लिए बॉलीवुड ने झूठ और पाखंड की एक ऐसी ऊंची दीवार खड़ी कर दी थी जिसमें एक असली और सच्चे देश प्रेमी नायक को कभी उसका वाजिब हक और सम्मान नहीं मिल पाया। लेकिन इस पूरी कहानी का ट्विस्ट तो अभी आना बाकी था। जिसने आमिर खान के घर के अंदर की कलह को सड़क पर ला दिया। जिस वक्त आमिर खान लंदन की ठंडी हवाओं में बैठकर बड़ी ही बेरुखी से सोनम वांगचुक के साथ अपने किसी भी तरह के संबंध को नकार रहे थे। ठीक उसी समय उनकी पूर्व पत्नी किरण राव ने अपने Instagram अकाउंट की डिस्प्ले पिक्चर यानी डीपी को रातोंरात बदल दिया और वहां पर सोनम वांगचुक की एक बड़ी सी तस्वीर लगा दी। जिस पर साफ और बड़े अक्षरों में लिखा हुआ था कि आई सपोर्ट सोनम बात सिर्फ एक सोशल मीडिया डीपी बदलने तक ही सीमित नहीं रही बल्कि किरण राव ने इसके साथ एक बेहद तीखा और भावुक पोस्ट भी साझा किया जिसमें उन्होंने सोनम वांगचुक अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी के उन तमाम युवाओं के साथ अपनी पूरी एकजुटता और संवेदना व्यक्त की। किरण राव ने लिखा कि यह देखकर मेरा दिल पूरी तरह टूट जाता है

कि 19 दिनों की भूख हड़ताल के बाद भी हमारे देश की सत्ता में बैठे लोग पूरी तरह से खामोश और बहरे बने हुए हैं। एक ही परिवार से जुड़े दो सबसे बड़े चेहरों का इस तरह एक ही मुद्दे पर पूरी तरह आमने-सामने आ जाना कोई छोटी बात नहीं थी। एक तरफ आमिर खान का सत्ता के डर से किया गया वो इंकार था और दूसरी तरफ किरण राव का बिना किसी खौफ के सीधे सरकार को कटघरे में खड़ा करना था। जिसने यह साफ कर दिया कि आमिर खान का यह झूठ उनके अपने ही घर में पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। यह पूरी दास्तान आज हम सभी देशवासियों को सोचने पर मजबूर कर देती है कि हम असल जिंदगी में किन लोगों को अपना असली हीरो मानते हैं और किन के लिए तालियां बजाते हैं। एक तरफ वो पर्दे का नकली और मतलबी हीरो है जो एक फिल्म से ₹300 करोड़ कमाने के बाद अपने निजी स्वार्थ के डर से अपने ही जीवन के असली प्रेरणा स्रोत को सरेआम पहचानने से इंकार कर देता है।

और दूसरी तरफ वो लद्दाख का असली फुंसुख वांगडू है जो बिना किसी फिल्मी क्रेडिट, बिना किसी रॉयल्टी के पैसे या किसी नाम की परवाह किए अपने शरीर का एक-एक कतरा देश की बलिदी पर गलाकर युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए मौत से टकरा रहा है। फिल्म तीन इडियट्स का वो बेहद मशहूर डायलॉग कि सक्सेस के पीछे मत भागो बल्कि एक्सीलेंस का पीछा करो। आज जंतरमंतर की तपती हुई सड़कों पर एक कड़वे मजाक की तरह चीख रहा है। अगर आपको भी लगता है कि इस देश को नकली पर्दे के हीरोज़ की नहीं बल्कि सोनम वांगचुक जैसे असली नायकों की जरूरत है तो इस वीडियो को दिल से एक लाइक जरूर करें और इस आवाज को दूर तक पहुंचाने के लिए चैनल को तुरंत सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबाना बिल्कुल ना भूलें ताकि यह सच हर एक हिंदुस्तानी तक पहुंच सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *