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डॉलर नहीं है सबसे मजबूत ! टॉप-5 से बाहर हुआ अमेरिका

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यह खबर पारुल यूनिवर्सिटी द्वारा प्रस्तुत [संगीत] की गई है। क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी डॉलर नहीं है। डॉलर तो दुनिया की टॉप पांच करेंसियों की लिस्ट से भी बाहर हो चुकी है। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 94.94 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। तेल के दम पर इन मुस्लिम देशों की करेंसी ने पूरी दुनिया में बाजी मार ली है। नमस्कार, मेरा नाम है अंशुल शर्मा और आप देख रहे हैं दैनिक जागरण। आज हम बात करेंगे दुनिया की सबसे शक्तिशाली मुद्राओं के बारे में। जब भी मजबूत करेंसी की बात आती है तो हमारे दिमाग में सबसे पहले अमेरिकी डॉलर का नाम आता है। हाल ही में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले नए रिकॉर्ड लो लेवल तक फिसल गया और शुक्रवार को 94.94 के लेवल पर बंद हुआ।

यानी इस समय $194.95 के बराबर है। मगर इसके बावजूद डॉलर दुनिया की सबसे पावरफुल करेंसी नहीं है। आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि डॉलर दुनिया की टॉप फाइव करेंसियों की लिस्ट में भी शामिल नहीं है। जी हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा। आप सोच रहे होंगे कि फिर [संगीत] किन देशों की करेंसी सबसे ज्यादा मजबूत है। आइए आपको इस वीडियो में पूरी लिस्ट और इसके पीछे की [संगीत] कहानी बताते हैं। दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी की लिस्ट में कुवैती दीनार नंबर एक पर काबिज है। इस वक्त एक कुवैती दीार की कीमत 3.23 के बराबर है। वहीं अगर हम इसकी तुलना हमारी भारतीय करेंसी से करें तो एक कुवैती दीार इस समय तीन ₹308.74 के बराबर है। कुवैती दीार को दुनिया की सबसे पावरफुल करेंसी माना जाता है। इसके बाद दूसरे नंबर पर बहरी दीार है जो 2 65 या $253.01 के बराबर है। तीसरे नंबर पर ओमान देश की करेंसी ओमानी रियाल आती है जिसकी कीमत $.6 यानी ₹248.16 है। चौथे स्थान पर जॉर्डियन दिनार है जो 1.41 या $134.58 के बराबर है। इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर पाउंड स्टर्लिंग आता है जिसकी कीमत 1.34 और भारतीय रुपए में $127.14 है। छठे नंबर पर कैमन द्वीप डॉलर है जो $1.214.47 के बराबर है।

सातवें नंबर पर स्विस फ्रैंक है जिसकी कीमत 1.11 और $120.01 [संगीत] है। आठवें नंबर पर यूरो आता है जो 1.04 या 110 के बराबर है। हमारा जाना माना अमेरिकी डॉलर इस लिस्ट में नौवें नंबर पर आता है जिसकी कीमत $1 यानी 94.95 है। 10वें नंबर पर बहामियन डॉलर आता है जिसकी कीमत भी $1 यानी 94.95 के बराबर है। अब सवाल उठता है कि कुवैत, बहरीन और ओमान जैसे देशों की करेंसी इतनी मजबूत क्यों है? दरअसल कुवैत, बहरीन और ओमान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात पर टिकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का सारा कारोबार अमेरिकी डॉलर में होता है। इसलिए इन देशों को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा यानी डॉलर मिलते हैं।

कुवैत का दीनार दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी इसलिए माना जाता है क्योंकि कुवैत के पास बहुत विशाल तेल भंडार है। इसके साथ ही वहां की जनसंख्या बहुत कम है और उनके पास एक विशाल सोवन वेल्थ फंड मौजूद है। बहरीन और ओमान जैसे देशों ने भी अपनी करेंसी को लंबे समय से अमेरिकी डॉलर से फिक्स्ड एक्सचेंज [संगीत] रेट पर बांध रखा है। इसे फिक्स्ड पैक भी कहा जाता है। डॉलर से जुड़े होने के कारण इन देशों की करेंसी में बहुत स्थिरता आती है और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा हमेशा बना रहता है। इसका एक सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि जब भी अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है तो इन देशों की करेंसी भी अपने आप मजबूत दिखाई देती है। यही वजह है कि यह करेंसीज दुनिया भर में अपना दबदबा बनाए हुए हैं और इसकी वैल्यू इतनी ज्यादा है। फोर देशों की कुल जनसंख्या भारत या चीन जैसे बड़े देशों के मुकाबले बहुत ही कम है। कम जनसंख्या होने का एक बड़ा मतलब यह है

कि सरकार को प्रति व्यक्ति ज्यादा संसाधन नहीं बांटने होते हैं और देश की करेंसी की सप्लाई को कंट्रोल करना बेहद आसान होता है। इन देशों की केंद्रीय बैंक नोट छापने के मामले में बहुत ज्यादा अनुशासन का पालन करते हैं। ओमान और जॉर्डन जैसे देशों ने भी इसी रणनीति के तहत अपनी मुद्रा की कीमत को हमेशा ऊंचा रखा और भारत में उसकी सप्लाई को सीमित बनाए रखा है। जॉर्डन के पास कुवैत या ओमान जितना तेल भंडार नहीं है। फिर भी जॉर्डियन दीार दुनिया में काफी मजबूत स्थिति में है। इसकी मुख्य वजह जॉर्डन की सख्त मौद्रिक नीति और साल 1995 से डॉलर के साथ किया गया फिक्स्ड पैग है।

वहां की सरकार और सेंट्रल बैंक ने महंगाई को पूरी तरह काबू में रखा और विदेशी सहायता व निवेश से अपने रिजर्व को मजबूत बनाए रखा। दूसरी तरफ बहरीन खाड़ी का एक बहुत बड़ा बैंकिंग हब है। इसलिए उसे अपनी वित्तीय स्थिरता बनाए रखना जरूरी था। ओमान ने भी अपने तेल राजस्व को बचाकर रखा और धीरे-धीरे अपनी अर्थव्यवस्था को विविध बनाने की कोशिश की। कुल मिलाकर फिक्स्ड एक्सचेंज रेट, कम जनसंख्या, तेल से आने वाला डॉलर और सख्त मौद्रिक अनुशासन ही इन चारों देशों की करेंसी को सबसे मजबूत बनाते हैं। तो यह थी दुनिया की टॉप 10 सबसे मजबूत करेंसियों की कहानी। डॉलर भरे ही दुनिया भर के व्यापार में सबसे ज्यादा चलता हो, लेकिन ताकत के मामले में खाड़ी देशों के और उनकी नीतियां सबसे आगे निकल चुकी हैं। आपको यह जानकारी कैसी लगी? हमें कमेंट्स में जरूर बताइए। देश दुनिया की बाकी खबरों के लिए देखते रहिए दैन।

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