खत्म हो गए, साम्राज्य मिट गए, सभ्यताएं इतिहास के किताबों में दब गई। लेकिन एक जीव है जो आज भी पूरे आत्मविश्वास के साथ आपकी रसोई में टहलता हुआ मिल जाएगा। उसे देखकर के कुछ लोग ऐसे उछलते हैं जैसे आग लग गई हो। वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर कभी हुआ तब भी सबसे पहले मलबे के नीचे से अपनी मूछे उमेटता हुआ वही निकलेगा। वो कॉकरोच होगा। मतलब दुनिया खत्म हो जाएगी लेकिन सिंक के नीचे से आवाज आएगी कि कुछ खाने को है क्या?
कॉकरोच सिर्फ कीड़ा नहीं है। साहित्यकारों के ख्यालों का हीरो भी है। 20वीं सदी के बड़े नोवेलिस्ट फ्रांस काफका ने अपनी मशहूर नवेल द मेटामॉर्फेसिस में ग्रेगर सैमसा को एक सुबह उठते ही कॉकरोच जैसे जीव में बदल दिया था। और फिर उन्हीं कैफका से प्रेरित होकर के इयान मैकवान ने एक किताब लिखी द कॉकरोच जिसमें कॉकरोच इंसान बनकर के प्रधानमंत्री बन जाता है। तो प्रधानमंत्री बनना तो अभी दूर की कौड़ी है .
लेकिन देश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के एक बयान से नाराज कुछ लोगों ने एक पार्टी जरूर बना ली है। कॉकरोच जनता पार्टी। पिछले 5 दिन से सोशल मीडिया पर इस पार्टी ने और इस पार्टी के मीम्स ने हंगामा बरपा रखा है। Instagram पर फॉलोवर्स इतने हो गए हैं जितने कुछ पार्टियों को वोट भी नहीं मिलते। लेकिन सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने और चुनाव में वोट बटोरने में जमीन आसमान का अंतर होता है।
यह बात आप जानते हैं। आज इसी कॉकरोच जनता पार्टी की बात होगी। यह पार्टी क्या है? किसने बनाई है? क्या यह किसी पॉलिटिकल पार्टी इसके पीछे कोई है? क्या आम आदमी पार्टी से इसके जो लिंक जोड़े जा रहे हैं उसमें कोई दम है और इनका भविष्य कैसा दिख रहा है? इनके मेनिफेस्टो पर भी बात करेंगे। नमस्कार, मेरा नाम है कुलदीप और आप देखना शुरू कर चुके हैं कुछ युवा ऐसे हैं जो कॉकरोच की तरह हैं। उन्हें ना रोजगार मिलता है ना ही किसी पेशे में जगह। उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं। कुछ सोशल मीडिया में कुछ एक्टिविस्ट बन जाते हैं। कुछ दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर वे हर किसी पर हमला करने लगते हैं। 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में एक केस की सुनवाई चल रही थी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने तब यह टिप्पणी की थी। देश के युवाओं, बेरोजगारों और कॉकरोच का जिक्र ने एक ही पंक्ति में कर दिया था। बयान पर हंगामा कटना शुरू हुआ। अगले दिन उन्होंने सफाई भी दी। कहा कि गलत तरीके से बात को रिपोर्ट किया गया।
लेकिन खबरें ऐसी चली कि देश के सर्वोच्च न्यायाधीश भी आलोचनाओं से बच नहीं पाए। और इस बीच चुपके से कॉकरोच सोशल मीडिया का सबसे बड़ा कीवर्ड बन गया। क्योंकि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की टिप्पणी के अगले ही दिन अस्तित्व में आ गई कॉकरोच जनता पार्टी। तब से इस पार्टी के नाम पर हंगामा मचा हुआ है।
बात पहले मीमीकृत हुई, फिर ट्रेंडीकरण हुआ। खबरों में जिक्र आया और अब मामला पॉलिटिकल हो गया है। सोशल मीडिया के शगूफे से शुरू हुई बात को अब कोई जेंजी आंदोलन बता रहा है तो कोई अगला चुनाव ही जितवा दे रहा है। लेकिन एक बात तो है कि सोशल मीडिया पर सेंसेशन बन गई है कॉकरोच जनता पार्टी। आज सुबह कॉकरोच जनता पार्टी के Instagram फॉलोवर्स थे 10 मिलियन। मतलब 1 करोड़ दोपहर में देखा तो 14 मिलियन हो गए और अभी शाम को चेक किया इस शो से पहले तो 15 1/2 मिलियन करीब 16 मिलियन के करीब हो चुके थे।
बीजेपी अपने आप को देश की नहीं दुनिया के सबसे बड़ी पार्टी कहती है और उसके Instagram पर फॉलोवर्स 8.8 मिलियन हैं 88 लाख लोग। कॉकरोच जनता पार्टी के बीजेपी से दोगुने फॉलोअर्स होने वाले हैं। साथ के साथ यह शक भी जताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि साहब सीजेपी के फॉलोवरर्स कहीं खरीदे हुए तो नहीं है।
कुछ लोग ऐसा कह रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर यह बहस भी छिड़ चुकी है कि फॉलोवर्स से सोशल मीडिया पर लाइक्स जरूर बटोरे जा सकते हैं, लेकिन चुनाव नहीं जीते जाते। मिसाल के तौर पर राघव चड्ढा का ही उदाहरण ले लेते हैं। राघव के Instagram पर 11.6 मिलियन फॉलोवर्स हैं। लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव उन्होंने लड़ा और बीजेपी के रमेश बिदूड़ी के आधे वोट भी वो हासिल नहीं कर सके।
कॉकरोच जनता पार्टी को सामने आए चार दिन भी नहीं हुए कि कंट्रोवर्सी शुरू हो गई। Instagram पर पार्टी के फॉलोअर्स वंदे भारत से भी तेज रफ्तार से बढ़ रहे हैं। एक्स पर भी 2 लाख हो गए थे। लेकिन एक्स अकाउंट आज ब्लॉक हो गया। इंडिया में कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट अब खुल नहीं रहा है। लिख के आ रहा है कि इट हैज़ बीन विद हेल्ड इन रिस्पांस टू अ लीगल डिमांड। यह तो सोशल मीडिया की बात हुई पर कॉकरोच जनता पार्टी जब पेज बना तो सबसे पहले उसको जॉइ करने का सायरिकल एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया चर्चा में आया।
कुछ शर्तें हैं उनको आप पूरा करेंगे तभी पार्टी में एंट्री मिलेगी। पहली शर्त है बेरोजगारी। भाई साहब बेरोजगार होना कंपलसरी है। दूसरा है आलसी होना। डले रहो पड़े रहो। और तीसरी योग्यता है ऑनलाइन रहना पड़ेगा। बेसिकली दूसरी और तीसरी योग्यता को मिलाकर के देखें तो पड़े-पड़े फोन स्क्रॉल करते रहो। और चौथी योग्यता होनी चाहिए प्रोफेशनल तरीके से रेंट करना आता हो, निकालना आता हो। यह तो पार्टी वर्कर्स के लिए चार तंजिया शर्तें थी। लेकिन पार्टी होती है मिशन और विज़न से। पार्टी को आगे कैसे ले जाना है और जनता के सामने क्या परोसना है। इस मामले में कॉकरोच जनता पार्टी ने पहले ही अपना एक मेनिफेस्टो जारी कर दिया था।
क्या है यह मेनिफेस्टो में? वैसे तो पार्टियां अपना लंबा चौड़ा घोषणापत्र जारी रखती करती हैं। लेकिन सीजेपी ने सिर्फ पांच वादे किए हैं। पहला वादा है कि अगर कॉकरोच जनता पार्टी सरकार में आती है तो रिटायरमेंट के बाद किसी भी सीजेआई को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को राज्यसभा जाने को नहीं मिलेगा। कोई भी सीजीआई को राज्यसभा की सीट से नवाजा नहीं जाएगा। ऐसा क्यों? पहले क्या किसी सीजीआई को राज्यसभा भेजा गया है? जवाब है बिल्कुल हां।
जस्टिस रंजन गोगोई देश के 46वें चीफ जस्टिस थे। 3 अक्टूबर 2018 को पदभार उन्होंने संभाला। नवंबर 2019 में रिटायर हुए। 4 महीने बाद राज्यसभा के लिए नॉमिनेट हो गए। इसके पहले जस्टिस रंगनाथ मिश्रा भी ऐसे मुख्य न्यायाधीश थे जिन्हें राज्यसभा की सांसदी मिली। तो सीजेपी कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि ऐसा हम नहीं होने देंगे। सीजेआई को राज्यसभा की सीट नहीं मिलेगी। वादा नंबर दो है इनका कि अगर कोई वैध कोई वैलिड वोट डिलीट किया जाए चाहे उस राज्य में सीजेपी की सरकार हो या विपक्ष की तो देश के चीफ इलेक्शन कमिश्नर पर यूएपीए लगाया जाएगा। उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। क्योंकि किसी के वोटिंग का अधिकार छीनना l से कम नहीं है। आप जानते हैं अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट आमतौर पर देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने पर लगाया जाता है और यह वोट का अधिकार छीनने वाली बात का रेफरेंस क्या है? आप समझ गए होंगे।
देश में अभी एसआईआर चल रहा है। कुछ प्रदेशों में हो चुका है। वोटर लिस्ट का जो रिवीजन हो रहा है, छटनी की जा रही है। चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर के बहुत हंगामा हुआ था। ममता बनर्जी ने आरोप लगाए थे कि लोगों को टारगेट करके नाम काटे गए। 27 लाख लोग इसकी वजह से वोट नहीं कर पाए क्योंकि चुनाव आयोग फैसला नहीं कर पाया। अगला वादा महिलाओं के लिए 50% का आरक्षण होगा। 33% नहीं और इसके लिए सांसदों की संख्या भी नहीं बढ़ाई जाएगी। कैबिनेट में भी महिलाओं के लिए 50% आरक्षण अनिवार्य होगा। एक बात है वैसे इसमें ये सारी बातें कहना आसान है। वादे करना आसान है। जमीन पर चरितार्थ करना थोड़ा कठिन है। केंद्र में बीजेपी वाले एनडीए की 12 साल से सरकार है। 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन करना था। सरकार ने इस दिशा में बहुत सी गतिविधियां की लेकिन बिल पास नहीं करा पाए क्योंकि दो तिहाई बहुमत चाहिए।
सामान्य बिल पास कराने के लिए सदन में सिर्फ बहुमत चाहिए होता है और संविधान संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत। चौथा वादा अडानी अंबानी के कंपनियों के चैनलों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे और गोदी मीडिया के एंकर्स के बैंक अकाउंट्स की जांच होगी। आप जानते हैं कि विपक्ष मीडिया के एक सेक्शन को सरकार का समर्थक बता के गोदी मीडिया टर्म का इस्तेमाल करता है। एक आरोप की शक्ल में गोदी गोदी मीडिया कहता है तो कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि उनके एंकर्स के बैंक अकाउंट की जांच होगी।
पांचवा और आखिरी वादा अगर कोई विधायक या सांसद दूसरी पार्टी में पाला बदल करके जाता है तो उसके चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई जाएगी और उसे अगले 20 साल तक किसी भी पब्लिक ऑफिस में कोई पद नहीं मिलेगा। पार्टी बदलने का मामला अभी कुछ ही दिन पहले सामने आया था। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के छह सांसदों के साथ बीजेपी में चले गए थे। आरोप लगते हैं कि बीजेपी इस प्लान पर लंबे समय से काम कर रही थी।
अरविंद केजरीवाल आखिर में कुछ कर नहीं पाए। कॉकरोच पार्टी का कहना है कि हम ऐसा नहीं होने देंगे। किसी ने किया तो चुनाव नहीं लड़ने देंगे। वैसे इसके लिए भी उनको संसद में कानून पास करवाना होगा। पर सबसे बड़ा सवाल कौन हैं कॉकरोच पार्टी बनाने वाले? इसके पीछे लोग कौन हैं? सीजेपी के Instagram पेज से सिर्फ तीन अकाउंट्स को फॉलो किया जा रहा है। नाम सुन लीजिए। अभिजीत दीपके, मेघनाद और अर्पित शर्मा। इन तीनों के बारे में एक-एक करके बताते हैं। पहले अभिजीत की बात करते हैं। सीजेपी के संस्थापक 29 साल के हैं। महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले फिलहाल अमेरिका में रहते हैं। पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने पुणे चले गए थे। फिर पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की पढ़ाई के लिए अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। लेकिन पुणे और बॉस्टन के बीच बीए और एमए के बीच एक पड़ाव केजरीवाल की पार्टी में भी पड़ा।
अभिजीत दीपके ने आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया और इलेक्शन कैंपेन टीम के साथ मिलकर के काम किया है। ऑनलाइन स्ट्रेटजीस बहुत सारी बनाई हैं। मीम, सटायर वाले वीडियोस को प्रचारित किया है। 2020 का दिल्ली चुनाव याद करिए। उस समय आम आदमी पार्टी ने मीम और सटायर से कैंपेन को एक नया रूप दिया था और इस कैंपेन के पीछे अभिजीत का ही दिमाग बताया जाता है। लेकिन वह सिर्फ सोशल मीडिया टीम की नहीं दिल्ली की केजरीवाल सरकार का भी हिस्सा थे। बिजनेस टुडे की रिपोर्ट बता रही है कि दीपके केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ क्लोजली काम कर चुके हैं।
अक्टूबर 2019 से अप्रैल 2021 के बीच वो दिल्ली के सीएमओ में कम्युनिकेशन फेलो थे। जून 2021 से मई 2024 तक दिल्ली के शिक्षा विभाग में कम्युनिकेशन एडवाइजर भी रह चुके हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ने की वजह क्या रही? इसका जवाब वो खुद देते हैं। इंडिया टुडे की सोनल मेहोत्रा कपूर से बातचीत में उन्होंने कहा कि मैंने आपके साथ 3 साल काम किया है। मैं उनके शिक्षा और स्वास्थ्य के मॉडल से प्रभावित था। यह तब भारतीय राजनीति में काफी अलग था क्योंकि ज्यादातर डिस्कोर्स में यह दो मुद्दे गायब थे। लेकिन आपने दोनों मुद्दों पर डिलीवर करके दिखाया था। इसलिए मैं इनके साथ जुड़ना चाहता था। आपसे रुखसती के बाद दीपके ने पढ़ाई लिखाई और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी में वो अपना ध्यान लगाया। बॉस्टन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। वहां उनकी पढ़ाई पूरी हो चुकी है।
फिलहाल वे नौकरी की तलाश में हैं। खुद को एक बेरोजगार बताते हैं। दूसरा नाम है मेघनाथ एस का। 35 साल के मेघनाथ भी महाराष्ट्र से आते हैं। उनके पास पब्लिक पॉलिसी और कंटेंट क्रिएशन का अच्छा खासा अनुभव है। 2011 में नागपुर यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया। उसके बाद पीआरएस संस्था के लैंप फेलोशिप के लिए चुने गए। जहां मेघनाथ ने बीजू जनता दल के सांसद रहे। तथागत सतपति के साथ 2014 से 17 तक काम किया। इसके बाद पत्रकारिता में हाथ आजमाया। न्यूज़ ल्डरी के साथ करीब 3 साल तक काम किया। वहां से निकल कर के उन्होंने मेघनर्ड नाम का YouTube चैनल बनाया जहां वे सामाजिक मुद्दों पर बात करते थे। दिल्ली सरकार के एजुकेशन विभाग में 11 महीने एडवाइजर रह चुके मेघनाथ का एक परिचय और है। विधायकी का चुनाव भी वह लड़ चुके हैं।
2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मालवीय नगर सीट से इंडिपेंडेंट चुनाव लड़ा। चुनाव चिन्ह रखा पेन तब चुनाव आयोग को सबमिट किए अपने हलफनामे में बताया कि उनकी कुल संपत्ति ₹55 लाख है। ₹1 लाख का कर्जा भी गिनाया था। अपने चुनाव का खर्च खुद उठाने का दावा करने वाले मेघनाथ के सामने आम आदमी पार्टी के सोमनाथ भारती और बीजेपी के सतीश उपाध्याय थे। सोमनाथ भारती सिंगिंग एमएलए थे। अपने चुनावी कैंपेन के लिए मेघनाथ ने YouTube पर दिल्ली के नामी नेताओं से एक वीडियो बनवाया जिसमें ट्रैफिक जाम प्रदूषण जैसे दिल्ली के स्थाई मुद्दों पर जनता का ध्यान दिलाने की कोशिश की।
लेकिन मेघनाथ को जीत नसीब नहीं हुई। बुरी हार मिली। आलम यह रहा कि लोगों ने मेघनाथ की कलम से अधिक नोटा के बटन दबाए। 192 वोटों के साथ मेघनाथ पांचवें नंबर पर रहे। नोटा को 532 वोट मिले। तब उनके YouTube चैनल पर 81,000 सब्सक्राइबर्स थे और 2 लाख लोग एक्स पर उन्हें फॉलो करते थे। खुद को भारत का पहला यूबर नेता बताने वाले मेघनाथ की हार से क्या सबक मिला? यह राजनीति के छात्रों और खुद मेघनाथ के लिए भी शोध का विषय है। हालांकि वह यह कहा करते थे कि मैं यह एक्सपीरियंस और चुनाव प्रक्रिया को देखने के लिए ही चुनाव लड़ रहा हूं। तीसरा नाम है अर्पित शर्मा का। यूके में रहते हैं। अपने बायो में खुद को एक्सीडेंटल चार्टर्ड अकाउंटेंट लिखते हैं। राजनीतिक मुद्दों पर कंटेंट बनाते हैं। Instagram पर अर्पित के 8.5 लाख फॉलोवरर्स हैं। सितंबर 2025 में अर्पित अचानक सुर्खियों में आ गए थे। तब उनके खिलाफ यूपी पुलिस ने बुलंदशहर में एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर अर्पित के एक वीडियो पर हुई थी जिसमें उन्होंने नेपाल के जेजी प्रोटेस्ट का जिक्र भारत के रेफरेंस में किया था।
आरोप लगा था जानबूझकर अशांति फैलाने का। हालांकि अर्पित ने एफआईआर पर कहा था कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के बनने के साथ ही अर्पित की प्रोफाइल फिर से खंगाली जा रही है। उनके पिता विकास शर्मा की एक फोटो वायरल हो रही है जिसमें वे आप सांसद संजय सिंह के साथ मंच पर खड़े हुए नजर आ रहे हैं। खबरें बता रही है कि विकास शर्मा 2022 में आपके टिकट पर बुलंदशहर सीट से विधायकी का टिका चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि उन्हें 1400 वोटों के साथ बुरी तरह हार मिली थी। पर बात सिर्फ गुदगुदाने वाली शर्तों या तंज कसने वाले मेनिफेस्टो की ही नहीं है। सिर्फ सारकाजम और उस अटायर की ही नहीं है। नेपाल का हवाला देकर जजी की राजनीति की ही नहीं है। देश भर के नेता कॉकरोच जनता पार्टी को समर्थन देते या अपनी राजनीति के हिसाब से उसका जिक्र करते हुए नजर आ रहे हैं। अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि बीजेपी बनाम सीजेपी। टीएमसी सांसद महुआ मोहत्रा ने भी कॉकरोच जनता पार्टी के साथ सॉलिडेरिटी दिखाई।
सीजेपी का एक्स अकाउंट ब्लॉक हुआ तब भी महुआ ने पोस्ट लिखा। टीएमसी के ही सांसद कीर्ति आजाद ने तो पार्टी में शामिल होने की इच्छा ही जता दी। हालांकि अपने वजूद में आने के साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने पोस्ट से अपनी घोषणाओं से यह तो स्पष्ट कर दिया है कि वो केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ रुझान रखते हैं। पर कुछ सवाल हैं जिनके जवाब कॉकरोच जनता पार्टी के मौजूदा कर्ताधर्ताओं को भी देने होंगे। सबसे पहला सवाल यही है कि आगे क्या? क्या पार्टी आने वाले समय में राजनीति में सक्रिय होगी? अभी तो सिर्फ सोशल मीडिया हैंडल का नाम पार्टी रखा गया है। पर क्या पार्टी के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराकर चुनाव भी लड़ने की योजना है। पार्टी अपने मेनिफेस्टो में कह रही है कि महिलाओं को 50% आरक्षण दिया जाएगा। लेकिन सामाजिक न्याय जाति धर्म का रिप्रेजेंटेशन इसको कैसे एड्रेस किया जाएगा या कि जैसा कि होता है सोशल मीडिया का ट्रेंड है।
नीश से मेन स्ट्रीम हुआ कल को क्रिंज की अधोगति प्राप्त हो जाएगा। हर ट्रेंड की तरह, हर श्लोक की तरह। खैर, अभिजीत दीपके आजकल खूब कोलैब कर रहे हैं। इंटरव्यूज भी दे रहे हैं। इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में। उनसे भविष्य का प्लान पूछा गया। इस पर अभिजीत क्या बोले सुनिएगा। बिकॉज़ इट हैज़ जस्ट बीन थ्री फोर डेज। एंड एज़ आई टोल्ड यू दिस वाज़ नथिंग ऑफ़ दिस वाज़ प्लंड। इफ आई हैड टू प्लान इट, आई वुडंट बी डूइंग इट फ्रॉम द यूए। आई वुड हैव बीन इन इंडिया। राइट? ऑल ऑफ़ दिस हैपेंड सो सडनली। बट आई वांट टू अंडरलाइन दिस दिस हैज़ हैपेंड बिकॉज़ द फ्रस्ट्रेशन दैट दी यंग पीपल हैव फॉर मेनी इयर्स इट हैज़ हैपेंड बिकॉज़ ऑफ़ दैट लाइक 36 करोड़ इंडिया हैज़ द लार्जेस्ट यंग पपुलेशन एंड मेजोरिटी ऑफ़ दैट यंग पपुलेशन इज़ आउट ऑफ वर्क फ़ोर्स। व्हाट डू यू एक्सपेक्ट देम फ्रॉम देम देन? इट विल बी फ्रस्ट्रेटेड। दे आर रियली फ्रस्ट्रेटेड।
अगला सवाल कि अगर उनकी पार्टी राजनीति में आती है तो क्या 2029 का चुनाव लड़ेगी? और अगर हां तो क्या कॉकरोच जनता पार्टी चुनावी गठबंधन के लिए तैयार है। तो इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में अभिजीत ने कहा कि इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। इस आंदोलन को शुरू हुए सिर्फ तीन दिन हुए हैं। हम लोगों से बात करेंगे। उनकी राय लेंगे कि क्या करना चाहिए क्योंकि युवाओं की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी उनसे बात नहीं करती। उनकी सुनती नहीं। उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया जाता है। लेकिन अब वे एक ऐसी जगह पहुंच गए हैं जहां इस आंदोलन की वजह से दूसरी राजनीतिक पार्टियां भी उन पर ध्यान देने लगी हैं। दूसरे दलों के नेता हमारा समर्थन करने को तैयार हैं। लेकिन जजी ने अपना मन बना लिया है।
वे सभी मुझसे कह रहे हैं कि आप जो करना चाहे करें लेकिन इस आंदोलन में किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी को शामिल होने मत दीजिए। अगला सवाल देश की राजनीति का सेट फरमा ही अब तक देखा गया है। पार्टियां अमूमन लेफ्ट राइट सेंटर सोशलिस्ट लिबरल अंबेडकराइड गांधीियन विचारधाराओं पर काम करती हैं। कॉकरोच जनता पार्टी की पॉलिटिक्स क्या है? आइडियोलॉजी क्या है? और वो पहले से चली आ रही इन राजनीतिक विचारधाराओं पर क्या सोचती है? और सबसे बड़ा सवाल कि सोशल मीडिया पर एक बहस छिड़ी है कि कॉकरोच जनता पार्टी को तो केजरीवाल की आम आदमी पार्टी शह दे रही है। उन्हीं के इशारों पर काम किया जा रहा है। सच क्या है? क्योंकि केजरीवाल के साथ अभिजीत भी काम कर चुके हैं। आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ उनकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इंडिया टुडे के इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अरविंद केजरीवाल का समर्थन स्वीकार करेंगे?
ही कैन एक्सटेंड हिज सपोर्ट इफ ही वांट्स टू बट आई डोंट थिंक दैट एनीबडी इन द अमोंग द जीसस वुड लाइक एनी पॉलिटिकल पार्टी टू बी इनवॉल्व्ड इन दिस। आई आई वांट टू बी रियली क्लियर अबाउट इट। तो कॉकरोच जनता पार्टी पर जो भी खबरें आगे आएंगी आप तक उसे पहुंचाते रहेंगे। अगर वो सक्रिय राजनीति में आते हैं तो जरूरी सवाल भी पूछेंगे। बड़ी खबर में फिलहाल इतना ही। अब बारी है सुर्खियों की। भारत का सबसे भरोसेमंद सलूजा गोल्ड टीएमडी बार्स। सलूजा गोल्ड टीएमटी। अब सही पकड़े हो कांट्रेक्टर बाबू। मजबूती सब कुछ है। तमिलनाडु में विजय सरकार का कैबिनेट विस्तार हुआ। 23 और विधायकों को मंत्री बनाया गया है। कांग्रेस के दो विधायक भी मंत्री बने हैं। कैबिनेट में बीसी के और आईयूएमएल के विधायकों को भी शामिल होना था। लेकिन अभी तक इन पार्टियों ने नाम तय नहीं किए हैं। कांग्रेस की तरफ से राजेश कुमार और पी विश्वनाथन को कैबिनेट में जगह मिली है। इसी के साथ करीब 59 साल बाद कांग्रेस तमिलनाडु की सरकार का हिस्सा बनी है। टीवी ने एआईए डीएमके के अलग हुए गुट के किसी भी विधायक को कैबिनेट में जगह नहीं दी।
इससे पहले सीपीआईएम ने टीवी को धमकी दी थी। कहा था कि एआईए डीएमके के विधायकों को मंत्री बनाने पर अपना समर्थन वापस ले लेंगे। नए कैबिनेट में दलित समुदाय से आने वाले सात मंत्रियों को जगह मिली है। टीवी की बात हो रही है तो उससे जुड़ा एक और अपडेट मद्रास हाईकोर्ट में विजय के खिलाफ एक जनहित याचिका डाली गई है। मांग है कि चुनाव आयोग विजय के खिलाफ जांच करें। आरोप है कि विधानसभा चुनाव के वक्त विजय ने बच्चों से अपने बड़े बुजुर्गों को टीवी के लिए वोट डलवाने की अपील की थी। याचिका में कहा गया है कि छोटे बच्चों से इस तरह वोट डलवाने के लिए दबाव डलवाना भ्रष्टाचार के तहत आता है। याचिका में एआईए, डीएमके और डीएमके पर वोट के लिए पैसे बांटने के आरोपों की जांच कराने की भी मांग की गई है। हाई कोर्ट ने याचिका पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। जवाब देने का समय 29 मई तक है। आम आदमी पार्टी से बीजेपी में जाने वाले राघव चड्ढा अपनी ऑनलाइन ट्रोलिंग से परेशान लगते हैं। समोसे में आलू से लेकर डिलीवरी बॉयज तक के चिंतक अपनी इमेज को लेकर के व्यथित हैं। लिटरली जीपीजी वाली पहुंच गए वो कोर्ट याचिका लगा दी पर्सनालिटी राइट्स की और यह तब लगाई जाती है जब किसी शख्स को यह लगे कि उसकी आवाज, नाम, उसके स्टाइल या चेहरे का इस्तेमाल बिना उसकी परमिशन के हो रहा है। राघव का भी यही कहना है याचिका लगाई कि सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर, नाम और पहचान का गलत इस्तेमाल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि पार्टी बदलने के कारण उनके खिलाफ सिस्टमैटिक तरीके से अभियान चलाया जा रहा है।
लेकिन राघव को कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई कर रहे थे जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद। इंडिया टुडे की रिपोर्ट बताती है कि जज ने कहा कि राजनीतिक शख्सियतों के फैसले की आलोचना सामान्य बात है। कोर्ट ने साफ कहा कि नेताओं पर की जाने वाली टिप्पणी सटायर वगैरह लोकतंत्र का हिस्सा है। इसे केवल इसलिए नहीं रोक सकते क्योंकि यह किसी को पसंद नहीं आ रहा। कोर्ट ने कहा कि यह मामला पर्सनालिटी राइट्स के केस का नहीं है।