अभी आईआईटी के कार्यक्रम में गए थे तो आपका नाम ले रहे थे कि मैं बागेश्वर बाबा तो नहीं हूं किसी संदर्भ में उन्होंने कहा तो वो तो आपको याद करते हैं और आप कह रहे हैं कि जिसको जो सत्ता में आए सब ठीक हमने एक बात जी से सीखी जो उनको व्यक्तिगत मिले तो हम कह सकते हैं हमारी जो मुलाकातें हुई उनमें हमने व्यक्तिगत ऐसा व्यक्तित्व असाधारण व्यक्तित्व अभूतपूर्व व्यक्तित्व 140 करोड़ लोग हैं कितने महात्मा नहीं हमारे जैसे छोटे छोटे व्यक्ति को भी वो स्मरण रख लेते हैं। यह उनके अद्भुत व्यक्तित्व की क्षमता है। दूसरी बात इस अवस्था में भी वो दल की नहीं देश की सोचते हैं।इस पर आपका इससे बड़ा क्या चाहिए? इस इस निष्कर्ष पे आप पहुंच चुके हैं कि वो देश की सोचते हैं। हमारा निजी मत है। हम यह मिले हैं। हम जिनको मिलते हैं हम आपको मिले। आपके बारे में कोई भी हमसे पूछेगा कि सौरभ जी कैसे हम कह सकते हैं ऐसे तो हम माननीय जी को मिले हैं तो हम यह कह सकते हैं कि वो दल के बारे में कम सोचते हैं। देश के बारे में बहुत सोचते हैं। अच्छा आप एक साल से चूक गए हैं जजी से वो हमारे यहां पर एक नया फिनोमिना बना तो वो पार्टी भी बनाने वाले हैं कॉकरोच जनता पार्टी। तो जेंज़ कॉकरोच हो गया। मतलब उन्होंने कहा गर्व से कहो हम कॉकरोच हैं। जेंज़ के लिए। जी। ये संज्ञा कैसी है? हां ये तो वही बता सकते हैं जो हूं जो हूं जो हो अपने भारत की सब संविधान की यही अद्भुत स्वतंत्रता है कि आप कुछ भी कह सकते हो कुछ भी बन सकते हो हम तो इस देश के लोगों को जैन जी को विवेकानंद बनाना चाहते हम देश के युवाओं को जैन जी को अल्बर्ट आइंस्टीन जैसा देखना चाहते अब्दुल कलाम जैसा देखना चाहते हम देश के युवाओं को, देश की बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई जैसा देखना चाहते। अपने अपने मन में है।
यदि उन्हें कॉकरोच पसंद आया तो रख लेना चाहिए। आपको हिट पसंद आए हिट रख लो। हां। उन्हें कॉकरोच नाम पसंद आया तो उन्होंने कॉकरोच पार्टी बना ली। किसी को खुजली हो। वो हिट रख ले। मन रख लो। सीजीपी के बाद डीजीपी रख लो। अपने-अपने काम है। सबके अपने-अपने लफड़े हैं। चल रहे हैं। पर हम इतना कह सकते हैं जैन जी आज की जनरेशन सिर्फ एक बात से प्रभावित नहीं होती। उसे निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए आपको तर्क रखना पड़ेगा।
तभी आज की जैन जी आपके साथ खड़ी होगी। पर समय है सबका आता जाता। यह बहुत छोटी बात है। हम किसी पार्टी के बारे में नहीं कह सकते। पार्टियों का अपना काम। पार्टी कुछ भी हो पर बात देश की हो। हम ये चाहते हैं। ठीक। आप लोगों के नाम पर इतनी बात हो गई। आप लोग कुछ कहना चाहते हैं, कुछ पूछना चाहते हैं। अच्छा पीछे दे दीजिए। कुछ लड़कियां कुछ हैं पीछे। पीछे दे दीजिए। मेरा क्वेश्चन मतलब ये था कि आजकल के जजी में बहुत ज्यादा ए्जायटी और ओवर ओवरथिंकिंग की बहुत ज्यादा समस्या है। तो उस चीज में आप क्या मतलब बोलना चाहेंगे कि हम कैसे उसे कम कर सकते हैं? हमको ब्रेन के एल्गोरिदम को समझना होगा।
हमारा एक जैसा चलेगा तो रिपीट टू रिपीट थॉट्स प्रोसेस ब्रेन में चलती रहेगी और हम से जूझने लगेंगे। उसका सर्वोत्तम उपाय यही है कि जैसे इंजन को ठंडा पानी को गर्म करने के लिए हमको चूल्हे पर रखना होता है। पर ठंडा करने के लिए कुछ नहीं करना पड़ता। चूल्हा बंद करना होता है। ऐसे ही हमको एंजायटी और डिप्रेशन को समझना होगा कि जब ओवरवर्क हमारे ब्रेन को होता है तो वह एंजायटी और डिप्रेशन में बदल जाता है और वर्क लेस हो जाएं, थॉट्स लेस हो जाए और नो माइंड मेडिटेशन यदि करें तो हम एंजायटी से बच सकते हैं। अब वो कैसे करना है वो आपको सिखा सकते हैं।
जी राधे-राधे गुरु जी। मेरा नाम प्रियंका है। मेरा यह क्वेश्चन है कि जैसे कि Instagram की तरफ लोग आजकल जो हमारी जनरेशन है बहुत खींची जाh खींची जा रही है। बहुत ज्यादा Instagram स्कूल करे जा रहे हैं। तो इससे दूर कैसे जाया जाए? मोबाइल फोड़ दो। चला जाता है ना। ये अपनी भावनाओं पे कंट्रोल करने के ऊपर है। आपकी भावना यदि आपके कंट्रोल पहले आपको यह समझना होगा आप मन के गुलाम है कि मन आपका गुलाम है। हम भी हमारे पास भी मोबाइल है। हमारे पास भी Instagram है, YouTube है लेकिन वो हमको प्रभावित नहीं करता कि आप चलाओ। हम उसको कहते हैं अब तुझे चलाएंगे। अपने ऊपर है कि कभी हम बिल्कुल नहीं चलाते। कभी 20 मिनट चला लेते हैं, कभी न्यूज़ भर स्क्रॉल करते हैं। तो हमारी भावनाएं यदि हमारे कंट्रोल में होंगी तो दुनिया की कोई भी Instagram ऐप, TikTok आपको प्रभावित नहीं कर पाएगा।
यदि आपकी भावनाएं आपके कंट्रोल में है और भावनाएं कंट्रोल होंगी ध्यान से। यही एक रास्ता है कि आप जो है अपनी भावनाओं को कंट्रोल। आगे आगे। सर राधे-राधे गुरु जी। मेरा नाम अदिति है। मैं बीजेएमसी की छात्रा हूं। मेरा क्वेश्चन यह है कि आपने जैसे अभी-अभी बोला कि स्त्रियों को पहले रखा जाता है। जैसे राधा कृष्ण, सीता राम फिर शिव शक्ति में शिव क्यों आगे है और शक्ति क्यों पीछे? नहीं नमः पार्वती पते हर हर महादेव बोला तो लेकिन शिव शक्ति भी तो एक वर्ड है ना तो उसमें शिव क्यों आगे है और शक्ति क्यों पीछे?
देखो ऐसे अनेक शब्द हैं जिन शब्दों में भगवान को आगे भगवती को पीछे रखा गया। और अनेक शब्द ऐसे हैं जिसमें भगवती आगे शक्ति आंगे अथवा शिव पूछे। तो दो बातें इसमें समझने जैसी हैं। आपने नमः पार्वती पते हर हर महादेव सुना या पकड़ा अथवा शिव शक्ति पकड़ा वो आपके ऊपर है। हमारे जैसे सोच के व्यक्ति ने नमः पार्वती पते हर हर महादेव पकड़ा है। मेरा आज का सवाल यह है कि आपको जजी गुरु कहा जाता है। पर लेकिन जो सीजेपी प्रोटेस्ट हुआ था उसमें आपका क्या कोई योगदान था? जैन जी गुरु कहा जाता है। यह हमने आज नया नाम अपना सुना है।
उसके लिए थैंक यू। उसके लिए धन्यवाद। एक साल हम चूक जरूर गए पर आप लोगों ने हम पर कृपा कर दी। दूसरी बात उस प्रोटेस्ट के बारे में हम अब हमारी जो भूमिका होनी चाहिए वो हमने अपनी भूमिका निभाई। उस वक्त किसी आयोजन में थे। हमने अपनी बात रखी कि यह नहीं होना चाहिए और इनकी मांगों को सुना जाना चाहिए।
हमने अपनी भूमिका पूरी निभाई जो हम कह सकते हैं। पर हम इसके भी पक्ष में नहीं। हम विद्यार्थियों को देश की शिक्षा पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सड़क पर नहीं देखना चाहते। संसद को भी हम सड़क पर नहीं देखना चाहते। हम चाहते हैं देश की सरकार एक ऐसा डोर ओपन करें जिसमें विद्यार्थी अपनी डायरेक्ट बात पहुंचा सके।