चीन के कब्जे वाले तिब्बत से अचानक बाढ़ आई और नेपाल में भारी तबाही मचा दी। शुरुआती वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक भूकंप के कारण तिब्बत में बर्फ और चट्टान का एक बड़ा हिस्सा पहाड़ से गिरकर लेंदे नदी के रास्ते में आ गया। जिसकी वजह से कुछ समय के लिए पानी रुक गया। आप देखिए किस तरह से पहाड़ के बीच में तीन जगहों पर पानी रुका हुआ है। थोड़ी देर बाद यह बर्फ की चट्टान टूट गई और पानी अचानक नीचे की ओर आया। लाखों गैलनिस पानी ने फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति बना दी। इसके बाद यह पानी बिजली की रफ्तार से नेपाल की भोटे कोशी नदी में आया
और रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर दिया। इस भयानक बाढ़ की वजह से नेपाल में बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। कई लोगों की मौत हो गई है। 105 भारतीय नागरिकों समेत कुल 291 विदेशी पर्यटक लापता हैं। नेपाल में तबाही मचाने वाला यह पानी भारत में आ सकता है। इसीलिए बिहार के आठ जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में महाराजगंज और कुशीनगर में भी हाई अलर्ट घोषित हो गया है
लेकिन अब इस भयंकर तबाही के बीच चीन और भारत को लेकर बहुत बड़ी खबर आ रही है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि चीन के धोखे से नेपाल में यह जल प्रलय आई है। लेकिन एक तरफ शायद चीन ने धोखा दिया तो दूसरी तरफ भारत ने तुरंत नेपाल को बचाने के लिए जबरदस्त एक्शन लेना शुरू कर दिया। भारत क्या कर रहा है वह आपको आगे बताएंगे। लेकिन उससे पहले देखिए कि नेपाल के लोग चीन को क्यों कोस रहे हैं। नेपाल के एक बड़े पत्रकार परशुराम काफले ने लिखा है कि हम अपने पड़ोसियों की सुरक्षा से जुड़ी जायज चिंताओं का समाधान करते हैं। लेकिन दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि हमारे उत्तरी पड़ोसी यानी चीन ने हमें काफी नुकसान पहुंचाया है।
इतनी बड़ी आपदा की पूर्व चेतावनी ना मिलने के कारण हमें जान माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। परशुराम काफले ने आगे कहा कि हमें लगातार उनके इलाकों से पैदा होने वाले संकटों का सामना करना पड़ रहा है जबकि हम उनकी सभी चिंताओं का समाधान करते हैं चाहे वो जरूरी हो या गैर जरूरी ही क्यों ना हो लेकिन इस एक तरफफ़ा प्यार की कीमत सिर्फ नेपाल को ही क्यों चुकानी पड़ रही है? आपको बता दें कि चीन कब्जे वाले तिब्बत में भयंकर रफ्तार से बांध बना रहा है। इनमें सैकड़ों बन चुके हैं और कई बन रहे हैं। तिब्बत में गैरकानूनी तरीके से बनाए जा रहे यह बांध नेपाल, बांग्लादेश और भारत के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। कुछ समय पहले तिब्बत के लोगों ने चीन द्वारा बनाए जा रहे बांधों का विरोध भी किया था। लेकिन चीन ने सभी को खामोश कर दिया। हिमालय में चीन के निर्माण
कार्यों की वजह से हिमस्खलन के खतरे बढ़ते जा रहे हैं। बहरहाल इसी बीच भारत ने नेपाल को बचाने के लिए बहुत बड़ा एक्शन लेना शुरू कर दिया है। भारत ने शुरुआत में तुरंत 30 टन राहत सामग्री नेपाल भिजवानी शुरू कर दी है। भारतीय एयरफोर्स के विमान रवाना होने वाले हैं। पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की है और हर संभव मदद देने का आश्वासन भी दिया है। आपको बता दें कि इस बाढ़ की वजह से नेपाल में 19 पुल बर्बाद हो गए हैं। 40 कि.मी. सड़कें बह गई हैं। इलाके में चल रहे 13 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स को काफी नुकसान हुआ है।