चीनी के दाम बढ़ गए तो हाहाकार मच गया। लोग परेशान हो गए। कहने लगे कि काश सरकार इथेनॉल का प्रोडक्शन नहीं करती तो चीनी भी इतना महंगा नहीं होता और चीनी के दाम भी नहीं बढ़ते और चीनी की किल्लत भी नहीं होती और भारत को चीनी आयात भी नहीं करना पड़ता। तो क्या यह सच है? केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला अचानक से ले लिया। 31 अक्टूबर 2026 तक अब बिना किसी ड्यूटी के 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की मंजूरी दी गई है। चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू करने के लिए त्यौहार से पहले यह कदम उठाया गया। जबकि लोग तो कह रहे हैं कि इथेनॉल बनाने के कारण चीनी की कमी हुई है। जिस कारण चीनी की कीमतें बढ़ी और अब आयात किया जा रहा है। दुनिया में चीनी उत्पादन के मामले में ब्राजील के बाद भारत दूसरे नंबर पर है। तो फिर भारत में ही चीनी की कमी।
भारत को ही आयात करना पड़ रहा है। भारत सरकार के आंकड़ों को आपको समझना होगा। यह आंकड़े कहते हैं कि देश में गन्ने के रस से चीनी बनाने वाली कुल 703 मिले हैं। इनमें 335 मील प्राइवेट मिल है। 325 सहकारी हैं और 43 सरकारी मिले हैं। भारत में चीनी का जो प्रोडक्शन होता है अगर उसके कुछ वर्षों की बात करें तो अक्टूबर से शुरू होता है यह हर वर्ष और फिर अगले साल सितंबर में जाकर यह खत्म होता है। इसी दौरान यानी एक साल यह जो पूरा होता है अक्टूबर से सितंबर तक का उसी दौरान चीनी का प्रोडक्शन होता है। अब सवाल यह है क्या सच में इथेनॉल की वजह से ही चीनी की कमी हुई है? काश ये इथेनॉल नहीं बनता तो शायद आज हमारे पास बहुत चीनी होती और हमें बाहर से चीनी मंगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसको समझते हैं जरा। एक रिपोर्ट कहती है केवल इसी महीने भारत में चीनी की कीमतों में 20% की बढ़ोतरी हुई है। यानी इससे पहले कभी भी ऐसा नहीं हुआ। एक्सपर्ट जो कहते हैं पहले उन्हें समझिए फिर आपको बताएंगे सरकार क्या कह रही है। सरकार के वो आंकड़े जो आपको चौंका सकते हैं और आपको यह भी समझ में आ जाएगा
कि चीनी आने वाले दिनों में और ज्यादा महंगी होगी। आप खरीद पाएंगे या नहीं खरीद पाएंगे और सस्ती होगी या नहीं यह सब आज हम आपको बताने वाले हैं। पहले एक्सपर्ट जो कह रहे हैं वो समझिए। जो बाजार को समझते हैं वह कह रहे हैं कि चीनी के दाम इससे पहले कभी इतने ऊंचे नहीं गए। वो कहते हैं कि अलनीनो के प्रभाव से चीनी का जो प्रोडक्शन था वह कम रहा और इसी के प्रभाव से चीनी की जो कीमतें हैं वो प्रभावित हुई हैं। अब सवाल यह है कि चीनी का प्रोडक्शन कितना हुआ? मतलब कितनी चीनी का उत्पादन हुआ था? फाइनेंशियल ईयर जिसको हम हिंदी में वित्त वर्ष बोलते हैं। बहुत ध्यान से सुनिएगा। 2021 से 22 में देश के भीतर कुल 358 लाख टन चीनी का प्रोडक्शन हुआ था। इस साल का जो ओपनिंग स्टॉक रहा वो 63 से 65 लाख टन था। फिर यह जाता है 2022 से 23 वाले फाइनेंसियल ईयर में यानी वित्त वर्ष में। यहां पर जो प्रोडक्शन थी चीनी की वो घट गई। यानी यह 328 मिलियन टन हो गया। 2023 से 24 की अगर बात करें तो चीनी का जो कुल प्रोडक्शन था यह और घटा। यह 320 मिलियन टन हुआ। फिर 2025 से 26 के दौरान यह 324 मिलियन टन शुगर प्रोडक्शन का अनुमान जताया गया। इसमें इथेनॉल के लिए होने वाला आंकड़ा भी शामिल है। फरवरी में जारी जो आंकड़े किए गए थे उसके मुताबिक वित्त वर्ष 2025 से 26 में कुल 290 लाख टन शुगर का उत्पादन हुआ। यानी यह कहा गया था सरकार को भी यह उम्मीद थी कि यह जो वित्त वर्ष चल रहा है इसमें 300 2025 से ऊपर चीनी का उत्पादन होगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सरकार का जो अनुमान था वह फेल हो गया। 290 लाख टन शुगर का उत्पादन हुआ है। यानी चीनी का प्रोडक्शन हुआ। अब इसमें भी ध्यान देने वाली बात है कि इसमें 31 लाख टन इथेनॉल के प्रोडक्शन में प्रयोग हुआ। शुगर शामिल नहीं है। यानी जो चीनी इथेनॉल के लिए बनाई गई थी यानी इथेनॉल में यूज़ हुई जो चीनी वो इस उसका जो आंकड़ा है
वो इसमें शामिल नहीं है। रिपोर्ट्स कह रही हैं सरकार इस साल नए सीजन से पहले तक 280 लाख टन की खपत का अनुमान लगा चुकी थी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब सरकारी आंकड़े को समझते हैं। केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े तो यह कहते हैं कि देश में गन्ने की बुवाई पिछले साल के लगभग बराबर ही हुई। तो दिक्कत कहां हुई? यह 5 सालों के औसत बुवाई से करीब 4 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। ऐसे में चीनी की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने अब चीनी के निर्यात पर ही रोक लगा दी है। साथ ही थोक व्यापारियों के पास चीनी का कितना स्टॉक हो सकता है इस पर भी लिमिट लगा दी गई। अब सरकारी आंकड़े की जब हम बात कर रहे हैं तो इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन और वाणिज्य मंत्रालय के कुछ आंकड़े हैं वो समझिएगा। यह आंकड़ा यह कहता है कि साल 2023 से 24 में 34 मिलियन टन चीनी का आयात हुआ। जिसमें से 2.2 मिलियन टन इथेनॉल के लिए यूज़ हुआ। इसी तरह साल 2024 से 25 में 29.70 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हुआ। लेकिन इसमें से 1.70 मिलियन टन इथेनॉल में डायवर्ट हुआ। वहीं साल 2025 से 26 में अभी तक 32.40 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हुआ और 3.10 मिलियन टन तक इथेनॉल में यूज किया गया। ऐसे में देखा जाए तो चीनी उत्पादन का बहुत कम हिस्सा एथेनॉल में यूज हो रहा है। अब गन्ने के रकबे को समझिए। चालू सीजन में भारत लगभग 5.74 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती भारत ने की। जिसमें से सबसे ज्यादा गन्ने की खेती उत्तर प्रदेश में हुई। इसके बाद महाराष्ट्र और फिर कर्नाटक जैसे राज्य आते हैं। इन तीनों जगहों को मिला दिया जाए तो भारत का 80% चीनी का उत्पादन तो यहीं इन्हीं तीनों से होता है।
पिछले 10 साल में क्या चीनी का जो आयात है वह नहीं हुआ है? इसका भी जवाब है भारत दूसरे देश से चीनी आयात करने पर 100% की ड्यूटी लगाता है। जिस कारण चीनी आयात शून्य हो जाता है। पिछले 10 सालों से भारत ने चीनी का आयात नहीं किया था। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक आखिरी बार साल 2016 से 17 में चीनी की कीमतों में तेजी की वजह से आयात करना पड़ा था क्योंकि उस साल देश में सूखा पड़ा और गन्ने का उत्पादन बहुत कम हो गया था। तो कितने चीनी का निर्यात भारत करता है? कितना चीनी भारत विदेशों में भेजता है। भारत चीनी का निर्यात बहुत कम करता है। भारत सरकार ने 2025 से 26 मार्केटिंग सीजन के लिए 20 लाख टन यानी 2 मिलियन टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी। यह चीनी मुख्य तौर पर अफ्रीका, एशियाई देशों जैसे सोमालिया, सूडान और जिबूती को भेजी जाती है। अब सवाल यह है कि क्या पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल की वजह से चीनी महंगी हुई? तो कच्चे तेल की खपत के मामले में अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। लेकिन भारत में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल का 80% से ज्यादा हिस्सा विदेशों से आता है। इस आयात को कम करने, विदेशी मुद्रा को बचाने, आत्मनिर्भरता बढ़ाने और पोल्यूशन कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक फैसला लिया 2018 में कि हम पेट्रोल में इथेनॉल मिला देंगे और इथेनॉल की मात्रा रखेंगे 10%। बाद में इसे बढ़ाया गया 20% करने का फैसला रखा गया। यह लक्ष्य 2030 में हासिल किया जाना था। लेकिन सरकार ने इसको जुलाई 2025 में ही हासिल कर लिया। भारत में चीनी उद्योग सरकारी नियंत्रण के तहत आता है। चीनी मिलों को किसानों से खरीदे गए गन्ने के लिए कितना एफआरपी देना होगा यह केंद्र सरकार तय करती है। सरकार यह भी तय करती है कि कौन सी चीनी मिल हर महीने कितनी चीनी बेच सकती है और चीनी का निर्यात किया जा सकता है या नहीं। देश में बड़े पैमाने पर इथेनॉल खरीदने वाला ग्राहक भी सरकार ही है और इस तरह इथेनॉल की कीमत भी अप्रत्यक्ष रूप से सरकार ही तय करती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2025 से 26 के वर्ष में चीनी की अगर बात करें तो 30 लाख टन चीनी का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने के लिए हुआ।
रिपोर्ट तो यह भी कह रही है कि यह देश में चीनी के कुल उत्पादन का करीब सिर्फ 10% है। गन्ने के रस के अलावा चीनी बनाने के दौरान तैयार होने वाले सिरप ए हैवीमोलिसिस, बी हैवी मोलिसिस और सी हैवीमोलिसिस से भी इथेनॉल बनाया जा सकता है। यानी उसके गाज से। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में उत्पादित कुल इथेनॉल का करीब 1/3 हिस्सा गन्ने से तैयार किया गया था। तो अब सवाल यह है चीनी के दाम क्यों बढ़े? जब इतना सब कुछ है, सब सही चल रहा है तो चीनी के दाम बढ़ने की क्या जरूरत थी? दाम क्यों बढ़े हैं? पिछले सालों की तुलना में कुल बफर स्टॉक और मिल गोदामों में बहुत कमी आई जिससे चीनी की कुल प्रोडक्शन और असल खपत के बीच का अंतर कम हो गया। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र में गन्ने की खेती वाले जिलों में ज्यादा बारिश से गन्ने की फसलें खराब हो गई। देश में सबसे ज्यादा गन्ना उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में उगाया जाता है। भारी बारिश, बाढ़ की वजह से फसलें खराब हुई। इसका साइकिल यानी जो चक्र था वह बिगड़ गया। पैदावार कम हुई। तो भारत चीनी क्यों आयात कर रहा है? सरकार ने दरअसल त्यहारी सीजन में जो डिमांड होगी उसमें सप्लाई में कमी ना आए इसलिए यह फैसला लिया है। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे चीनी की कीमतों को कम करने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन तक चीनी के ड्यूटी फ्री आयात करने की परमिशन मिली है। लगभग एक दशक में यह पहली बार है जब भारत ने आयात का सहारा लिया है। सिर्फ इसलिए कि त्यहारी सीजन में लोगों को मिठाइयां फीकी ना लगे। तो क्या अब आने वाले दिनों में चीनी के दाम बढ़ने वाले हैं? चीनी की मांग लगातार बढ़ रही है। त्यौहारी सीजन में इसकी खपत बढ़ जाती है। ऐसे में अगर गन्ने की उपलब्धता कम रहती है और चीनी का उत्पादन मांग के मुकाबले कम होता है तो कीमतों में बढ़ोतरी होगी। आने वाले दिनों में त्यौहारी मांग को देखते हुए चीनी के दाम और बढ़ने की संभावना बिल्कुल है। अगर आप यह वीडियो YouTube पर देख रहे हैं तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर बेल आइकन दबाएं और Facebook पर देख रहे हैं तो हमारे पेज को लाइक