मुस्लिम लड़ाकों की एक सेना चीन पर बड़ा हमला करने की फिराक में है। पिछले 13 सालों से यह मुस्लिम लड़ाके चीन के एक बड़े हिस्से को तोड़कर उसे आजाद देश बनाना चाहते हैं। इन लोगों का कहना है कि चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा कर रखा है। यह मुस्लिम लड़ाके चीन से जो इलाका छीनना चाहते हैं, उस इलाके का नाम शिंजियांग है। यहीं से चीन का सीपक प्रोजेक्ट शुरू होता है। उसके बाद पीओके से होता हुआ बलूचिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक पहुंचता है। हैरानी की बात देखिए कि मुस्लिम लड़ाकों के इस संगठन ने एक बार भारत से भी मदद मांगी थी। इन्होंने कहा था कि चीन के खिलाफ हमारी जंग में भारत को आगे आना चाहिए और हमारी मदद करनी चाहिए।
हालांकि भारत ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन अब इन लड़ाकों ने चीन के खिलाफ अपनी जंग बहुत तेज कर दी है। इन मुस्लिम लड़ाकों ने चीन के खिलाफ ऐसा ऐलान किया है जो बैठे-बठाए भारत के लिए एक बड़ी जीत हो सकती है। वैसे कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह मुस्लिम लड़ाके भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक हथियार भी हो सकते हैं। चीन ने भारत के खिलाफ नॉर्थ ईस्ट और पीओके में जिस तरह से अस्थिरता पैदा की, ठीक वैसी ही अस्थिरता अब चीन के दो इलाकों में शुरू हो गई है। यह खबर बहुत शानदार और बड़ी है। इसे ध्यान से समझिए। दरअसल यह खतरनाक सेना उईगर मुसलमानों ने मिलकर बनाई है।
यह वही उईगर मुस्लिम है जिन्हें चीन प्रताड़ित करता आया है। जिनकी जमीन पर कब्जा कर चीन ने उसे शिंजियांग नाम दे दिया और अपने देश में शामिल कर लिया। हालांकि इन मुस्लिम लड़ाकों का कहना है कि इस इलाके का नाम शिंजियांग नहीं बल्कि तुर्किस्तान है और अब तुर्किस्तान आजाद होगा। इन उईगर मुस्लिम लड़ाकों ने अपने संगठन का नाम तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी रखा हुआ है जिसे टीआईपी भी कहते हैं। टीआईपी के उईगर लड़ाके सीरिया के एचटीएस नाम के उसी आतंकी संगठन से ट्रेनिंग ले रहे हैं जिसने हाल ही में बशर अल असद की सरकार का तख्तापलट किया था। बताया जाता है कि सीरिया के एचटीएस आतंकी संगठन को अमेरिका से मदद मिलती है और अब यही संगठन सीरिया की सत्ता में आकर बैठ गया है। चीन के लिए खतरे की बात यह है कि अब सीरिया के एचटीएस आतंकी संगठन ने उईगर लड़ाकों को अपनी सेना में उच्च पदों पर नियुक्त कर दिया है।
सीरिया की सेना में तीन उईगर लड़ाकों को सीनियर पद दिए गए हैं। यानी चीन के खिलाफ बगावत कर चुके उईगर मुसलमानों के संगठन को बहुत ज्यादा मजबूती मिल गई है। आपको बता दें कि कुछ समय पहले तुर्किस्तान के लिए लड़ रहे इन लोगों ने भारत से कहा था कि शिनजियांग और तिब्बत को आजाद कराने के लिए पीएम मोदी को आगे आना होगा। मजे की बात देखिए कि यह उईगर लड़ाके शिंजियांग को तो आजाद करवाना ही चाहते हैं लेकिन इन्होंने तिब्बत में भी चीन के खिलाफ बगावत की चिंगारी जला दी है। यानी दो तरफ से चीन के खिलाफ बगावत शुरू हो चुकी है और अब यही तुर्किस्तान की मांग करने वाले उईगर लड़ाके भारत से मदद चाहते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि उईगर लड़ाके जिस तुर्किस्तान को आजाद करवाना चाहते हैं, वहीं से चीन का सीपक प्रोजेक्ट शुरू होता है। भारत लगातार इस विचित्र घटना को देख रहा है। शिंजियांग के उईगर लड़ाके हो या फिर तिब्बत में बगावत कर रहे लोग दोनों ही भारत के लिए कूटनीतिक हथियार हो सकते हैं। भारत भी इस नए घटनाक्रम पर जरूर कुछ ना कुछ सोच रहा होगा।